क्या बालाजी महाराज की पूजा में प्याज और लहसुन खाना चाहिए? यह प्रश्न लगभग हर उस श्रद्धालु के मन में आता है जो मेहंदीपुर बालाजी महाराज में श्रद्धा रखता है या नियमित रूप से उनकी पूजा करता है। विशेष रूप से जो भक्त अर्जी, दरख्वास्त या परहेज का पालन करते हैं, उनके मन में प्याज और लहसुन को लेकर अनेक प्रकार के प्रश्न उठते हैं।
जैसे— क्या बालाजी महाराज के दर्शन करके लौटने के बाद 11, 21 या 41 दिनों के परहेज में प्याज और लहसुन खाना चाहिए? यदि घर में नियमित रूप से बालाजी महाराज की पूजा होती है तो क्या घर में प्याज-लहसुन बनाया जा सकता है? यदि घर में नहीं बना सकते तो क्या होटल, रेस्तरां या ढाबे में इसका सेवन किया जा सकता है? क्या केवल मंगलवार और शनिवार को ही परहेज रखना चाहिए या अन्य दिनों में भी इसका ध्यान रखना चाहिए?
इन सभी प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए हमने वर्षों तक मेहंदीपुर बालाजी धाम के विद्वान पुजारियों, विभिन्न शहरों में लगने वाले बालाजी महाराज के दरबारों के संचालकों तथा अनुभवी श्रद्धालुओं से चर्चा की। इस लेख में उन्हीं अनुभवों और प्रचलित मान्यताओं के आधार पर विस्तार से जानकारी दी गई है।
| विषय | बालाजी की पूजा में प्याज और लहसुन |
|---|---|
| मुख्य प्रश्न | क्या बालाजी महाराज की पूजा में प्याज और लहसुन खाना चाहिए? |
| पूजा में आहार | सात्विक भोजन को प्राथमिकता |
| परहेज अवधि | 11, 21 या 41 दिन (श्रद्धालु की साधना एवं नियम के अनुसार) |
| नियमित पूजा | प्याज, लहसुन, मांस एवं मदिरा से परहेज रखना उचित माना जाता है |
| होटल या बाहर का भोजन | यथासंभव बिना प्याज-लहसुन वाला सात्विक भोजन ग्रहण करें |
| संबंधित विषय | परहेज, सात्विक आहार एवं बालाजी महाराज की पूजा |
तो आइए जानते हैं कि ऊपर लिखे प्रश्नों के अनुसार क्या बालाजी महाराज की पूजा में प्याज और लहसुन खाना चाहिए या नहीं। हमने कई वर्षों से विभिन्न स्रोतों के माध्यम से इस विषय को समझने का प्रयास किया। घाटा मेहंदीपुर बालाजी धाम के पुजारियों, विभिन्न शहरों में लगने वाले बालाजी महाराज के दरबारों के संचालकों तथा अनेक अनुभवी श्रद्धालुओं से चर्चा करके हमने प्याज और लहसुन खाने अथवा न खाने से जुड़े उत्तर जानने की कोशिश की।
यहाँ दी गई जानकारी मुख्य रूप से मेहंदीपुर बालाजी धाम में प्रचलित मान्यताओं, श्रद्धालुओं के अनुभवों तथा सनातन धार्मिक परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग संत, महंत अथवा परंपराओं के मत में कुछ अंतर संभव है, इसलिए श्रद्धालु अपने गुरु या परंपरा के निर्देशों का भी पालन कर सकते हैं।
प्याज और लहसुन खाएं या नहीं?
हमारा पहला प्रश्न है कि क्या बालाजी महाराज की पूजा-पाठ में प्याज और लहसुन खा सकते हैं?
हिन्दू सनातन धर्म के अनुसार प्याज और लहसुन को तामसिक भोज्य माना गया है। कहा जाता है कि यह काम और क्रोध को बढ़ाने वाले होते हैं। अनेक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इनकी उत्पत्ति राक्षसी रक्त से मानी गई है। यही कारण है कि इन्हें भगवान के भोग में नहीं चढ़ाया जाता और व्रत-उपवास के दौरान भी इनका सेवन नहीं किया जाता।
हनुमान जी स्वयं शाकाहारी माने जाते हैं। अतः उनकी पूजा करते समय तामसिक आहार का सेवन निषिद्ध बताया जाता है।
उपरोक्त जानकारी के आधार पर यही कहा जा सकता है कि जिस प्रकार हनुमान जी महाराज पूर्ण रूप से शुद्ध, सात्विक और पवित्र देव माने जाते हैं तथा जिनके हृदय में स्वयं श्री सीताराम का निवास बताया जाता है, उसी प्रकार उनके भक्तों को भी यथासंभव सात्विक जीवन अपनाने का प्रयास करना चाहिए। इसलिए बालाजी महाराज की नियमित पूजा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्याज और लहसुन का त्याग करना अधिक उचित माना जाता है।
परहेज के दौरान प्याज और लहसुन खाना चाहिए या नहीं?
