तीन पहाड़ी मंदिर मेहंदीपुर बालाजी की जानकारी

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भक्तों, आज हम आपको मेहंदीपुर बालाजी में स्थित तीन पहाड़ी मंदिर मेहंदीपुर बालाजी के बारे में बताएंगे।
यदि आप पहली बार तीन पहाड़ी मंदिर के बारे में जान रहे हैं, तो पहले मेहंदीपुर बालाजी मंदिर की संपूर्ण जानकारी पढ़ लें। इससे आपको मंदिर परिसर, प्रमुख दर्शनीय स्थलों और यात्रा क्रम की पूरी जानकारी एक ही स्थान पर मिल जाएगी।

यदि आप मेहंदीपुर बालाजी के इतिहास, प्रमुख मंदिरों, प्रेतराज सरकार, दूत महाराज, सात पहाड़ और अन्य ऐतिहासिक स्थलों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी का इतिहास अवश्य पढ़ें।

पहाड़ीप्रमुख मंदिर / स्थलविशेष मान्यता
पहली पहाड़ीशिव मंदिर, बाल गणेश, बाल हनुमानतीन पहाड़ी मंदिर का प्रवेश मार्ग, प्राचीन मंदिरों के दर्शन
दूसरी पहाड़ीकाली माता मंदिर, अंजनी माता मंदिर, पंचमुखी हनुमानमानसिक शांति, संतान प्राप्ति की मान्यता तथा श्रद्धापूर्वक दर्शन
तीसरी पहाड़ीभैरव बाबा, श्मशान भैरव, गुरु गोरखनाथ, योगमायारोग मुक्ति, प्रेतबाधा से राहत तथा विशेष धार्मिक मान्यताओं का केंद्र

तीन पहाड़ी मंदिर मेहंदीपुर बालाजी क्या है?

इसे बालाजी में तीन पहाड़ भी कहते हैं। असल मे तीन पहाड़ी मंदिर सिर्फ एक ही मंदिर नहीं है बल्कि (but ) बालाजी मंदिर के ठीक सामने कुछ पहाड़ियां हैं।

जिन्हें क्रमशः एक पहाड़ी, दो पहाड़ी और तीन पहाड़ी कहा जाता है।

प्रत्येक पहाड़ी पर कई मंदिर बने हुए हैं जो कि अति प्राचीन भी हैं।

आज हम इसी तीनों पहाड़ियों पर स्थित मंदिरों के बारे में बताएंगे।

तीन पहाड़ी मंदिर मेहंदीपुर बालाजी राजस्थान

मुख्य मंदिर के सामने तीन पहाड़ियां है। यही तीन पहाड़ी तीन पहाड़ी मंदिर मेहंदीपुर कहलाती है।

बाजार से ही तंग रास्ते से होते हुए ऊपर चढ़ाई चढ़ते हैं। पहले शिव मंदिर आता है।

जहां पर ऊपर पहाड़ी पर जाने के रास्ता का तीर नुमा चिन्ह दर्शाया गया है। दूर से प्रेतराज सरकार के मंदिर के दर्शन चढ़ते-चढ़ते बराबर के दृश्य बड़े मनोहारी हैं।

बायीं ओर एक बाल गणेश और बाल हनुमान के एक छोटे से मंदिर में दर्शन होते हैं। यात्री फिर पौड़ी चढ़ते हैं।

मान्यता है कि मेहंदीपुर बालाजी के रज-रज में समाए हैं बजरंगबली और यहां के कण-कण में भूत-प्रेत तथा ऊपरी हवा को दूर करने की शक्ति और हनुमान जी का आशीर्वाद है।

यही आस्था, श्रद्धा और विश्वास दूर दूर से रोगियों को यहां खींच कर लाती हैं।

आत्मिक युग, आशीर्वाद के सिद्धांत को माने या ना माने लेकिन (but)यहां की मान्यता में कोई कमी नहीं आयी।

पहली और दूसरी पहाड़ी पर स्थित प्रमुख मंदिर

और थोड़ा ऊपर काली माँ का मंदिर आता है जो प्राचीन है। यहीं पर एक मानसिक रोगी को आशीर्वाद देकर इलाज करते पाया जाता है।

