मेहंदीपुर बालाजी में संकट वाले बंधन कैसे कटवाएं? (Bandhan Kaise Katwaye) – मेहंदीपुर बालाजी में एक जगह है तीन पहाड़ी जहां पर पंचमुखी बालाजी, काली माता, शनिदेव और श्मशान भैरव बाबा का मंदिर है। इस जगह पर संकटों के बंधन काटे जाते हैं और लोगों के संकटों को दूर किया जाता है।
इस पोस्ट के माध्यम से हम यह जानेंगे कि संकट वाले बंधन कैसे कटवाएं जाते हैं, तीन पहाड़ी का क्या महत्व है तथा पंचमुखी हनुमान, काली माता और श्मशान भैरव बाबा की पूजा किस क्रम में करनी चाहिए। इस लेख में हम बंधन कटवाने की पूरी प्रक्रिया, आवश्यक सामग्री, सावधानियां तथा परहेज के नियमों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

मेहंदीपुर बालाजी में संकट वाले बंधन कैसे कटवाएं?
मेहंदीपुर बालाजी में बंधन कटवाने की प्रमुख जानकारी
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | तीन पहाड़ी, मेहंदीपुर बालाजी |
| मुख्य मंदिर | पंचमुखी हनुमान, काली माता, श्मशान भैरव |
| प्रारंभिक दरख्वास्त | 10 रुपये |
| बंधन काटने का सामान | 30 से 60 रुपये तक |
| मुख्य उद्देश्य | संकट एवं बंधन निवारण |
| परहेज अवधि | 40 दिन |
आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि तीन पहाड़ जाने का रास्ता बालाजी मंदिर (Balaji Mandir) के ठीक सामने है। यहां जाने के लिए एक बहुत ही छोटा और संकरा मार्ग है जो कि सीढ़ीनुमा बना हुआ है।
तीन पहाड़ी और शिव मंदिर का महत्व
सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने पर सीधे हाथ की ओर एक रास्ता जाता है जो आपको भगवान् महादेव शिव जी के मंदिर की तरफ ले जाता है।
संकट वालों को चाहिए कि वे यहां शिवलिंग पर दूध चढ़ाए और दरख्वास्त (Darkhast) लगाए और अपने संकटों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।
यदि आपको दरख्वास्त लगाने की सही विधि और उसका महत्व नहीं पता है, तो दरख्वास्त मेहंदीपुर बालाजी की क्या है, कब और कैसे लगाते हैं यह लेख भी अवश्य पढ़ें।
सीढ़ियों से आगे की चढ़ायी करने पर आपको यहां मार्ग में कई मंदिर मिलेंगे जिसमें काली माता, शनिदेव और श्मशान भैरव बाबा का मन्दिर प्रमुख है।
यह सभी मंदिर काफी प्राचीन माने जाते हैं और इनका निर्माण इतिहास काफी पुराना बताया जाता है।
इन सभी मंदिरों में आपको एक बार अपनी हाजिरी अवश्य लगानी चाहिए और दर्शनों का पुण्य लाभ लेना चाहिए।
नए व्यक्ति जो ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं उनको चाहिए कि वे लोग यहां थोड़ी सावधानी बरतें क्योंकि यहां अनेक अनेक बहानों से लोग, पंडित और पुजारी आदि धन की मांग करते हैं।
ऐसे लोगों से आपको बचना चाहिए ताकि आपको अज्ञानता में धन हानि न हो सके।
यहीं पहाड़ी पर एक अंजनी माता का मंदिर भी है जहां माता अंजनी की गोद में बाल रूप में बालाजी हनुमान जी महाराज बैठे हुए हैं।
एक मान्यता के अनुसार निःसंतान स्त्रियां यहां संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं। कहा जाता है कि यहां आकर विनती करने से सन्तान प्राप्ति का सुख अवश्य प्राप्त होता है।
तीन पहाड़ी क्षेत्र को मेहंदीपुर बालाजी का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां स्थित विभिन्न मंदिरों में श्रद्धापूर्वक दर्शन और विनती करने के लिए दूर-दूर से भक्त और संकट वाले आते हैं। प्रत्येक मंदिर की अपनी अलग धार्मिक मान्यता है, इसलिए दर्शन करते समय श्रद्धा, संयम और मंदिर की परंपराओं का पालन करना जरूरी समझा जाता है।
पंचमुखी हनुमान मंदिर में दरख्वास्त कैसे लगाएं?
