पितृपक्ष (Pitru Paksh) कनागत में श्राद्ध करने की विधि (Shradh Karne Ki Vidhi) – सबसे आसान और सुलभ तरीका – श्राद्ध का आरम्भ हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास की पूर्णिमा और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से होता है। आश्विन मास की अमावस्या तक पितृपक्ष कहलाता है। इसे कनागत भी कहा जाता है। सोलह दिनों के इस पक्ष में मृत पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है।
यदि आप हिंदू धर्म के अन्य प्रमुख व्रत, पूजा, श्राद्ध, तर्पण और धार्मिक विधियों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो व्रत एवं पूजा: संपूर्ण जानकारी, महत्व और नियम भी अवश्य पढ़ें।
श्राद्ध | पितृ पक्ष | कनागत से जुड़ी कुछ खास बातें
| 01 | श्राद्ध (Shradh) किसे कहते हैं? | बुजुर्गों की मृत्यु तिथि के दिन श्रद्धापूर्वक तर्पण और ब्राह्मण को भोजन कराना ही श्राद्ध है। |
| 02 | श्राद्ध, कनागत या पितृ पक्ष कब शुरू होता है? | श्राद्ध का आरम्भ हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास की पूर्णिमा और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से होता है। आश्विन मास की अमावस्या तक पितृपक्ष कहलाता है। |
| 03 | पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू है? | 26 सितंबर 2026 से 10 अक्टूबर 2026 तक। |
| 04 | श्राद्ध किसका किया जाता है? | पितृ पक्ष में मृत पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है। |
| 05 | श्राद्ध करने से क्या होता है? | पितरों को संतुष्टि और शांति मिलती है। |
| 06 | श्राद्ध करने का अधिकार किसको है? | बड़े बेटे या नाती को। |
| 07 | पुरुष के श्राद्ध में किसे भोजन करते हैं? | ब्राह्मण को। |
| 08 | महिला के श्राद्ध में किसे भोजन कराना चाहिए? | ब्राह्मणी को। |
| 09 | श्राद्ध के भोजन में विशेष रूप से क्या होता है? | खीर और पूड़ी। |
| 10 | श्राद्ध का तर्पण कैसे किया जाता है? | श्राद्ध का संकल्प बोलकर। |

पितृपक्ष का धार्मिक महत्व
पितृपक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का विशेष पक्ष माना जाता है। इन 16 दिनों में पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से उन्हें तृप्ति प्राप्त होती है तथा परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। ◉ श्राद्ध एवं पितृ-परंपरा — शोध स्रोत (पृ. 182–197)
धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितृ दोष शांत होता है तथा परिवार में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
श्राद्ध करने का अधिकार ज्येष्ठ पुत्र अथवा नाती को होता है। पुरुष के श्राद्ध में ब्राह्मण को तथा महिला के श्राद्ध में ब्राह्मणी को भोजन कराते हैं। भोजन में खीर और पूरी विशेष रूप से होती है।
भोजन कराने के बाद दक्षिणा दी जाती है। पितृपक्ष में पितरों की मरने की तिथि को ही उनका श्राद्ध किया जाता है। गया जी में श्राद्ध करने का बड़ा महत्व माना गया है।
जानिए किस दिन कौन सा श्राद्ध है? Shradh | Pitru Paksh 2026 Date
| 01 | 26 सितंबर 2026 | शनिवार | पूर्णिमा का श्राद्ध |
| 02 | 27 सितंबर 2026 | रविवार | प्रतिपदा का श्राद्ध |
| 03 | 28 सितंबर 2026 | सोमवार | द्वितीया का श्राद्ध |
| 04 | 29 सितंबर 2026 | मंगलवार | तृतीया का श्राद्ध |
| 05 | 30 सितंबर 2026 | बुधवार | चतुर्थी / पंचमी का श्राद्ध |
| 06 | 01 अक्टूबर 2026 | बृहस्पतिवार | षष्ठी का श्राद्ध |
| 07 | 02 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | सप्तमी का श्राद्ध |
| 08 | 03 अक्टूबर 2026 | शनिवार | अष्टमी का श्राद्ध |
| 09 | 04 अक्टूबर 2026 | रविवार | नवमी का श्राद्ध |
| 10 | 05 अक्टूबर 2026 | सोमवार | दशमी का श्राद्ध |
| 11 | 06 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | एकादशी का श्राद्ध |
| 12 | 07 अक्टूबर 2026 | बुधवार | द्वादशी का श्राद्ध |
| 13 | 08 अक्टूबर 2026 | बृहस्पतिवार | त्रयोदशी का श्राद्ध |
