समाधि वाले बाबा का भोग मेहंदीपुर बालाजी धाम की प्रमुख परंपराओं में से एक माना जाता है, संकट वालों के लिए यहां भोग लगाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। गणेशपुरी जी महाराज, जिन्हें समाधि वाले बाबा के नाम से जाना जाता है, बालाजी मंदिर के प्रथम महंत माने जाते हैं। भक्त जन अपने कष्टों के निवारण और अपनी विनती प्रस्तुत करने के लिए जलेबी का भोग अर्पित करते हैं। आइए जानते हैं समाधि वाले बाबा का भोग लगाने की विधि, समय और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
बालाजी आने वाले अनेक श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल रहता है कि समाधि वाले बाबा को जलेबी का भोग कब, कैसे और किस विधि से लगाया जाता है। इस पोस्ट में हम समाधि वाले बाबा का भोग, उसका समय, भोग लगाने की विधि, परिक्रमा तथा आवश्यक सावधानियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
| विषय | समाधि वाले बाबा का भोग |
|---|---|
| भोग | जलेबी |
| स्थान | मेहंदीपुर बालाजी स्थित समाधि वाले बाबा का मंदिर। |
| समय | दोपहर 12 बजे से 12:30 बजे तक |
| समर्पित | गणेशपुरी जी महाराज |

यदि समाधि वाले बाबा आपकी विनती प्रार्थना सुन लेते हैं तो आपका संकट निश्चित रूप से कट जाएगा। ऐसा माना जाता है कि मेहंदीपुर बालाजी में समाधि वाले बाबा जी की बात बालाजी, भैरव जी और प्रेतराज जी में से किसी भी दरबार में नहीं काटी जाती।
समाधि वाले बाबा यानि गणेशपुरी जी महाराज मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के सबसे प्रथम महंत रहे हैं। बालाजी महाराज की शक्तियों का विस्तार करने का श्रेय गणेशपुरी जी महाराज को ही जाता है।
समाधि वाले बाबा यानि गणेश पुरी जी महाराज की सेवा भक्ति से ही आज बालाजी महाराज की महिमा का इतना विस्तार हुआ है और प्रसिद्धि मिल पायी है।
यही एक खास कारण भी है कि आज भी बड़ी संख्या में भक्त समाधि वाले बाबा के स्थान पर जाकर श्रद्धापूर्वक जलेबी का भोग लगाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और श्रद्धा के साथ लगाया गया भोग बाबा तक अवश्य पहुँचता है।
यही वजह है कि अनेक भक्त मेहंदीपुर बालाजी की यात्रा के दौरान समाधि वाले बाबा के दर्शन और भोग को अपनी यात्रा का महत्वपूर्ण भाग मानते हैं।
जब भी आप स्वयं या मित्रों या परिवार के साथ बालाजी जायें सबसे पहला काम आपका वहां पहुंचने की दरख्वास्त लगाने का होना चाहिए।
दरख्वास्त क्या है और कैसे लगायी जाती है इसके लिए हमने पूर्व में एक पोस्ट लिखी है। अगर आपको दरख्वास्त लगानी नहीं आती है तो आप यह पोस्ट पढ़ें।
बहुत से भक्त बालाजी पहुंचने पर दरख्वास्त नहीं लगाते हैं उन्हें चाहिए कि वे वहां पहुंचकर दरख्वास्त जरूर लगाएं। यह वर्तमान में मात्र 51/- रुपये की लगती है।
दरख्वास्त लगाते समय मन ही मन प्रार्थना करें कि हे बालाजी महाराज मैं आपके दर पे कुशल मंगल आ गया हूं। मेरे संकट काटिये। मेरी समस्या का समाधान कीजिए। इसके बाद श्री राम जी के दरबार में जाइए और अपनी परेशानी वहां भी दोहराएं।
यदि आपने अभी तक श्री बालाजी महाराज के समक्ष अर्जी नहीं लगाई है, तो मेहंदीपुर बालाजी में अर्जी लगाने की पूरी विधि भी अवश्य जान लें।
