बालाजी महाराज का भोग और अज्ञारी
आपने बालाजी महाराज का छप्पन (56) भोग जरूर सुना होगा। मेहंदीपुर बालाजी धाम में बाबा को प्रतिदिन 56 प्रकार के प्रसाद का भोग लगाया जाता है।
बहुत से भक्तों के मन में यह प्रश्न भी उठता है कि घर पर श्री बालाजी महाराज को भोग कैसे लगाया जाता है, अज्ञारी क्या होती है, अज्ञारी में किन-किन वस्तुओं की आवश्यकता होती है और इसे करने की सही विधि क्या है।
बालाजी महाराज के भोग और अज्ञारी की मुख्य जानकारी
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| मुख्य विषय | बालाजी महाराज का भोग और अज्ञारी |
| भोग का उद्देश्य | भगवान को श्रद्धा और प्रेमपूर्वक अर्पण |
| अज्ञारी का माध्यम | अग्नि द्वारा भोग समर्पण |
| मुख्य सामग्री | बताशे, लौंग, देसी घी, कंडा, जल |
| विशेष दिन | मंगलवार और शनिवार |
| भोग का प्रकार | सात्विक भोजन |
| छप्पन भोग | 56 प्रकार के व्यंजन |

बालाजी महाराज का भोग और अज्ञारी क्या है?
आज हम इस पोस्ट के माध्यम से आपको बताएंगे कि अपने घर में बालाजी महाराज को भोग कैसे लगाते हैं। एक निश्चित प्रक्रिया से बालाजी महाराज को भोग लगाने से भोग का अंश सीधे बालाजी महाराज तक पहुँच जाता है और साथ ही आपके लगाए हुए भोग को ग्रहण करने बालाजी महाराज की शक्तियाँ सीधे आपके घर के द्वार तक आती हैं।
जिससे आपका बालाजी महाराज को लगाया हुआ भोग सार्थक हो जाता है और आपको श्री बालाजी महाराज के अमृत तुल्य भोग का प्रसाद प्राप्त होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान को श्रद्धा, प्रेम और निष्काम भाव से अर्पित किया गया भोग सर्वोत्तम माना जाता है। इसलिए भोग का महत्व उसके वैभव में नहीं, बल्कि उसे अर्पित करने वाले भक्त के भाव में माना गया है।
इस विषय को हम चार चरणों में समझेंगे।
- मेहंदीपुर श्री बालाजी महाराज का भोग क्या है?
- बालाजी महाराज की अज्ञारी क्या होती है?
- बालाजी महाराज को भोग कैसे लगाया जाता है?
- बालाजी महाराज की भोग विधि अज्ञारी द्वारा।
बाला जी का भोग और अज्ञारी – बालाजी का भोग क्या है?
भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण जी ने कहा है कि जो कोई भी भक्त मुझे फल, पुष्प, पत्र और जल निःस्वार्थ भाव से और प्रेमपूर्वक अर्पित करता है, उसे मैं उसी भाव से स्वीकार करता हूँ।
भोग एक प्रकार का प्रसाद है, जिसे हम स्वयं ग्रहण करने से पहले अपने श्री आराध्य को अर्पित करते हैं। भोग के द्वारा हम अपनी श्रद्धा, प्रेम और भावनाओं को अपने इष्ट के चरणों में समर्पित करते हैं।
देवी-देवताओं को भोग लगाने की परंपरा हिन्दू सनातन धर्म में युगों-युगों से चली आ रही है। सनातन परंपरा के अनुसार भगवान को सात्विक खाद्य पदार्थों का ही भोग लगाया जाता है। …तामसिक यानी ऐसी चीज़ें जिनसे बदबू आती हो उसका भोग लगाना वर्जित बताया गया है जैसे प्याज़-लहसुन, मांस और मदिरा का भोग वर्जित है।
हालाँकि तंत्र शास्त्रों में कुछ विशेष साधनाओं में इन वस्तुओं का उल्लेख मिलता है, लेकिन उसे सामान्य देवपूजन में लगाए जाने वाले भोग की संज्ञा नहीं दी जाती।
बालाजी महाराज अर्थात भगवान हनुमान पूर्ण रूप से शाकाहारी माने जाते हैं। इसलिए उन्हें पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ सात्विक पदार्थों का ही भोग लगाया जाना चाहिए।
इसी कारण अधिकांश श्रद्धालु घर पर भोग बनाते समय भी शुद्धता, सात्विकता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हैं। यही भाव भोग को अधिक सार्थक बनाता है।
श्री बाला जी का भोग और अज्ञारी – बालाजी को भोग क्यों लगाना चाहिए?
