Home Mehandipur Balaji Maharaj बजरंग बाण का पाठ किन लोगों को नहीं करना चाहिए ?

बजरंग बाण का पाठ किन लोगों को नहीं करना चाहिए ?

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अगर आप बजरंग बाण का पाठ करते हैं तो आपको इस पोस्ट को अवश्य पढ़ना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि बिना जाने समझे आप महावीर बजरंग बली को प्रसन्न करने के बजाए आप उन्हें अप्रसन्न कर रहे हों। भक्तों, जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हनुमान जी महाराज रुद्र यानि शिव जी के ग्यारहवें अवतार माने जाते हैं और हनुमानजी कलियुग में साक्षात रूप में रहने वाले देवता कहलाते हैं।

इनकी शक्ति और सामर्थ्य की अगर बात की जाए तो यह सर्वविदित है कि अपनी बाल्यावस्था मे इन्होंने सूर्य देव को अपने मुख में रख कर देवराज इन्द्र के वज्र के प्रहार को भी बेअसर कर दिया था और इसी बात की वजह से इन्होंने चारो लोक मे अपनी निडरता और शक्ति का परचम फहरा दिया था। कर्म, भक्ति और विश्वास का उदाहरण का परिचय देने वाले देव इनके सिवाय शायद ही कोई और हों।

भैया लक्ष्मण को जब नाग पाश मे बाँध लिया गया था तो उनके उपचार के लिए संजीवनी बूटी लाने के लिए विशालकाय रूप लेकर एक हाथ में संजीवनी पर्वत लेकर हनुमान जी उड़ बैठे थे। इन्होंने ही माता सीता की सुध लेने के लिए श्री रामजी के आदेश से विशालकाय समुद्र तक लांघ दिया था जिसकी कल्पना मात्र से ही आम जनमानस के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

यहां पर आपको इन सब बातों का स्मरण इसलिए कराया जा रहा है क्योंकि जब सूक्ष्म भक्ति और पूजा पाठ के द्वारा बजरंग बली अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं तो सभी हनुमान भक्तों को उन त्रुटियों का ज्ञान होना भी आवश्यक हो जाता है जिससे हनुमान जी महाराज रुष्ट हो जाते हैं। अधिकांश लोगों को इतना भी ज्ञान नहीं होता है कि बजरंग बाण किसे कहते हैं और किन किन परिस्थितियों में इसका पाठ करना चाहिए और कब कब नहीं करना चाहिए।

भक्तों, आप लोगों ने इस बात पर गौर किया होगा कि वर्तमान में लगभग लगभग सभी हनुमान चालीसा की पुस्तक में बजरंग बाण भी मुद्रित होता है। जिन लोगों को हनुमान चालीसा कंठस्थ नहीं होती वो इस पुस्तक से हनुमान चालीसा का पाठ करने के साथ ही भक्त लोग बजरंग बाण का पाठ भी अज्ञान वश कर लेते हैं और बस यहीं त्रुटि हो जाती है और हनुमानजी को रुष्ट कर बैठते हैं।

हनुमत रत्नावली मे इस बात का पूरा वर्णन किया गया है कि किसे इसका पाठ करना चाहिए और किसे नहीं और साथ ही किन किन परिस्थितियों में इसका पाठ करना चाहिए विस्तार से समझाया गया है। यहां इसके बारे में पढ़ने मात्र से ही आप चौंक जाएंगे कि बिन उद्देश्य के पाठ करने से आप कितनी बड़ी गलती कर रहे थे।

बजरंग बाण मे बजरंग बली के वज्र रूप का बखान किया गया है। इसके एक एक शब्द बीज मंत्र के समान है और इनका उच्चारण अचूक असर करता है। जिस महाबली हनुमान जी ने श्री राम की भक्ति सेवा के लिए अपने माता पिता को त्यागकर, ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भगवत भक्ति का परिचय दिया ऐसे वीर हनुमान जी का बजरंग बाण का पाठ करके बिना उचित ज्ञान के आप उन्हें बार बार श्री राम की शपथ दिला रहे हैं।

आत्म अवलोकन मात्र से ही आपको एहसास हो जाएगा कि बजरंग बाण मे लिखी श्री राम की शपथ की दुहाई देकर आप बिन उद्देश्य के उन्हें प्रसन्न कर रहे हैं या रुष्ट। जिस भक्त के लिए श्री राम भक्ति से बढ़कर कुछ और नहीं उनकी शपथ और सौगंध देना क्या उचित है। इसे इस उदाहरण से समझें जैसे मानो कोई बार बार आपको आपके अति पूज्यनीय माता या पिता की शपथ देकर अपना कार्य सिद्ध करे तो आप भी क्रोधित हो उठेंगे।

बजरंग बाण का पाठ संकट की घड़ी में ही करना चाहिए। वह भी तब जब कोई अन्यत्र मार्ग शेष न बचे। किन किन अवस्था में बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए आइए आपको बता देते हैं।

  • शत्रु से भय
  • कारोबार में संकट
  • स्वास्थ्य मे अति गिरावट
  • सन्तान प्राप्ति न होना
  • ऐसी अवस्था जब पूर्वाभास हो कि कोई कार्य संपादित न होने से दरिद्रता का कारण बन सकता है।

बजरंग बाण का पाठ करने की विधि :-

पाठ करने के लिए शुद्धता का भाव शारीरिक और मानसिक रूप से आती आवश्यक है। यदि शुद्धता रखने मे आप असमर्थ हैं तो बजरंग बाण का श्रवण करे। मंगलवार या शनिवार को स्नान करके चमेली का दीपक जलाये। गुड़ और चने का भोग रखे। लाल आसन पर बैठकर पूजन करें। 7, 11 या 21 दिन पाठ करने का संकल्प लें। एकाग्रता के साथ मनोकामना का स्मरण करें। सात्विकता और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। संकल्प पूरा होने पर उद्यापन करे।

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