श्री मायापती हनुमान मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर का एक प्रसिद्ध हनुमान मंदिर है। यहां भगवान हनुमान दक्षिणमुखी स्वरूप में विराजमान हैं। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से पूजा करने पर शनि दोष, जीवन की परेशानियां और संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित यह मंदिर पूरे देश से आने वाले भक्तों की आस्था का केंद्र है। अगर आप श्री मायापती हनुमान मंदिर का इतिहास, मान्यता, पूजा, धार्मिक महत्व और दर्शन की जानकारी चाहते हैं, तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें।
श्री मायापती हनुमान मंदिर एक नजर में
| मंदिर का नाम | श्री मायापती हनुमान मंदिर |
|---|---|
| स्थान | उज्जैन, मध्य प्रदेश |
| मुख्य देवता | भगवान हनुमान |
| विशेष पहचान | दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा |
| प्रमुख मान्यता | शनि दोष से राहत और संतान प्राप्ति की कामना |
| विशेष दिन | मंगलवार, शनिवार और अमावस्या |
श्री मायापती हनुमान मंदिर उज्जैन, यहां बजरंग बली निःसंतानो की झोली भर देते हैं। उज्जैन जहां हनुमान जी ने एक राक्षस की माया को जानकर उसका वध ही नहीं किया बल्कि बजरंग बली कहलाए मायापती हनुमान।
क्षिप्रा नदी के तट पर बसा शहर उज्जैन – राजा विक्रमादित्य के राज्य की राजधानी और कालिदास की नगरी कही जाने वाली धार्मिक स्थली उज्जैन।

यहां कण कण पुकारता है महाकाल का नाम । But, महाकाल की इस नगरी में मौजूद है पवन पुत्र का एक ऐसा धाम जिन्हें भक्त पुकारते हैं मायापती हनुमान के नाम से।
उज्जैन के आगर रोड के पास संकट मोचन के इस मंदिर में भक्तों को भगवान् के भव्य और विशाल रूप के ही दर्शन नहीं होते बल्कि उनकी मनोकामनाओं को भी यहां मिलता है बजरंग बली का आशीर्वाद।
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श्री मायापती हनुमान मंदिर की खास बातें
मायापती हनुमान मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं, दक्षिणमुखी प्रतिमा और विशेष धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं।
मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष भीड़ रहती है। कई श्रद्धालु लगातार पांच मंगलवार तक यहां पूजा करके भगवान हनुमान का आशीर्वाद प्राप्त करने की मान्यता निभाते हैं।
महावीर के दरबार में आकर शीश नवाने और पांच मंगलवार का व्रत करने भर से हनुमान जी लगा देते हैं अपने भक्तों की जीवन नैया को पार।
श्री मायापती हनुमान मंदिर का इतिहास
श्री मायापती हनुमान मंदिर का इतिहास भगवान हनुमान और कालनेमि राक्षस से जुड़ी प्रसिद्ध कथा से जुड़ा माना जाता है। इसी कथा के कारण यहां भगवान हनुमान को मायापती हनुमान के नाम से पूजा जाता है।
मायापती हनुमान का स्वरूप जितना दिव्य है उतनी ही रोचक हनुमान जी के यहां प्रकट होने की कहानी भी है।
मायापती हनुमान मंदिर की मान्यता
भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से पूजा करने पर भगवान हनुमान जीवन की परेशानियों को दूर करते हैं। हालांकि यह पूरी तरह लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास पर आधारित मान्यता है।
कहते हैं कि लंका युध्द के दौरान जब लक्ष्मण जी को बाण और हनुमान जी समुद्र को लांघ कर संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे तब रावण ने उनका रास्ता रोकने के लिए कालनेमि राक्षस को भेजा।
कालनेमि राक्षस मायावी विद्या मे निपुण था जिससे वो कोई भी वेश धारण कर सकता था।
कालनेमि बजरंग बली का रास्ता रोकने के लिए ब्राह्मण का वेश धारण कर उनके पास पहुंचा लेकिन पवन पुत्र तुरंत ही उस राक्षस की माया समझ गए और कालनेमि का वध कर दिया।
तभी सभी देवताओं ने बजरंग बली को आशीर्वाद दिया कि अबसे आप मायापती के नाम से भी जाने जाएंगे। उसी प्रतिरूप मे मायापती के नाम से हनुमान जी इस मंदिर में विराजमान हैं।