भोग लगाने का वर्णन भगवान श्रीकृष्ण जी ने श्रीमद्भगवद्गीता में किया है। उसमें उन्होंने बताया है कि भगवान को श्रद्धा और प्रेमपूर्वक अर्पित किया गया भोग भक्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
बालाजी महाराज हमारे पूज्य एवं आराध्य हैं। इनकी भक्ति से भवसागर तर जाना ही हमारा एकमात्र स्वार्थ है। भोग लगाना इन्हें निरंतर प्रसन्न करने का एक माध्यम भर है।
भोग लगाने का एक दूसरा कारण अपने से बड़ों को सम्मान देना भी है। जिस प्रकार हम अपने घर-परिवार में अपने से बड़े लोगों को भोजन के लिए पहले आग्रह करते हैं और उन्हें सम्मान देकर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, उसी प्रकार भोग लगाकर हम बालाजी महाराज के प्रति अपना सम्मान और श्रद्धा प्रकट करते हैं तथा स्वयं भोजन ग्रहण करने से पहले उन्हें भोग अर्पित करते हैं।
यह भी माना जाता है कि भगवान को अर्पित किया गया भोजन प्रसाद बन जाता है। इसलिए श्रद्धा और विश्वास के साथ लगाया गया भोग केवल भोजन नहीं रहता, बल्कि वह भगवान का प्रसाद बनकर भक्तों के लिए आशीर्वाद का स्वरूप धारण कर लेता है।
श्री बाला जी का भोग और अज्ञारी – छप्पन भोग क्या है?
आपने अक्सर मंदिरों में छप्पन भोग का नाम अवश्य सुना होगा। हिन्दू धर्म में भगवान को छप्पन भोग अर्पित करने की परंपरा बहुत प्राचीन मानी जाती है। मेहंदीपुर बालाजी धाम में भी बाबा को प्रतिदिन छप्पन प्रकार के प्रसाद का भोग लगाया जाता है।
छप्पन भोग में अनेक प्रकार के सात्विक व्यंजन, मिष्ठान, फल तथा अन्य खाद्य पदार्थ सम्मिलित होते हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित भोगों का उल्लेख मिलता है –
हिन्दू लोग भगवान को छप्पनभोग का प्रसाद चढ़ाते हैं। इनमे निम्नलिखित भोग आते हैं:
- रसगुल्ला
- चन्द्रकला
- रबड़ी
- शूली
- दधी
- भात
- दाल
- चटनी
- कढ़ी
- साग-कढ़ी
- मठरी
- बड़ा
- कोणिका
- पूरी
- खजरा
- अवलेह
- वाटी
- सिखरिणी
- मुरब्बा
- मधुर
- कषाय
- तिक्त
- कटु पदार्थ
- अम्ल {खट्टा पदार्थ}
- शक्करपारा
- घेवर
- चिला
- मालपुआ
- जलेबी
- मेसूब
- पापड़
- सीरा
- मोहनथाल
- लौंगपूरी
- खुरमा
- गेहूं दलिया
- पारिखा
- सौंफ़लघा
- लड़्ड़ू
- दुधीरुप
- खीर
- घी
- मक्खन
- मलाई
- शाक
- शहद
- मोहनभोग
- अचार
- सूबत
- मंड़का
- फल
- लस्सी
- मठ्ठा
- पान
- सुपारी
- इलायची
यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक श्रद्धालु भगवान को छप्पन भोग ही अर्पित करे। भगवान भाव के भूखे माने जाते हैं। यदि श्रद्धा और प्रेम से फल, मिष्ठान, खीर, लड्डू अथवा घर में बना कोई भी शुद्ध सात्विक भोजन अर्पित किया जाए, तो वही भोग भगवान को स्वीकार्य माना जाता है।
बालाजी महाराज का भोग और अज्ञारी – छप्पन भोग के पीछे का विज्ञान
रस 6 प्रकार के होते है।
- कटु
- तिक्त
- कषाय
- अम्ल
- लवण
- मधुर
इन छह रसों के विभिन्न संयोजनों की कुल संख्या 63 मानी जाती है।
इनमें 6 एकल रस और 1 सभी रसों के संयुक्त संयोजन को हटाने पर 56 प्राप्त होते हैं।
63 – (6 + 1) = 56
इसी कारण छप्पन भोग (56 भोग) की परंपरा का उल्लेख किया जाता है।
बाला जी महाराज की अज्ञारी क्या होती है?