इस प्रश्न के उत्तर में हम बताना चाहेंगे कि परहेज में सभी स्वाद प्रिय भोजन जैसे उड़द, चावल, दूध, दही और अमचूर आदि का परहेज करना पड़ता है। अब आप यह मत सोचिएगा कि उड़द, चावल और दूध-दही भी तो सात्विक हैं। जी हाँ, बिल्कुल हैं, लेकिन मेहंदीपुर बालाजी धाम की प्रचलित मान्यताओं के अनुसार चावल का भोग श्री प्रेतराज सरकार को तथा उड़द का भोग श्री भैरव बाबा को लगाया जाता है। इसी कारण परहेज के दौरान इनका सेवन नहीं किया जाता।
इसी प्रकार दूध और दही सफेद रंग के होते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार संकट वाले श्रद्धालुओं को परहेज के समय इन चीजों से भी दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
जब परहेज में इतनी सात्विकता का पालन किया जाता है, तो दुर्गंध पैदा करने वाले प्याज और लहसुन का सेवन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। इसलिए यदि आपने 11, 21 या 41 दिनों का परहेज रखा है, तो यथासंभव प्याज और लहसुन से भी दूर रहना ही उचित माना जाता है।
यदि आप परहेज के साथ-साथ अर्जी लगाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बताए गए अन्य नियम और सावधानियाँ भी जानना चाहते हैं, तो अर्जी से जुड़ी 16 बातें भी अवश्य पढ़ें।
अब आते हैं हम अगले प्रश्न पर।
नियमित पूजा करने वाले भक्तों के लिए नियम
अगर नियमित तौर पर बालाजी महाराज की पूजा घर पर की जाती हो तो क्या घर में प्याज लहसुन आदि खायी जा सकती है? अगर घर में नहीं बना सकते तो क्या घर के बाहर जैसे होटल, रेस्तरां या ढाबे आदि में प्याज लहसुन खा सकते हैं?
उत्तर :- भाई, अगर आपके घर पर नियमित तौर पर बालाजी महाराज की पूजा होती है तो यह तो कहा जा सकता है कि आप बालाजी महाराज के सेवक हैं और वही आपके आराध्य हैं। फिर तो आपको कहीं न कहीं से यह भी पता ही चल गया होगा कि बाबा की पूजा की पहली शर्त यही मानी जाती है कि पूजा के दौरान प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से दूर रहना चाहिए।
अगर आप नियमित रूप से श्री बालाजी महाराज की पूजा करते हैं और पूजा की सही विधि जानना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी महाराज की पूजा कैसे करें यह लेख भी अवश्य पढ़ें।
क्या होटल या बाहर का भोजन खा सकते हैं?
अब सवाल यह है कि क्या होटल, ढाबे या रेस्तरां में प्याज और लहसुन खा सकते हैं? भाई, अगर आपने बालाजी महाराज को अपना इष्ट माना है तो फिर कोशिश यही होनी चाहिए कि घर हो या घर के बाहर, जहाँ तक संभव हो सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
हाँ, कई बार ऐसी परिस्थिति भी आ जाती है जब कोई व्यक्ति घर से दूर होता है और होटल या ढाबे का भोजन उसकी मजबूरी बन जाता है। ऐसे समय में यथासंभव पहले ही पूछ लें कि सब्जी या भोजन में प्याज-लहसुन का प्रयोग तो नहीं किया गया है। थोड़ा सा प्रयास भी आपको भीतर से संतोष देगा।
कभी-कभी अनजाने में ऐसी वस्तु खा ली जाती है जिसमें बाद में पता चलता है कि प्याज या लहसुन था। ऐसी स्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है। दरखास्त लगाकर और श्रद्धापूर्वक श्री बालाजी महाराज से अपनी भूल के लिए क्षमा याचना करें। यदि आप दरख्वास्त लगाने की पूरी प्रक्रिया जानना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी की दरख्वास्त कैसे लगाते हैं यह लेख भी पढ़ सकते हैं।
मंगलवार और शनिवार को प्याज लहसुन खाना चाहिए या नहीं?
