पापांकुशा एकादशी व्रत कथा – Papankusha Ekadashi Vrat Katha In Hindi

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पापांकुशा एकादशी व्रत (Papankusha Ekadashi Vrat) आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। यह भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजा और कथा का श्रवण करने से पापों का नाश होता है तथा सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

यदि आप वर्षभर आने वाली सभी एकादशियों, उनकी तिथि, व्रत नियम और धार्मिक महत्व के बारे में जानना चाहते हैं, तो एकादशी व्रत की संपूर्ण जानकारी भी पढ़ सकते हैं। आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी व्रत की पूजा विधि, कथा, महत्व और व्रत के लाभ।

papankusha ekadashi vrat katha in hindi पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

यह व्रत (Papankusha Ekadashi Vrat) व्रतों का राजा माना जाता है। सर्व सुख शांति, सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला, मोह माया से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति कराने वाला यह व्रत सभी के किये कल्याणकारी है।

Papankusha ekadashi vrat katha in hindi

Papankusha Ekadashi 2026 date22 october 2026
पापांकुशा एकादशी व्रत सामग्री विष्णुजी की प्रतिमा, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प और गंध, पंचामृत ।
ब्राह्मण दान सामग्री यथाशक्ति तिल, भूमि, अन्न, जूता, वस्त्र और छाता आदि।
Papankusha ekadashi vrat kab kiya jata hai? यह व्रत आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है।
व्रत कब समाप्त करते हैं? अगले दिन द्वादशी तिथि को।

पापांकुशा एकादशी का महत्व

पापांकुशा एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत सुख, समृद्धि, शांति और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।

पापांकुशा एकादशी पूजा विधि

पापांकुशा एकादशी व्रत के दिन पूजा कैसे करें? (Papankusha Ekadashi vrat Ki Puja Vidhi)

इस दिन भगवान् श्री हरि विष्णु जी की पूजा करके ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए। इस व्रत के दिन भगवान् पद्म नाथ जी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

व्रत करने वाले को सुबह जल्दी उठकर अपने नित्य कर्मों और स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान् विष्णु जी की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए। पूरी श्रद्धा, भक्ति भाव से विधिवत पूजन करना चाहिए। पूजा के पश्चात भगवान् को भोग लगाएं।

भक्तों को चरणामृत और प्रसाद वितरित कर ब्राह्मण को यथाशक्ति तिल, भूमि, अन्न, जूता, वस्त्र और छाता आदि का दान उन्हें भोजन के बाद देना चाहिए।

भगवान् विष्णुजी की प्रतिमा के निकट ही भजन कीर्तन रात्रि में करे। उपवास के दौरान अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। चाहें तो एक समय फलाहार कर सकते हैं।

पापांकुशा एकादशी व्रत के नियम

  • प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान् श्री हरि विष्णु जी की प्रतिमा के सामने पापांकुशा व्रत का संकल्प लें।
  • यथा संभव पूरे दिन व्रत रखें।
  • व्रत में अन्न बिल्कुल भी ग्रहण नहीं करना चाहिए।
  • पूरे दिन मौन धारण करे।
  • यदि पूरे दिन व्रत नहीं रख सकते तो एक समय फलाहार कर सकते हैं।
  • भगवान् पद्मनाभ की पूजा पूरे विधि विधान से करनी चाहिए।
  • भगवान् विष्णु की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान करवाये।
  • भगवान् को धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प और गंध अर्पित करना चाहिए।
  • पूजा करने के बाद भगवान् को भोग लगाए, आरती प्रार्थना कीजिए।
  • किसी विद्वान ब्राह्मण से भी पूजा करवा सकते हैं।
  • चरणामृत बनाए और परिवार जनों को बांटे।
  • विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करे और कथा सुननी चाहिए।
  • रात्रि को विष्णु जी की प्रतिमा के समक्ष सोना चाहिए।
  • द्वादशी को ब्राह्मण भोज कराए और दान दक्षिणा देनी चाहिए।

पापांकुशा एकादशी की कथा (Papankusha Ekadashi Vrat Katha)

एक महा क्रूर बहेलिया था। जो विंध्याचल पर्वत पर निवास करता था। जिसका उसके काम के अनुरूप ही नाम क्रोधन था। उसने अपना समस्त जीवन हिँसा, लूटपाट, मिथ्या भाषण, शराब के सेवन और वेश्या गमन में बिता दिया।

यमराज ने उसके अन्तिम समय के एक दिन पहले अपने दूत उसे लाने के लिए भेजे। दूतों ने क्रोधन को बताया कि कल तुम्हारा अंतिम दिन है और हम तुम्हें लेने के लिए आए हैं।

मृत्यु के भय से वह एक ऋषि के आश्रम में पहुंचा। वह ऋषि से अपने प्राणों की रक्षा के लिए बहुत ही अनुनय पूर्वक प्रार्थना करने लगा। ऋषि को उस पर दया आ गयी।

उन्होंने उससे आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत और भगवान् विष्णु जी की पूजा की सारी विधि बतायी। संयोगवश उस दिन एकादशी ही थी।

क्रोधन ने ऋषि द्वारा बताये अनुसार पापांकुशा एकादशी का व्रत (Papankusha Ekadashi Ka Vrat) विधिपूर्वक किया। भगवान् विष्णु जी की कृपा से वह विष्णुलोक को चला गया और यमदूत हाथ मलते रह गए।

पापांकुशा एकादशी के बाद आने वाली रमा एकादशी का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह भगवान विष्णु की आराधना तथा पापों से मुक्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

रमा एकादशी के बाद आने वाली देवउठनी एकादशी का सनातन धर्म में विशेष महत्व है।

पापांकुशा एकादशी व्रत के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत से पापों का नाश, मानसिक शांति, सुख-समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने वाले भक्तों को मोक्ष प्राप्त होने की भी मान्यता है।

निष्कर्ष

पापांकुशा एकादशी भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत, पूजा तथा कथा का श्रवण करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। यदि आप अन्य एकादशियों की कथा, पूजा विधि और महत्व भी जानना चाहते हैं, तो हमारी अन्य एकादशी संबंधी जानकारी भी अवश्य पढ़ें।

FAQ – पापांकुशा एकादशी

पापांकुशा एकादशी किस भगवान को समर्पित है?

यह एकादशी भगवान विष्णु और पद्मनाभ भगवान को समर्पित मानी जाती है।

पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से क्या लाभ मिलता है?

इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है, भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

पापांकुशा एकादशी पर क्या दान करना चाहिए?

तिल, अन्न, वस्त्र, छाता, भूमि तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान शुभ माना गया है।

पापांकुशा एकादशी पर क्या खाना चाहिए?

व्रत के दौरान फल, दूध, दही, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा तथा अन्य सात्विक व्रत आहार का सेवन किया जा सकता है।

क्या पापांकुशा एकादशी पर चावल खाना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है। इसलिए इस दिन सात्विक व्रत भोजन ही करना चाहिए।

पापांकुशा एकादशी का पारण कब किया जाता है?

द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय पर भगवान विष्णु की पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पुराणों तथा प्रचलित सनातन मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार पूजा-विधि एवं मान्यताओं में थोड़ा अंतर हो सकता है।

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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