आगे बढ़ने पर अंत में आपको पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन होते हैं। यहाँ पहुंचने पर आपको सर्वप्रथम दस रुपये की एक दरख्वास्त लगानी चाहिए।
यह दरख्वास्त आपको मंदिर के समीप ही प्रसाद की दुकान से मिल जाएगी। इसमें कुछ बताशे और छोटे छोटे लड्डू होते हैं।
इस दरख्वास्त को लेकर पंचमुखी बाबा के मंदिर में जाना चाहिए और वहां पुजारी जी के सामने इसे आगे कर दें।
पुजारी जी आपके दोने के प्रसाद का भोग लगा देंगे और उसमे से दो लड्डू भभूत में लगाकर आपको दे देंगे।
इन दोनों लड्डुओं को आपको खा लेना चाहिए क्योंकि यह प्रसाद होता है। जिसने प्रसाद चढ़ाया होता है ये लड्डू उन्हीं को ग्रहण करना चाहिए।
ऐसा काफी देखने में आता है कि बहुत से लोग लड्डुओं को खाते नहीं है और उतारा करके पीछे की ओर फेंक देते हैं जो कि बिल्कुल गलत है उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।
आपके साथ यदि संकट वाला कोई है तो उन्हें तो ये प्रसाद अवश्य ही ग्रहण करना चाहिए। क्योंकि इसे खाने के बाद पेशी खुल जाती है। मंदिर में अपने संकट निवारणार्थ विनती प्रार्थना करें।
पंचमुखी हनुमान जी के समक्ष अपनी प्रार्थना पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ करें। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई विनती और नियमपूर्वक की गई प्रार्थना भक्त को मानसिक बल प्रदान करती है तथा संकटों से मुक्ति पाने का आत्मविश्वास बढ़ाती है। इसलिए यहां किसी प्रकार की जल्दबाजी न करें और कुछ समय तक शांत चित्त मन से हनुमान जी का स्मरण करें।
मेहंदीपुर बालाजी में काली माता और भैरव बाबा से बंधन कैसे कटवाएं?
मंदिर से वापिस आकर प्रसाद की दुकान से बंधन कटवाने का सामान खरीद लेना चाहिए। इसमें आपको काली माता के भोग के रूप में नारियल और काली चुन्नी मिलती है।
जबकि दूसरी ओर श्मशान भैरव बाबा के भोग के रूप में आपको दुकान से नारियल और लाल चुन्नी मिलेगी।
जिन संकट वालों पर काली की चोकी बतायी गयी हो उन्हें चाहिए कि वे काली माता का भोग ले ताकि उनके बंधन कट सकें।
जिन व्यक्तियों पर अन्य चोकी बंधन आदि बताये गये हों उन्हें भैरव बाबा का बंधन कटवाने का सामान ले लेना चाहिए।
अगर बात की जाए कि बंधन कटवाने का सामान कितने का आता है तो आपको बता दें कि यह सब सामान तकरीबन 30 और 60 रुपये में मिल जाता है। यह सामान आपको मंदिर के सामने की दुकानों से ही मिल जाएगा। उसके लिए आपको कही और अनावश्यक भाग दौड़ नहीं करनी होगी।
मेहंदीपुर बालाजी में संकट वाले बंधन कैसे कटवाएं – बंधन काटने की पूरी प्रक्रिया
अगर आपने काली चुन्नी वाला सामान लिया है तो काली माता के मंदिर (Kali Mata Ka Mandir) में और अगर लाल चुन्नी वाला सामान लिया है तो भैरव बाबा के मंदिर में वहां के पुजारी जी को 10 रुपये के साथ दे दें।
मंदिर के पुजारी आपके बंधन काटने की क्रिया करेंगे। प्रकिया पूरी होने के बाद आपको चाहिए कि आप वहीं मंदिर में बैठे और मन ही मन विनती प्रार्थना कीजिए, ध्यान आदि लगाइए।
ध्यान प्रार्थना आदि करने से पेशी खुलने लगती है और बयान होने शुरू हो जाते हैं। बंधन कटवाने के बाद कुछ समय तक शांत भाव से वहीं बैठकर प्रार्थना करना अनेक श्रद्धालुओं द्वारा वास्तविक अनुभव के आधार पर महत्वपूर्ण माना जाता है।
बंधन कटने के बाद क्या करें?