| 14 | 09 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | चतुर्दशी, मघा श्राद्ध |
| 15 | 10 अक्टूबर 2026 | शनिवार | सर्वपितृ विर्सजन अमावस्या |
पितृपक्ष में देवताओं को जल देने के पश्चात् मृतकों का नामोंच्चारण करके उन्हें भी जल देना चाहिए।
◉ पितृ श्राद्ध में अन्न, जल एवं अन्य अर्पण — मनुस्मृति 3.82
बुजुर्गों की मृत्यु तिथि के दिन श्रद्धा पूर्वक तर्पण और ब्राह्मण को भोजन कराना ही श्राद्ध है।
श्राद्ध | तर्पण | की पूजा सामग्री
| 01 | पान |
| 02 | सुपारी |
| 03 | काले तिल |
| 04 | जौ |
| 05 | गेहूं |
| 06 | चंदन |
| 07 | जनेऊ |
| 08 | तुलसी |
| 09 | पुष्प |
| 10 | दूब |
| 11 | कच्चा दूध |
| 12 | जल |
पितृपक्ष में क्या करें और क्या न करें
- पूर्वजों का तर्पण श्रद्धापूर्वक करें।
- ब्राह्मण, गाय, कौआ और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- क्रोध और विवाद से बचें।
- नशा एवं तामसिक भोजन से दूर रहें।
पितृपक्ष में श्राद्ध करने के लाभ
- पितरों की तृप्ति होने की मान्यता है। ◉ पितृ तृप्ति एवं श्राद्ध — मनुस्मृति 3.82
- पितृ दोष की शांति के लिए यह महत्वपूर्ण माना जाता है।
- परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
- पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- धार्मिक कर्तव्य की पूर्ति होती है।
श्राद्ध करने की विधि – तर्पण कैसे किया जाता है? (Tarpan Vidhi In Hindi)
तर्पण के लिए पान, सुपारी, काला तिल, जौ, गेहूँ, चंदन, जनेऊ, तुलसी, पुष्प, दूब, कच्चा दूध, जल आदि सामग्री तर्पण पूजा हेतु एकत्रित कर लेनी चाहिए।
◉ श्राद्ध सामग्री एवं पितृ-अर्पण — शास्त्रीय संदर्भ
नोट: श्राद्ध और तर्पण में प्रयोग की जाने वाली सामग्री तथा विधि अलग-अलग शास्त्रीय, स्थानीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार कुछ अलग हो सकती है।
तर्पण पूजा करने का स्थान गाय के गोबर से साफ कर लेना चाहिए। मृत पितृ के निमित्त और उनकी तिथि स्मरण करके नैवेद्य निकाल देना चाहिए। एक थाली में गाय का (पंच ग्रास) तथा एक थाली में ब्राह्मण भोजन निकाले।
श्राद्ध संकल्प कैसे करें? (Shradh Sankalp Kaise Karein)
श्राद्ध संकल्प : आज मिमी………….. वार………….. मास………….. (कृष्ण पक्ष /शुक्ल पक्ष) पक्षे संयुक्त संवत्सरे (पितृ /मातृ या दादा /दादी) की पुण्य श्राद्ध तिथि पर उनके ब्रह्मलोक में स्वर्ग का आनंद एवं सुख की प्राप्ति हेतु धर्मराज की प्रसन्नता के लिए काक बलि, मार्ग देवता की प्रसन्नता के लिए खान (कुत्ता) बलि, वैतरणी नदी के पार कराने हेतु गौ ग्रास बलि, कीट पतंग की तृप्ति व अतिथि देवता हेतु पंच ग्रास बलि………… (अमुक) के निमित्त है। उनकी (माता- पिता, दादा-दादी) भूख प्यास का दोष शांत हो तथा उन्हें आनंद की प्राप्ति होवे। हमारे वंश व धन की वृद्धि होवे।
(ऐसा बोलते हुए हाथ में जल, जौ, तिल दक्षिणा रखे हुए पांचों ग्रास पर घुमाकर दक्षिण की ओर मुँह करके छोड़ दें) इसके अतिरिक्त ब्राह्मण भोजन के निमित्त जो थाली में प्रसाद रखा है उस पर घुमाकर जल छोड़े और कहें इससे हमारे………….. (माता-पिता, दादा-दादी) की तृप्ति होवे प्रसन्नता होवे।
अमावस्या तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। यदि आप अन्य प्रमुख अमावस्या व्रतों के बारे में जानना चाहते हैं, तो मौनी अमावस्या का महत्व भी पढ़ सकते हैं।
पितृ विसर्जन अमावस्या (Pitru Visarjan Amavasya)
इस दिन शाम को दीपक जलाने के बाद पूड़ी पकवान आदि खाद्य पदार्थ दरवाजे पर रखे जाते हैं। जिसका अर्थ यह है कि पितर जाते समय भूखे न रह जाए।
इसी तरह दीपक जलाने का आशय उनके मार्ग को प्रकाशमय करने का है। आश्विन अमावस्या पितृ अमावस्या के नाम से जानी जाती है।
इस दिन ब्राह्मण भोजन तथा दान आदि से पितर तृप्त हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि विसर्जन के समय वे अपने पुत्रों को आशीर्वाद देकर जाते हैं। इस दिन सवा किलो जौ के आटे के 16 पिण्ड बनाकर, आठ गाय को, चार कुत्ते को एवं कौओ को खिलाना चाहिए एवं उस दिन पितृ स्त्रोत का पाठ करना चाहिए।
