आज जिस विषय पर हम चर्चा करेंगे वो है कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष क्या है? सभी शुभ कार्य शुक्ल पक्ष मे किए जाते हैं।
किसी भी प्रकार का कार्य करने से आपके जीवन मे प्रगति आती है या आप किसी भी तरह का उपाय करते हैं या पूजा करते हैं या रत्न धारण भी करते हैं या फिर ज्योतिषीय सलाह से विवाह हेतु लड़का या लड़की देखने जाते हैं तो शुक्ल पक्ष को ही महत्व दिया जाता है।

वहीं कृष्ण पक्ष जो कि भगवान् श्री कृष्ण जी के जन्म के साथ शुरू हुआ था।
परन्तु यही कहा जाता है कि कृष्ण पक्ष चूंकि हम मानव हैं तो हमारे लिए यह उतना उत्तम नहीं होता है जितना कि यह होना चाहिए।
कृष्ण पक्ष मे बहुत से कार्यों पर रोक लगाई जाती है।
हमारे बड़े बूढ़ों द्वारा भी कुछ ऐसी ही सलाह दी जाती है जैसे अगर नयी दुकान या कारोबार शुरू करना हो, नया वाहन खरीदने जा रहे हो या फिर शरीर पर कोई रत्न धारण करना हो तो वो कृष्ण पक्ष मे नही करना चाहिए।
सभी जानते हैं कि एक माह मे 30 दिन होते हैं।
ये जो 30 दिन होते हैं इन्हें हिन्दू पंचांग के हिसाब से दो भागों मे विभाजित किया गया है जो कि दो पक्ष होते हैं। इन्हीं दो पक्षों को कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष कहा जाता है।
जब आपको इसके बारे में नहीं पता चल पाता है या आपके पास हिन्दी पंचांग या कैलेंडर नहीं होता है तो सिर्फ और सिर्फ चन्द्रमा की घटने की कलाओं और बड़ने के आधार पर इनका अनुमान बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है।
15 दिनों मे पूनम यानि पूर्णिमा आती है और इस दिन चण्द्रमा हमे अपने पूरे रूप आकार मे दिखाई देता है तभी इसे अंग्रेजी मे full Moon कहते हैं ।
धीरे धीरे नित प्रतिदिन अमावस्या से बढ़ता हुआ चांद पूर्णिमा आते आते अपने पूर्ण आकार में आ जाता है इस अवधि को शुक्ल पक्ष कहते हैं।
अमावस्या के अगले दिन से ही शुक्ल पक्ष का आरम्भ हो जाता है।
चंद्रमा अपने बल को मजबूत करता है और यह हमारे मन का स्वामी होता है इसी कारण से सभी लोग शुभ कार्यो का निष्पादन शुक्ल पक्ष मे करते हैं।
सभी ज्योतिषी सलाह और शुभ कार्यों को करने की अनुमति भी इसी शुक्ल पक्ष मे करने के लिए दी जाती है।
अब हम बात करेंगे कृष्ण पक्ष की। जब पूनम यानि पूर्णिमा होती है वो शुक्ल पक्ष का ही दिन कहलाता है परन्तु इसके अगले दिन से जब चंद्र की कलाएं धीरे-धीरे घटने लगती हैं अर्थात् चंद्रमा अपने आकार को धीरे-धीरे घटाने लगता है इसे कृष्ण पक्ष कहा जाता है यानि चंद्रमा का बल कमजोर होने लगता है।
इन दिनों रातें अंधेरी होने लगती है और हमारा मन विचलित होने लगता है।
चूंकि, जैसे आपको बताया कि चन्द्रमा हमारे मन का कारक होता है इसलिए कृष्ण पक्ष मे शुभ कार्यो को करने का परहेज किया जाता है।
कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष मे से शुक्ल पक्ष को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
शुक्ल पक्ष मे शुरू किया गया शुभ कार्य आपको अंत तक लेकर जाता है, शुभता प्रदान करता है और सफलता दिलाता है।
अगर आप कोई ज्योतिषीय रत्न को धारण करते हैं तो इसी समय को श्रेष्ठ कहा जाता है क्योंकि आपका बल और मन दोनों ही मजबूत होते हैं क्योंकि चंद्रमा आपकी मानसिक बीमारियों और चिंताओं को दूर करता है।
