बसोड़ा और शीतला माता की पूजा कैसे करें? (Basoda/Sheetla Mata Ki Kahani) – बसोड़ा (Basoda) होली के सात या आठ दिनों के बाद होता है। बसोड़ा के पहले दिन पक्का खाना और मीठे चावल बनाए जाते हैं। राबड़ी बनाने के बाद हाथ में नहीं लेनी चाहिए और साथ ही बसोड़ा वाले भी हाथ में सुई नहींं लेनी चाहिए और पक्की रसोई बनानी चाहिए।
बसोड़ा या शीतला अष्टमी हिन्दू धर्म के प्रमुख पारंपरिक पर्वों में से एक है। यदि आप अन्य प्रमुख हिन्दू पर्वों, उनकी पूजा विधि, महत्व और परंपराओं के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो पर्व एवं त्योहार लेख भी पढ़ सकते हैं।
राबड़ी, बाजरे की रोटी, गुड़ चीनी का मीठा भात और मन हो तो हलवा, पूरी साग आदि बना लें। मोठ बाजरा भिगो दें। शीतला माता (shitla Mata) के गीत गायें तो बसोड़े के पहले दिन रात को रसोई में दीवार धोकर दीवार पर पांचों उंगलियों पर घर लगाकर छापा बनाएं और रोली, चावल चढ़ाएं, गीत गाए और बसोड़े की पूजा (Basode Ki Puja) करें।

Sheetla Mata Ki Kahani और बसोड़ा पूजा विधि
Sheetla Mata Ki Kahani हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। बसोड़ा के दिन शीतला माता की पूजा की जाती है और ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है। इस लेख में Sheetla Mata Ki Kahani, बसोड़ा पूजा विधि, पूजा सामग्री और उद्यापन की जानकारी दी गई है।
बसोड़े के दिन सुबह एक थाली में राबड़ी, रोटी, चावल, रोली, कलावा, मूंग की छिलके वाली दाल, हल्दी, धूप, बाजरे के आटे में घी चीनी मिलाकर चढ़ाएं।
चूड़े के पास की आंख बनायें। एक बड़कुल्ले की माला जो होली के दिन से रखी होती है उसमे से रखें और दक्षिणा में मोठ, भिगा चढ़ाएं।
सारी चीजों में सबके साथ लगाकर शीतला माता (Sheetla Mata) पर एक जल का लोटा चढ़ा दें। बायना मिनसकर अपनी सास के पैर छूकर दें।
कई लोग बसोड़े को सुबह चूरमा बनाते हैं। इस दिन हनुमान जी यानि बालाजी महाराज की पूजा करें , जलेबी मंगवाकर पितरों की धोक लगायें। जल, रोली, जेल, बड़कुुल्ला, फूल, पैसे चढ़ाए, झुवारा उगाये और सभी लोग ठंडी रोटी खायें। बसोड़ा (Basoda) जीमने से पहले एक बुढ़ी मिसरानी और एक कुंवारी लड़की को जिमा दें।
अगर कोई कुंडारा भरता हो तो एक बड़ा कुण्डा और दस छोटे कुण्डे मंगा लें। एक कुण्डारे में राबड़ी, एक में भात, एक में रसगुल्ले, एक में मोठ, एक कुण्डारे में हल्दी पीसकर रखें।
कुण्डारे में इच्छानुसार पैसे रख लें। उन कण्डारों को रखकर पूजन करें। हल्दी का टीका निकालें और हल्दी से ही पूजन करें। बाद में जल माला और समान भरा कुण्डारा शीतला माता (shitla mata) पर ले जाकर चढ़ा दें।
कुण्डारे का पूजन करने के बाद बसोड़े की कहानी (Basode Ki Kahani) सुनें। बसोड़े के पहले दिन रात को शीतला माता के गीत (Sheetla Mata Ke Bhajan) गायें।
रास्ते में दूब व हरा साग लाकर पैण्डे पर रख दें। यदि किसी के लड़का या लड़के का विवाह हो तो उसका उद्यापन (Udyapan) करें । उद्यापन में जितने कुण्डारे भरें उतने ही और लें।
बसोड़ा पूजा जानकारी
| पर्व | बसोड़ा / शीतला अष्टमी |
| देवी | शीतला माता |
| मुख्य भोग | ठंडा भोजन, राबड़ी, मीठे चावल |
| पूजा का समय | प्रातःकाल |
| विशेष परंपरा | एक दिन पहले भोजन बनाना |
| लाभ | परिवार की सुख-समृद्धि एवं रक्षा |
बसोड़े की कहानी (Sheetla Mata Ki Kahani)
एक बुढ़िया माई थी। वह बसोड़े (Basode) के दिन ठंडी रोटी खाया करती थी और शीतला माता की पूजा (Sheetla Mata ki Puja) करती थी। गाँव में उसके अलावा और कोई पूजा नहीं करता था।
एक दिन बसोड़े के दिन सारे गाँव में आग लग गई और सारा गाँव जल गया लेकिन बुढ़िया माई की झोपड़ी बच गई।
सबने बुढ़िया माई के पास आकर पूछा कि सबके घर जल गए लेकिन तेरा घर नहीं जला, क्या बात है?
इस पर बुढ़िया माई बोली कि मैंने बसोड़े की ठंडी रोटी खाई थी और शीतला माता की पूजा (Sheetla Mata Ki Puja) करी थी और किसी ने ऐसा नहीं किया इसलिए मेरी झोपड़ी तो बच गई और तुम्हारी झोपड़ियां जल गई।
सारे गाँव में ढिंढोरा पिटवा दिया गया कि बसोड़े के दिन सब कोई ठंडी रोटी खाए और शीतला माई की पूजा (Shitla Mata Ki Puja) करें। जिस दिन शीतला माता की धोक लगानी हो उससे पहले दिन पक्का खाना बनाएँ।
हे शीतला माई! जैसे बुढ़िया माई की रक्षा करी वैसे ही सबकी करना। सब बाल बच्चों की रक्षा करना। सबको शीतला माता की कहानी (Sheetla Mata Ki Kahani) अवश्य कहनी सुननी चाहिए।
पूजा हमेशा लाल आसन बिछाकर करनी चाहिए।
शीतला माता पूजा का महत्व
शीतला माता को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। बसोड़ा या शीतला अष्टमी के दिन भक्त माता की पूजा कर परिवार की सुख-शांति और स्वास्थ्य की कामना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक Sheetla Mata Ki Kahani सुनने और पूजा करने से माता की कृपा प्राप्त होती है।
Sheetla Mata Ki Kahani से जुड़े प्रश्न
बसोड़ा कब मनाया जाता है?
बसोड़ा सामान्यतः होली के सात या आठ दिन बाद मनाया जाता है।
बसोड़ा के दिन क्या खाया जाता है?
इस दिन एक दिन पहले बनाया गया ठंडा भोजन ग्रहण किया जाता है।
Sheetla Mata Ki Kahani क्यों सुनी जाती है?
मान्यता है कि कथा सुनने और माता की पूजा करने से परिवार की रक्षा और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।






Jai mata di. Jai ma shitla bhabwani.