फिर पौड़ी चढ़कर अंजनी माता मंदिर के दर्शन होते हैं।

मंदिर की खूबसूरती दर्शनीय है। माता अंजनी के मंदिर में औरते पूजा करती रहती है।

पति पत्नी यहां आकर औलाद की मन्नतें मांगकर अपनी हाजिरी दर्ज करते हैं।

यदि किसी ऊपरी हवा के कारण गर्भ धारण नहीं हो पाता तो ऐसी औरतों को यहां पर सिर हिलाते हुए खेलता हुआ देखा जा सकता है।

विग्रह स्वरूप में माता अंजनी की गोद में बाल हनुमान
जी के दर्शन होते हैं।

यह बहुत ही प्यारा दृश्य जो श्रद्धा और विश्वास की पराकाष्ठा है।

औरत अपने बालों से फर्श को साफ करती हुई दिखाई देती है।

साथ ही अपने पल्लू से अंजनी माता के फर्श को साफ करती है। आज के युग में यह सब आश्चर्य सा लगता है।

यहीं पर एक वृक्ष है जिस पर औरतें, पति पत्नी साथ साथ चुन्नी और धागे बाँध कर मन ही मन सन्तान प्राप्ति का माता अंजनी से वरदान मांगती है।

इन्हें पूर्ण विश्वास होता है कि अंजनी मैया हमारी मन की मुराद अवश्य ही पूरी करेंगी।

यह अंजनी माता का दूसरा प्राचीन मन्दिर है।

यहां पर भी पुजारी मानसिक रोगियों का इलाज भजन कीर्तन कराते हुए देखा जाता है।

ऊपरी हवा वाला रोगी अनैच्छिक क्रियाओं में खेलने लगता है जैसे सिर हिलाना।

साथ आने वाले परिवार के सदस्य हथेलियां बजाते रहते हैं। रोगी जमीन पर अपने दोनों हाथ रख देता है।

काफी देर तक यह प्रक्रिया चलती रहती है। निराश, हताश मानसिक रोगी इलाज कराने यहां पर जरूर आते हैं।

यहीं पर पंचमुखी हनुमान जी का बड़ा ही मनोहारी विग्रह स्वरूप है। यदि आप विशाल हनुमान प्रतिमा के बारे में जानना चाहते हैं तो 151 फुट के हनुमान जी के बारे में भी पढ़ें।

तीसरे पहाड़ पर स्थित शक्ति स्थल और भैरव मंदिर

💡 क्या आप जानते हैं?
मंदिर की वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, पहले दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक लगने वाली श्री प्रेतराज सरकार की कचहरी अब तीन पहाड़ी पर लगती है। मेहंदीपुर बालाजी धाम की प्रचलित परंपरा के अनुसार, इस कचहरी की व्यवस्था में श्री दीवान सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

यहां के दर्शनों के पश्चात समय आता है है तीसरे पहाड़ का। रास्ते में मृत पूर्वजों के बने हुए थान दिखाई देते हैं।

जिन्हें देखकर पूर्वजों की याद ताजा हो जाती है। मान्यता है कि मेहंदीपुर बालाजी में श्रद्धापूर्वक दर्शन और पूजा करने से पितरों को मुक्ति मिलने का भी विशेष महत्व बताया जाता है। अब यात्री तीसरे पहाड़ पर तीन पहाड़ शक्ति स्थल पर आते हैं।

दूर से लहराते हुए झंडों के दर्शन होते हैं। खाने पीने की वस्तुए और पूजा सामग्री का बाजार भी है।

यहां पर कोतवाल और प्रेतराज का शिला रूप में स्वरूप है।

मान्यता है कि जिनके रोग ठीक हो जाते हैं उन्हें यहां के दर्शन अनिवार्य है क्योंकि इन्हीं की कृपा से तो बालाजी हनुमान भूत प्रेतों, ऊपरी हवाओं को मार मार कर भागते हैं।

मेहंदीपुर बालाजी के इस पुराने उपचार स्थल के बारे में विस्तार से जानने के लिए भंगीवाड़ा: मेहंदीपुर बालाजी में एक भूला-बिसरा उपचार स्थल पढ़ें।

प्रेतों के देवता प्रेतराज के दर्शन आश्चर्यचकित करने वाले है। यहीं पर चौमुखा भैरव बाबा के दर्शन होते हैं।