हमारे धार्मिक पुराणों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि अग्नि अर्थात आग के द्वारा लगाया गया भोग सीधे रूप से देवताओं तक पहुँचता है। इसलिए भोग अर्पित करने में अग्नि का विशेष महत्व बताया गया है। इसी कारण अनेक धार्मिक अनुष्ठानों में हवन, यज्ञ और अग्नि के माध्यम से आहुति देने की परंपरा भी चली आ रही है।
मेहंदीपुर बालाजी की परंपरा में अज्ञारी भी इसी भाव से की जाती है। इसके माध्यम से भक्त अपने आराध्य श्री बालाजी महाराज को श्रद्धा और भक्ति के साथ भोग अर्पित करते हैं।
बालाजी की अज्ञारी मुख्य रूप से दो प्रकार की बताई जाती है।
- दूत महाराज की अज्ञारी
- बालाजी के भोग की अज्ञारी
श्री बालाजी महाराज का भोग और अज्ञारी – दूत महाराज की अज्ञारी
जो लोग मेहंदीपुर बालाजी धाम भूत-प्रेत बाधा, संकट या अन्य कष्टों के निवारण के लिए जाते हैं और उनकी परेशानी दूर होने के बाद उन्हें दूत महाराज मिलते हैं, ऐसे श्रद्धालु प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को बालाजी महाराज की छवि के समक्ष अज्ञारी द्वारा अपने दूत महाराज को भोग लगाया करते हैं।
यह अज्ञारी श्रद्धालुओं द्वारा अपनी श्रद्धा, कृतज्ञता और बाबा के प्रति आभार व्यक्त करने का एक माध्यम मानी जाती है।
बालाजी महाराज का भोग और अज्ञारी – बालाजी के भोग की अज्ञारी
इस रीति के अंतर्गत भक्त बालाजी महाराज को अज्ञारी द्वारा अपना बनाया हुआ भोग समर्पित करते हैं। जो श्रद्धालु मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के दर्शन करने गए होंगे, उन्होंने अवश्य देखा होगा कि बाबा की प्रतिमा के सामने एक बड़े पीतल के कुंड में अग्नि प्रज्वलित रहती है। इसी अग्नि में पुजारी भक्तों द्वारा लायी गयी अर्जी और दरख्वास्त के लड्डू डाल दिया करते हैं, जिससे उनका भोग लगाया जाता है।
इसी परंपरा से प्रेरित होकर अनेक श्रद्धालु अपने घर पर भी श्रद्धापूर्वक अज्ञारी करते हैं।
भोग विधि अज्ञारी द्वारा
अज्ञारी के लिए आवश्यक सामग्री
श्री बालाजी महाराज की अज्ञारी करने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता पड़ती है।
- तांबे या पीतल का पात्र
- तीन छोटे बताशे
- तीन जोड़ी लौंग
- तीन चम्मच शुद्ध देशी घी
- एक गाय के गोबर का कंडा (उपला)
- स्वच्छ जल
सामग्री तैयार हो जाने के बाद अब आइए जानते हैं कि अज्ञारी की विधि किस प्रकार की जाती है।
भोग विधि
- सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ धोती-कुर्ता अथवा कुर्ता-पायजामा पहन लें।
- ज़मीन पर स्वच्छ आसन बिछाकर श्री बालाजी महाराज की प्रतिमा या छवि के सामने बैठ जाएँ।
