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मेहंदीपुर बालाजी का रहस्य क्या है और ये इसे क्यों खास बनाता है ?

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मेहंदीपुर बालाजी का रहस्य क्या है और ये इसे क्यों खास बनाता है?


आपने इंसानी अदालतें तो बहुत देखी होंगी जहां अपराधियों को उनके किए गुनाहों की सजा सुनाते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी रूहानी अदालतें देखी है? ये आपको पढ़ने में अजीब और अविश्वसनीय लग सकता है लेकिन राजस्थान के दौसा जिले मे स्थित मेहंदीपुर में एक ऐसी रूहानी अदालत लगती है जहां शैतानी रूहों की किस्मत का फैसला देवताओं द्वारा किया जाता है। और, इंसानों पर हावी इन शैतानी ताकतों को सजा देकर शरीर से बाहर निकाला जाता है।

मेहंदीपुर बालाजी का रहस्य :-


इस समूचे ब्रह्मांड के कण – कण मे ऊर्जा यानि एनर्जी व्याप्त है। हर वस्तु की तरह इस ऊर्जा के भी दो पहलू होते हैं।

  1. सकारात्मक
  2. नकारात्मक

सकारात्मक यानि पॉजीटिव एनर्जी सृष्टि में सहायक होती है और नकारात्मक ऊर्जाओं यानि नेगेटिव एनर्जी को चाहे शैतानी आत्माएं कहो या शैतानी रूह, ये हर जगह फैली होती हैं और इन पर काबू पाना इंसानी शक्ति के बस में नहीं होता। इसलिए, दैवीय शक्तियां यानि ऐसी सकारात्मक ऊर्जाएं जो बहुत विस्तृत हो चुकी हैं वो बुरी ताकतों को वश में करती हैं। और जब सकारात्मक ऊर्जाओं का नेतृत्व स्वयं महाबली हनुमान करते हों तो कहना ही क्या।

यह चमत्कारी बालाजी धाम राजस्थान के जयपुर – बांदीकुई बस मार्ग पर जयपुर से 102 किलोमीटर और बांदीकुई रेल्वे स्टेशन से 36 किलोमीटर दूर मेहंदीपुर में स्थित है । भूत प्रेत के अस्तित्व में आज शायद ही कोई विश्वास करता हो लेकिन विज्ञान के तथ्यों के विपरीत मेहंदीपुर बालाजी धाम अनास्था की ओर बढ़ते इस युग में एक आश्चर्यपूर्ण चमत्कार जैसा लगता है।

एक मंदिर जहां हर दिन बुद्धिजीवी आते हैं और अपने साथ दिव्य चमत्कारी अनुभव ले जाते हैं। एक मंदिर जहां हार मान चुका आधुनिक विज्ञान धराशायी होकर नित्य नये चमत्कारों से लोगों को पीड़ा मुक्त होते हुए देखता है। दो पहाड़ियों के मध्य स्थित होने के कारण लोग इसे घाटा मेहंदीपुर भी कहते हैं।

मेहंदीपुर बालाजी का रहस्य :-


हर सप्ताह मंगलवार और शनिवार को यहां मेले भरते हैं जहां दर्शनार्थियों की अपार भीड़ उमड़ती है। जनश्रुति के अनुसार यह देव स्थान लगभग एक हजार वर्ष पुराना है और इससे पहले यहां कोई मंदिर नहीं था। एक बार मंदिर के महंतो के किसी पूर्वज को बालाजी ने स्वप्न में दर्शन देकर वहां उपासना करने का आदेश दिया।

बालाजी के आदेश से उन्होंने इस स्थान पर बालाजी की प्रतिमा स्थापित की। जिसके बारे में मान्यता है कि यह प्रतिमा चट्टान पर स्वयं उभरी थी। बाद में ग्रामीणों ने यहां मंदिर का निर्माण करा दिया। बालाजी महाराज ने यहां कुछ चमत्कार दिखाए तो इस स्थान की लोकप्रियता बढ़ती चली गई और आज इस मंदिर की प्रसिद्धि विश्व भर में हो चली है।

देश के कोने-कोने से श्रद्धालु और बुरी शक्तियों के वशीभूत इंसान बालाजी की इस अदालत में माथा टेकने आते हैं और सकुशल होकर प्रसन्नता के साथ घर लौटते हैं। यहाँ के प्रमुख देवता बालाजी तो हैं ही साथ ही प्रेतराज और भैरव नाथ भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। भैरव जी इस दरबार में कोतवाल के रूप में जाने जाते हैं। उनका कार्य भूत प्रेतों को बंदी बनाना है।

तीसरे देव हैं प्रेतराज सरकार। ये बालाजी के सेना के प्रधान माने जाते हैं। इनका मंदिर पीछे की ओर पहाड़ियों की गोद में है। प्रमुख रूप से अपराधी भूत प्रेत के दंड की व्यवस्था यहीं की जाती है। सुनवायी बालाजी के समक्ष होती है तथा प्रेतराज मुकदमे का फैसला करके शैतानी रूह को दंड देते हैं।

इन बुरी आत्माओं को सजा देने की प्रक्रिया पुलिस की थर्ड डिग्री की तरह होती है। यह मंजर इतना डरावना होता है कि जिसे अगर आप अपनी आंखों से देखेंगे तो आपके भीतर की रूह तक कांप जायेगी। और इसकी शुरुआत होती है बालाजी के पेशी के दो लड्डू जैसे प्रसाद से जिनका सेवन करते ही पीड़ित व्यक्ति अजीब अजीब हरकतें करने लगता है।

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क्या आपका मन मचल उठता है बालाजी महाराज के द्वार जाने को ?

और, उसके बाद काम शुरू होता है प्रेतराज सरकार का जो इन बुरी शक्तियों को थर्ड डिग्री की तरह यातनाएं देकर इन्हे वश में करते हैं। भले ही विज्ञान इस पर विश्वास न करे लेकिन यह उसके भी समझ से परे है कि आखिर पीड़ित व्यक्ति बालाजी का प्रसाद ग्रहण करते ही ऐसा व्यवहार क्यों करने लगता है। और अगर यह केवल बीमारी है तो मरीज़ पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद इस प्रकार ठीक होकर कैसे लौट सकते हैं जो लंबी चलने वाली बीमारी की दवाइयों से भी ठीक नहीं हो पाते हैं।

खैर, मेहंदीपुर के चमत्कारों में कितना सत्य है और कितना मिथ्या यह शोध का विषय हो सकता है लेकिन इस बात में कोई विवाद नहीं है कि यहाँ से हर साल हजारों की संख्या में लोग पीड़ा से मुक्त होकर संतोष के साथ प्रसन्नता पूर्वक अपने घर लौटते हैं।

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॥ जय बाबा की ॥

॥ बोलो बालाजी महाराज की जय ॥

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