सारंगपुर हनुमान (Sarangpur Hanuman) मंदिर, गुजरात

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Sarangpur Hanuman Mandir गुजरात के सबसे प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में से एक है। यह मंदिर श्री कष्ट भंजन देव हनुमान जी के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से यहां आकर हनुमान जी के दर्शन करते हैं, उनके जीवन के दुख, संकट और नकारात्मक परेशानियां दूर होने लगती हैं। इसी वजह से हर साल लाखों लोग इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं।

सारंगपुर हनुमान मंदिर गुजरात के बोटाद जिले के सालंगपुर (Sarangpur/Salangpur) गांव में स्थित है। यहां हनुमान जी का दिव्य दरबार लगा रहता है और लोग उन्हें महाराजाधिराज श्री कष्ट भंजन देव के नाम से पूजते हैं। शनि दोष, भूत-प्रेत बाधा, मानसिक तनाव और जीवन की दूसरी परेशानियों से राहत पाने के लिए भी लोग इस मंदिर में विशेष पूजा करवाते हैं।

अगर आप सारंगपुर हनुमान मंदिर का इतिहास, यहां की मान्यता, दर्शन का समय, कैसे पहुंचे और मंदिर की खास बातें जानना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को आखिर तक जरूर पढ़ें।

सारंगपुर हनुमान मंदिर एक नजर में

मंदिर का नामश्री कष्ट भंजन देव हनुमान मंदिर
स्थानसालंगपुर (सारंगपुर), बोटाद जिला, गुजरात
किस नाम से प्रसिद्ध है?श्री कष्ट भंजन देव
स्थापनाश्री गोपालानंद स्वामी
मुख्य दिनमंगलवार और शनिवार
विशेष मान्यतासंकट, शनि दोष और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति

Salangpur hanuman

Sarangpur Hanuman

इस सारंगपुर धाम की विशेषता यही है कि यहां स्वामी नारायण भगवान् के महान संत ऐश्वर्य मूर्ति गुरुदेव गोपालन स्वामी ने यहां के लोगों के दुःख दूर करने के लिए, कष्टों को दूर करने के लिए, लोगों की व्याधि को दूर करने के लिए एक ऐसे देव को प्रस्थापित किया जिनका नाम कष्ट भंजन हनुमान (Sarangpur Hanuman) जी महाराज है।

यदि आप भारत के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो भारत के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर पोस्ट भी अवश्य पढ़ें, जहाँ देशभर के चमत्कारी और ऐतिहासिक हनुमान मंदिरों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध है।

गुजरात का सारंगपुर महज तीन हजार की आबादी वाला एक छोटा सा गाँव है जो गुजरात के शहर भावनगर से 82 और अहमदाबाद से करीब 153 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जहां आने के लिए बस सेवा और प्राइवेट वीइकल आसानी से उपलब्ध रहते हैं।

सारंगपुर के ज्यादातर लोग स्वामी नारायण संप्रदाय से जुड़े हुए हैं लेकिन यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है कष्ट भंजन देव का अति भव्य मंदिर। किसी राजदरबार की तरह सजे सुन्दर मंदिर के विशाल और भव्य मंडप के बीच 45 किलो सोने और 95 किलो चांदी से बने एक सुन्दर सिंहासन पर पवनपुत्र विराजमान होकर अपने भक्तों की हर मुरादें पूरी करते हैं। इनके शीश पर हीरे जवाहरात का मुकुट है और निकट ही रखी गदा भी स्वर्ण निर्मित है।

सारंगपुर हनुमान मंदिर की खास बातें

सारंगपुर हनुमान मंदिर सिर्फ गुजरात ही नहीं बल्कि पूरे भारत के सबसे प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में गिना जाता है। यहां विराजमान श्री कष्ट भंजन देव के बारे में लोगों का विश्वास है कि वे अपने भक्तों के हर दुख और संकट को दूर करते हैं। यही वजह है कि हर दिन हजारों लोग यहां दर्शन करने आते हैं।

इस मंदिर की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यहां हनुमान जी का दरबार बहुत भव्य है। सोने और चांदी से बने सुंदर सिंहासन पर विराजमान श्री कष्ट भंजन देव के दर्शन करते ही मन को अलग ही शांति मिलती है। मंदिर के अंदर की साफ-सफाई, व्यवस्था और शांत माहौल भी लोगों को बहुत पसंद आता है।

देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी भक्त यहां आते हैं। कई लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा यहां दर्शन करने और धन्यवाद देने भी आते हैं।

