Home Mehandipur Balaji Maharaj समाधि वाले बाबा का भोग कैसे लगाएं? Samadhi Wale Baba Ka Bhog

समाधि वाले बाबा का भोग कैसे लगाएं? Samadhi Wale Baba Ka Bhog

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समाधि वाले बाबा का भोग कैसे लगाएं? – नमस्कार मित्रों, मेहंदीपुर बालाजी ब्लॉग वेबसाइट पर आपका स्वागत है। आज हम आपको बताएंगे कि गणेशपुरी जी महाराज को जिन्हें समाधि वाले बाबा भी कहा जाता है को आप कैसे मना सकते हैं। क्योंकि बालाजी में जो लोग अपना संकट कटवाना चाहते हैं उन्हें समाधि वाले बाबा से अपनी विनती कहनी और उन्हें मनाना चाहिए।

यदि समाधि वाले बाबा आपकी विनती प्रार्थना सुन लेते हैं तो आपका संकट निश्चित रूप से कट जाएगा। ऐसा माना जाता है कि मेहंदीपुर बालाजी में समाधि वाले बाबा जी की बात किसी भी दरबार में नहीं काटी जाती।

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समाधि वाले बाबा यानि गणेशपुरी जी महाराज मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के सबसे प्रथम महंत रहे हैं। बालाजी महाराज की शक्तियों का विस्तार करने का श्रेय गणेशपुरी जी महाराज को ही जाता है।

समाधि वाले बाबा की सेवा भक्ति से ही आज बालाजी महाराज की महिमा का इतना विस्तार हुआ है और प्रसिद्धि मिल पायी है।

जब भी आप स्वयं या मित्रों या परिवार के साथ बालाजी जायें सबसे पहला काम आपका वहां पहुंचने की दरख्वास्त लगाने का होना चाहिए।

दरख्वास्त क्या है और कैसे लगायी जाती है इसके लिए हमने पूर्व में एक पोस्ट लिखी है। अगर आपको दरख्वास्त लगानी नहीं आती है तो आप यह पोस्ट पढ़ें।

बहुत से भक्त बालाजी पहुंचने पर दरख्वास्त नहीं लगाते हैं उन्हें चाहिए कि वे वहां पहुंचकर दरख्वास्त जरूर लगाएं। यह मात्र दस रुपये की लगती है।

दरख्वास्त लगाते समय मन ही मन प्रार्थना करें कि हे बालाजी महाराज मैं आपके दर पे कुशल मंगल आ गया हूं। मेरे संकट काटिये। मेरी समस्या का समाधान कीजिए।

इसके बाद श्री राम जी के दरबार में जाइए और अपनी परेशानी वहां भी दोहराएं।

जलेबी का लगता है भोग :-

इसके बाद आपको समाधि वाले बाबा के स्थान पर जाना चाहिए। समाधि वाले बाबा को जलेबी का भोग लगाया जाता है। वहां पर स्थित दुकानों से जलेबी का भोग खरीद का रख लीजिए।

ऐसा माना जाता है कि बाबा को जलेबी का भोग अत्यंत प्रिय है। यह जलेबी का भोग दुकान से मात्र दस रुपये में मिल जाता है।

समाधि वाले बाबा का भोग का समय

आपको बता दें कि समाधि वाले बाबा को जलेबी का भोग अपरान्ह बारह से साढ़े बारह बजे तक लगता है। संकट वालों को समाधि वाले बाबा के स्थान पर जाकर 10 रुपये का जलेबी का भोग लगाना चाहिए।

कैसे लगाए जलेबी का भोग?

भोग लगाने के बाद थोड़ी सी जलेबी निकालकर हाथ में रख लें। और इसको अपने सिर से सात बार वारने के बाद प्रेम और आस्था के साथ इसे उस स्थान पर रख दें जहां अन्य भक्तगण प्रसाद को वारने के बाद रख रहे हों।

जो भोग आपने निकाला है इसे अब आप स्वयं ग्रहण करें। किसी अन्य को न खिलायें।

समाधि वाले बाबा की करें परिक्रमा।

भोग की प्रक्रिया पूरी करने के बाद आपको समाधि वाले बाबा की सात परिक्रमा करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सात परिक्रमा करने से संकट निश्चित रूप से कट जाता है।

जिन लोगों की पेशी न खुल रही हो या संकट न कट पा रहा हो ऐसे लोगों को 10 रुपये की एक दरख्वास्त भी लगा देनी चाहिए।

यह लगाते समय बाबा से विनती करनी चाहिए कि बाबा हमारी पेशी खोल दीजिए और संकट काट दीजिए। दरख्वास्त में अपना पूरा नाम पता जरूर बोलें।

इसके बाद समाधि वाले बाबा के स्थान के पास कोई खाली जगह देखकर बैठ जायें और बाबा का ध्यान करें आपको निश्चित ही लाभ होगा। जिसकी पेशी नहीं खुली होगी उसकी पेशी भी खुलेगी, जिसके संकट कटने बाकी होंगे उनके बयान भी होंगे, मुक्ति भी मांगेंगे और संकट भी कटेंगे।

अपने महंत जी से पूछ कर ही लगाएं भोग।

आपसे निवेदन है कि जब भी आप मेहंदीपुर बालाजी धाम जायें बाबा से विनती विनय करे और उनका भोग विधि विधान के साथ लगायें। अपनी इच्छा से कोई भोग न लगायें। किसी भी प्रकार का भोग ऐसे व्यक्ति से पूछ कर ही लगाएं जो बालाजी महाराज के सभी भोगों की जानकारी रखता हो।

कुछ भोग ऐसे होते हैं जिन्हें सामान्य सी जानकारी के साथ लगाया जा सकता है जैसे अर्जी, दरखास्त और सवामनी आदि।

लेकिन बाकि के भोग अपने महंत जी से पूछ कर ही लगाने चाहिए। कुछ लोग भंगी बाड़े का भोग बिना बताये ही लगा देते हैं या भैरो बाबा को मीठे पुए का भोग लगा देते हैं जो कि उन्हें स्वेच्छा से बिना किसी मार्गदर्शन के नहीं लगाने चाहिए।

बिना जानकारी के या गलत तरीके से लगाया गया भोग आपको परेशानी में डाल सकता है। आपका संकट आपको और ज्यादा परेशान भी कर सकता है।

हर प्रकार के भोग अपने महंत जी के मार्गदर्शन और सानिध्य में ही लगाने चाहिए। ये सभी भोग लगाने का आदेश बालाजी महाराज के दूत और शक्तियां देती हैं।

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