भगवान क्यों नहीं दिखते जबकि भूत तो दिखते हैं ?

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क्या आपने कभी सोचा है कि भूत तो दिखते हैं, लेकिन भगवान क्यों नहीं दिखते? यह प्रश्न बहुत से लोगों के मन में आता है। कुछ लोग इसे आस्था से जोड़ते हैं, तो कुछ विज्ञान के नजरिए से समझने की कोशिश करते हैं।

इस पोस्ट में इसी विषय पर एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है, जिसमें प्रेत, देवता और भगवान के स्वरूप को हिंदू धार्मिक मान्यताओं के आधार पर समझाने का प्रयास किया गया है। आइए जानते हैं कि इस विषय में क्या बताया जाता है।

ऐसा क्यों है? यह एक ऐसा logic है जिसे समझने मे विज्ञान भी कामयाब नहीं हो पाया है।

विषय जानकारी
मुख्य प्रश्न भूत तो दिखते हैं, लेकिन भगवान क्यों नहीं दिखते?
आधार हिंदू धार्मिक मान्यताओं पर आधारित व्याख्या
मुख्य विषय प्रेत योनि, देव योनि और भगवान के दिव्य स्वरूप की चर्चा
क्या जानेंगे भूत, देवता और भगवान के बारे में प्रस्तुत आध्यात्मिक दृष्टिकोण

भूत दिखते हैं पर भगवान् क्यों नहीं

भूत तो दिखते हैं लेकिन भगवान क्यों नहीं दिखते?

धीरे धीरे हिन्दू धर्म मे लिखी हर बात NASA समेत यूरोप के सभी वैज्ञानिकों के सामने सही साबित होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है।

और कई secular लोग ये बात अपने गले उतारने मे दिक्कत हो रही है कि अभी तक जिसे पाखण्ड अंधविश्वास आदि का नाम देकर मॉडर्न बनाने के लिए पश्चिमी सभ्यता का अंधाधुंध अनुकरण कर रहे थे।

वही पश्चिमी सभ्यता वाले अपनी कर्मो से उपजी हुई दुनिया भर की समस्या से आजिज़ आ कर हमारे परम आदरणीय हिन्दू धर्म के आदर्शों को तेजी से अपना रहे हैं।

कई लोगों को पता ही नहीं होगा कि विश्व के सबसे महंगे hollywood के हीरो और हिरोइन बहुत पहले ही हिन्दू धर्म को अपनाकर काफी सुखी और तरोताजा महसूस कर रहे हैं।

जबकि भारत वर्ष के कई हिन्दुओं का कहना है कि उन्हें तो हिन्दू धर्म मे कोई भी मजा नहीं आता है या कहें हिन्दू धर्म मे जन्म लेकर कोई भी बात वो नहीं है जो दूसरे धर्म में है।

तो वो इस वजह से क्योंकि उन्होंने कभी भी यह जानने की कोशिश नहीं की है कि हिन्दू धर्म आखिर है क्या?

हिन्दू धर्म का सबसे पहला सिद्धांत है कि कर्मो की पवित्रता से विचारों की पवित्रता को पैदा करना। जिसका की आज के युग में भी घोर अभाव है।

विदेशी जो पहले मनमाने नियम कानून तरीके से लाइफ इन्जॉय करने की कोशिश करते रहे हैं but बदले मे जिन्हें सिर्फ बैचेनी ही हाथ लगी है।

दुनिया भर की बीमारी जो आज तक ठीक नहीं हो पायी थी वो हमारे हिन्दू धर्म मे आने के बाद उन्हें लगने लगा कि ये ठीक हो सकती है and उनकी बीमारी ठीक भी हुई।

उन्होने हिन्दू धर्म के आदर्शों को समझा and उसे अपने जीवन में उतारा तो धीरे-धीरे उनका खोया हुआ सुख सन्तोष उन्हें वापस मिलने लगा।

देवता और भगवान् क्यों नहीं दिखते?