आपको बस इतना ध्यान देना होता है कि चंद्रमा की कलाएं बढ़ रही है या घट रही है।
इसी बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कौन सा पक्ष चल रहा है कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष ।
शुक्ल पक्ष के बहुत सारे उपाय भी हमारे जीवन में समृद्धि का वास करते हैं।
आप आर्थिक समस्याओं से छुटकारा चाहते हैं या फिर आप बहुत परेशान हैं धन को लेकर तो आपको शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से एक उपाय करना है जो कि 21 शुक्रवार तक लगातार करना है।
9 वर्ष से कम आयु की पांच कन्याओं को खीर और मिश्री का प्रसाद दे। जरूरी नहीं कि आप ये अपने ही घर पर दे आप इसे बाहर जाकर या मंदिर मे भी दे सकते हैं।
कन्याओं को खीर और मिश्री खिलाने से माता लक्ष्मी की कृपा आती है और समृद्धि आती है।
अगर आप काफी परेशान रहते हैं तो आप शुक्ल पक्ष के रविवार से एक तांबे के पात्र में जल भरकर उसमे थोड़ा सा लाल चंदन मिला दे।
इस पात्र को रात्रि में अपने सिरहाने रखकर सो जाए तथा सुबह इस जल को तुलसी के पौधे पर चढ़ा दे।
धीरे-धीरे जीवन की सारी परेशानियां समाप्त होकर आपके जीवन मे धन का आगमन शुरू करेंगी।
अगर आप अपने व्यापार को बढ़ाना चाहते हैं तो शुक्ल पक्ष के समय को बहुत ही उत्तम माना जाता है।
यदि आपको लगता है कि आपके व्यापार या फैक्ट्री मे बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है तो आपको क्या करना है दरवाजे के बाहर थोड़ा सा गेहूं का आटा रखकर छोड़ देंगे।
लेकिन ऐसा करते हुए कोई आपको ना देख पाए। बस यही एक नियम है।
यह उपाय आपको शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से शुरू करना है और लगातार करते रहे जितने भी गुरुवार इसे आप कर सकते हैं।
इससे जीवन मे खुशहाली आएगी, धन का आगमन होगा, व्यापार मे वृद्धि होगी।
इससे बंद हुई फैक्ट्री भी दुबारा चालू हो जाती है। यह एक छोटा सा लेकिन बहुत ही कारगर उपाय है।
अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान के पूजा घर में श्री यंत्र जरूर रखे क्योंकि यह लक्ष्मी जी का ही स्वरूप माना जाता है।
शुक्ल पक्ष की शुक्रवार की रात को काले चने भिगोकर रख दे और दूसरे ही दिन शनिवार को इसे सरसों के तेल मे बना ले और इसे तीन हिस्सों में बांट ले।
एक हिस्सा घोड़े या भैंस को खिला दे। दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे और तीसरा हिस्सा सिर से घड़ी की उल्टी सुई की तरफ यानि anti clock wise तीन बार घुमा कर किसी चौराहे पर रख देना है।
यह प्रयोग चालीस दिनों तक करे। इससे आप देखेंगे कि आपको कारोबार में लाभ होना शुरू होने लगेगा।
अगर नौकरी ना टिकती हो या नौकरी में परेशानी आती हो, झगड़े बहुत होते हो तो शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को मीठी बूंदी का प्रसाद लेकर मंदिर में जाए और पंडित जी को दे।
पंडित जी से इसका प्रसाद लेकर थोड़ी बूंदी वही बच्चों मे लड़कियों को बांट दे।
ऐसा चार मंगलवार तक लगातार करने पर आपके जीवन मे नौकरी का शुभ समाचार आपको प्राप्त होगा तथा आपके कार्य बनने लगेंगे और मनचाही नौकरी प्राप्त होगी।
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