दरख्वास्त लगाने के बाद श्रद्धापूर्वक श्री राम दरबार में अपने संकटों की मुक्ति और मनोकामना की प्रार्थना तथा उसके पश्चात समाधि वाले बाबा के स्थान पर जाना यहां आने वाले अनेक भक्तों की परंपरा मानी जाती है। इससे भक्त अपनी विनती क्रमबद्ध रूप से श्री बालाजी महाराज के दरबार में प्रस्तुत करता है और आगे की दर्शन और पूजा विधि को पूरी करता है।
कहां स्थित है समाधि स्थल
दरखास्त हो या अर्जी, लगाने के बाद आपको समाधि वाले बाबा के स्थान पर जाना चाहिए। पहले इस स्थान पर राम मंदिर के बगल से होकर जाना पड़ता था लेकिन अब मार्ग परिवर्तित कर दिया गया है। वर्तमान में नया रास्ता बालाजी मंदिर से आगे बढ़ते जाइए और बाई ओर से रास्ता मुड़ता है यहां समाधि वाले बाबा को जलेबी का भोग लगाया जाता है। वहां पर स्थित दुकानों से जलेबी का भोग खरीद का रख लेना चाहिए।
जलेबी का लगता है भोग
ऐसा माना जाता है कि समाधि वाले बाबा को जलेबी का भोग अत्यंत प्रिय है। यह जलेबी का भोग दुकान से मात्र दस रुपये में मिल जाता है।
समाधि वाले बाबा के स्थान पर जलेबी का भोग श्रद्धा के साथ अर्पित किया जाता है। जरूरी सलाह – परेशान व्यक्तियों को मन ही मन अपना सारा दुखड़ा इनके आगे बोल देना चाहिए और उसके बाद ‘श्री राम जय हनुमान” बोलते हुए भोग अर्पित करना चाहिए। भोग का महत्व उसकी मात्रा में नहीं, बल्कि श्रद्धा और सच्चे भाव में माना जाता है।
समाधि वाले बाबा का भोग का समय
आपको बता दें कि समाधि वाले बाबा को जलेबी का भोग अपरान्ह बारह से साढ़े बारह बजे तक लगता है। संकट वालों को समाधि वाले बाबा के स्थान पर जाकर 10 रुपये का जलेबी का भोग जरूर लगाना चाहिए।
समाधि वाले बाबा का भोग लगाने की विधि
भोग लगाने के बाद थोड़ी सी जलेबी निकालकर हाथ में रख लें। और इसको अपने सिर से सात बार वारने के बाद प्रेम और आस्था के साथ इसे उस स्थान पर रख दें जहां अन्य भक्तगण प्रसाद को वारने के बाद रख रहे हों।
नोट – एक महत्वपूर्ण बात, जो भोग आपने निकाला है इसे अब आप स्वयं ग्रहण करें। किसी अन्य को न खिलायें।
यदि आप घर पर भी श्रद्धापूर्वक श्री बालाजी महाराज को भोग अर्पित करना चाहते हैं, तो बालाजी महाराज का भोग या अज्ञारी कैसे लगाते हैं? यह विस्तृत जानकारी भी अवश्य पढ़ें।
भोग अर्पित करते समय मन को बिल्कुल शांत रखें, मानो आप सब बंधन अपने घर छोड़ आए हो और पूरी श्रद्धा के साथ बाबा का स्मरण करें। भोग की परंपरा के अनुसार प्रत्येक भोग की प्रक्रिया नियमपूर्वक करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या लापरवाही से बचे।
समाधि वाले बाबा की परिक्रमा
भोग की प्रक्रिया पूरी करने के बाद आपको समाधि वाले बाबा की सात परिक्रमा करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सात परिक्रमा करने से संकट निश्चित रूप से कट जाता है।
यहां की मान्यता के हिसाब से ध्यान करते समय मन को शांत रखते हुए अपनी प्रार्थना बाबा के चरणों में समर्पित करें। अनेक श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से किया गया ध्यान व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है और भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास को और अधिक मजबूती प्रदान करता है। इसलिए कुछ समय तक वहीं बैठकर बाबा का ध्यान लगाना भी इस परंपरा का खास भाग माना जाता है।
जिन लोगों की पेशी न खुल रही हो या संकट न कट पा रहा हो ऐसे लोगों को 10 रुपये की एक दरख्वास्त भी लगा देनी चाहिए।
