होम Mehandipur Balaji Mandir – Janiye Yahan Ki Poori Jankari Hindi Me कैसे करने जाये दर्शन मेहंदीपुर बालाजी मंदिर मे || Darshan Mehandipur Balaji || पहली बार मेहंदीपुर बालाजी जा रहे हैं? यात्रा से पहले ये जरूरी...

पहली बार मेहंदीपुर बालाजी जा रहे हैं? यात्रा से पहले ये जरूरी टिप्स जान लें

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Mehandipur Balaji Tips For First Time Visitors In Hindi | पहली बार मेहंदीपुर बालाजी जाने वालों के लिए कुछ जरूरी टिप्स

नमस्कार मित्रों, श्रीराम दूत हनुमान जी के बाल रूप के कारण विख्यात राजस्थान के दौसा जिले मे मेहंदीपुर बालाजी महाराज के दर्शनों के लिए आप लोग एक या इससे अधिक बार आप लोग यहां आये होंगे।

हर तीर्थ स्थान की भांति आपने कुछ अच्छे और कटु अनुभव भी किए होंगे। कुछ अनुभव ऐसे अवश्य होंगे जिनसे आपने कुछ सीख ली होगी ताकि अगली बार जब भी कभी आप यहाँ आए तो पिछले अनुभव का आप इस प्रकार उपयोग करें ताकि आपकी यात्रा सहज और सुगम हो सके।

इस पोस्ट के द्वारा हम पहली बार मेहंदीपुर बालाजी जाने वालों के लिए कुछ जरूरी टिप्स बताने जा रहे हैं ताकि आपको अतिरिक्त परेशानी न उठानी पड़े और आप सहजता से दर्शन कर पाए।

यह स्थान आगरा जयपुर मार्ग पर स्थित है और देश की राजधानी दिल्ली से यहां की दूरी 250 किलोमीटर और दौसा से 50 किलोमीटर है।

मेहंदीपुर बालाजी का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन

यहां का Mehandipur Balaji Nearest Railway Station – Bandikui है और Station Code – BKI है। यदि आप मेंहदीपुर बालाजी के नज़दीकी रेलवे स्टेशन के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो हमारी यह पोस्ट पढ़ें।

यदि अर्जी लगाने जा रहे हैं तो यह बात जरूर जानें

अगर आप मेंहदीपुर बालाजी मंदिर में अर्जी लगाना चाहते हैं तो उसका समय सुबह 11:30 बजे तक का ही है। अगर अर्जी लगाने आए हैं तो पहले ही चेक कर लें कि उस दिन एकादशी की तिथि न हो या सूर्य ग्रहण या चन्द्र ग्रहण न पड़ रहा हो क्योंकि इन दोनों अर्जी नहीं लगती है।

मंदिर खुलने और दर्शन का समय

भक्तों के लिए मंदिर प्रातः 06:00 बजे खुल जाता है जो कि रात्रि 09:00 बजे तक खुला रहता है। दिन में लगभग आधे घंटे के लिए दर्शन रोक दिए जाते हैं जिसका समय 11:30 बजे से 12:00 बजे तक का है। इस बीच बालाजी महाराज को भोग लगाया जाता है।

मंगलवार और शनिवार को यात्रा की योजना कैसे बनाएं?

मंगलवार और शनिवार को बहुत ही अधिक भीड़ का सामना आपको करना पड़ सकता है इसलिए यदि आप महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ जा रहे हैं तो एक बार जरूर सोच ले। बेहतर होगा कि आप अन्य दिन का चुनाव करे ताकि अपेक्षाकृत कम असुविधा का सामना करना पड़े। मेहंदीपुर बालाजी जाने से पहले जरूरी सामान की checklist भी देख लें।

सामान्य दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय

अगर आप सिर्फ दर्शन करना चाहते हैं तो आपके लिए सबसे उपयुक्त समय अपराह्न 1 बजे से 04:30 बजे का है क्योंकि सामान्यतः इस बीच मंदिर में कम भीड़ होती है।

उपचार हेतु आने वाले श्रद्धालुओं के लिए

वह लोग जो संकट से पीड़ित हैं और उपचार हेतु यहां आए हैं उनके लिए आरती के छींटे का समय सुबह शाम 6 बजे और प्रेतराज सरकार जी की कचहरी का समय दिन में 02:00 बजे से 04:00 बजे का है।

मंदिर में प्रवेश से पहले

जूते चप्पल पहन कर मंदिर में प्रवेश न करें। उचित स्थान पर हाल में इन्हें उतार दे या फिर प्रसाद की दुकान पर भी उतार सकते हैं और दुकानदार को बता दे।

खराब सड़क

कुछ स्थानों पर सड़क और आसपास की व्यवस्था आपकी अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सकती, इसलिए यात्रा के दौरान थोड़ा धैर्य और तैयारी रखें।

जेबकतरे

जेबकतरो से सावधान रहने की सतर्कता बरतनी अति आवश्यक है क्योंकि यहां भीड़ ज्यादा रहने के कारण जेब आदि काटने की वारदातों में बढ़ोतरी हो रही है। पहली बार मेहंदीपुर बालाजी जाने वालों के लिए यह जानना आवश्यक है।

यदि आप मेंहदीपुर बालाजी यात्रा की गलतियां विस्तार से जानना चाहते हैं तो हमारी यह पोस्ट अवश्य पढ़ें।

शाकाहारी भोजन

यहां सभी होटल, भोजनालय और ढाबे में भोजन पूर्णतः शाकाहारी मिलता है। प्याज लहसुन आदि भी सब्ज़ी और दाल में नहीं डाली जाती। तीर्थ की शुद्धता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है।

यदि समय हो तो आसपास के इन स्थानों पर भी जा सकते हैं।

जयपुर यहां से करीब 100 किलोमीटर दूर है। भरतपुर की bird santuary यहां से मात्र एक से डेढ़ घंटे की दूरी पर स्थित है। मथुरा, वृंदावन आदि भी पास ही है और आसानी से जाया जा सकता है।

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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