आस माता की कहानी, व्रत, पूजा और उद्यापन (Aas Mata Ki Kahani, Vrat, Puja, Udyapan) – आस माता का व्रत (Aas Mata Ka Vrat) महिलाओं को हिन्दू कैलेंडर के फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर अष्टमी तिथि तक किसी भी दिन देखकर एक दिन कर लेना चाहिए। आइए जानते हैं कि आस माता का व्रत कैसे करना चाहिए।
आस माता का व्रत कैसे करें?
- यह व्रत फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा से अष्टमी तिथि के बीच किसी भी दिन अपनी सुविधानुसार रखें।
- व्रत के दिन आस माता की कहानी (Aas Mata Ki Kahani) जरूर सुननी चाहिए।
- एक लकड़ी का पटला लें और उस पर एक जल का लोटा रखें।
- उसी लोटे पर रोली से एक सतिया यानि स्वस्तिक बनायें।
- अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
- सीधे हाथ में गेहूं के सात दाने लेकर आस माता की कहानी (Aas Mata Ki Kahani) सुनें।
- बायना निकाले जिसमें सूजी का हलवा, सात पूरी और रुपये हों।
- यह बायना अपनी सास को देना चाहिए और देते समय उनके चरण स्पर्श अवश्य करें। बाद में स्वयं जीम लें।
✔️नोट :-
ऐसा माना जाता है कि यदि किसी के घर पुत्र का जन्म हो या उसकी शादी होने जा रही हो तो आस माता का उद्यापन करना चाहिए। इसमें सात जगह चार चार पूरी और हलवा रखना चाहिए।
उसके उपर रुपये रखकर अपनी सास के पैर छूकर देना चाहिए।
आस माता व्रत की कहानी (Aas Mata Ki Kahani In Hindi)
एक आलसी था। वह जुआ खेला करता था और अनेक व्यसनों में लिप्त रहता था। जब भी कभी वह जुए में हारता या जीतता था ब्राह्मणों को अवश्य भोज कराता था।

एक दिन उसकी भाभियों ने कहा कि तुम तो हारो या जीतो दोनों स्थिति में ब्राह्मण जिमाते हो। ऐसा कब तक चलेगा।
यह कहकर भाभियों ने उसे घर से निकाल दिया। वह घर से निकाल दिया गया तो वह शहर चला गया और आस माता की पूजा (Aas Mata Ki Puja) करने बैठ गया।
तभी एक खबर पूरे शहर में आग की तरह फैल गई कि एक जुए का बहुत अच्छा खिलाड़ी शहर में आया है।
वहां के राजा तक भी यह खबर पहुंची और राजा उसके साथ जुआ खेलने जा पहुंचा। जुआ खेलते खेलते राजा अपना सारा राज पाट जुए में हार गया।
आलसी ने तुरंत राज पाट पर कब्जा कर लिया और स्वयं राजा बन बैठा। उधर आलसी की भाभियों के घर में अन्न की कमी हो गई थी तो वो अपने देवर को ढूंढने निकल पड़ी।
ढूंढते ढूंढते भाभियां शहर पहुंच गईं। वहां पहुंचकर उन्हें सुनने को मिला कि एक जुआरी जुए में राजा से जीत गया और स्वयं राजा बन बैठा।
सभी भाभी उसे देखने पहुंच गई। वहां उसकी माँ ने कहा कि मेरा बेटा भी जुआ खेलता है और हमने उसे घर से निकाल दिया था वो भी यहीं जुआ खेला करता था।
वह बोला कि मां मैं ही तुम्हारा बेटा हूं, तुम्हारी करनी तुम्हारे साथ और मेरी करनी मेरे साथ। तब उन लोगों ने अपने घर जाकर आस माता का उद्यापन करा दिया और सुख से राज्य करने लगा।
हे आस माता जैसा आलसी को राज पाट दिया वैसे सबको देना।











