Ratha Saptami Vrat Katha Puja Vidhi In Hindi

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रथ सप्तमी व्रत सूर्य देव को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है। इसे सूर्य जयंती और सूर्य सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु सूर्य भगवान की पूजा करके स्वास्थ्य, ऊर्जा, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं।

Ratha Saptami / Surya Saptami

01व्रत या त्योहार का मुख्य नाम सूर्य सप्तमी, रथ सप्तमी ratha Saptami Vrat Katha Puja Vidhi In Hindi
02किस संप्रदाय का पर्व है? हिन्दू धर्म
03उद्देश्य व्यक्ति वर्ग और ब्रह्मांड में ऊर्जा और प्रकाश के संचार के लिए तथा पाप मोचन के लिए।
04तिथि माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को।
05मुख्य आराध्य देव भगवान् सूर्य।

रथ सप्तमी व्रत

Ratha Saptami Vrat Katha Puja Vidhi In Hindi – यह व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रखा जाता है। यदि आप वर्षभर आने वाले अन्य प्रमुख व्रत और पूजा-विधियों के बारे में जानना चाहते हैं, तो सभी प्रमुख व्रत एवं पूजा की संपूर्ण जानकारी भी पढ़ सकते हैं। यह दिन सूर्य भगवान् के जन्म दिवस के तौर पर भी जाना जाता है। इस दिन को सूर्य जयंती या सूर्य सप्तमी भी कहा जाता है।

सूर्य देव जी के रूप में भगवान् विष्णु जी की भी इस दिन पूजा की जाती है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए बृहस्पतिवार व्रत की कथा और पूजा विधि भी पढ़ सकते हैं।

भारत के किसानों के लिए यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि यह मौसम फसलों की कटाई की शुभ शुरुआत का होता है।

रथ सप्तमी व्रत का धार्मिक महत्व

सूर्य देव जी पूरे ब्रह्माण्ड की परिक्रमा अपने रथ द्वारा करते हैं और यह रथ सात घोड़ों द्वारा खींचा जाता है।

यह रथ और सात घोड़े इन्द्रधनुष के सात रंगों की ओर इशारा करते हैं।

ये सात घोड़े भगवान् सूर्य देव के दिन रविवार से प्रारम्भ होकर सभी सात दिनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही रथ में लगे बारह पहिये ज्योतिषी 12 राशियों को दर्शाते हैं।

इसलिये रथ सप्तमी (Ratha Saptami) सूर्य से ऊर्जा और प्रकाश लेने का दिन भी कहा जाता है। रथ सप्तमी के दिन से तापमान में वृद्धि आरम्भ हो जाती है और वसंत शुरू हो जाता है।

रथ सप्तमी व्रत कैसे करें?

देश भर के सूर्य मंदिरों में सूर्य सप्तमी (Surya Saptami) का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। चूंकि य़ह व्रत स्त्रियों का है, इसलिए वे सूर्य नारायण की प्रसन्नता के लिए रखती हैं।

  • सूर्य आराधना का मुख्य समय सूर्योदय के एक घंटे तक का माना जाता है। सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए रविवार व्रत की विधि और महत्व भी विशेष रूप से बताया गया है।
  • सूरज भगवान् जिस समय बादल मे से निकलते हैं उस समय सूरज भगवान् को गंगाजल से अर्ध्य देना चाहिए।
  • अर्ध्य देते समय जल में तुलसी की 7 पत्तियाँ जल में डाल दें।
  • मौली, लाल चंदन, चावल, लाल फूल, प्रसाद, फल, जनेऊ, धूप, दीपक, कपूर से आरती कर दक्षिणा चढ़ानी चाहिए।
  • परिक्रमा देनी चाहिए और सूरज भगवान् को अर्ध्य देना चाहिए। अर्ध्य देते समय यह श्लोक बोलें –

जन जनम क्रीत, पांप, माया, जनम,

स जनम स तन में रोग च सीझंच मा की हती सप्तमी।

  • आदित्यहृदयम, गायत्री मंत्र, सूर्यकष्टम, सूर्य सहस्त्रनाम आदि स्तुति प्रार्थनाएं करें।

