इन्दिरा एकादशी व्रत कथा (Indira Ekadashi Vrat Katha In Hindi)

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इन्दिरा एकादशी व्रत (Indira Ekadashi Vrat Katha) आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है। यह भगवान विष्णु तथा शालिग्राम भगवान की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजा और कथा का श्रवण करने से पितरों की सद्गति होती है, पापों का नाश होता है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

यदि आप वर्षभर आने वाली सभी एकादशियों, उनकी तिथि, व्रत नियम और धार्मिक महत्व के बारे में जानना चाहते हैं, तो एकादशी व्रत की संपूर्ण जानकारी भी पढ़ सकते हैं। आइए जानते हैं इन्दिरा एकादशी व्रत की पूजा विधि, कथा, महत्व और व्रत के लाभ।

indira ekadashi vrat katha in hindi इन्दिरा एकादशी व्रत कथा

Indira Ekadashi Vrat Katha - Important Facts

Indira Ekadashi vrat 2026 date06 अक्टूबर 2026
Indira Ekadashi Vrat कब पड़ता है? अश्विन मास के कृष्ण पक्ष को पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है
इन्दिरा एकादशी व्रत का क्या महत्व है? इस दिन व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है, साथ ही पूर्वजों को मुक्ति मिलती है
इंदिरा एकादशी व्रत पूजा विधिपोस्ट पढ़ें
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इन्दिरा एकादशी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्दिरा एकादशी का व्रत विशेष रूप से पितरों की शांति और सद्गति के लिए किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु एवं शालिग्राम भगवान की पूजा करने, व्रत रखने तथा कथा सुनने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

स्नान आदि से पवित्र होकर फिर सूर्य देव को जल अर्घ्य दें फिर शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराकर वस्त्र पहनाये जाते हैं तथा भोग लगाकर आरती उतारी जाती है। पंचामृत वितरण करके शालिग्राम पर तुलसी अवश्य चढ़ानी चाहिए। इस दिन जलीय आहार ग्रहण करना चाहिए तथा निर्धन को दान करना चाहिए। झूठ और क्रोध करने से बचना चाहिए। इस व्रत की कथा को सुनने से सब पापों से छुटकारा मिल जाता है। और सब प्रकार के भोगों को भोगकर बैकुंठ को प्राप्त होते हैं।

इन्दिरा एकादशी व्रत के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्दिरा एकादशी का व्रत करने से पितरों की सद्गति होती है। इस व्रत से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, पापों का नाश होता है तथा परिवार में सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

इन्दिरा एकादशी व्रत की पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें।
  • शालिग्राम भगवान को पंचामृत से स्नान कराएँ।
  • तुलसी, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • दिनभर व्रत रखें तथा यथाशक्ति फलाहार करें।
  • पितरों की शांति के लिए भगवान विष्णु का ध्यान करें।
  • द्वादशी तिथि में ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें।

इन्दिरा एकादशी व्रत कथा (Indira Ekadashi Vrat Katha In Hindi)

सतयुग में महिष्मती पुरी में इंद्रसेन नामक एक प्रबल प्रतापी राजा राज्य करता था। वह पुत्र, पौत्र, धन्य-धान्य से संपन्न था। वह भगवान् विष्णु का परम भक्त भी था। उसके माता-पिता स्वर्गवासी हो चुके थे।

अचानक एक दिन उन्हें स्वप्न आया कि तुम्हारे माता-पिता यमलोक मे कष्ट भोग रहे हैं। अपनी नींद खुलने पर वे बहुत चिंतित हुए कि किस प्रकार इस यातना से पितरों को मुक्ति दिलाई जाए।

इस विषय पर उन्होंने मंत्री से परामर्श किया। मंत्री ने राजा को परामर्श दिया कि वे विद्वानों को बुलाकर इस विषय पर वार्तालाप करे। राजा ने ऐसा ही किया। सभी ब्राह्मणों के उपस्थित होने पर स्वप्न की बात उन्हें बतायी गयी।

ब्राह्मणों ने कहा, राजन! यदि आप सकुटुंब इन्दिरा एकादशी व्रत (Indira Ekadashi Vrat) करें तो आपके पितरों की मुक्ति हो जायेगी।

उस दिन आप शालिग्राम की पूजा, तुलसी आदि चढ़ाकर 11 ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें। इससे आपके माता पिता स्वयं ही स्वर्ग में चले जायेंगे और आप रात्रि को मूर्ति के पास ही शयन करना।

राजा ने ऐसा ही किया। जब राजा मंदिर में सो रहा था तभी भगवान् के दर्शन हुए और उन्होंने कहा कि हे राजन! व्रत के प्रभाव से तेरे माता-पिता स्वर्ग को पहुंच गए हैं। राजा इंद्रसेन भी इस व्रत के प्रभाव से इस लोक में सुख भोगकर अंत में स्वर्ग को गया।

अतः इन्दिरा एकादशी व्रत कथा (Indira Ekadashi Vrat Katha) सुनने और सुनाने वाले को अभीष्ट फल की प्राप्ति कराती है।

इन्दिरा एकादशी के बाद आने वाली पापांकुशा एकादशी भगवान विष्णु की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

पापांकुशा एकादशी के बाद आने वाली रमा एकादशी का भी सनातन धर्म में विशेष महत्व बताया गया है।

निष्कर्ष

इन्दिरा एकादशी भगवान विष्णु की आराधना तथा पितरों की सद्गति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत को करने तथा कथा का श्रवण करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। यदि आप अन्य एकादशियों की कथा, पूजा विधि और महत्व भी जानना चाहते हैं, तो हमारी अन्य एकादशी संबंधी जानकारी भी अवश्य पढ़ें।

इन्दिरा एकादशी से जुड़े प्रश्न

इन्दिरा एकादशी किस माह में आती है?

यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है।

इन्दिरा एकादशी पर किस भगवान की पूजा की जाती है?

इस दिन भगवान विष्णु और शालिग्राम भगवान की पूजा की जाती है।

इन्दिरा एकादशी का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से पितरों की सद्गति होती है, पापों का नाश होता है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

क्या इन्दिरा एकादशी पर चावल खाना चाहिए?

एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है। इसलिए सात्विक व्रत भोजन करना उचित माना जाता है।

इन्दिरा एकादशी का पारण कब किया जाता है?

द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय पर भगवान विष्णु की पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पुराणों तथा प्रचलित सनातन मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार पूजा-विधि एवं मान्यताओं में थोड़ा अंतर हो सकता है।

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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