भैरव बाबा शमशान वासी माने जाते हैं। तांत्रिक इन्हीं की पूजा करके विशेष सिद्धियां प्राप्त करते हैं और लोगों का भला करते हैं।

इन्हें कालों के काल महाकाल माना गया है।

यहां पर पुजारी हवन कुंड मे मंत्रो से रोगियों को आशीर्वाद देते हुए दिखाई देते हैं।

मोर के पंखों से झाड़ा लगाते हैं। मस्तक पर तिलक लगाकर पुन: कष्ट न आए ऐसा आशीर्वाद देते हैं।

बराबर मे श्री श्मशान भैरव का मंदिर है। यहीं पर शिव के अवतार गुरु गोरखनाथ का विग्रह रूप और धुना है।

इसकी भभूति सर्वकष्टहारी मानी जाती है। बराबर मे योगमाया के अनेक विग्रह रूप दिखाई देते हैं।

योगमाया भी सर्व क्लेशहारी है। इनका आशीर्वाद और दर्शन भी अनिवार्य है।

यहां पर एक सरसों के तेल की ज्योत सदा जलती रहती है। यहां के दृश्य और पूजा बड़ी विस्मयकारी सी लगती है।

यहां पर दो प्रकार का प्रसाद होता है। एक मे जो भैरव नाथ का प्रसाद माना जाता है।

नारियल पर लाल कपड़ा लिपटा होता है। दूसरा प्रसाद माँ काली का होता है। जिस पर नारियल पर काला कपड़ा लिपटा होता है।

पंचमुखी की हाजिरी बताशे और लड्डुओं की मानी जाती है।

चाहे जो हो (However) पूजा का यहां पर एक अनोखा अद्भुत रूप देखने को मिलता है।

यहां के दर्शनों के पश्चात वापिस नीचे मुख्य मंदिर पर आया जाता है।

यदि आप तीन पहाड़ी क्षेत्र के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में भी जानना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी के सात पहाड़ तथा घाटा मेहंदीपुर बालाजी की जानकारी भी अवश्य पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मेहंदीपुर बालाजी का तीन पहाड़ी मंदिर क्या है?

तीन पहाड़ी मंदिर मेहंदीपुर बालाजी मुख्य मंदिर के सामने स्थित तीन पहाड़ियों पर बने प्राचीन मंदिरों का समूह है। इन्हें एक पहाड़ी, दो पहाड़ी और तीन पहाड़ी के नाम से भी जाना जाता है।

तीन पहाड़ी मंदिर में कौन-कौन से प्रमुख मंदिर हैं?

तीन पहाड़ी क्षेत्र में शिव मंदिर, अंजनी माता मंदिर, पंचमुखी हनुमान, प्रेतराज सरकार, भैरव बाबा, योगमाया तथा अन्य प्राचीन धार्मिक स्थल स्थित हैं।

क्या तीन पहाड़ी मंदिर के दर्शन करना आवश्यक माना जाता है?

मेहंदीपुर बालाजी आने वाले अनेक श्रद्धालु मुख्य मंदिर के दर्शन के बाद तीन पहाड़ी मंदिर भी जाते हैं। मान्यता के अनुसार यहां स्थित विभिन्न शक्तिस्थलों के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व है।

तीन पहाड़ी मंदिर तक कैसे पहुंचा जाता है?

मुख्य मंदिर के सामने स्थित बाजार से होकर सीढ़ियों के मार्ग से तीन पहाड़ी मंदिर तक पहुंचा जाता है। रास्ते में क्रमशः विभिन्न प्राचीन मंदिरों के दर्शन होते हैं।

निष्कर्ष

मेहंदीपुर बालाजी का तीन पहाड़ी मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि अनेक प्राचीन और श्रद्धा के केंद्रों का समूह है। पहली पहाड़ी से लेकर तीसरे पहाड़ तक शिव मंदिर, अंजनी माता मंदिर, पंचमुखी हनुमान, प्रेतराज सरकार, भैरव बाबा तथा अन्य शक्तिस्थलों के दर्शन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। यदि आप मेहंदीपुर बालाजी धाम जाएं, तो मुख्य मंदिर के साथ तीन पहाड़ी मंदिर के दर्शन भी अवश्य करें।

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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