Home Vrat Aur Tyohar Ratha Saptami Vrat Katha Puja Vidhi In Hindi

Ratha Saptami Vrat Katha Puja Vidhi In Hindi

0
611

Ratha Saptami Vrat Katha Puja Vidhi In Hindi – यह व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रखा जाता है। यह दिन सूर्य भगवान् के जन्म दिवस के तौर पर भी जाना जाता है। इस दिन को सूर्य जयंती या सूर्य सप्तमी भी कहा जाता है।

सूर्य देव जी के रूप में भगवान् विष्णु जी की भी इस दिन पूजा की जाती है।

भारत के किसानों के लिए यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि यह मौसम फसलों की कटाई की शुभ शुरुआत का होता है।

Ratha Saptami / Surya Saptami

01व्रत या त्योहार का मुख्य नाम सूर्य सप्तमी, रथ सप्तमी ratha Saptami Vrat Katha Puja Vidhi In Hindi
02किस संप्रदाय का पर्व है? हिन्दू धर्म
03उद्देश्य व्यक्ति वर्ग और ब्रह्मांड में ऊर्जा और प्रकाश के संचार के लिए तथा पाप मोचन के लिए।
04तिथि माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को।
05मुख्य आराध्य देव भगवान् सूर्य।

धार्मिक महत्व (Religious Importance Of Rath Saptami)

सूर्य देव जी पूरे ब्रह्माण्ड की परिक्रमा अपने रथ द्वारा करते हैं और यह रथ सात घोड़ों द्वारा खींचा जाता है।

यह रथ और सात घोड़े इन्द्रधनुष के सात रंगों की ओर इशारा करते हैं।

ratha Saptami Vrat Katha Puja Vidhi In Hindi

ये सात घोड़े भगवान् सूर्य देव के दिन रविवार से प्रारम्भ होकर सभी सात दिनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही रथ में लगे बारह पहिये ज्योतिषी 12 राशियों को दर्शाते हैं।

इसलिये रथ सप्तमी (Ratha Saptami) सूर्य से ऊर्जा और प्रकाश लेने का दिन भी कहा जाता है। रथ सप्तमी के दिन से तापमान में वृद्धि आरम्भ हो जाती है और वसंत शुरू हो जाता है।

रथ सप्तमी का व्रत कैसे करें? (Ratha Saptami Or Surya Saptami Vrat Pujan Vidhi Vidhan)

देश भर के सूर्य मंदिरों में सूर्य सप्तमी (Surya Saptami) का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। चूंकि य़ह व्रत स्त्रियों का है, इसलिए वे सूर्य नारायण की प्रसन्नता के लिए रखती हैं।

  • सूर्य आराधना का मुख्य समय सूर्योदय के एक घंटे तक का माना जाता है।
  • सूरज भगवान् जिस समय बादल मे से निकलते हैं उस समय सूरज भगवान् को गंगाजल से अर्ध्य देना चाहिए।
  • अर्ध्य देते समय जल में तुलसी की 7 पत्तियाँ जल में डाल दें।
  • सम्भव हो सके तो नदी या समुद्र में स्नान करें।
  • मौली, लाल चंदन, चावल, लाल फूल, प्रसाद, फल, जनेऊ, धूप, दीपक, कपूर से आरती कर दक्षिणा चढ़ानी चाहिए।
  • परिक्रमा देनी चाहिए और सूरज भगवान् को अर्ध्य देना चाहिए। अर्ध्य देते समय यह श्लोक बोलें –

जन जनम क्रीत, पांप, माया, जनम,

स जनम स तन में रोग च सीझंच मा की हती सप्तमी।

  • आदित्यहृदयम, गायत्री मंत्र, सूर्यकष्टम, सूर्य सहस्त्रनाम आदि स्तुति प्रार्थनाएं करें।

रथ सप्तमी व्रत कथा (Ratha Saptami / Surya Saptami Vrat Ki Kahani In Hindi)

एक बार की बात है कम्बोज साम्राज्य पर राजा यशोवर्मा नामक महान राजा राज्य किया करते थे।

उनके उत्तराधिकारी के रूप में उनके कोई सन्तान नहीं हुई। राजा ने अनगिनत देवी देवताओं के मन्दिरों में जाकर मन्नतें मुरादें मांगी ताकि उन्हें अपने राज्य के लिए कोई वारिस मिल जाए।

परिणामस्वरूप ईश्वरीय कृपा से उन्हें एक सन्तान प्राप्त हुई।

उनकी यह खुशी अधिक दिनों तक बनी न रह सकीं क्योंकि उनका पुत्र मानसिक रूप से बीमार था।

तभी उनके राज्य में एक साधु भ्रमण करते हुए पहुंचे। राजा ने अपने राजमहल में साधु का बहुत आदर सत्कार किया।

अपनी सेवा से प्रसन्न होकर साधु ने बदले में कुछ मांगने को कहा। इस पर राजा ने अपने पुत्र की मानसिक बीमारी की व्यथा उन्हें सुनायी।

साधु ने कहा कि यह सब तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्मों का फल है जिस कारण से तुम्हारे पुत्र की यह हालत है।

इस सबसे उबरने के लिए साधु ने राजा को सूर्य रथ सप्तमी का व्रत पूरी सच्ची श्रद्धा और निष्ठा के साथ रखने को कहा।

राजा ने भी रथ सप्तमी पूजा (Ratha Saptami Puja) पूरी विधि विधान से की।

इस सबका परिणाम यह हुआ कि राजा का पुत्र धीरे धीरे मानसिक लाभ प्राप्त करने लगा और पूरी तरह ठीक हो गया।

राजा के बाद उसके इस उत्तराधिकारी पुत्र ने राज्य पर शासन किया और कीर्ति, यश प्राप्त किया।

भारत के प्रमुख सूर्य मंदिर जहां रथ सप्तमी मनायी जाती है। (Famous Surya Temples Where Ratha Saptami is Celebrated

  • कोणार्क का सूर्य मंदिर, कोणार्क, ओडिशा।
  • बिरंची नारायण मंदिर, Baguda, बंजाम जिला, ओड़िशा।
  • मुल्तान का सूर्य मंदिर।
  • नवग्रह मंदिर।
  • सूर्य मंदिर, मार्तण्ड, जम्मू कश्मीर।
  • रथ सप्तमी के दिन तिरुमाला में एक दिवसीय ब्रह्मोत्सव का आयोजन किया जाता है।

Related Post:-
जानिए रविवार का व्रत कैसे करें, कथा, फायदे, लाभ, उद्यापन, महत्व, विधि, नियम और आरती