जानिए मेहंदीपुर बालाजी महाराज से जुड़ी मान्यताओं के बारे में – Mehandipur Balaji यूं तो हमारे देश में हनुमान जी के लाखों मंदिर है। हनुमान जी की महिमा और प्रसिद्धि इसी बात से समझी जा सकती है कि देश विदेश में श्री रामचन्द्र भगवान् के भी इतने मंदिर नहीं है जितने हनुमान जी के हैं । सभी हनुमान मंदिर किसी न किसी रूप में विशेष स्थान रखते हैं लेकिन श्री मेहंदीपुर बालाजी धाम श्री राम भक्त हनुमान जी का एक प्रसिद्ध और सिद्ध मंदिर है।
मेहंदीपुर बालाजी से जुड़ी मान्यताएं
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान के दौसा जिले मे स्थित है। दरअसल यह मंदिर सबसे अधिक इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहां लोगों की मान्यता है कि इस मंदिर को बालाजी यानि हनुमान जी की अदृश्य शक्तियां संचालित करती हैं।
मेहंदीपुर बालाजी हनुमान की शक्तियां करती हैं संचालन

यहां की शक्तिशाली शक्तियां लोगों को भूत-प्रेत, ऊपरी बाधाओं और आत्माओं से छुटकारा और मुक्ति दिलाने का कार्य करती हैं।
भूत प्रेत बाधा से छुटकारा दिलाने के दृश्य लोगों को यहां आने के लिए प्रेरित करते हैं और इस स्थान की सुनी सुनाई बातों और चमत्कारी शक्तियों का साक्षात् अनुभव करने के लिए प्रतिवर्ष देश विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां बालाजी महाराज के दर्शन करने के लिए मेहंदीपुर बालाजी आते हैं।
कहां स्थित है Mehndipur Balaji?
आपके मन में निश्चित ही यह प्रश्न उठ रहा होगा कि आखिर ऐसा मंदिर कहां है जिसकी इतनी अधिक मान्यता है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बालाजी महाराज का यह मंदिर राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर नामक स्थान पर बना हुआ है। मेहंदीपुर में होने के कारण ही इस मंदिर को मेहंदीपुर बालाजी या मेहंदीपुर वाले बालाजी कहा जाता है।
यह मंदिर कब और कैसे अस्तित्व में आया इसका कोई निश्चित प्रमाण नहीं है। जनश्रुतियों के हिसाब से इस मंदिर का प्रादुर्भाव यहां के प्रथम महंत श्री गणेशपुरी जी के काल में हुआ था। लेकिन मंदिर की संरचना देखने से ऐसा लगता है कि यह राजपूताना काल का है और मान्यताओं के अनुसार इसका इतिहास एक हजार साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है। सम्भवतः यह सही भी प्रतीत होता है।
यहां श्री बालाजी महाराज की मूर्ति को स्वयंभू कहा जाता है यानि बालाजी महाराज की यह मूर्ति किसी कलाकार ने नहीं बनाई थी और न ही यह भूमि से निकाली गई बल्कि यह अपने आप ही प्रकट हुई थी।
मन्दिर के बारे में माना जाता है कि सैकड़ों साल पहले अरावली पर्वत पर संकट मोचन हनुमान व प्रेतराज सरकार और भैरव जी की मूर्तियां एक साथ प्रकट हुई थीं।
दो पहाड़ियों के बीच स्थित है यह स्थान
मेहंदीपुर बालाजी को घाटे वाले बाबा भी कह कर पुकारते हैं क्योंकि यह मंदिर दो पहाड़ियों के बीच बना हुआ है। यहां का दृश्य बहुत ही आकर्षक और मनोहारी लगता है। तीन पहाड़ी और सात पहाड़ी जैसे आकर्षक स्थलों के होने से यह स्थान शहरों की भीड़ भाड़ से दूर है और यहां की आबो हवा एकदम शुद्ध है इसलिए यह स्थान लोगों को बहुत आकर्षित भी करता है।
इसके अलावा अगर आप यहां आते हैं तो आपको यहां आने पर राजस्थान की कला और संस्कृति और साथ ही यहां के खानपान को भी नजदीक से देखने और जानने का अवसर मिलता है।
हनुमान जी को संकट मोचन के तौर पर तो जाना ही जाता है इसलिए ऊपरी बाधा के इलाज के लिए यहां लोग आते हैं। लेकिन सिर्फ ऐसा ही नहीं है यहां हनुमान भक्त भक्ति भाव से दर्शनों के लिए भी आते हैं और मनोकामना, नौकरी, संतान, कारोबार में वृद्धि जैसी इच्छा की पूर्ति के लिए अपने हाथ से अर्जी भी लगाते हैं।
चाहे ऊपरी बाधा से मुक्ति की बात हो या मनोकामना की हर हनुमान भक्त के लिए मेहंदीपुर बालाजी एक सिद्ध गढ़ माना जाता है।
कब जाएं मेहंदीपुर बालाजी ?