हमारे हिन्दू धर्म मे बहुत अच्छे से प्रेत योनि पिशाच योनि और देवत्व योनि यानि जो देवता योनि है उन्हें बहुत ही अच्छे तरीके से बताया गया है।

हमारे हिन्दू धर्म के अनुसार यानि कि ग्रंथो के अनुसार प्रेत पिशाच योनि अतृप्त योनि होती है और सामन्यतः इसका शरीर दो तत्वो से बना हुआ होता है।

पहला है वायु और दूसरा है अग्नि। That Is Why वे हमे दिखाई नहीं देते हैं।

पर जब कोई प्रेत पिशाच अपनी अतृप्त इच्छा को पूरी करने के लिए बहुत ज्यादा उत्सुक होता है तब वो लंबा अनुसंधान करके अपने शरीर मे आकाश तत्व को कुछ देर के लिए समाविष्ट कर लेता है जिससे कि वो मानवों को दिखने लगता है।

पर तभी तक के लिए जब तक आकाश तत्व उसके शरीर मे है।

लेकिन इस स्थिति मे कोई उसके शरीर को छू नहीं सकता है because वो वायु से बना हुआ है। वो वायु स्वरूप ही होता है।

उसे छूने वाले का हाथ उसके शरीर के आर पार निकल जाता है जैसा कि आपने कई डरावनी फ़िल्मों मे जरूर देखा होगा।

इतना ही नहीं जब बहुत ज्यादा अतृप्त प्रेत पिशाच होते हैं वो छूने का भी एहसास पा जाते हैं।

So, वे बहुत ज्यादा प्रयास करके अपने अंदर आकाश तत्व के साथ जल तत्व का भी समावेश अपने अंदर कर लेते हैं जिससे कुछ देर के लिए स्पर्श का भी अनुभव पा सकते हैं।

पर इस स्थिति मे कोई आदमी उस प्रेत पिशाच को छू ले then उसे ऐसा लगेगा जैसे उसने किसी बर्फ को छू लिया हो।

Means इतना ठंडा होता है उनका शरीर किसी बर्फ के समान होता है।

प्रेत पिशाच योनि वाले चाहे कुछ भी कर ले वो पांचो तत्व यानि पृथ्वी तत्व का अपने शरीर मे समावेश नहीं कर सकते हैं।

Because, पांचो तत्वों से ही हम मानवों का शरीर बना हुआ होता है।

किसी भी प्रेत पिशाच को प्रेत पिशाच योनि से वापस मानव योनि मे आने के लिए पहले उसे अपने सारे पापों का प्रायश्चित करना होता है।

तब अगर उसके कर्म इस लायक रहे कि मानव जैसी दुर्लभ योनि उसे मिल सके तो ही उसे मानव योनि मिल सकती है।

Otherwise, उसे निम्न योनि जैसे कीड़े मकोडे, जीव जंतु, पेड़ पौधे आदि की योनि मे भेजा जा सकता है।

पृथ्वी तत्व की कमी की वजह से ही प्रेत पिशाच का शरीर कभी भी पृथ्वी का स्पर्श नहीं कर सकता है बल्कि हमेशा जमीन से कुछ ऊंचा उठा हुआ होता है।

इसके विपरीत उच्च योनियों मे जैसे देव योनि आदि योनियों मे शरीर छह तत्वों से बना हुआ होता है।

जिसमें वायु, जल, अग्नि, आकाश, पृथ्वी तत्वों के अलावा अक्षर तत्व भी होता है।

ये अक्षर तत्व वो तत्व होता है जो इन दिव्य लोगों के लिए इन दिव्य शरीरों का क्षरण यानि नाश नहीं होने देता है।

And, इन्हें हमेशा युवक, महाबली और अजर बनाए रखता है।

That Is Why इन देव पुरुषों का शरीर का शरीर सामान्य मानव बर्दाश्त नहीं कर पाते।

अगर इन देव पुरुषों को मानव स्थूल आंखों यानि नंगी आंखों से देख ले Then देव पुरुषों के दिव्य तेज से मानव अंधा भी हो सकता है और उसकी त्वचा भी जल जाएगी।

अगर ये देव अपने अक्षर तत्व को कुछ देर के लिए अपने शरीर से बाहर कर दे तो हर मानव इन्हें आसानी से देख सकता है।

