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बालाजी का छप्पन भोग | भोग में क्या क्या और कितना कितना जीमाते हैं?

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भक्तों जय श्री राम। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे कि मेहंदीपुर में बालाजी का छप्पन भोग कितनी बार लगाया जाता है? घाटा मेहंदीपुर बालाजी धाम में बालाजी महाराज को भोग में क्या-क्या लगाया जाता है? बालाजी महाराज को लगने वाले भोग के व्यंजनों की मात्रा क्या होती है? बालाजी महाराज को लगाए जाने वाले भोग में सवामनी में क्या खास होता है? क्या बालाजी महाराज को लगाया गया भोग सभी भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है? प्रेतराज सरकार की सवामनी में क्या होता है? भैरव जी महाराज की सवामनी में क्या होता है? तथा बालाजी महाराज का महाप्रसाद क्या होता है?

अक्सर श्रद्धालुओं के मन में यह भी जिज्ञासा रहती है कि मेहंदीपुर बालाजी धाम में प्रतिदिन लगने वाले चारों भोगों में क्या अंतर होता है और किस समय कौन-सा भोग लगाया जाता है। इस पोस्ट में हम इन्हीं सभी प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में जानने का प्रयास करेंगे।

विषय सूची

मेहंदीपुर बालाजी में छप्पन भोग में क्या-क्या और कितना-कितना भोग लगाया जाता है
मेहंदीपुर बालाजी धाम में प्रतिदिन लगने वाले बाल भोग, राजभोग, ग्वाल भोग और शयन भोग की जानकारी।

तो आइए, एक-एक करके इन सभी प्रश्नों के उत्तर जानने का प्रयास करते हैं।

बालाजी महाराज को कितनी बार भोग लगाया जाता है?

उत्तर :- घाटा मेहंदीपुर बालाजी धाम में श्री बालाजी महाराज को प्रतिदिन चार बार भोग लगाया जाता है।

  1. सुबह की आरती के बाद बाल भोग।
  2. सुबह लगभग 11:30 बजे राजभोग।
  3. शाम की आरती के बाद ग्वाल भोग।
  4. रात्रि शयन से पहले शयन भोग।

मेहंदीपुर बालाजी धाम में लगने वाले इन चारों भोगों का अपना-अपना विशेष महत्व माना जाता है। प्रत्येक भोग दिन के अलग-अलग समय पर निर्धारित परंपरा के अनुसार अर्पित किया जाता है। इसी कारण देशभर से आने वाले श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार इन भोगों के दर्शन करने का प्रयास करते हैं।

घाटा मेहंदीपुर धाम में बालाजी महाराज को छप्पन भोग में क्या-क्या लगाया जाता है?

उत्तर :- सुबह की आरती के बाद लगने वाले बाल भोग में श्री बालाजी महाराज को छप्पन भोग, विभिन्न प्रकार की मिठाइयाँ, सूखे मेवे तथा चूरमे का भोग लगाया जाता है। यदि आप घर पर बालाजी महाराज का भोग और अज्ञारी लगाने की विधि जानना चाहते हैं, तो यह लेख भी पढ़ें।

इसके बाद सुबह लगभग 11:30 बजे राजभोग में बालाजी महाराज को खीर, पूरी, परांठे, मीठे और नमकीन चावल, विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ, अनेक पकवान तथा चूरमे का भोग लगाया जाता है।

सुबह राजभोग के बाद बालाजी महाराज का लगभग 11:45 से 12:00 बजे के बीच पर्दा कर दिया जाता है। इस समय परंपरा के अनुसार बाबा विश्राम करते है।

यदि आप घर पर भी श्री बालाजी महाराज की नियमित सेवा और पूजा करते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी महाराज की पूजा कैसे करें? यह लेख भी अवश्य पढ़ें।

संध्या आरती के बाद बालाजी महाराज को ग्वाल भोग अर्पित किया जाता है। इस भोग में मुख्य रूप से मूंग की दाल से बनी बर्फी तथा चूरमे का भोग लगाया जाता है।

रात्रि शयन से पहले बालाजी महाराज को मिष्ठान, सूखे मेवे तथा गर्म दूध का भोग लगाकर बाबा को शयन कराया जाता है।

इस प्रकार दिन के चारों भोगों में अलग-अलग प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य परंपरा के अनुसार दिनभर की सेवाओं को पूर्ण करना होता है।

बालाजी महाराज को लगने वाले भोग के व्यंजनों की मात्रा क्या होती है?

