आज हम आपको एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहे हैं। यह कहानी आज से 22 वर्ष पुरानी खेत के भूत की सच्ची कहानी है।
एक लड़की का विवाह एक छोटे से गांव में हुआ था। ये कहानी है राधा नाम की एक लड़की का। राधा की एक बड़ी बहन थी राखी। और उसका एक छोटा भाई था।
राधा को सजने संवरने का बहुत शौक था। उसकी उम्र मात्र 16 वर्ष की थी। मेकअप की शौकीन राधा बहुत ही खुशबूदार क्रीम पावडर लगाया करती थी और हर वक्त इधर उधर घूमती रहती थी।
कुछ दिन पहले बड़ी बहन राखी का रिश्ता हो गया था और शादी का दिन करीब आ गया था।
सब लोग शादी की तैयारियों मे ही लगे हुए थे। शादी मे अब सिर्फ चार दिन ही बचे थे और आज से घर में नाचने गाने का कार्यक्रम प्रारंभ होने जा रहा था।

इसी तरह दो दिन गुजर गए और अब शादी से एक दिन पहले का दिन था। दिन तो अन्य कामों मे बीत गया और रात को शुरू हुआ नाचने गाने का प्रोग्राम।
आज नाचने गाने के साथ ही मेहंदी लगाने की भी रात थी। दोनों काम साथ साथ चल रहे थे।
राधा ने आज नए नए कपड़े और खूब मेकअप कर रखा था। साथ ही पूरी बाहें भर के मेहंदी भी लगा रखी थी।
लेकिन आज सुबह से राधा के पेट में दर्द हो रहा था। अब रात को 1 बज गया था सब लोगों को नाचते गाते हुए।
उन दिनों गाँव मे शौचालय नहीं हुआ करते थे इस हेतु सभी को खेतों में जाना पड़ता था।
राधा के पेट मे बहुत दर्द हो रहा था इसलिए मजबूरी बन पड़ी खेत में जाने के लिए।
उसने अपनी दादी और चाची को साथ चलने को कहा। दादी के कहा कि चलो चलते हैं लेकिन रात बहुत हो गई है इसलिए अपने चाचा को साथ ले चलो।
वो भी साथ चलेगा और हमसे थोड़ी दूर खड़ा हो जाएगा।
राधा अपने चाचा को बुला लायी और सब लोग खेतों की तरफ चल दिए। साथ में एक टॉर्च भी ले ली।
जैसे ही वो लोग खेतों के पास पहुंचे राधा के चाचाजी वहीं पर रुक गए और तीनों को कहा कि वो लोग जाए।
खेतों में आगे जाकर राधा की दादी और चाची थोड़ा पहले ही रुक जाते हैं और राधा खेतों के अंदर चली जाती है और एक तरफ खाली सी जगह पर बैठ जाती है।
और तभी राधा की नजर एक पेड़ के नीचे नाचते हुए भूतो पर पड़ती है और वह बहुत ज्यादा घबरा जाती है। राधा उन्हें देखते ही जल्दी से वहां से खड़ी हो जाती है और वहां से भागने लगती है।
लेकिन उन प्रेतों को भी राधा की खुशबू पहुंच जाती है। वो नाचना बंद कर देते हैं और राधा की तरफ देखते हैं। राधा वहां से निकल भी नहीं पाती और तब तक एक प्रेत पल भर में राधा के पास होता है।
राधा जल्दी से दादी की तरफ भागती है। मगर तब तक एक प्रेत राधा के साथ हो लेता है। राधा पागलों की तरह घर की तरफ भागने लगती है।
दादी भूत प्रेत आ गया, चाची भूत प्रेत आ गया, भागो भागो…. भागते भागते ऐसा कहकर चिल्लाने लगती है।
राधा को घर आते आते डर की वजह से बुखार चढ़ जाता है। दो दिन तक राधा बुखार मे ही पडी रहती है।
उस पर किसी भी दवाई का कोई असर नहीं हो रहा होता है। राधा के पिता जगह जगह डॉक्टर बदल बदल कर थक चुके होते हैं।
वह राधा जब भी होश मे आती एक ही बात कहती, “पापा भूत आ गया। मम्मी भूत आ गया। भूत मुझे मार देगा।”
फिर राधा के पिता जी ने उसको एक अघोरी बाबा को दिखाना शुरू किया। एक एक करके फिर न जाने कितने बाबा आए। और कितने ही डॉक्टर भी आए।