But, इस दौरान उस देवता को पंच तत्वों के शरीर की किसी कारण से मौत हो सकती है।

वो देव पुरुष किसी कारण से फंस जाते हैं because उन्हें जो शरीर मिलेगा उसमे छठवें तत्व को फिर से समावेश करने का तरीका जानना बहुत मुश्किल है या कहें ऐसा कुछ है ही नहीं इसके बाद कि वो देव पुरुष अनन्त काल के लिए भटकाव चक्र में फंस जाता है।

और फिर बिना देव शरीर पाए वो भटकता ही रहता है।

देव पुरुष अपने तेज को कम करके साधारण मानवों के सामने आने की बजाय सिर्फ उन्हीं तपस्वी संतों को दर्शन देते हैं जो उनका रूप बर्दाश्त करने की क्षमता रखते हों।

कई लोग देवताओ को भगवान् भी समझते हैं जबकि ये गलत है। देवता भगवान् के द्वारा बनाए गए प्राणी होते हैं जैसे कि हम लोग।

पर देवताओं को हमारी तुलना में ज्यादा सुख और शक्तियाँ प्राप्त होती है क्योंकि वे देवता जब पूर्व जन्म मे मानव थे तो उन्होंने बहुत अच्छे कर्म किए थे जैसे गरीबों और बीमारों की सेवा करना।

इनमें बहुत सारे काम होते हैं और अच्छे कर्म करने होते हैं।

जिसकी वजह से उन्हें मरने के बाद देव लोक मिलता है पर उनके अच्छे कर्म थोड़े से कम पड़ गए जिसकी वजह से उनके मरने के बाद सीधे भगवान् का लोक नहीं मिला बल्कि उससे नीचे का लोक देव लोक मिला।

केवल एक स्वर्ग ही यानि देवताओं का लोक वह निवास स्थान नहीं है। स्वर्ग के अलावा और भी कई उच्च लोक जैसे कि भूवर्ग लोक आदि भी होते हैं।

इस ब्रह्माण्ड में जैसे मानवों से उच्च योनियां निवास करती है।

एक बात और जो ध्यान देने वाली है वो यह है कि हमारे हिन्दू धर्म के ज्ञान के मुताबिक हम मानव तीन आयामी लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई संसार में रहते हैं इसलिए तीन आयाम से ज्यादा लोको को उच्च लोक कहते हैं।

तीन आयामों से नीचे के लोकों को निम्न लोक कहते हैं। ग्यारहवें आयाम मे ब्रह्माण्ड के निर्माता श्री ब्रह्मा जी रहते हैं और ग्यारहवां आयाम हमारे इस ब्रह्माण्ड का आखिरी आयाम होता है।

पर इन सभी ग्यारह आयामों में या आयाम मे रहने वाले सभी प्राणी चाहे वो निम्न हो या मानव हो या देव हों का विलय, नाश या समाप्ति हो जाती है।

जब महा माया परम सत्ता की अध्यक्षता मे महा प्रलय करती है तो परम सत्ता का निज धाम या जो निवास स्थान होता है जो कृष्ण भक्त को गोलोक प्रतीत होता है।

शिव के भक्तों को शिव लोक, नारायण के भक्तों को बैकुण्ठ प्रतीत होता है।

उसका कभी भी नाश नहीं होता है because वो अनन्त आयाम से बना हुआ है। और वहां जाने का महासौभाग्य पाने वाले भक्तों के शरीर भी अनन्त तेजस्वी अक्षर तत्व से ही बने होते हैं।

भगवान् के परम निजी और परम दिव्य लोक का निवास महा सौभाग्य उन्हीं लोगों को प्राप्त होता है जिन पर परमात्मा की महान कृपा हो।

और इस महान कृपा का हकदार वही है जिसका मन वचन कर्म सब दूसरों की भलाई मे ही मृत्यु पर्यन्त लगा रहे।

इसलिए अगर आप सोचते हैं कि भगवान् को देखने के लिए इतना आसान है Then यह वहम अपने दिमाग से निकाल दीजिए because ये इतना ही मुश्किल है जितना पानी मे छेद करना।

इस विषय से हमें क्या समझना चाहिए?