रथ सप्तमी व्रत कथा

एक बार की बात है कम्बोज साम्राज्य पर राजा यशोवर्मा नामक महान राजा राज्य किया करते थे।

उनके उत्तराधिकारी के रूप में उनके कोई सन्तान नहीं हुई। राजा ने अनगिनत देवी देवताओं के मन्दिरों में जाकर मन्नतें मुरादें मांगी ताकि उन्हें अपने राज्य के लिए कोई वारिस मिल जाए।

परिणामस्वरूप ईश्वरीय कृपा से उन्हें एक सन्तान प्राप्त हुई।

उनकी यह खुशी अधिक दिनों तक बनी न रह सकीं क्योंकि उनका पुत्र मानसिक रूप से बीमार था।

तभी उनके राज्य में एक साधु भ्रमण करते हुए पहुंचे। राजा ने अपने राजमहल में साधु का बहुत आदर सत्कार किया।

अपनी सेवा से प्रसन्न होकर साधु ने बदले में कुछ मांगने को कहा। इस पर राजा ने अपने पुत्र की मानसिक बीमारी की व्यथा उन्हें सुनायी।

साधु ने कहा कि यह सब तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्मों का फल है जिस कारण से तुम्हारे पुत्र की यह हालत है।

इस सबसे उबरने के लिए साधु ने राजा को सूर्य रथ सप्तमी का व्रत पूरी सच्ची श्रद्धा और निष्ठा के साथ रखने को कहा।

राजा ने भी रथ सप्तमी पूजा (Ratha Saptami Puja) पूरी विधि विधान से की।

इस सबका परिणाम यह हुआ कि राजा का पुत्र धीरे धीरे मानसिक लाभ प्राप्त करने लगा और पूरी तरह ठीक हो गया।

राजा के बाद उसके इस उत्तराधिकारी पुत्र ने राज्य पर शासन किया और कीर्ति, यश प्राप्त किया।

भारत के प्रमुख सूर्य मंदिर

  • कोणार्क का सूर्य मंदिर, कोणार्क, ओडिशा।
  • बिरंची नारायण मंदिर, Baguda, बंजाम जिला, ओड़िशा।
  • मुल्तान का सूर्य मंदिर।
  • नवग्रह मंदिर।
  • सूर्य मंदिर, मार्तण्ड, जम्मू कश्मीर।
  • रथ सप्तमी के दिन तिरुमाला में एक दिवसीय ब्रह्मोत्सव का आयोजन किया जाता है।

रथ सप्तमी व्रत का महत्व

रथ सप्तमी को सूर्य उपासना का विशेष पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा और व्रत करने से आरोग्य, ऊर्जा, यश, समृद्धि तथा मानसिक बल की प्राप्ति होती है। किसानों और गृहस्थ जीवन के लिए भी यह पर्व अत्यंत शुभ माना गया है।

रथ सप्तमी व्रत FAQ

यह सप्तमी कब मनाई जाती है?

रथ सप्तमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है।

इस सप्तमी को सूर्य जयंती क्यों कहा जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन सूर्य देव के प्रकट होने का दिन माना जाता है, इसलिए इसे सूर्य जयंती कहा जाता है।

रथ सप्तमी व्रत का क्या लाभ है?

इस व्रत से स्वास्थ्य, ऊर्जा, सुख-समृद्धि और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

निष्कर्ष

रथ सप्तमी केवल सूर्य उपासना का पर्व ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, ऊर्जा, सकारात्मकता और नए उत्साह का भी प्रतीक है। इस दिन श्रद्धापूर्वक सूर्य देव की पूजा, अर्घ्य, दान और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि तथा आरोग्य की प्राप्ति होने की मान्यता है। यदि संभव हो तो इस दिन प्रातःकाल स्नान करके सूर्य भगवान को जल अवश्य अर्पित करें और पूरे परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

अस्वीकरण (Disclaimer)

इस आर्मेंटिकल दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों में पूजा-विधि, व्रत नियम और धार्मिक परंपराओं में कुछ भिन्नताएं हो सकती हैं। किसी विशेष परंपरा का पालन करने से पहले अपने परिवार के बुजुर्गों या योग्य विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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