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Mehandipur Balaji Sat Pahad : Precautions You Should Take Before Riding Up.

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Mehandipur Balaji Sat Pahad : Precautions You Should Take Before Riding Up – हाँ तो दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं मेहंदीपुर बालाजी के सात पहाड़ी मंदिर की। Balaji Mandir में दर्शन करने के बाद भक्तगण Mehandipur Balaji में कुछ खास जगहों पर जाना पसंद करते हैं। उनमें से प्रमुख जगहें हैं तीन पहाड़ी और सात पहाड़ी।

यह वो मंदिर है जहां पर जाकर प्रसाद चढ़ाया जाता है। भक्तगण श्री बालाजी महाराज के दर्शनों के पश्चात यहां आकर प्रसाद चढ़ाते हैं।

Mehandipur Balaji Sat Pahad : Precautions You Should Take Before Riding Up

इसलिए पड़ा यहां का नाम Mehandipur Balaji Sat Pahad:-

असल मे यहां का नाम सात पहाड़ी नाम इसलिए पड़ा है क्योंकि यहां सात पहाड़ियां हैं और यहां सात पहाड़ी पार करनी पड़ती है।

मुख्य रूप से पहली पहाड़ी प्रमुख पहाड़ी है। सात पहाड़ (Sat Pahad) की कुल यात्रा में चढ़ने मे ज्यादा मुश्किल पहली पहाड़ी पर पड़ती है। बाकी पहाडियों पर चढ़ायी ज्यादा नहीं है।

आपको बता दें कि अगर आप यहां की यात्रा करना चाह रहे हैं तो आपको थोड़ा ध्यान रखना पड़ेगा। इसीलिए इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको Mehandipur Balaji Sat Pahad जाने से पूर्व आपको बरतने वाली जरूरी सावधानियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

आप यहां नंगे पैर न आए (Mehandipur Balaji Sat Pahad) :-

यहां आने का मार्ग पथरीला रास्ता है और यहां कोई सड़क या सीढ़ी नहीं है। राजस्थान वैसे ही पत्थरों और शिलाओं के लिए प्रसिद्ध है। खास तौर से संगमरमर के लिए।

यहां रास्ते में छोटे छोटे नुकीले पत्थर बिखरे हुए हैं। इसलिए आप यहां नंगे पैर न आए। भक्तगण अपनी-अपनी के अनुसार लोग ज्यादातर नंगे पैर ही आते हैं।

हम उन्हे भी सुझाव देना चाहते हैं कि वे भी यहाँ नंगे पैर न आए। मैं आपको यही suggest करूंगा कि आप लोग चप्पल या shoes पहनकर ही यहां आए। वर्ना आपको यहां परेशानी हो सकती है।

आपको रास्ते में कांटे भी लग सकते हैं। रास्ते में एक जगह ऐसी भी है जहां आपको झाड़ियों में से होकर निकालना पड़ेगा।

दोनों तरफ झाड़ियां ही झाड़ियां है और पगडंडी है। यहां से तो इस बात का आपको विशेष ध्यान रखना है। अगर आप पहाड़ चढ़ने के शौकीन हैं तो यहां जरूर आइए।

बुजुर्ग लोग और श्वास रोगी विशेष सावधानी बरतें :-

बालाजी मंदिर से यहां तक की दूरी लगभग तीन से चार किलोमीटर की है। रास्ते में थोड़ी चढ़ाई है थोड़ा plain भी है और थोड़ी हल्की चढाई भी है सभी तरह की है और मिक्स है।

जो बुजुर्ग लोग हैं या जिन्हें साँस आदि की बीमारी है तो उन्हें चढ़ाई करने में परेशानी हो सकती है। पहले पहाड़ की चढ़ाई ज्यादा कठिन है।

वैसे यहां आने में इतनी ज्यादा भी मुश्किल नहीं है आना चाहें तो आ सकते हैं लेकिन उन्हें सहारे की जरूरत होगी।

अगर आपके माता पिता बुजुर्ग है या साँस की समस्या रहती है तो आपको उन्हें हाथ पकड़कर यहां लाना होगा।

अगर आप बिना सहारे के चल सकते हैं और बुजुर्ग हैं तो sat pahad पर जाने के लिए एक छड़ी अवश्य साथ रख लें क्योंकि यही चढाई करते वक़्त आपका सहारा होगी।

यात्रा पूर्व कम भोजन कर के ही निकलें :-

एक बात का ध्यान रखें कि यहाँ पानी जरूर साथ लाए। आप ज्यादा खा कर यहां के लिए न चले। बहुत हल्का फुल्का खा कर चलें।

खाना साथ लेकर चल सकते हैं। ज्यादा वजन न लेकर चलें। यहां आकर प्रसाद चढ़ाने के बाद ही कुछ खाए।

यहां खाने के लिए आपको कुछ नहीं मिलेगा। रास्ते में जरूर चाय के स्टॉल आपको मिल जाएंगे। इसलिए थोड़ा बहुत साथ जरूर लाए।

पानी जरूर लाए क्योंकि चढ़ाई करते समय आपको प्यास जरूर लगेगी। ज्यादा गर्म कपड़े लाद कर न लाए। चढ़ायी करते समय ज्यादा गर्म कपड़े आपको परेशानी में डाल सकते हैं। हल्के गर्म कपड़े पहने क्योंकि चढाई चढ़कर आपको ऊपर हवा का सामना भी करना पड़ेगा।

Sat Pahad की सभी सावधानियां एक नजर में :-

  • नंगे पैर यहां की यात्रा न कीजिए।
  • यात्रा से पूर्व ढीले और आरामदायक जूते या चप्पल पहन कर ही यात्रा आरंभ कीजिए।
  • वृद्ध और साँस के रोगी अकेले न जाए।
  • बुजुर्ग व्यक्ति सहारे के लिए अपने साथ किसी को साथ लेकर जाए।
  • अपनी दवाइयां अपने साथ रखें।
  • अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें।
  • यात्रा से पहले खाना कम ही खाकर जाएं।
  • थोड़ा बहुत भोजन अवश्य साथ ले जाए।
  • अनावश्यक या ज्यादा वजन न लादकर ले जायें।
  • मौसम के अनुसार कपड़े पहने।
  • बारिश के मौसम में छाता लेकर निकले।
  • समय का विशेष ध्यान रखें। अंधेरा होने से पूर्व वापिस लौट आए। हो सके तो एक टार्च रखें।

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