कहते हैं कि साढ़े साती से पीड़ित जातकों के लिए ये मंदिर किसी वरदान से कम नहीं है। बजरंग बली का यह रूप करता है शनि दोष का नाश। फिर चाहे Whether ढैय्या हो या साढ़े साती।
हनुमान के नाम की एक छोटी सी पूजा और तेल का एक छोटा सा दीपक जलाने से भक्तों को मिलती है शनिदेव के प्रकोप से मुक्ति।
संतान प्राप्ति की मान्यता
इसी मान्यता के कारण दूर-दूर से दंपत्ति यहां दर्शन करने आते हैं। मनोकामना पूरी होने पर कई लोग दोबारा मंदिर आकर भगवान हनुमान का धन्यवाद भी करते हैं।
यही नहीं जिनकी सन्तान नहीं होती उनकी यहां गोद भराई होती है और सन्तान प्राप्ति के लिए उन्हें लगाया जाता है खास प्रसाद का भोग।
राजस्थान में भी एक ऐसा प्रसिद्ध हनुमान मंदिर है जहां भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। इसके बारे में श्री बोरवट हनुमान मंदिर की इस पोस्ट में विस्तार से पढ़ें।
विशेष पूजा और प्रसाद
हर अमावस्या के दिन हवन मे नारियल की आहुति दी जाती है जिससे भक्तों की विनती पूर्ण होती है और मायापती हनुमान जी को लगाया जाता है मोतीचूर के लड्डू और चूरमे का भोग जो इन्हें बेहद प्रिय है।
कहा जाता है कि इनकी पूजा से कई निःसंतान दंपत्ति को सन्तान की प्राप्ति हुई है। उज्जैन के ये मायापती हनुमान जी दक्षिण मुखी हैं जिसे समस्त दुखों का नाश करने वाला माना जाता है।
मंगलवार और शनिवार का महत्व
इन दोनों दिनों मंदिर में सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रहती है। कई लोग परिवार की सुख-शांति और अच्छी सेहत की कामना लेकर भी यहां आते हैं।
मान्यता है कि बजरंग बली के इस दरबार में ध्वजा चढ़ाने से हर तरह की बलाओं को दूर किया जा सकता है। मंगलवार और शनिवार को मायापती हनुमान की पूजा और अर्चना का विशेष महत्व है।
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कहते हैं बजरंग बली के इस धाम मे होने वाली आरती का हर कोई गवाह बनना चाहते हैं और जिसने भी इस मौके का लाभ उठा लिया उसके जीवन में खुशियो का लग जाता है अंबार।
हनुमान जी के चमत्कारी मंदिरों में सारंगपुर हनुमान मंदिर का भी विशेष स्थान माना जाता है, जहां देशभर से लाखों भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं।
श्री मायापती हनुमान मंदिर कैसे पहुंचे?
श्री मायापती हनुमान मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में आगर रोड के पास स्थित है। उज्जैन रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। स्थानीय ऑटो, टैक्सी और ई-रिक्शा भी उपलब्ध रहते हैं।
मंदिर जाने से पहले ध्यान रखें
- मंगलवार और शनिवार को सबसे अधिक भीड़ रहती है।
- सुबह के समय दर्शन करना सुविधाजनक रहता है।
- मंदिर परिसर की साफ-सफाई और नियमों का पालन करें।
- पूजा सामग्री मंदिर के बाहर की दुकानों से आसानी से मिल जाती है।
- विशेष पूजा की जानकारी मंदिर प्रबंधन से पहले ले सकते हैं।
श्री मायापती हनुमान मंदिर से जुड़े सवाल
श्री मायापती हनुमान मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में आगर रोड के पास स्थित है।
मायापती हनुमान मंदिर किस लिए प्रसिद्ध है?
यह मंदिर दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा, शनि दोष से जुड़ी मान्यता और संतान प्राप्ति की आस्था के लिए प्रसिद्ध है।
भगवान हनुमान को मायापती क्यों कहा जाता है?
मान्यता है कि कालनेमि राक्षस की माया को पहचानकर उसका वध करने के बाद भगवान हनुमान को मायापती नाम मिला।
क्या यहां संतान प्राप्ति की मान्यता है?
स्थानीय मान्यता के अनुसार कई दंपत्ति संतान की कामना लेकर यहां दर्शन करने आते हैं। यह धार्मिक आस्था पर आधारित विश्वास है।
मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ कब रहती है?
मंगलवार, शनिवार और अमावस्या के दिन यहां सबसे अधिक भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
क्या यहां विशेष पूजा होती है?
हां, अमावस्या पर हवन, नारियल की आहुति और भगवान हनुमान को मोतीचूर के लड्डू तथा चूरमे का भोग लगाने की परंपरा है।
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