क्या मंगलवार और शनिवार को छोड़कर अन्य दिन प्याज आदि खायी जा सकती हैं? और अगर घर पर नियमित तौर पर बालाजी महाराज की पूजा नहीं होती है तो क्या प्याज लहसुन खा सकते हैं?
तो भाई, अब तक हमने आपको इतने कारण बता दिए हैं कि बालाजी महाराज की पूजा में प्याज और लहसुन का सेवन क्यों नहीं करना चाहिए। अब इसका उत्तर आप स्वयं भी आसानी से दे सकते हैं।
अगर आप श्री बालाजी महाराज को अपना आराध्य मानते हैं और उनकी पूजा श्रद्धा एवं विश्वास के साथ करते हैं, तो फिर केवल मंगलवार और शनिवार ही नहीं, बल्कि पूजा के समय यथासंभव सात्विक आहार का ही पालन करना अधिक उचित माना जाता है।
हाँ, जिन लोगों के घर पर नियमित रूप से बालाजी महाराज की पूजा नहीं होती, उनके लिए भी यही कहा जा सकता है कि यदि वे पूजा, व्रत, अर्जी, दरख्वास्त या किसी विशेष साधना के समय बाबा का स्मरण कर रहे हैं, तो उस अवधि में सात्विक भोजन करना ही श्रेष्ठ माना गया है।
यदि आप मेहंदीपुर बालाजी धाम में अर्जी, दरख्वास्त, पूजा, परहेज तथा अन्य महत्वपूर्ण नियमों की पूरी जानकारी एक ही स्थान पर पढ़ना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी के नियम अवश्य पढ़ें।
जय बाबा की।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
क्या बालाजी महाराज की पूजा में प्याज और लहसुन खा सकते हैं?
यदि आप नियमित रूप से श्री बालाजी महाराज की पूजा करते हैं, तो प्रचलित मान्यताओं के अनुसार सात्विक भोजन करना और प्याज-लहसुन से परहेज रखना अधिक उचित माना जाता है।
क्या 11, 21 या 41 दिनों के परहेज में प्याज और लहसुन खा सकते हैं?
नहीं। मेहंदीपुर बालाजी धाम की प्रचलित मान्यताओं के अनुसार परहेज के दौरान प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए तथा सात्विक भोजन का ही पालन करना चाहिए।
अगर गलती से प्याज या लहसुन खा लिया जाए तो क्या करें?
यदि भूलवश ऐसा हो जाए तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धापूर्वक श्री बालाजी महाराज से अपनी भूल के लिए क्षमा याचना करें और भविष्य में अधिक सावधानी रखने का प्रयास करें।
क्या होटल या ढाबे में बिना प्याज-लहसुन का भोजन कर सकते हैं?
हाँ। यदि आप घर से बाहर हैं, तो यथासंभव ऐसा भोजन चुनने का प्रयास करें जिसमें प्याज और लहसुन का प्रयोग न किया गया हो।
क्या केवल मंगलवार और शनिवार को ही प्याज-लहसुन छोड़ना चाहिए?
यदि आप नियमित रूप से श्री बालाजी महाराज की पूजा करते हैं, तो केवल मंगलवार और शनिवार ही नहीं, बल्कि पूजा और साधना के समय सात्विक आहार का पालन करना अधिक उचित माना जाता है।
निष्कर्ष
उम्मीद करते हैं कि अब आपको यह अच्छी तरह समझ में आ गया होगा कि बालाजी महाराज की पूजा में प्याज और लहसुन खाना चाहिए या नहीं। हमारा उद्देश्य किसी पर अपनी बात थोपना नहीं है, बल्कि मेहंदीपुर बालाजी धाम में प्रचलित मान्यताओं और वर्षों से चली आ रही परंपराओं की जानकारी आप तक पहुँचाना है।
अगर आप श्री बालाजी महाराज को अपना आराध्य मानते हैं और उनकी पूजा पूरे श्रद्धा भाव से करते हैं, तो यथासंभव सात्विक जीवनशैली अपनाना ही उचित माना जाता है। इससे पूजा में एकाग्रता भी बढ़ती है और मन में भी शांति बनी रहती है।
जय बाबा की।