यह लगाते समय बाबा से विनती करनी चाहिए कि बाबा हमारी पेशी खोल दीजिए और संकट काट दीजिए। दरख्वास्त में अपना पूरा नाम पता जरूर बोलें।
इसके बाद समाधि वाले बाबा के स्थान के पास कोई खाली जगह देखकर बैठ जायें और बाबा का ध्यान करें आपको निश्चित ही लाभ होगा। जिसकी पेशी नहीं खुली होगी उसकी पेशी भी खुलेगी, जिसके संकट कटने बाकी होंगे उनके बयान भी होंगे, मुक्ति भी मांगेंगे और संकट भी कटेंगे।
समाधि वाले बाबा का भोग लगाते समय सावधानियां
आपसे निवेदन है कि जब भी आप मेहंदीपुर बालाजी धाम जायें बाबा से विनती विनय करे और उनका भोग विधि विधान के साथ लगायें। अपनी इच्छा से कोई भोग न लगायें। किसी भी प्रकार का भोग ऐसे व्यक्ति से पूछ कर ही लगाएं जो बालाजी महाराज के सभी भोगों की जानकारी रखता हो।
कुछ भोग ऐसे होते हैं जिन्हें सामान्य सी जानकारी के साथ लगाया जा सकता है जैसे अर्जी, दरखास्त और सवामनी आदि।
लेकिन बाकि के भोग अपने महंत जी से पूछ कर ही लगाने चाहिए। कुछ लोग भंगी बाड़े का भोग बिना बताये ही लगा देते हैं या भैरो बाबा को मीठे पुए का भोग लगा देते हैं जो कि उन्हें स्वेच्छा से बिना किसी मार्गदर्शन के नहीं लगाने चाहिए।
बिना जानकारी के या गलत तरीके से लगाया गया भोग आपको परेशानी में डाल सकता है। आपका संकट आपको और ज्यादा परेशान भी कर सकता है।
हर प्रकार के भोग अपने महंत जी के मार्गदर्शन और सानिध्य में ही लगाने चाहिए। ये सभी भोग लगाने का आदेश बालाजी महाराज के दूत और शक्तियां देती हैं।
यह भी ध्यान रखें कि किसी अन्य व्यक्ति की देखा-देखी या आधी अधूरी जानकारी के आधार पर कोई भी धार्मिक प्रक्रिया नहीं करनी चाहिए। यदि किसी भोग, पूजा या विशेष अनुष्ठान के संबंध में संदेह हो, तो मंदिर के अधिकृत महंत अथवा जानकार व्यक्ति से जानकारी लेकर ही आगे की प्रक्रिया पूरी करें। इससे भोग विधिपूर्वक सम्पन्न होता है।
बाबा के भोग का महत्व
समाधि का भोग यहां की प्रमुख परंपराओं में से एक माना जाता है। गणेशपुरी जी महाराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और अपनी विनती प्रस्तुत करने के लिए भक्त जलेबी का भोग अर्पित करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक और नियमपूर्वक लगाया गया भोग भक्त को मानसिक शांति, आध्यात्मिक बल तथा बाबा की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है।
समाधि वाले बाबा का भोग केवल परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है। अनेक भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद उन्हे कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए भी बाबा को जलेबी का भोग अर्पित करते हैं। इसी प्रकार मनोकामना पूर्ण होने पर अनेक भक्त श्री बालाजी महाराज को सवामणि प्रसाद क्यों चढ़ाया जाता है, इसकी परंपरा का भी पालन करते हैं।
इस परंपरा का उद्देश्य केवल प्रसाद चढ़ाना ही नहीं, बल्कि भगवान और गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था प्रकट करना भी है।
मेहंदीपुर बालाजी धाम आने वाले भक्तों के लिए समाधि वाले बाबा का स्थान विशेष महत्व रखता है। इसलिए यहां भोग लगाते समय श्रद्धा और विश्वास बनाए रखना बहुत जरूरी माना जाता है।
समाधि वाले बाबा के भोग से जुड़े प्रश्न
समाधि वाले बाबा को कौन सा भोग लगाया जाता है?
