भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरतालिका तीज व्रत किया जाता है। इस वर्ष यह व्रत 13 सितंबर 2026 को है। यह व्रत सुहागिन स्त्रियां रखती हैं। इस दिन शंकर पार्वती सहित बालू की मूर्ति बनाकर पूजा करनी चाहिए। तथा सुन्दर वस्त्रों और कदली स्तम्भों से घर को सजाकर नाना प्रकार के मंगल गीतों से रात को जागरण करना चाहिए। साथ ही हरतालिका तीज व्रत कथा कहनी सुननी चाहिये।

इस व्रत को करने वाली स्त्रियां माता पार्वती के समान सुखपूर्वक पति रमण करके शिवलोक को जाती है।
हरतालिका तीज व्रत कथा
शंकर जी ने पार्वती जी को कहा कि एक बार तुमने हिमालय पर्वत पर जाकर गंगा किनारे मुझको पति के रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी।
उसी घोर तपस्या के कारण नारद जी हिमालय के पास गये और कहा कि विष्णु भगवान् आपकी पुत्री के साथ विवाह करना चाहते हैं, नारद जी की ऐसी अपने मन से बनायी हुई बात को तुम्हारे पिता ने स्वीकार कर लिया।
फिर नारद जी विष्णुजी के पास गये और कहा कि आपका विवाह हिमालय ने पार्वती जी के साथ करने का निश्चय किया है। आप इसकी स्वीकृति दें। नारदजी के जाने के पश्चात् पिता हिमालय ने तुम्हें भगवान् विष्णु जी के साथ निश्चित किया गया विवाह संबंध बताया।
यह बात सुनकर तुम्हें बहुत ही दुख हुआ। एक सखी के द्वारा दुख का कारण पूछे जाने पर तुमने कहा कि मैं इधर भगवान् शंकर के साथ विवाह करने के लिए कठिन तपस्या कर रही हूं और इधर हमारे पिताजी विष्णु जी के साथ मेरा विवाह करना चाहते हैं।
तुम मेरी सहायता करो। नहीं तो मैं प्राण त्याग दूंगी। सखी ने सांत्वना दी और कहा कि मैं तुम्हें एक ऐसे वन में ले चलूंगी कि तुम्हारे पिता को पता नहीं चल पायेगा। इस प्रकार तुम अपनी सखी की सम्मति से घने जंगल में चली गयी।
इधर तुम्हारे पिता हिमालय ने घर में इधर उधर खोजने पर जब तुम्हें नहीं पाया तो बहुत चिंतित हुए क्योंकि नारद जी ने विष्णु जी के साथ विवाह करना मान लिया था। वचन भंग की चिंता ने उन्हें मूर्छित कर दिया।
तब सभी पर्वत य़ह बात जानकर तुम्हारी खोज में लग गये। उधर सखी सहित तुम सरिता किनारे की एक गुफा में मेरे नाम पर तपस्या करने लगीं।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को उपवास रखकर तुमने सिक्ता का शिवलिंग संस्थापित करके पूजन तथा रात्रि जागरण भी किया। तुम्हारे इस कठिन तप व्रत के कारण मुझे तुरन्त तुम्हारे पूजन स्थल पर आना पड़ा।
तुम्हारी मांग तथा इच्छानुसार मुझे तुमको अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार करना पड़ा। इसके बाद मैं तुरंत कैलाश पर्वत पर चला गया। प्रातः काल में जब तुम पूजन सामग्री नदी में छोड़ रही थी उसी समय हिमालय राज उस स्थान पर पहुंच गए।
वे तुम दोनों को देखकर पूछने लगे कि बेटी! तुम यहाँ कैसे आ गयी? तब तुमने विवाह वाली बात सुना दी। वे तुम्हें घर ले आये। तब शास्त्र विधि से तुम्हारा मेरे साथ विवाह हुआ।
हरतालिका व्रत का नामकरण सखी द्वारा हरी जाने पर इसका (हरत-तालिका) पड़ गया। शंकर जी ने पार्वती जी को यह भी बताया कि जो स्त्री इस व्रत को परम श्रद्धा से करेगी उसे तुम्हारे समान ही अचल सुहाग मिलेगा।
हरतालिका तीज व्रत का महत्व
हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम, तपस्या और अखंड दांपत्य जीवन का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। उसी तपस्या की स्मृति में सुहागिन महिलाएं तथा अनेक स्थानों पर अविवाहित कन्याएं भी योग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन तथा भगवान शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।
हरतालिका तीज व्रत पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा अथवा बालू से निर्मित प्रतिमाएं स्थापित करें।
- फल, फूल, बेलपत्र, धूप, दीप, अक्षत, रोली, सुहाग सामग्री और नैवेद्य अर्पित करें।
- व्रत के दौरान निर्जला या परंपरा के अनुसार उपवास रखें।
- हरतालिका तीज व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
- रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करें तथा अगले दिन विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।
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हरतालिका तीज व्रत कथा से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)
हरतालिका तीज का व्रत कौन रख सकता है?
मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं। कई स्थानों पर अविवाहित कन्याएं भी योग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
हरतालिका तीज किस तिथि को मनाई जाती है?
यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
हरतालिका तीज पर किसकी पूजा की जाती है?
इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती तथा भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
हरतालिका तीज व्रत का क्या फल मिलता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत से अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन तथा भगवान शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।
निष्कर्ष
हरतालिका तीज व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की अटूट भक्ति, प्रेम और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा एवं विधि-विधान से इस व्रत का पालन करने और हरतालिका तीज व्रत कथा का श्रवण करने से अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन तथा शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख धार्मिक ग्रंथों, मान्यताओं और लोक परंपराओं के आधार पर तैयार किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों एवं संप्रदायों में हरतालिका तीज व्रत की पूजा-विधि और परंपराओं में कुछ अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान का पालन अपने कुलाचार, पारिवारिक परंपरा अथवा योग्य आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार करें।