पितृ स्त्रोत (Pitru Strot)
जो सबके द्वारा पूज्यनीय, अमूर्त, अत्यन्त तेजस्वी, ध्यानी तथा दिव्य दृष्टि से संपन्न हैं, मैं उन पितरों को सदा नमस्कार करता हूं। जो इन्द्र आदि देवताओं, दक्ष, मारीचादि सप्तर्षियों तथा दूसरों के भी नेता हैं, कामनाओं की पूर्ति करने वाले पितरों को मैं प्रणाम करता हूं।
जो मनु आदि राजर्षियों, मुनीश्वरो तथा सूर्य और चंद्रमा के भी नायक हैं, उन समस्त पितरों को मैं जल और समुद्र में भी नमस्कार करता हूं। नक्षत्रों, ग्रहों, वायु, अग्नि, आकाश और भूलोक तथा पृथ्वी के जो भी नेता हैं उन पितरों को मैं हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूं।
जो देव ऋषियों के जन्म दाता, समस्त लोकों द्वारा वंदित तथा सदा अक्षय फल के दाता हैं, उन पितरों को मैं हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूं।
प्रजापति, कश्यप, सोम, वरुण, तथा, योगेश्वरों के रूप में स्थित सात पितृगणों को कोटि-कोटि प्रणाम। मैं योगदृष्टि संपन्न स्वयंभू ब्रह्मा जी को प्रणाम करता हूं। चंद्रमा के आधार पर प्रतिष्ठित तथा योगमूर्तिधारी पितृ गणों को मैं प्रणाम करता हूं।
साथ ही सम्पूर्ण जगत के पिता सोम को नमस्कार करता हूं तथा अग्नि स्वरूप अन्य पितरों को भी प्रणाम करता हूं क्योंकि यह सम्पूर्ण जगत अग्नि और सोममय है।
जो पितर में स्थित है, जो ये चंद्रमा, सूर्य और अग्नि के रूप में विद्यमान है। तथा जो जगत स्वरूप एवं ब्रह्म स्वरूप हैं, उन सम्पूर्ण योगी पितरों को मैं एकाग्रचित होकर प्रणाम करता हूं। मैं उन्हें बार-बार शत शत प्रणाम करता हूं। वे स्वधाभोजी पितर मुझ पर प्रसन्न हों।
पितृपक्ष के बाद आने वाले प्रमुख धार्मिक पर्वों में कार्तिक पूर्णिमा का भी विशेष महत्व माना जाता है।
पितृपक्ष से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)
पितृपक्ष कितने दिन का होता है?
पितृपक्ष सामान्यतः 16 दिनों तक चलता है।
श्राद्ध कौन कर सकता है?
परंपरागत रूप से ज्येष्ठ पुत्र या योग्य उत्तराधिकारी श्राद्ध करता है। आवश्यकता होने पर परिवार के अन्य सदस्य भी श्रद्धापूर्वक यह कर्म कर सकते हैं।
यदि मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण किया जाता है।
क्या पितृपक्ष में शुभ कार्य किए जाते हैं?
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इन दिनों में श्राद्ध और पितृ तर्पण को प्राथमिकता दी जाती है तथा कई परिवार शुभ कार्यों से परहेज़ करते हैं।
पितृपक्ष, श्राद्ध एवं पितृ तर्पण — स्रोत एवं संदर्भ
पितृपक्ष और श्राद्ध से संबंधित धार्मिक परंपराओं को समझने के लिए निम्न अकादमिक एवं शास्त्रीय संदर्भ उपयोगी हैं:
◉ Sayers (2015) — Śrāddha: The Development of Ancestor Worship in Classical Hinduism
Religion Compass, Volume 9, Issue 6, pp. 182–197. DOI: 10.1111/rec3.12155
◉ मनुस्मृति 3.82 — श्राद्ध एवं पितृ-अर्पण
अध्याय 3, श्लोक 82 — अन्न, जल, दूध, मूल एवं फल आदि से पितरों के लिए श्राद्ध का संदर्भ।
◉ मनुस्मृति 3.146 — श्राद्ध एवं पितृ-संबंधी संदर्भ
अध्याय 3, श्लोक 146 — संबंधित शास्त्रीय संदर्भ।
स्रोत संबंधी टिप्पणी: श्राद्ध, तर्पण और पितृ-अर्पण की विधियों में अलग-अलग शास्त्रीय, क्षेत्रीय तथा पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अंतर पाया जा सकता है। इसलिए इस लेख में दी गई सामान्य विधि को सभी परंपराओं में अनिवार्य एकमात्र विधि नहीं माना जाना चाहिए।
धार्मिक सूचना
इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, लोक परंपराओं और प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की विधियों में कुछ अंतर हो सकता है। श्रद्धालु अपने कुलाचार, परिवार की परंपरा या योग्य विद्वान के मार्गदर्शन का पालन करें।
पोस्ट : पितृपक्ष (Pitru Paksh) कनागत में श्राद्ध करने की विधि (Shradh Karne Ki Vidhi) – सबसे आसान और सुलभ तरीका।





