मेहंदीपुर बालाजी में संकट वाले बंधन कैसे कटवाऐं? (Bandhan Kaise Katwaye) – मेहंदीपुर बालाजी में एक जगह है तीन पहाड़ी जहां पर पंचमुखी बालाजी, काली माता, शनिदेव और श्मशान भैरव बाबा का मंदिर है। इस जगह पर संकटों के बंधन काटे जाते हैं और लोगों के संकटों को दूर किया जाता है।

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि तीन पहाड़ जाने का रास्ता बालाजी मंदिर (Balaji Mandir) के ठीक सामने है। यहां जाने के लिए एक बहुत ही छोटा और संकरा मार्ग है जो कि सीढ़ीनुमा बना हुआ है।
✔️ तीन पहाड़ी मंदिर मेहंदीपुर बालाजी की जानकारी।
सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने पर सीधे हाथ की ओर एक रास्ता जाता है जो आपको भगवान् महादेव शिव जी के मंदिर की तरफ ले जाता है।
संकट वालों को चाहिए कि वे यहां शिवलिंग पर दूध चढ़ाए और दरख्वास्त (Darkhast) लगाए और अपने संकटों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।
✔️ दरख्वास्त क्या है और कैसे लगाएं?
सीढ़ियों से आगे की चढ़ायी करने पर आपको यहां मार्ग में कई मंदिर मिलेंगे जिसमें काली माता, शनिदेव और श्मशान भैरव बाबा का मन्दिर प्रमुख है।
यह सभी मंदिर काफी प्राचीन माने जाते हैं और इनका निर्माण इतिहास काफी पुराना बताया जाता है।
इन सभी मंदिरों में आपको एक बार अपनी हाजिरी अवश्य लगानी चाहिए और दर्शनों का पुण्य लाभ लेना चाहिए।
नए व्यक्ति जो ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं उनको चाहिए कि वे लोग यहां थोड़ी सावधानी बरतें क्योंकि यहां अनेक अनेक बहानों से लोग, पंडित और पुजारी आदि धन की मांग करते हैं।
ऐसे लोगों से आपको बचना चाहिए ताकि आपको अज्ञानता में धन हानि न हो सके।
यहीं पहाड़ी पर एक अंजनी माता का मंदिर भी है जहां माता अंजनी की गोद में बाल रूप में बालाजी हनुमान जी महाराज बैठे हुए हैं।
एक मान्यता के अनुसार निःसंतान स्त्रियां यहां संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं। कहा जाता है कि यहां आकर विनती करने से सन्तान प्राप्ति का सुख अवश्य प्राप्त होता है।
आगे बढ़ने पर अंत में आपको पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन होते हैं। यहाँ पहुंचने पर आपको सर्वप्रथम दस रुपये की एक दरख्वास्त लगानी चाहिए।
यह दरख्वास्त आपको मंदिर के समीप ही प्रसाद की दुकान से मिल जाएगी। इसमें कुछ बताशे और छोटे छोटे लड्डू होते हैं।
इस दरख्वास्त को लेकर पंचमुखी बाबा के मंदिर में जाना चाहिए और वहां पुजारी जी के सामने इसे आगे कर दें।
पुजारी जी आपके दोने के प्रसाद का भोग लगा देंगे और उसमे से दो लड्डू भभूत में लगाकर आपको दे देंगे।
इन दोनों लड्डुओं को आपको खा लेना चाहिए क्योंकि यह प्रसाद होता है। जिसने प्रसाद चढ़ाया होता है ये लड्डू उन्हीं को ग्रहण करना चाहिए।
ऐसा काफी देखने में आता है कि बहुत से लोग लड्डुओं को खाते नहीं है और उतारा करके पीछे की ओर फेंक देते हैं जो कि बिल्कुल गलत है उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।
आपके साथ यदि संकट वाला कोई है तो उन्हें तो ये प्रसाद अवश्य ही ग्रहण करना चाहिए। क्योंकि इसे खाने के बाद पेशी खुल जाती है। मंदिर में अपने संकट निवारणार्थ विनती प्रार्थना करें।
मंदिर से वापिस आकर प्रसाद की दुकान से बंधन कटवाने का सामान खरीद लेना चाहिए। इसमें आपको काली माता के भोग के रूप में नारियल और काली चुन्नी मिलती है।
जबकि दूसरी ओर श्मशान भैरव बाबा के भोग के रूप में आपको दुकान से नारियल और लाल चुन्नी मिलेगी।
जिन संकट वालों पर काली की चोकी बतायी गयी हो उन्हें चाहिए कि वे काली माता का भोग ले ताकि उनके बंधन कट सकें।
जिन व्यक्तियों पर अन्य चोकी बंधन आदि बताये गये हों उन्हें भैरव बाबा का बंधन कटवाने का सामान ले लेना चाहिए।
अगर बात की जाए कि बंधन कटवाने का सामान कितने का आता है तो आपको बता दें कि यह सब सामान तकरीबन 30 और 60 रुपये में मिल जाता है।
अगर आपने काली चुन्नी वाला सामान लिया है तो काली माता के मंदिर (Kali Mata Ka Mandir) में और अगर लाल चुन्नी वाला सामान लिया है तो भैरव बाबा के मंदिर में वहां के पुजारी जी को 10 रुपये के साथ दे दें।
मंदिर के पुजारी आपके बंधन काटने की क्रिया करेंगे। प्रकिया पूरी होने के बाद आपको चाहिए कि आप वहीं मंदिर में बैठे और मन ही मन विनती प्रार्थना कीजिए, ध्यान आदि लगाइए।
ध्यान प्रार्थना आदि करने से पेशी खुलने लगती है और बयान होने शुरू हो जाते हैं।
इन सबके बाद आपको वापिस आ जाना चाहिए और श्री बालाजी महाराज के दर्शन करने चाहिए। इसके बाद समाधि वाले बाबा के स्थान पर जाकर परिक्रमा दीजिए और वही बैठकर ध्यान लगाइए।
आपके संकट अवश्य कट जाएंगे क्योंकि प्रार्थना आस्था और विश्वास में बहुत बल होता है और इन्ही के बलबूते आप बालाजी महाराज से कोई भी कार्य करा सकते हैं।
तो अब आप जान गए होंगे कि मेहंदीपुर बालाजी में संकट वाले बंधन कैसे कटवाऐं ।
बालाजी से आने के बाद 40 दिन का कठोर परहेज जरूर करें यह बहुत आवश्यक है। ऐसा न करने से संकट लौट आता है।