सारंगपुर हनुमान मंदिर का इतिहास

तकरीबन 170 साल पुराने इस Sarangpur Hanuman मन्दिर की विशेषता यह है कि इसकी स्थापना भगवान् श्री स्वामी नारायण के अनुयायी परम पूज्य श्री गोपालानन्द स्वामी जी के द्वारा हुई थी।

सारंगपुर और श्री कष्ट भंजन देव का उल्लेख इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। कहा जाता है कि स्वयं भगवान् श्री स्वामी नारायण ने अपने जीवन का कुछ समय यहां बिताया था। आज भी उनकी स्मृतियां यहां के रोम रोम में अंकित हैं।

मन्दिर के मुख्य प्रवेश द्वार के नजदीक आज भी मौजूद है गाँव के उस वक़्त के राजा श्री जीवा खाचर का दरबार जहां बैठकर स्वयं श्री स्वामी नारायण भगवान् ने अपने आशी वचन कहे थे।

मंदिर के इतिहास में उल्लेख है कि नगरवासियों के दुःख दर्द और कष्टों के निवारण के लिए श्री जीवा खाचर के पुत्र श्री वाघा खाचर ने स्वामी श्री गोपालानन्द जी से अनुरोध किया। श्री वाघा खाचर का उनके प्रति भाव देखकर स्वामी जी ने सारंगपुर में भक्तों के कष्ट दूर कर सके वैसे देव की स्थापना करने का वचन दिया।

सम्वत 1905 आश्विन वद पंचमी के दिन हनुमानजी महाराज की एक प्रतिमा की स्थापना की। जो आज कष्ट भंजन श्री हनुमानजी महाराज के स्वरुप में जगप्रसिद्ध है जिसे सारंगपुर हनुमान (Sarangpur Hanuman) भी कहा जाता है।

आज भी मंदिर में आने वाले लोग श्री गोपालानंद स्वामी को बहुत सम्मान के साथ याद करते हैं। माना जाता है कि उनके आशीर्वाद और हनुमान जी की कृपा से यह स्थान धीरे-धीरे पूरे देश में प्रसिद्ध हो गया। समय के साथ यहां आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती गई और आज यह भारत के सबसे ज्यादा दर्शन किए जाने वाले हनुमान मंदिरों में शामिल है।

अति सुन्दर शिल्पकला और नक्काशी वाला यह मंदिर किसी राजदरबार से कम नहीं है और यहां विराजमान हैं श्री कष्ट भंजन देव। अद्भुत शृंगार से सजा दादा का दरबार किसी भी राजा से कम नहीं है। उनके आसपास स्थान मिला है उनकी वानर सेना को।

श्री कष्ट भंजन देव की मान्यता

आश्चर्य की बात यह है कि उनके बाल ब्रह्मचारी के रूप में प्रसिद्ध हनुमान जी के पैरों के नीचे है स्त्री के रूप में प्रतिमा शनि देव की जो कि व्याधि उपाधि के तौर पर जाने जाते हैं और जिन्होंने हनुमान जी से बचने के लिए स्त्री का स्वरूप धारण किया था। और आज भी यहां हनुमान जी की पूजा और अर्चना करने मात्र से शनि दोष दूर हो जाते हैं।

इसी वजह से हर शनिवार यहां भक्तों की सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। कई लोग अपनी कुंडली में शनि दोष या जीवन में लगातार आ रही परेशानियों से राहत पाने की कामना लेकर यहां आते हैं। मंदिर में पूजा करने के बाद लोग हनुमान जी के सामने नारियल और प्रसाद चढ़ाकर अपने परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।

कुछ भक्त तो मात्र शनि प्रकोप से बचने के लिए यहां आते हैं क्योंकि वो तो जानते हैं कि वो शनिदेव से डरते हैं लेकिन शनिदेव अगर किसी से डरते हैं तो वो स्वयं कष्ट भंजन हनुमान जी से।

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कष्ट भंजन हनुमान जी की मंगलवार और शनिवार को विशेष आराधना होती है। भक्त अपने कष्टों और बुरी नजर के दोषों को दूर करने की कामना को लेकर यहां आते हैं। और मंदिर के पुजारी से बजरंग बली की पूजा करवाकर दोषों से मुक्ति पाते हैं। बजरंग बली के इस धाम को अन्य मंदिरों से अलग विशेष स्थान दिलाती है इनके पैरों के नीचे विराजमान शनिदेव की मूर्ति। क्योंकि शनि यहां बजरंग बली के चरणों में स्त्री रूप में दर्शन देते हैं। तभी तो जो भक्त शनि प्रकोप से परेशान होते हैं वे यहां आकर नारियल चढ़ाकर समस्त चिन्ताओं से मुक्ति पा जाते हैं।

