Holi Ke Badkulle होली पर्व से जुड़ी एक प्राचीन परंपरा का हिस्सा हैं। होलिका दहन से पहले गाय के गोबर से विभिन्न प्रकार के बड़कुल्ले और खिलौने बनाए जाते हैं तथा उनकी मालाएं तैयार की जाती हैं। आइए जानते हैं होली के बड़कुल्ले क्या होते हैं, इन्हें कब बनाया जाता है और इनका धार्मिक महत्व क्या माना जाता है।
होली के बड़कुल्ले हिन्दू धर्म की पारंपरिक लोक परंपराओं से जुड़े हुए हैं। यदि आप अन्य प्रमुख हिन्दू पर्वों, उनकी परंपराओं और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो पर्व एवं त्योहार लेख भी पढ़ सकते हैं।
| विषय | होली के बड़कुल्ले |
|---|---|
| संबंधित पर्व | होली एवं होलिका दहन |
| निर्माण सामग्री | गाय का गोबर |
| बनाने का समय | होलिका दहन से लगभग 15 दिन पहले |
| विशेष उपयोग | माला बनाकर होलिका पूजन में उपयोग |

प्रतिवर्ष होली के दिन से पहले होलिका दहन की परम्परा रही है। इस दिन लोग शाम के समय जहां होली जलायी जाती है वहां पूजन करने जाते हैं और अपने अपने घरों से गोबर की मालाएं लेकर जाते हैं। ये गोबर की माला गोबर के बड़कुल्लों से बनाई जाती है। इन्हें बरूए (Baruae) भी कहा जाता है।
Holi Ke Badkulle Kab Banaye Jate Hain?
यह होली के बड़कुल्ले होली दहन से पंद्रह दिन पहले बनाए जाते हैं। पंद्रह दिन पहले कोई भी शुभ दिन देख कर बड़कुल्ले बनाए जा सकते हैं। ये बड़कुल्ले पहले सात की संख्या में बनाए जाते हैं। बाद में आप कितने भी बना सकते हैं।
होली के कुछ दिनों बाद बसोड़ा (शीतला अष्टमी) का पर्व मनाया जाता है, जिसमें शीतला माता की पूजा के दौरान भी होली के समय तैयार किए गए बड़कुल्लों का विशेष महत्व माना जाता है।
Holi Ke Badkulle Kya Hote Hain?
गाय के गोबर से नारियल, पान, पयावड़ी, पीड़ा, पारा, चकला, बेलन, तवा आदि कई तरह के खिलौने बनाए जाते हैं।
Falgun Shukla Paksha Ekadashi Par Badkulle Mein Kya Banate Hain?
फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को गाय के गोबर की एक तलवार, पांच ढाल, एक चांद, एक सूरज, एक नारियल, एक रोटी, एक पान और एक होलिका माता बनाए जाते हैं। साथ ही तेरह सुपारी भी गोबर की बनाई जाती है।
- अगर परिवार में बेटा हो या पुत्र का विवाह होने जा रहा हो तो इस दिन उद्यापन करना चाहिए।
- इसके बाद बड़कुल्लों को माला में पिरो देना चाहिए।
- माला में सभी तरह के खिलौने, ढाल, तलवार, होलिका माई पिरो लें।
Holi Ke Badkulle Ki Mala Kaise Banaye?
बड़कुल्लों की माला की संख्या कितनी होनी चाहिए यह जानते हैं।
- एक माला पितरों की।
- एक हनुमान जी के नाम की ।
- एक घर की।
- एक शीतला माई की।
- घर में जितने आदमी और लड़के हों उतनी।
प्रत्येक माला में आठ आठ की संख्या में बड़कुल्ले, एक पान, बड़ी सुपारी और नारियल पिरोना चाहिए।
अगर उद्यापन किया गया है तो तेरह सुपारी माला में पिरो लीजिए और रात्रि में होली के गीत अवश्य गाने चाहिए।
होली के बड़कुल्लों का महत्व
होली के बड़कुल्ले भारतीय लोक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हुए हैं। होलिका दहन से पूर्व इन्हें बनाकर माला तैयार की जाती है और पूजन में उपयोग किया जाता है। यह परंपरा परिवार की मंगलकामना, पूर्वजों के स्मरण और धार्मिक आस्था का प्रतीक मानी जाती है।
होली के बड़कुल्लों से जुड़े प्रश्न
होली के बड़कुल्ले कब बनाए जाते हैं?
आमतौर पर होलिका दहन से लगभग 15 दिन पहले शुभ मुहूर्त में बड़कुल्ले बनाए जाते हैं।
होली के बड़कुल्ले किससे बनाए जाते हैं?
बड़कुल्ले मुख्य रूप से गाय के गोबर से बनाए जाते हैं।
बड़कुल्लों की माला में क्या-क्या पिरोया जाता है?
माला में बड़कुल्ले, पान, सुपारी, नारियल तथा अन्य पारंपरिक आकृतियां पिरोई जाती हैं।