समाधि वाले बाबा को परंपरागत रूप से सिर्फ जलेबी का भोग लगाया जाता है।
समाधि पर भोग किस समय लगाया जाता है?
मंदिर की वर्तमान व्यवस्था के अनुसार जलेबी का भोग दोपहर 12 बजे से 12:30 बजे के बीच लगाया जाता है।
क्या भोग लगाने के बाद परिक्रमा करनी चाहिए?
हाँ, भक्त भोग अर्पित करने के बाद श्रद्धापूर्वक सात परिक्रमा भी करते हैं।
क्या समाधि वाले बाबा का भोग कोई भी श्रद्धालु लगा सकता है?
हाँ, श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए कोई भी श्रद्धालु समाधि वाले बाबा को जलेबी का भोग अर्पित कर सकता है। यदि भोग को लेकर संशय हो, तो मंदिर के महंत या जानकार व्यक्ति से मार्गदर्शन लेना उचित माना जाता है।
समाधि वाले बाबा को जलेबी का भोग ही क्यों लगाया जाता है?
मेहंदीपुर बालाजी की प्रचलित परंपरा के अनुसार समाधि वाले बाबा को जलेबी का भोग अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु इसी परंपरा का पालन करते हुए बाबा के चरणों में जलेबी का प्रसाद चढ़ाते हैं।
क्या समाधि वाले बाबा का भोग घर पर लगाया जा सकता है?
नहीं, यह भोग मुख्य रूप से मेहंदीपुर बालाजी स्थित समाधि वाले बाबा के स्थान पर अर्पित किया जाता है।
निष्कर्ष
उम्मीद करते हैं कि अब आपको समाधि वाले बाबा का भोग, उसका समय, भोग लगाने की विधि, परिक्रमा तथा इससे जुड़ी आवश्यक सावधानियों की पूरी जानकारी मिल गई होगी। मेहंदीपुर बालाजी धाम की प्रत्येक परंपरा का अपना विशेष धार्मिक महत्व है, इसलिए किसी भी प्रकार का भोग श्रद्धा, नियम और विधि के अनुसार ही अर्पित करना चाहिए।
यदि नए हैं और आप पहली बार मेहंदीपुर बालाजी जा रहे हैं, तो वहां की परंपराओं का सम्मान करें, मंदिर के नियमों का पालन करें तथा आवश्यकता होने पर वहां के महंत जी या जानकार व्यक्ति से मार्गदर्शन अवश्य लें। यही श्रद्धा और मर्यादा इस पावन धाम की सबसे बड़ी पहचान है।
यदि आप मेहंदीपुर बालाजी धाम की पूजा, अर्जी, दरख्वास्त, भोग, सवामणि तथा अन्य सभी महत्वपूर्ण नियम एक ही स्थान पर पढ़ना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी के नियम अवश्य पढ़ें।
॥ जय श्री बालाजी महाराज ॥
॥ जय श्री प्रेतराज सरकार ॥
॥ जय श्री भैरव बाबा ॥