इन सबके बाद आपको वापिस आ जाना चाहिए और श्री बालाजी महाराज के दर्शन करने चाहिए। इसके बाद समाधि वाले बाबा के स्थान पर जाकर परिक्रमा दीजिए और वही बैठकर ध्यान लगाइए।
यदि आप समाधि वाले बाबा को जलेबी का भोग लगाने की सही विधि, समय और परिक्रमा की पूरी जानकारी जानना चाहते हैं, तो समाधि वाले बाबा का भोग कैसे लगाएं? यह लेख भी अवश्य पढ़ें।
आपके संकट अवश्य कट जाएंगे क्योंकि प्रार्थना आस्था और विश्वास में बहुत बल होता है और इन्ही के बलबूते आप बालाजी महाराज से कोई भी कार्य करा सकते हैं।
तो अब आप जान गए होंगे कि मेहंदीपुर बालाजी में संकट वाले बंधन कैसे कटवाए जाते हैं।
बालाजी से आने के बाद 40 दिन का कठोर परहेज जरूर करें यह बहुत आवश्यक है। ऐसा न करने से संकट लौट आता है।
यदि आप जानना चाहते हैं कि मेहंदीपुर बालाजी से आने के बाद कौन-कौन से नियम और परहेज का पालन करना चाहिए, तो क्या बालाजी महाराज की पूजा में प्याज और लहसुन खाया जा सकता है? यह लेख भी अवश्य पढ़ें।
परहेज की अवधि के दौरान श्रद्धालुओं को बेहद संयमित जीवनशैली अपनाने और मंदिर में बताए गए नियमों का पालन करने का प्रयास करना चाहिए। बंधन कटवाने के बाद भी अपनी दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखना तथा नियम परहेज के साथ भगवान का नियमित स्मरण करते रहना लाभदायक माना जाता है।
मेहंदीपुर बालाजी में संकट वाले बंधन कैसे कटवाएं से जुड़े प्रश्न
1. मेहंदीपुर बालाजी में बंधन कहां कटवाए जाते हैं?
बंधन मुख्य रूप से तीन पहाड़ी स्थित काली माता और श्मशान भैरव बाबा मंदिर में कटवाए जाते हैं।
2. पंचमुखी हनुमान मंदिर में क्या करना चाहिए?
पंचमुखी हनुमान मंदिर में दरख्वास्त लगाकर संकट निवारण की प्रार्थना करनी चाहिए।
3. बंधन काटने का सामान कितने रुपये में मिलता है?
सामान्यतः 30 से 60 रुपये तक का सामान मिलता है, जिसमें नारियल और चुन्नी आदि शामिल होते हैं।
4. बंधन कटवाने के बाद क्या करना चाहिए?
बंधन कटवाने के बाद श्री बालाजी महाराज के दर्शन और समाधि वाले बाबा की परिक्रमा करनी चाहिए।
5. क्या बंधन कटवाने के बाद परहेज करना आवश्यक है?
हाँ, मान्यता अनुसार 40 दिन का परहेज करना चाहिए।
निष्कर्ष
उम्मीद करते हैं कि अब आपको मेहंदीपुर बालाजी में संकट वाले बंधन कैसे कटवाए जाते हैं, तीन पहाड़ी का महत्व, पंचमुखी हनुमान मंदिर में दरख्वास्त लगाने की प्रक्रिया, काली माता एवं श्मशान भैरव बाबा के बंधन तथा परहेज के नियमों की पूरी जानकारी मिल गई होगी। श्रद्धा, विश्वास और मंदिर की परंपराओं का पालन करते हुए ही सभी धार्मिक प्रक्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए।
यदि आप मेहंदीपुर बालाजी धाम में अर्जी, दरख्वास्त, बंधन, भोग, परहेज तथा अन्य सभी महत्वपूर्ण नियमों की विस्तृत जानकारी एक ही स्थान पर पढ़ना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी के नियम अवश्य पढ़ें।
॥ जय श्री बालाजी महाराज ॥
॥ जय श्री प्रेतराज सरकार ॥
॥ जय श्री भैरव बाबा ॥