यदि आप श्री मेहंदीपुर बालाजी महाराज के दर्शनों के लिए जाने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले तो हम आपको बता दें कि प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की बहुत भारी भीड़ देखने को मिलती है।
अगर बात यहां की आरती की की जाए तो प्रतिदिन आरती के समय सुबह छह बजे और शाम को साढ़े छह बजे भी यहां भारी भीड़ जमा हो जाती है। पांव रखने भर की जगह नहीं मिल पाती है। इसके अलावा धक्का-मुक्की और जेब आदि कटने का डर अलग से रहता है। वृद्ध जनों और बच्चों के लिए यह भीड़ कभी कभी अच्छी खासी परेशानी भी पैदा कर देती है।
अगर आपको यहां की भीड़ भाड़ और बेवजह की परेशानियों से बचना हो तो शनिवार, रविवार और मंगलवार के दिन को छोड़कर बाकि के दिनों में ही यहां जाना चाहिए।
श्री मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में नित्य होने वाली सुबह शाम की आरती का माहौल और यहां के दृश्य विचलित करने वाले होते हैं और देश के अन्य मंदिरों से कुछ हटकर भी दिखाई देते हैं। इसलिए, इस मंदिर के नियम भी अन्य मंदिरों की तुलना में अलग और विशिष्ट हैं।
कैसा है यहां का मंदिर?
श्री मेहंदीपुर बालाजी धाम पहुंचकर अगर आप यहां के मुख्य आराध्य मंदिर में श्री बालाजी महाराज के दर्शन के लिए जाएंगे तो सबसे पहले आपका सामना दर्शनों के लिए लगी बड़ी बड़ी लाइनों से होगा।
पंक्तिबद्ध होकर दर्शन करने के बाद मंदिर से बाहर निकलते ही पास ही में सीधे हाथ पर श्री भैरव बाबा का मन्दिर बना हुआ है जिन्हें यहां कप्तान साहब भी कहा जाता है क्योंकि भैरव बाबा यहां कोतवाल के पद पर आसीन हैं।
मेहंदीपुर बालाजी की परम्परा के अनुसार भैरव बाबा के मंदिर में दर्शन करने के बाद आप कुछेक कदम ही आगे बढ़ेंगे तो कुछ सीढ़ियां चढ़कर श्री प्रेतराज सरकार के मंदिर में भी जाना होता है। जहां प्रवेश करते ही श्री प्रेतराज सरकार जी के दर्शन होते हैं।
बहुत ही डरावना दृश्य देखने को मिलता है प्रेतराज की अदालत में।
श्री प्रेतराज सरकार जी के दरबार का नजारा कह लें या दृश्य बहुत डरावना सा लगता है। ऐसा इसलिए है कि यहां महिलाओं और पुरुषों प्रेत आत्माओं के आवेश में देखने को मिलते हैं।
चूंकि मेहंदीपुर बालाजी (Mehandipur Balaji) स्थान पर लोग ऊपरी बाधा और भूत प्रेत जैसी बीमारियों का उपचार कराने यहां आते हैं और मान्यताओं के अनुसार बालाजी महाराज के आशीर्वाद से ठीक होकर भी जाते हैं इसलिए यहां का मन्दिर कष्टों से दूर कराने वाला एक विशेष सिद्ध स्थान बन गया है और इसलिए यहां कई पीड़ित महिलाओं और पुरुषों को तरह-तरह की हरकतें करते हुए, चिल्लाते हुए या बड़बड़ाते भी देखा जा सकता है।
खास कर जब मंदिर में श्री बालाजी महाराज की आरती होती है उस समय ऐसे लोगों की छटपटाहट देखकर यहां आने वाले कई लोग बहुत विचलित हो जाते हैं और ऐसे लोगों से दूरी बना लेते हैं।
भूत प्रेत और ऊपरी हवा के कष्टों से पीड़ित लोगों को यहां जंजीरों में जकड़े हुए देखना बहुत ही पीड़ादायक लगता है। पहले यहां बहुत सारी पीड़ादायक क्रियाएं होती थी लेकिन मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप से काफी क्रियाएं बंद हो गई हैं।
प्रथम महंत श्री गणेशपुरी जी महाराज जिन्हें यहां समाधि वाले बाबा भी कहा जाता है के कार्यकाल के विस्तार में यहां के स्थानीय लोगों को जब उन्हें भूत प्रेत और ऊपरी हवा के कष्टों से धीरे-धीरे छुटकारा मिलने लगा तो दूर दूर तक इसकी चर्चा और आस्था बढ़ती चली गई। और इसी के फलस्वरुप आज यह विश्व प्रसिद्ध मंदिर बन चुका है।
श्री प्रेतराज सरकार के मंदिर में हर दिन दोपहर के दो बजे से चार बजे तक श्री प्रेतराज सरकार की कचहरी लगती है जिसे प्रेतराज बाबा की अदालत भी कहा जाता है। यहां ये दंडाधिकारी के पद पर आसीन हैं।
माना जाता है कि इस कचहरी के माध्यम से दंडाधिकारी के पद पर आसीन प्रेतराज बाबा उन महिलाओं और पुरुषों के शरीर से प्रेत आत्माओं को बाहर निकाल कर उन्हें ठीक कर देते हैं। यही कारण है कि यहां ऐसे पीड़ितों को इलाज के लिए दूर-दूर से लाया जाता है।
जो श्रद्धालु यहां पहली बार आए होते हैं या ऐसे श्रद्धालु जो कचहरी के दृश्यों से पहली बार दो चार होते हैं उनमे से अधिकतर तो प्रेतराज सरकार के दरबार के दृश्यों को देखने के बाद विचलित होकर यहां से जल्दी से जल्दी निकल जाना चाहते हैं।
संकट से पीड़ित व्यक्ति क्या करें?