लेकिन सभी यही कहते कि वो प्रेतराज है और वो शक्तिशाली भी है। हमारी शक्ति इस प्रेतराज के सामने कम पड़ रही है।
जब भी कोई अघोरी बाबा उस प्रेत राज को आवाज देकर राधा के शरीर को छोड़ने की बात करते तो वह प्रेत राधा के शरीर में जोर जोर से चिल्लाता और कहता, “नहीं जाउंगा, नहीं जाउंगा, मै इसे छोडकर कहीं नहीं जाउंगा, यह मुझे बहुत पसंद है मै इसे अपने साथ लेकर जाउंगा, तुम लोग छोड़ दो जाने दो मुझे नहीं तो मै इसको मार दूंगा”।
ऐसी हालत देखकर राधा के माता पिता बहुत परेशान थे। अभी तक तो राधा को थोड़ा पानी और एक आधी रोटी जबरदस्ती करके उसके माँ बाप खिला दिया करते थे।
लेकिन जब अघोरी बाबा राधा को ठीक करने के लिए प्रेत राज को परेशान कर रहे थे और उसको राधा का शरीर छोड़ने के लिए कह रहे थे तो प्रेत बौखला गया और उसने राधा का बहुत बुरा हाल कर दिया।
राधा अब खाना भी नहीं खा पाती थी और पानी भी न पी पाती थी।
मतलब कोई भी चीज़ हो खाने या पीने की वह कुछ भी खा नहीं पा रही थी क्योंकि उसको हर चीज़ मे कीड़े ही कीड़े नजर आते थे।
कीड़े देखते ही वह खाने पीने की चीजों को फेंक कर मारती और कहती, “तुम लोग मुझे खाने की बजाय कीड़े खिलाना चाहते हो।
इन सबमें कीड़े भरे पड़े हैं” और कभी वो अपना सिर दीवार मे पटकती और कभी जमीन पर।
भूख से परेशान होकर अपने ही पेट में घूसे मारती और लेट कर चिल्लाती, “माँ मुझे बचा लो। पापा मुझे बचा लो।”
राधा का किसी से कोई इलाज न हो सका। बेटी की ये हालत देखकर माँ का रो रोकर बुरा हाल हो रहा था।
आखिर में कुछ परिवार वालों, पड़ोसियो और अघोरी बाबा ने कहा कि इस लड़की को ठीक करने की आखिरी उम्मीद यह है कि तुम लोग इसे मेहंदीपुर बालाजी धाम के मंदिर ले जाओ।
अब तो ये वहीं पर जाकर ठीक हो सकती है। अब तो बालाजी महाराज ही इसकी जिंदगी बचा सकते हैं। ना जाने कितने ही लोग बालाजी मंदिर से ठीक होकर अपने घर को जाते हैं।
सबकी बात मानकर अगले ही दिन राधा के पिता जी ने राधा को बालाजी मंदिर ले जाने का इंतजाम किया और वो उसको बालाजी मंदिर ले गए। उसके माता पिता राधा को लेकर बालाजी मे करीब 15 से 20 दिन रहे।
इन दिनों राधा की हालत में थोड़ा सा सुधार था। बालाजी मंदिर मे सुबह शाम आरती होती। मंदिर के पुजारियों के खास मन्त्रों से मंदिर का भवन गूंजता और पवित्र जल सभी भक्तों पर छिड़का जाता।
अब राधा धीरे धीरे ठीक हो रही थी। राधा के माता पिता राधा को लेकर वापस घर जाने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन वो सोच रहे थे कि ये परेशानी पहले जिस वजह से हुई थी पहले वो काम करना है।
इसलिए वो राधा को अपने गाँव न ले जाकर शहर मे अपने एक रिश्तेदार के यहां छोडकर गाँव जाकर अपने यहां एक शौचालय बनवाते है। फिर जाकर राधा को वापस लाते हैं।
तो यह थी मेहंदीपुर बालाजी में ठीक हुई एक लड़की की खेत के भूत की सच्ची कहानी थी।
यह बालाजी भगवान् की ही शक्ति थी जो राधा ठीक हो पायी और न जाने कितने ही लोग जो भूत प्रेत जैसे अन्य रोगों से बीमार होते हैं सभी लोग बालाजी भगवान् के मंदिर से ठीक होकर जाते हैं।
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