उत्तर :- सुबह आरती के बाद बाल भोग में 315 किलोग्राम छप्पन तरह की मिठाइयों के 56 थाल, जिनमें प्रत्येक थाल लगभग 5 से सवा 5 किलोग्राम का होता है, बाबा को अर्पित किया जाता है। इसके साथ 50 किलोग्राम चूरमे की एक सवामनी, सवा ग्यारह किलोग्राम सूखे मेवों का एक थाल तथा सवा ग्यारह किलोग्राम मिष्ठान का एक थाल भी भोग में लगाया जाता है।

राजभोग में खीर, पूरी, परांठे, मीठे और नमकीन चावल, विभिन्न प्रकार की सब्जियों सहित 31 प्रकार के पकवान तथा चूरमे की 11 सवामनी अर्पित की जाती हैं।

ग्वाल भोग में मुख्य रूप से 101 किलोग्राम मूंग की दाल से बनी बर्फी तथा चूरमे की पाँच सवामनी बालाजी महाराज को अर्पित की जाती है।

इन सभी भोगों की व्यवस्था मंदिर की परंपरा के अनुसार निर्धारित मात्रा में की जाती है, जिससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को भी प्रसाद उपलब्ध कराया जा सके।

बालाजी महाराज को लगाए जाने वाले भोग में सवामनी में क्या खास होता है?

उत्तर :- सवामनी के भोग में विशेष रूप से चूरमे की सवामनी होती है, जो प्रत्येक प्रमुख भोग के साथ बालाजी महाराज को अर्पित की जाती है।

मेहंदीपुर बालाजी धाम में चूरमे की सवामनी का विशेष महत्व माना जाता है। अनेक श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धापूर्वक सवामनी अर्पित करते हैं और उसके बाद उसी प्रसाद को भक्तों में वितरित कराया जाता है।

यदि आप सवामनी चढ़ाने की पूरी विधि, नियम और प्रक्रिया विस्तार से जानना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी में सवामनी क्यों चढ़ाते हैं? यह लेख भी अवश्य पढ़ें।

क्या बालाजी महाराज को लगाया गया भोग सभी भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है?

उत्तर :- जी हाँ, बालाजी महाराज को लगाया जाने वाला प्रत्येक भोग सभी भक्तों में प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाता है।

मेहंदीपुर बालाजी धाम की यह एक विशेष परंपरा है कि बाबा को अर्पित किया गया प्रसाद केवल मंदिर तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि श्रद्धालुओं में बाँटा जाता है। दूर-दूर से आने वाले भक्त भी इस प्रसाद को बड़े श्रद्धा भाव से ग्रहण करते हैं और इसे बाबा का आशीर्वाद मानते हैं।

प्रेतराज सरकार की सवामनी में क्या होता है?

उत्तर :- श्री प्रेतराज सरकार जी को चावल की सवामनी लगाई जाती है।

प्रेतराज सरकार के लिए लगाई जाने वाली सवामनी भी मंदिर की प्राचीन परंपराओं का एक महत्वपूर्ण भाग है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा एवं संकल्प के अनुसार यह सवामनी अर्पित करते हैं।

भैरव जी महाराज की सवामनी में क्या होता है?

उत्तर :- भैरव जी महाराज को शाम की आरती के बाद गुलगुले की सवामनी का भोग लगाया जाता है।

भैरव बाबा की सेवा में गुलगुले की सवामनी चढ़ाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धापूर्वक यह भोग अर्पित करते हैं।

बालाजी महाराज का महाप्रसाद क्या होता है?