आपको बता दें कि अगर आप भी यहां किसी ऊपरी व्याधि से पीड़ित व्यक्ति को इलाज के लिए ले जाना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि यहां किसी भी प्रकार का कोई पंडित, पुजारी, तांत्रिक बाबा ओझा जैसा कोई व्यक्ति या फिर ऐसी कोई पूजा पाठ किसी भी व्यक्ति के द्वारा नहीं करवाई जाती और न ही किसी भी पूजन सामग्री का खर्च करना पड़ता है।
इसलिए आप भी यहां किसी पंडित, पुजारी या ओझा जैसे व्यक्ति के चक्कर/झांसे में न पड़े। सुबह-सुबह बिना खाए पिए स्नान कर बालाजी महाराज को अर्जी लगवाए और अपने उस पीड़ित व्यक्ति को सीधे श्री प्रेतराज सरकार जी की कचहरी में ले जाए और दोपहर दो से चार बजे के दरबार में बैठाएं।
यदि आपने अपने घर पर किसी भी समय मेहंदीपुर बालाजी (Mehandipur Balaji) के नाम से कोई दरख्वास्त या मनोकामना की अर्जी लगायी हुई हो तो उसे आप बालाजी महाराज के मन्दिर में पहुंच कर श्रद्धा के साथ दान पेटी में डाल दें और बालाजी महाराज से संकट मुक्ति की प्रार्थना कर धन्यवाद कर दें।
प्रसाद का है खास नियम :-
मेहंदीपुर बालाजी में प्रसाद खाने और घर ले जाने का का एक खास नियम है कि मुख्य मंदिरों से पुजारी द्वारा दिए जाने वाले भोग के प्रसाद के अलावा कोई और प्रसाद किसी से न लें और न ही खाए और ना ही अपना प्रसाद किसी दूसरे को खिलायें।
ऐसा इसलिए है कि क्योंकि यहां की मान्यताओं पर अगर विश्वास किया जाए तो किसी भी प्रकार की मिठाई या फिर सुगंधित चीजें नकारात्मक शक्तियों को सबसे अधिक आकर्षित करती हैं और यहां के प्रसाद पर शक्तियों और आत्माओं का अधिकार होता है।
इसीलिए, किसी भी प्रकार की कोई मीठी चीज या प्रसाद लेकर वहां का प्रसाद भी अपने साथ घर पर नहीं लाना चाहिए। इसलिए आप वहां प्रसाद वहीं पर पूरा ग्रहण कर लें। सूखे मेवे का प्रसाद जिसका भोग राम दरबार में लगाया जाता है आप घर ले जा सकते हैं।
इस मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता पर आधारित एक नियम यह भी है कि अगर आप मेंहदीपुर बालाजी धाम के इस मंदिर के दर्शन के बाद वापिस अपने घर जा रहे हैं तो आप वापसी में मुड़ कर न देखें और कहीं ओर ना जाकर सीधे घर ही पहुंचे।
हालांकि, इस मान्यता के पीछे का कारण क्या है यह ज्ञात नहीं है। लेकिन ऐसा कहा जाता है कि जिन प्रेत आत्माओं की मुक्ति करा दी जाती है अगर वो आपको पीछे मुड़कर देखते हुए देख ले तो फिर से मोह में पड़ जाती हैं और आपके साथ हो लेती हैं। इसलिए यह आपकी अपनी श्रद्धा और आस्था का विषय है कि आप इसे माने या ना माने।
मेहंदीपुर बालाजी में इस मंदिर के आस-पास और भी कई और दर्शनीय छोटे-बड़े मंदिर हैं, जिनमें अंजनी माता मंदिर, तीन पहाड़ी मंदिर, काली माता का मंदिर, पंचमुखी हनुमान जी का मंदिर, सात पहाड़ और भगवान गणेश जी का मंदिर प्रमुख हैं।
समाधि वाले बाबा के दर्शन के बिना रहती है यात्रा अधूरी
इसके अलावा यहां पास ही में एक और सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, वह है समाधि वाले बाबा। जहां जाए बिना मेहंदीपुर बालाजी की यात्रा अधूरी समझी जाती है। यह समाधि श्री बालाजी मंदिर के सबसे पहले महंत की मानी जाती है जिन्हें साक्षात् प्रकट होकर बालाजी महाराज ने दर्शन दिए थे और अपना सेवा भार दिया था।











