कजरी तीज, बूढ़ी तीज, बहुला चौथ और गूंगा पंचमी (भाई – भिन्ना) की जानकारी – भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज (kajri teej) मनाई जाती है। यह तीज खासतौर से बनारस और मिर्जापुर जिले मे एक विशेष उत्सव के रूप में मनाई जाती है। कजरी तीज प्रतिद्वंदिता भी होती है। प्रायः लोग नावों पर चढ़कर कजरी गीत गाते हैं। यह वर्षा ऋतु का एक विशेष राग है।

व्रज के मल्हारों की भांति मिर्जापुर तथा बनारस का यह प्रमुख वर्षा गान माना जाता है। वैसे तो यह समस्त भारत वर्ष में सभी लोग मनाते हैं और इस दिन लोग झूला डालकर झूलते भी हैं। और घरों में तरह तरह के पकवान भी बनाये जाते हैं।
ग्रामीण भारत में इसे ‘तीजा’ भी कहते हैं। हिंडोले (झूले) पर मचलती हुई बहुएं और ग्रामीण बालिकाएं इस विरह गीत (कजरी) को गा – गाकर एक अपूर्व उत्कंठा मन में भर देती है। वर्षा ऋतु में यह गीत पपीहा, बादलों तथा पुरवा हवाओं की झकझोर मे बहुत प्रिय लगता है।
बूढ़ी तीज (Boodhi Teej)
बूढ़ी तीज भादों के महीने की तीज होती है। इस दिन व्रत रखकर गायों की पूजा की जाती है। सात गायों के लिए सात आटे की लोई बनाकर उन्हें खिलाते हैं। और फिर खुद भोजन करते हैं। बहुएं चीनी और रुपयों का बायना सासू जी को पैर छूकर देती हैं।
बहुला चौथ (Bahula Chauth)
बहुला चौथ भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की चौथ को व्रत करके मनाई जाती है। इस व्रत में पुत्रों की रक्षा और मंगल कामना के लिए माताएं व्रत करती हैं। इस दिन केवल गेहूं – चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
गौ के दूध पर उसके बछड़े का अधिकार माना गया है। गाय तथा सिंह की मिट्टी की मूर्ति बनाकर पूजन करने की प्रथा चली आ रही है।
गूंगा पंचमी (भाई – भिन्ना) /Goonga Panchmi (Bhai-Bhinna)
गूंगा पंचमी भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा का विधान है। इस दिन सबसे पहले कटोरी मे दूध लेकर नागों को पिलाना चाहिए। इस वर्ष नाग पंचमी का त्योहार 17 अगस्त 2026 को मनाया जायेगा।
फिर दीवार में किसी एक जगह गेरू से पोत कर और थोड़े से दूध में कोयला पीसकर चौकोर घर जैसा बनाकर उसमे पांच सर्प बनाते हैं। इसके बाद उन नागों को जल, कच्चा दूध, रोली, चावल, बाजरा, आटा, घी और चीनी मिलाकर चढ़ाये और यथा शक्ति दक्षिणा भी चढ़ाएं।
इस व्रत के करने से स्त्रियां सौभाग्यवती होती हैं। पति की हर विपत्तियों से रक्षा होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। कई लोगों के यहां बहनें पूजन करके भाईयों के टीका लगाती हैं, वह उन्हें मिठाई आदि देती हैं और स्वयं चना और चावल का बना हुआ बासी भोजन उस दिन करती हैं। इसके बदले में भाई यथा शक्ति द्रव्य अपनी बहनों को उपहार के रूप में देते हैं।
कजरी तीज, बूढ़ी तीज, बहुला चौथ एवं गूंगा पंचमी का महत्व
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आने वाले कजरी तीज, बूढ़ी तीज, बहुला चौथ और गूंगा पंचमी के पर्व भारतीय लोक परंपराओं और धार्मिक आस्था से जुड़े हुए हैं। इन पर्वों पर अलग-अलग क्षेत्रों में विशेष रीति-रिवाजों के साथ पूजा एवं व्रत किए जाते हैं। इनका उद्देश्य परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की रक्षा, सौभाग्य तथा मंगलकामना माना जाता है।
इन पर्वों के प्रमुख नियम
- कजरी तीज पर महिलाएं व्रत रखती हैं, कजरी गीत गाती हैं तथा झूला झूलने की परंपरा निभाती हैं।
- बूढ़ी तीज पर गाय की पूजा करके सात आटे की लोइयां खिलाई जाती हैं।
- बहुला चौथ के दिन गेहूं और चावल का सेवन नहीं किया जाता तथा गाय एवं बछड़े की पूजा की जाती है।
- गूंगा पंचमी पर नाग देवता का पूजन कर दूध, जल, रोली, चावल आदि अर्पित किए जाते हैं।
- पूजन के दौरान श्रद्धा, संयम एवं सात्विकता का पालन करना शुभ माना जाता है।
इन व्रतों के लाभ
- सौभाग्य एवं पारिवारिक सुख की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है।
- संतान की रक्षा एवं मंगलकामना की जाती है।
- नाग देवता एवं गौ माता की कृपा प्राप्त होने का विश्वास किया जाता है।
- घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
- लोक परंपराओं एवं धार्मिक संस्कृति का संरक्षण होता है।
यदि आप भाद्रपद मास के अन्य प्रमुख व्रत एवं पर्वों की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो हल षष्ठी (हर छठ), चन्द्र छठ, ऋषि पंचमी तथा राधा अष्टमी के बारे में भी पढ़ सकते हैं।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
कजरी तीज कब मनाई जाती है?
कजरी तीज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है।
बहुला चौथ का व्रत किस लिए रखा जाता है?
यह व्रत मुख्य रूप से पुत्रों की रक्षा एवं उनके मंगल की कामना के लिए रखा जाता है।
गूंगा पंचमी पर किस देवता की पूजा होती है?
गूंगा पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है।
बूढ़ी तीज पर क्या विशेष किया जाता है?
इस दिन गाय की पूजा करके सात आटे की लोइयां खिलाई जाती हैं तथा परंपरा अनुसार बायना दिया जाता है।
निष्कर्ष
कजरी तीज, बूढ़ी तीज, बहुला चौथ और गूंगा पंचमी भारतीय संस्कृति एवं लोक परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण पर्व हैं। श्रद्धा एवं विधि-विधान से इन पर्वों का पालन करने से सुख, सौभाग्य, संतान की रक्षा तथा पारिवारिक समृद्धि की धार्मिक मान्यता है। यदि आप अन्य प्रमुख व्रतों एवं त्योहारों की जानकारी भी प्राप्त करना चाहते हैं, तो व्रत एवं पूजा श्रेणी के अन्य लेख भी अवश्य पढ़ें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह आर्टिकल धार्मिक ग्रंथों, लोक मान्यताओं एवं प्रचलित परंपराओं के आधार पर तैयार किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों में कजरी तीज, बूढ़ी तीज, बहुला चौथ एवं गूंगा पंचमी के रीति-रिवाजों में भिन्नता हो सकती है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान का पालन अपने कुलाचार, पारिवारिक परंपरा अथवा योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में करें।





