Basant Panchami Puja Vidhi aur Katha In Hindi – यह त्योहार माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इसे कहीं कहीं श्री पंचमी और ऋषि पंचमी भी कहा जाता है। इस पर्व की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती हैं। इस दिन पीला भोजन ग्रहण करते हैं और वस्त्र भी पीताम्बर यानि पीले ही पहनने का रिवाज है।
इस दिन को विद्यादायिनी सरस्वती जी के जन्म दिन के तौर पर भी देखा जाता है। इसी दिन राजा भोज और हिंदी के महान लेखक सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ के जन्म दिन का भी है।

वसंत पंचमी (Vasant Panchami) के दिन पतंग उड़ाने की परम्परा वर्षों से चली आ रही है। लोग चाहे बड़े हो या बच्चे बड़े चाव से अपने घर की छतों पर पतंगबाजी का शौक पूरा करते हैं।
बसंत पंचमी (Basant Panchami)
| 01 | व्रत या त्योहार का मुख्य नाम | बसंत पंचमी![]() |
| 02 | किस संप्रदाय का पर्व है? | हिन्दू धर्म |
| 03 | उद्देश्य | विद्या और ज्ञान प्राप्ति के लिए। |
| 04 | तिथि | माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को। |
| 05 | मुख्य आराध्य देव | देवी सरस्वती जी। |
भारत में छह प्रकार के मौसम होते हैं। जो इस प्रकार है :-
- बसंत ऋतु
- ग्रीष्म ऋतु
- वर्षा ऋतु
- शिशिर ऋतु
- हेमंत ऋतु
- शरद ऋतु
इन सबमें बसंत ऋतु सबसे खास मानी जाती है क्योंकि यह ऋतु सबसे खुशमिजाज और अच्छा माना जाता है। इस मौसम में न तो ज्यादा ठंड पड़ती है और न ही ज्यादा गर्मी। खेती के लिहाज से बसंत फसलों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
हमारे देश में फसलों को पीला सोना भी कहा जाता है इसलिए माघ मास की पंचमी के दिन लहलहाती फसलों को देखकर जश्न मनाने की परंपरा वर्षो से चली आ रही है।
भगवान् विष्णु, सरस्वती और कामदेव जी की पूजा बसंत पंचमी के दिन होती आ रही है।
बसंत पंचमी के दिन पूजा कैसे करें? (Basant Panchami Puja Vidhi In Hindi)
- इस दिन भगवान् विष्णु और देवी सरस्वती की पूजा करके जल, मौली, रोली, चावल, पीला फूल, अबीर, गुलाल, फल और दक्षिणा चढ़ाये।
- धूप, दीपक जलाकर और आरती करके भोग में प्रसाद चढ़ाएं।
- बसंत पंचमी के दिन घर में मीठे चावल यानि कि चासनी का केसरिया भात बनाए।
- पीले रंग के कपड़े पहने।
- इस दिन यदि अपने पति को अपने हाथ से जिमाए तो पति का कष्ट कटता है और पति की आयु बढ़ती है।
- पूजन और भोजन दोनों में हल्दी का प्रयोग अवश्य करें।
- छात्र पुस्तकों और पाठ्य सामग्री का पूजन जरूर करें।
- काले रंग के कपड़े इस दिन धारण न करें।
- किसान भाइयों को हरियाली के इस पर्व पर फसल नहीं काटनी चाहिए।
- सभी को चाहिए बसंत पंचमी के दिन तामसिक भोजन, मांस, मदिरा का त्याग करे।
बसंत पंचमी की कहानी (Basant Panchami katha In Hindi)
शास्त्रों और पुराणों के मुताबिक ब्रह्मा जी को सृष्टिकर्ता माना गया है। हम मनुष्यों की रचना का श्रेय इन्हीं को जाता है।
सृष्टि सृजन के समय ब्रह्मा जी को लगा कि उनसे मनुष्यों की रचना में कुछ कमी रह गई है जिससे वह थोड़े क्षुब्ध रहने लगे।
ब्रह्मा जी ने कारण जानने के लिए भगवान् विष्णु भगवान् की आराधना की।
विष्णुजी ब्रह्मा जी की प्रार्थना सुन तुरंत उनके सन्मुख प्रकट हो गए। ब्रह्मा जी की चिंता जान विष्णु जी ने माँ दुर्गा का आह्वान किया।
मां दुर्गा ने विष्णु जी और ब्रह्मा जी से समस्या पूछी। जिसपर दोनों देवों ने उनसे अपनी समस्या का निवारण करने हेतु विनय की।
तभी मां दुर्गा जी के शरीर से एक शक्ति पुंज प्रकट हुआ जो एक श्वेत रूपी स्त्री थी जिनके हाथों मे एक कमंडल, वीणा और एक पुस्तक थी।
इस दिव्य स्त्री के प्राकट्य से ही मनुष्य योनि को वाणी और बुद्धिमत्ता प्राप्त हो गयी और पूरा संसार सरस हो उठा।
संसार में रस का संचार करने वाली यह देवी माँ सरस्वती के नाम से जानी गई। माँ दुर्गा जी के आदेश से सरस्वती जी ब्रह्मा जी की धर्मपत्नी हुई।
बसंत पंचमी के दिन को हम देवी सरस्वती जी के प्रकट उत्सव के रूप में मनाते हैं। यह दिन ज्ञान और कला की देवी सरस्वती जी के जन्म दिन का है।











