Home Hanuman Temples करमनघाट हनुमान मंदिर हैदराबाद – यहां सिपाही बनकर खड़े हैं बजरंग बली

करमनघाट हनुमान मंदिर हैदराबाद – यहां सिपाही बनकर खड़े हैं बजरंग बली

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करमनघाट हनुमान मंदिर हैदराबाद – यहां सिपाही बनकर खड़े हैं बजरंग बली॥ भक्तों आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जहां हनुमान जी सिपाही बनकर खड़े हैं। और बताएंगे कि करमनघाट हनुमान मंदिर कहां है, इसकी कहानी व इतिहास क्या है साथ ही क्यों हैरान करता है इस मंदिर का विधान? आपको यह भी बताएंगे कि क्यों यहां सिपाही बनकर खड़े हैं वीरवर हनुमान।

करमनघाट हनुमान मंदिर हैदराबाद karmanghat hanuman mandir hyderabad

हैदराबाद के करमन घाट मे है एक ऐसा धाम जहां अपने ही मंदिर की रक्षा के लिए संकट मोचन बन गए सिपाही। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां बजरंग बली मंगलवार की नहीं बल्कि रविवार की पूजा से होते हैं प्रसन्न।

हैदराबाद के करमनघाट हनुमान – जितना भव्य बजरंग बली का दरबार, उतना ही सम्मोहक उनका रूप। एक झलक देखने के बाद मन-मंदिर में जिसकी छवि बस जाए ऐसा ही है हैदराबाद के करमनघाट का स्वरूप। पवन पुत्र का यह रूप जितना सुदर्शन है उतनी ही इनकी कहानी दिलचस्प है।

करमन घाट हनुमान मंदिर कहा है और करमन घाट हनुमान मंदिर की क्या कहानी है?

कहते हैं कि हैदराबाद के रंगा रेड्डी जिले में स्थित करमनघाट की यह अनोखी मूरत स्वयंभू है। कहानी सन 1142 की है जब काकतीय वंश के राजा रुद्र शिकार को निकले और शिकार करते करते जब वो इतना थक गए तो वो आराम करने लगे।

तभी कहीं से शेर की आवाज आयी और राजा उस ओर शिकार करने बढ़े। लेकिन आगे चलने पर उन्हें शेर तो नहीं दिखा भगवान् की मूर्ति जरूर दिखाई दी। तभी कहीं से आवाज आयी कि मंदिर बनाओ और भगवान् को स्थापित करो। कहते हैं कि तभी से यह मंदिर यहां स्थापित है।

हनुमान जी यहां सैनिक रूप मे क्यों विराजमान हैं?

ये तो है हनुमान जी के स्वयं भू होने की कहानी लेकिन हनुमान जी यहां सैनिक रूप में क्यों विराजमान हैं? यह कहानी जानने के लिए आपको चलना होगा मुग़लों के शासनकाल में।

कहते हैं कि औरंगजेब जब दुनिया पर कब्जा जमाने चला तो हैदराबाद के इस जिले की तरफ भी उसके कदम बढ़े। उसके सैनिक सारे मंदिरों को तहस नहस कर रहे थे। लेकिन जब वो इस मंदिर को तोड़ने लगे तो ये टूटा ही नहीं।

फिर औरंगजेब खुद चल कर इस मंदिर की तरफ आया और दरवाजा तोड़कर अंदर जाने की कोशिश करने लगा। तभी अंदर से एक आवाज आयी, “करमनघट” यानि मन को मजबूत बनाओ।

ऐसा सुनकर औरंगजेब ने वैसा ही किया और मंदिर के अंदर गया। लेकिन वहां से निकलकर फिर वो उस मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा पाया और चुपचाप निकल गया। कहते हैं कि तभी से इस मंदिर को करमनघाट हनुमान मंदिर कहा जाता है।

हैरान करता इस मंदिर की पूजा का विधान।

इस मंदिर का इतिहास जितना पुराना है उतना ही यहां चमत्कार के किस्से मशहूर हैं। लेकिन यहां सबसे ज्यादा हैरान करता है पवन पुत्र की पूजा का विधान। क्योंकि यहां शनिवार या मंगलवार को नहीं बल्कि रविवार को पूजे जाते हैं बजरंग बली वो भी नारियल से।

पूजा का विधान हो या चढ़ावा हनुमान जी का यह रूप हर तरह से सबसे अलग और सबसे खास है। तभी तो दूर दूर से लोग पवन पुत्र के इस मनोहारी और चमत्कारी रूप के दर्शन करने चले आते हैं और, भगवान् की एक झलक पाकर और कई कामनाएँ पूरी होने का वरदान ले जाते हैं।

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