साथ ही यह भी कहा जाता है कि कष्ट भंजन देव के इस दर पर आकर उनके भक्तों की हर पीड़ा हर तकलीफ का इलाज होता है फिर चाहे बात बुरी नजर की हो या किसी भी प्रकार के हठीले रोगों की। हनुमान जी के दरबार में आकर इन सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है। इनके दर्शन मात्र से ही सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।

भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति की मान्यता

विशेष बात यह है कि यहां ज्यादातर श्रद्धालु बुरी आत्माओं और भूत प्रेत जैसी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए आते हैं और यहां उन सबके लिए विशेष पूजा और विधि करवाई जाती है। इस विधि के लिए हर श्रद्धालु को पहले मंदिर से थोड़ी ही दूर पहले स्थित नारायण कुंड में स्नान करना पड़ता है।

हालांकि मंदिर आने वाले सभी लोग इस विशेष पूजा में शामिल नहीं होते। बहुत से भक्त केवल दर्शन, आरती और हनुमान जी का आशीर्वाद लेने के लिए भी आते हैं। अगर आप पहली बार यहां जा रहे हैं तो मंदिर के पुजारियों या ट्रस्ट से सही जानकारी लेकर ही किसी विशेष पूजा में शामिल हों।

राजस्थान में स्थित होरी हनुमान मंदिर भी प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की मान्यता के कारण लोगों के बीच अत्यंत प्रसिद्ध है।

नारायण कुंड का महत्व

नारायण कुंड का भी सारंगपुर के इतिहास में बड़ा महत्व है। कहा जाता है कि स्वयं श्री स्वामी नारायण भगवान् यहां स्नान किया करते थे। एक मान्यता अनुसार यहां स्नान करने वाला कोई मनुष्य हो या कुंड के उपर से गुजरने वाला कोई पक्षी, हर जीव को सारे पापों से मुक्ति मिलती है।

दर्शन और पूजा की जानकारी

बजरंग बली के इस मन्दिर में वैसे तो भक्तों का रोज तांता लगा रहता है। हर रोज करीब तीन से चार हजार श्रद्धालु यहां आते हैं और हर मंगलवार और शनिवार के दिन यह संख्या चार गुना हो जाती है। नारियल, पुष्प और मिठाई का प्रसाद केसरी नंदन को भेंट कर प्रार्थना करते हैं।

अगर आप मंगलवार या शनिवार को दर्शन करने जा रहे हैं, तो सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहता है। इन दोनों दिनों में मंदिर में काफी भीड़ रहती है। सामान्य दिनों में भी सुबह और शाम की आरती के समय भक्तों की संख्या ज्यादा होती है।

मान्यता है कि बजरंग बली के इसी रूप ने शनि के प्रकोप से मुक्त किया इसीलिए यहाँ की गई पूजा से शनि के प्रकोप तत्काल दूर हो जाते हैं। तभी तो दूर दूर से भक्त यहां आते हैं और शनि की दशा से मुक्ति पाते हैं। भक्तों को ऐसा विश्वास है कि केसरी नन्दन के इस रूप में 33 कोटि देवी देवताओं की शक्ति समायी हुई है। इस हनुमान मंदिर के प्रति लोगों को अगाध श्रद्धा है। क्योंकि भक्तों को यहां बजरंग बली के साथ शनि देव का भी आशीर्वाद मिल जाता है। कहते हैं कि कोई भक्त यहां नारियल चढ़ाकर अपनी कामना बोल दे तो उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती। शनि दशा से मुक्ति तो मिलती ही है साथ ही संकट मोचन का रक्षा कवच भी मिल जाता है।

श्री कष्ट भंजन देव की ख्याति सिर्फ गुजरात में ही नहीं ब्लकि पूरी दुनिया में फैली हुई है इसी कारण से देश विदेश से करोड़ों लोग इस मंदिर में दर्शनों के लिए आते हैं।

मंदिर में मिलने वाली सुविधाएं

मंदिर ट्रस्ट और मंदिर की सेवा करते सारे कर्मचारी बखूबी मंदिर की सारी व्यवस्था सम्भालते हैं। मंदिर परिसर के अंदर ही एक भोजनशाला है जहां सारे भक्तों के लिए दिन रात निःशुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है। यहां भक्तों के रहने के लिए मंदिर प्रबंधन ने विशाल और भव्य धर्मशालाएं बनाई है जो सारी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है।

अगर आप दूसरे शहर से आ रहे हैं, तो मंदिर परिसर में रुकने और भोजन की अच्छी व्यवस्था मिल जाती है। यहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। परिवार के साथ आने वाले लोगों के लिए भी यह स्थान काफी सुविधाजनक माना जाता है।

