सालासर बालाजी धाम राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में से एक है। यहां लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं। यदि आप भी जानना चाहते हैं कि सालासर बालाजी को क्या चढ़ाना चाहिए, तो इस लेख में आपको प्रसाद, भोग और पूजा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
अगर आप भगवान हनुमान की पूजा, भक्ति, कथाओं, चालीसा, मंदिरों और धार्मिक परंपराओं के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो हनुमान भक्ति, कथा और साधना: सम्पूर्ण मार्गदर्शिका भी जरूर पढ़ें।
| विषय | सालासर बालाजी को क्या चढ़ाना चाहिए |
|---|---|
| मुख्य प्रसाद | चूरमा, लड्डू, पेड़े |
| विशेष भेंट | सिंदूर, चमेली का तेल, नारियल, ध्वजा |
| प्रमुख दिन | मंगलवार, शनिवार और पूर्णिमा |
| स्थान | सालासर धाम, चूरू, राजस्थान |

सालासर बालाजी को क्या चढ़ाना चाहिए?
हनुमान जी जिन्हें बालाजी महाराज के नाम से भी जाना जाता है और पूरे भारत वर्ष में बालाजी के दो ही मंदिर प्रसिद्ध है एक आंध्रप्रदेश में तिरुपति बालाजी का मन्दिर और राजस्थान का सालासर बालाजी का मंदिर ।
सालासर बालाजी
| 01 | मन्दिर का मुख्य नाम | श्री सालासर बालाजी महाराज मंदिर ![]() |
| 02 | किस संप्रदाय का मंदिर है? | हिन्दू सनातन धर्म |
| 03 | उद्देश्य | सर्व कल्याण और मनोकामना पूर्ति के लिए। |
| 04 | मुख्य आराध्य देव | हनुमान जी। |
राजस्थान के हनुमानजी का धाम सालासर के चूरू जिले में स्थित है। इस धाम के बारे में कहा जाता है कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।
यहां सालासर बालाजी सभी की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। भक्त मनोकामना पूरी होने पर अपना आभार प्रकट करने के लिए मंदिर में उनका मनपसंद प्रसाद और सामग्री भेंट करते हैं।
सालासर सालासर के भवन में बजरंग बली को कुछ खास सामग्री चढ़ायी जाती है।
माना जाता है कि ये सामग्री चढ़ाने से हनुमान जी प्रसन्न हो जाते हैं और इससे शनि दोष से भी मुक्ति मिलती है।
यदि आप जानना चाहते हैं कि बालाजी महाराज स्वयं को श्रीराम का सेवक मानते थे या माता सीता का, तो बालाजी महाराज श्रीराम के सेवक थे या सीता के लेख भी अवश्य पढ़ें।
सालासर बालाजी को कौन सा प्रसाद चढ़ाया जाता है?
बालाजी को कुछ भी चढ़ा सकते हो उसमें चूरमा, लड्डू, पेड़े आदि कोई भी मनपसंद मिठाई चढ़ा सकते हैं। यहां बालाजी महाराज को सबसे प्रिय भोग चूरमा और लड्डू है।
यदि आप हनुमान जी की उपासना में बजरंग बाण का पाठ भी करते हैं, तो बजरंग बाण का पाठ किन लोगों को नहीं करना चाहिए लेख पढ़कर आवश्यक नियम और सावधानियां भी जान लें।
सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाने का महत्व
बालाजी महाराज को यहां विशेष तौर से सिन्दूर चढ़ाया जाता है। सिंदूर को चमेली के तेल के साथ चढ़ाया जाता है।
यहां साल में दो से तीन बार मेले लगते हैं जिसमें लाखों लोग दर्शनों के लिए यहां आते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं।
सालासर बालाजी को क्या चढ़ाना चाहिए – मनोकामना पूर्ति के लिए क्या भेंट करें?
मेलों के दिनों में लोग सिन्दूर, चूरमा, लड्डू, ध्वजा, नारियल की भेंट बालाजी को अर्पित करते हैं।
सालासर में वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंगल, शनि और प्रत्येक पूर्णिमा को दर्शनार्थी विशेष रूप से यहां आते हैं।
सालासर बालाजी मंदिर के प्रमुख मेले
यहां विशेष रूप से प्रतिवर्ष तीन बड़े मेले लगते हैं। इस दौरान लोग हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें सिन्दूर आदि चढ़ाते हैं।
इसके अलावा और भी सामग्री है जो विशेष रूप से बजरंग बली को चढ़ायी जाती है इससे बालाजी शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण कर देते हैं।
तो दोस्तों अगर आप भी सालासर जा रहे हैं तो बतायी गयी सामग्री साथ लेते जाए। आपकी हर मनोकामना महावीर अवश्य ही पूरी करेंगे।
सालासर बालाजी का यह धाम पूरे देश में प्रसिद्ध है। मेलों के दौरान यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस अवसर पर छोटा सा सालासर ग्राम महाकुंभ से कम नहीं लगता।
यदि आप सालासर धाम के इतिहास और स्थापना के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो सालासर धाम के 265वें स्थापना दिवस पर आधारित हमारा विशेष लेख भी पढ़ें।
यहां होने वाले चमत्कारों के कारण ही लोगों की आस्था इस मन्दिर के प्रति बढ़ती ही जा रही है।
कीर्तन सुनने के लिए आते हैं पक्षी
इस भवन में हर शाम एक चमत्कार होता है जोकि हर किसी को हैरान कर देता है। यहां मान्यता के अनुसार हर शाम जब भी मंदिर में कीर्तन शुरू होता है न जाने कहाँ से चिडियों का एक झुंड मंदिर परिसर के कीर्तन में शामिल होने आ जाता है।
आज तक इस बात का कोई पता नहीं लगा पाया कि ये पक्षी कहां से आते हैं और यही नहीं चौकाने वाली बात तो यह है कि जैसे ही कीर्तन समाप्त होता है ये झुंड खुदबखुद गायब हो जाता है।
आज तक इसका रहस्य कोई नहीं जान पाया। मंदिर के पुजारी की मानें तो यह हनुमानजी की ही माया है।
सालासर बालाजी को क्या चढ़ाना चाहिए में प्रसाद चढ़ाने का महत्व
मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ सालासर बालाजी को चूरमा, लड्डू, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और कष्टों से मुक्ति के लिए बालाजी महाराज के चरणों में भेंट अर्पित करते हैं।
सालासर बालाजी को क्या चढ़ाना चाहिए से जुड़े प्रश्न
सालासर बालाजी को सबसे प्रिय प्रसाद कौन सा है?
सालासर बालाजी को चूरमा और लड्डू का भोग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है।
सालासर बालाजी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?
हनुमान जी को सिंदूर अति प्रिय माना जाता है, इसलिए भक्त चमेली के तेल के साथ सिंदूर अर्पित करते हैं।
सालासर बालाजी में सबसे अधिक भीड़ कब होती है?
मंगलवार, शनिवार, पूर्णिमा और मेलों के दौरान यहां सबसे अधिक श्रद्धालु आते हैं।






जय हो सकंट मोचन हनुमान जी महाराज सुन लो मेरी पुकार बजंरग वली
जय हो सकंट मोचन हनुमान जी महाराज सुन लो मेरी पुकार बजंरग वली