उत्तर :- प्रतिदिन श्री मेहंदीपुर बालाजी महाराज को महाप्रसाद के रूप में लगभग 18,000 लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। इसके बाद इस महाप्रसाद को चार वाहनों के माध्यम से दौसा, करौली, जयपुर, सवाई माधोपुर, भरतपुर तथा अलवर आदि जिलों के विद्यालयों में विद्यार्थियों को अल्पाहार के रूप में वितरित किया जाता है।

यह परंपरा केवल प्रसाद वितरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सेवा और परोपकार की भावना का भी सुंदर उदाहरण मानी जाती है। इसी कारण महाप्रसाद का विशेष महत्व बताया जाता है।

मेहंदीपुर बालाजी को कितनी बार भोग लगाया जाता है?

01बाल भोग सुबह की आरती के बाद।
02राज भोग सुबह 11:30 बजे
03ग्वाल भोग शाम को आरती के बाद
04रात्रि भोग शयन से पहले

घाटा मेहंदीपुर धाम में बालाजी महाराज को भोग में क्या क्या लगाया जाता है?

01बालाजी महाराज का बाल भोग 56 भोग, मिठाई, चूरमा, सूखे मेवे।
02बालाजी महाराज का राजभोग खीर, पूरी, पराठे, मीठे - नमकीन चावल, विभिन्न सब्जियां, पकवान और चूरमा।
03ग्वाल भोग 101 किलो मूंग की दाल की बर्फी और चूरमा।
04शयन से पूर्व भोग मिष्ठान, मेवे और गर्म दूध।
05विशेष सवामनी का भोग 50 - 50 किलो की चूरमे की थालियां
06बालाजी महाराज का महाप्रसाद 18000 लड्डू
07प्रेतराज सरकार की सवामणि चावल का भोग
08भैरव जी की सवामणि मीठे गुलगुले का भोग

बालाजी के छप्पन भोग से जुड़े सामान्य प्रश्न

बालाजी महाराज को प्रतिदिन कितनी बार भोग लगाया जाता है?

श्री मेहंदीपुर बालाजी धाम में प्रतिदिन चार बार भोग लगाया जाता है। इनमें बाल भोग, राजभोग, ग्वाल भोग तथा शयन भोग शामिल हैं।

बालाजी महाराज के राजभोग का समय क्या है?

राजभोग प्रतिदिन प्रातः लगभग 11:30 बजे लगाया जाता है। इसके पश्चात कुछ समय के लिए बाबा के विश्राम हेतु पर्दा कर दिया जाता है।

बालाजी महाराज की सवामनी में क्या चढ़ाया जाता है?

बालाजी महाराज की सवामनी में मुख्य रूप से चूरमे की सवामनी अर्पित की जाती है। इसके साथ अवसर और परंपरा के अनुसार अन्य प्रसाद भी लगाया जाता है।

क्या बालाजी महाराज का भोग श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है?

हाँ, बाबा को अर्पित किया गया भोग प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

बालाजी महाराज का महाप्रसाद क्या होता है?

प्रतिदिन बाबा को लड्डुओं का महाप्रसाद अर्पित किया जाता है, जिसे बाद में सेवा कार्यों के अंतर्गत विद्यार्थियों तथा अन्य श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

निष्कर्ष

उम्मीद करते हैं कि अब आपको यह जानकारी मिल गई होगी कि श्री मेहंदीपुर बालाजी धाम में प्रतिदिन कितनी बार भोग लगाया जाता है, छप्पन भोग में कौन-कौन से व्यंजन शामिल होते हैं, सवामनी का क्या महत्व है तथा महाप्रसाद किसे कहा जाता है।

यदि आप मेहंदीपुर बालाजी की पूजा, अर्जी, दरख्वास्त, भोग, परहेज तथा अन्य सभी महत्वपूर्ण नियमों की विस्तृत जानकारी एक ही स्थान पर पढ़ना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी के नियम अवश्य पढ़ें।

॥ जय श्री बालाजी महाराज ॥
॥ जय श्री प्रेतराज सरकार ॥
॥ जय श्री भैरव जी महाराज ॥

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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