आरती का समय

कष्ट भंजन हनुमान जी के इस मन्दिर में दो बार आरती का विधान है। पहली आरती सुबह 05:30 बजे होती है। आरती से पहले पवनपुत्र का रात्रि का श्रंगार उतारा जाता है फिर नए वस्त्र पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से इनका भव्य श्रंगार किया जाता है और इसके बाद वेद मन्त्रों और हनुमान चालीसा के पाठ के बीच संपन्न होती है हनुमान लला की यह आरती।

आरती समय
प्रातः आरती सुबह 5:30 बजे
सायं आरती मंदिर प्रबंधन द्वारा तय समय पर

प्रसाद और गौशाला

इस मन्दिर के पास में ही एक गौशाला बनाई गई है जहां ऊंची नस्ल की गायों की परिवार के सदस्यों की तरह सेवा की जाती है और उनसे मिलने वाले गौ दूध का इस्तेमाल मंदिर में प्रसाद और भोजन सामग्री बनाने में होता है।

यहां प्रसाद के रूप में सुखड़ी नामक गुजराती मिठाई बनाई जाती है। जो हर किसी को मंदिर के परिसर में बने प्रसाद कक्ष से मिल सकती है।

यहां प्रमुख मंदिर के साथ ही में है भगवान् श्री स्वामी नारायण का बेहद सुन्दर मंदिर जहां उनकी स्मृतियों को आज भी संभालकर रखा गया है। Sarangpur Hanuman मंदिर के परिसर को साफ सुथरा रखने के लिए यहां के कर्मचारी निरंतर कार्यरत रहते हैं। यहाँ का निर्मल एवं स्वच्छ वातावरण भक्त को अपने प्रिय देव के निकट महसूस करवाता है और भक्त अपने आपमे एक सकारात्मक बदलाव पाता है।

यदि आपको प्राचीन और चमत्कारी हनुमान मंदिरों की यात्रा करना पसंद है, तो चित्रकूट हनुमान धारा की महिमा भी अवश्य जानें, जहाँ भगवान हनुमान से जुड़ी पौराणिक मान्यताएँ आज भी जीवंत हैं।

सारंगपुर हनुमान मंदिर कैसे पहुंचे?

सारंगपुर हनुमान मंदिर गुजरात के बोटाद जिले में स्थित है। यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। अहमदाबाद, भावनगर, राजकोट और आसपास के शहरों से नियमित बसें और टैक्सी मिल जाती हैं। अगर आप ट्रेन से आ रहे हैं, तो नजदीकी रेलवे स्टेशन से टैक्सी या बस लेकर मंदिर पहुंच सकते हैं।

सारंगपुर हनुमान मंदिर जाने से पहले ध्यान रखें

  • मंगलवार और शनिवार को मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ रहती है।
  • अगर आराम से दर्शन करना चाहते हैं तो सुबह जल्दी पहुंचें।
  • मंदिर परिसर की साफ-सफाई बनाए रखें और नियमों का पालन करें।
  • प्रसाद और पूजा की सामग्री मंदिर परिसर से भी खरीदी जा सकती है।
  • अगर किसी विशेष पूजा में शामिल होना चाहते हैं तो पहले मंदिर प्रबंधन से जानकारी जरूर लें।

सारंगपुर हनुमान मंदिर से जुड़े सवाल

सारंगपुर हनुमान मंदिर किस राज्य में है?

यह मंदिर गुजरात के बोटाद जिले के सालंगपुर (सारंगपुर) गांव में स्थित है।

सारंगपुर हनुमान मंदिर किस नाम से प्रसिद्ध है?

यह मंदिर श्री कष्ट भंजन देव हनुमान मंदिर के नाम से पूरे देश में प्रसिद्ध है।

क्या यहां शनि दोष से मुक्ति के लिए लोग आते हैं?

हां, ऐसी मान्यता है कि श्री कष्ट भंजन देव के दर्शन और पूजा करने से शनि दोष और कई तरह की परेशानियों से राहत मिलती है।

मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ कब होती है?

मंगलवार और शनिवार को सबसे ज्यादा भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

क्या मंदिर में रहने और भोजन की व्यवस्था है?

हां, मंदिर ट्रस्ट की ओर से भक्तों के लिए धर्मशाला और निःशुल्क भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है।

सारंगपुर हनुमान मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

यह मंदिर श्री कष्ट भंजन देव की चमत्कारी मान्यताओं, शनि दोष से जुड़ी आस्था और भव्य दरबार के कारण पूरे भारत में प्रसिद्ध है।

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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