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सालासर धाम के 265वे स्थापना दिवस पर सजाया गया बालाजी महाराज जी का मंदिर

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श्री सिद्धपीठ सालासर धाम के लिए आज सबसे बड़ा दिवस होता है। आज हनुमान जी के मंदिर का 265वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। 266 वर्ष पूर्व हनुमान जी महाराज भक्त शिरोमणि मोहन दास जी महाराज के वचनों में बंध कर आज ही के दिन सिद्धपीठ सालासर धाम में विराजमान हुए थे।

आप सब को बता दे कि आज ही के दिन आसोटा धाम में निकली थी। एक किसान जब खेत में हल चला रहा था, अचानक हल से कोई पत्थर टकराया।जब वहां खुदाई की गई तो वहां दो प्रतिमाएं निकली। जब इन प्रतिमाओं को खेजड़ी के नीचे रखा और धूप दीप से इनकी पूजा अर्चना की गई और चूरमे का प्रसाद चढ़ाया गया तो इसकी प्रसिद्धि एक दम से पूरे गाँव मे फैल गई।

लोग आए और बाद में हनुमान जी की प्रतिमा को गांव के ठाकुर के घर में रख दिया गया। हनुमान जी महाराज ने रात को ठाकुर के सपने में आकर कहा कि मेरा स्थान यहां पर नहीं है और मेरा भक्त मेरा इंतजार कर रहा है। तुम इस मूर्ति को गाड़ी में रख कर रवाना कर दो। जहां भी मुझे विराजना होगा ये गाड़ी वहीं रुक जाएगी।

ठाकुर ने वैसा ही किया। पहली गाड़ी जसवंतगढ़ के पास एक मंदिर के पास जाकर रुक गयी। और दूसरी गाड़ी श्री सिद्धपीठ सालासर धाम जाकर रुकी। उधर भक्त मोहन दास जी को भी हनुमान जी ने सपने में दर्शन देकर कहा कि मैं आ रहा हूं और तू मेरा इंतजार कर। आज जिस जगह सालासर बालाजी महाराज का मंदिर है वहीं पर गाड़ी आकर रुकी थी और मूर्ति की स्थापना की गई थी।

यह सब 266 वर्ष पूर्व की बात है और आज सालासर बालाजी महाराज का 265वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। लाइट और पुष्पों से धाम को सजाया गया है और लाखों भक्त बालाजी महाराज के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।

अनेक धार्मिक कार्यक्रम आज इस स्थापना दिवस पर आयोजित किए जा रहे हैं। पूरा मंदिर आज दुल्हन की तरह सजाया गया है। भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। मोहन दास जी की धूनी पर हर समय भजन कीर्तन और पाठ होते रहते हैं। यह धूनी 266 वर्षों से अखंड प्रज्वलित है।

जो भी भक्त यहां आते हैं यहां आकर मोहन दास जी के दर्शन करते हैं और यहां की भभूत अपने मस्तक पर धारण करते हैं।

सिद्धपीठ सालासर धाम में स्थापना दिवस के दिन हनुमान सेवा समिति के माध्यम से जो लोग सेवा करते हैं उनकों हनुमत सेवा सम्मान से सम्मानित किया जाता है। राम कृष्णा फाउंडेशन के नरेश जी जालान को हनुमत कृपा सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है।

यह सिद्धपीठ राजस्थान का सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र है। साल में 50 लाख से भी अधिक लोग यहां आकर दर्शन करते हैं।

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