इस पोस्ट में प्रेत, देवता और भगवान के स्वरूप को हिंदू धार्मिक मान्यताओं के आधार पर समझाने का प्रयास किया गया है। इसका मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अपने जीवन में अच्छे कर्म, शुद्ध विचार और ईश्वर भक्ति को महत्व देना चाहिए।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान के साक्षात्कार का मार्ग बाहरी चमत्कारों से नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना, सेवा और निष्काम कर्म से होकर गुजरता है। इसलिए केवल यह जानना पर्याप्त नहीं कि भगवान क्यों दिखाई नहीं देते, बल्कि यह समझना अधिक आवश्यक है कि उनके निकट पहुंचने के लिए हमें अपने जीवन में क्या परिवर्तन करने चाहिए।

यदि आपके मन में यह प्रश्न भी आता है कि जीवन में आने वाले कष्टों के पीछे क्या कारण हो सकते हैं, तो भगवान हमें दुख क्यों देता है विषय पर हमारी विस्तृत पोस्ट भी अवश्य पढ़ें।

निष्कर्ष

भूत तो दिखते हैं लेकिन भगवान क्यों नहीं दिखते—इस प्रश्न का उत्तर अलग-अलग लोगों की आस्था और समझ के अनुसार भिन्न हो सकता है। इस पोस्ट में हिंदू धार्मिक मान्यताओं के आधार पर एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है, जो प्रेत योनि, देव योनि और भगवान के दिव्य स्वरूप को समझाने का प्रयास करता है।

यदि हम धर्म के मूल संदेश पर ध्यान दें, तो स्पष्ट होता है कि मनुष्य का लक्ष्य केवल अदृश्य शक्तियों के बारे में जानना नहीं, बल्कि अपने कर्म, विचार और आचरण को श्रेष्ठ बनाना होना चाहिए। यही आध्यात्मिक उन्नति का वास्तविक मार्ग माना गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या भगवान वास्तव में दिखाई नहीं देते?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान का दिव्य स्वरूप सामान्य मनुष्य की इंद्रियों से परे माना गया है। इसलिए उनके दर्शन साधना, भक्ति और ईश्वर की कृपा से ही संभव बताए गए हैं।

क्या प्रेत और देवता एक ही होते हैं?

नहीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रेत योनि और देव योनि अलग-अलग मानी गई हैं तथा दोनों की प्रकृति और स्थिति भी अलग बताई गई है।

क्या इस विषय का कोई वैज्ञानिक प्रमाण है?

यह पोस्ट हिंदू धार्मिक मान्यताओं और आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर आधारित है। इसे वैज्ञानिक प्रमाण के रूप में नहीं, बल्कि धार्मिक विचार के रूप में समझना चाहिए।

इस पोस्ट का मुख्य संदेश क्या है?

मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अपने कर्म, विचार और आचरण को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग वहीं से शुरू होता है।

यदि आप जानना चाहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन को आनंद, संतुलन और सकारात्मकता के साथ जीने का क्या संदेश दिया है, तो जीवन को उत्सव की तरह जीना सिखाते श्रीकृष्ण विषय पर हमारी विस्तृत पोस्ट भी अवश्य पढ़ें।

यदि आपके मन में भोजन और धर्म से जुड़ा यह प्रश्न भी उठता है कि शाकाहार या मांसाहार में सनातन धर्म किसे अधिक उचित मानता है, तो इस विषय पर हमारी विस्तृत पोस्ट भी अवश्य पढ़ें।


धार्मिक ज्ञान से जुड़ी और जानकारी पढ़ें

यदि आप भगवान, धर्म, कर्म, श्रीकृष्ण, पूजा-पद्धति और सनातन जीवन दर्शन से जुड़े ऐसे ही ज्ञानवर्धक विषय विस्तार से पढ़ना चाहते हैं, तो धार्मिक ज्ञान एवं जीवन दर्शन अवश्य पढ़ें। इस पिलर पोस्ट में आपको इस विषय से संबंधित सभी महत्वपूर्ण पोस्ट एक ही स्थान पर मिल जाएंगी।

तो मै आशा करता हूं कि आप समझ गए होंगे कि प्रेत पिशाच हमे क्यों दिखते हैं और भगवान् क्यों नहीं दिखते। तो यह पोस्ट आपको अच्छा लगी हो तो पोस्ट को शेयर करे और कमेन्ट करे।

Tags: Why Can We See Ghost But Not God?

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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