- गोबर के कंडे को तब तक अच्छी तरह दहका लें, जब तक वह धुआँ छोड़ना बंद न कर दे और लाल अंगारे जैसा न हो जाए।
आगे की प्रक्रिया
- अब श्री बालाजी महाराज की प्रतिमा या छवि के सम्मुख धूप और दीप प्रज्वलित करें।
- दहकते हुए कंडे को सावधानीपूर्वक तांबे या पीतल के पात्र में रखें।
- श्री बालाजी महाराज के सामने श्रद्धापूर्वक शीश झुकाएँ।
- कंडे पर थोड़ा सा शुद्ध देशी घी डालकर अग्नि प्रज्वलित करें।
- अब दाहिने हाथ में एक बताशा लेकर “जय श्री बालाजी महाराज” बोलते हुए कंडे पर छोड़ दें।
- दूसरा बताशा “जय श्री प्रेतराज सरकार” बोलते हुए अर्पित करें।
- तीसरा बताशा “जय श्री भैरव बाबा” बोलते हुए कंडे पर अर्पित करें।
- यदि कोई बताशा कंडे के बाहर गिर जाए तो उसे दोबारा उठाकर कंडे में न डालें और उसकी जगह दूसरा बताशा भी न चढ़ाएँ।
- अब इसी प्रकार एक-एक जोड़ी लौंग को शुद्ध देशी घी में डुबोकर क्रमशः श्री बालाजी महाराज, श्री प्रेतराज सरकार और श्री भैरव बाबा का जयकारा बोलते हुए कंडे पर अर्पित करें।
- यदि लौंग भी कंडे के बाहर गिर जाए तो उसे दोबारा उठाकर अर्पित नहीं करना चाहिए।
- इसके बाद तीन चम्मच शुद्ध देशी घी भी इसी क्रम से जयकारा बोलते हुए कंडे पर अर्पित करें।
- अब जो भी प्रसाद या भोजन आप श्री बालाजी महाराज को भोग लगाना चाहते हैं, उसका थोड़ा-सा अंश कंडे पर अर्पित करें।
- अंत में हथेली में जल लेकर जयकारा बोलते हुए कंडे के चारों ओर तीन बार घुमाएँ और जल भूमि पर छोड़ दें।
- दोनों हाथ जोड़कर श्री बालाजी महाराज, श्री प्रेतराज सरकार और श्री भैरव बाबा को प्रणाम करें।
इस प्रकार आपकी भोग लगाने की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। जिस वस्तु का आपने भोग लगाया हो, उसे श्रद्धापूर्वक प्रसाद के रूप में स्वयं ग्रहण करें तथा परिवार के अन्य सदस्यों में भी वितरित करें।
यदि आप घर पर श्री बालाजी महाराज की नियमित पूजा भी करते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी की पूजा कैसे करें? यह पोस्ट भी अवश्य पढ़ें।
बालाजी महाराज का भोग और अज्ञारी से जुड़े सामान्य प्रश्न
बालाजी महाराज को भोग कब लगाना चाहिए?
बालाजी महाराज को प्रतिदिन भोग लगाया जा सकता है। हालांकि मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
बालाजी महाराज को कौन सा भोग लगाया जाता है?
बालाजी महाराज को सात्विक भोजन, लड्डू, बताशे, फल, खीर, चूरमा तथा अन्य शुद्ध शाकाहारी पदार्थों का भोग लगाया जा सकता है।
बालाजी महाराज की अज्ञारी क्या होती है?
अग्नि के माध्यम से श्रद्धापूर्वक भगवान को भोग अर्पित करने की प्रक्रिया को अज्ञारी कहा जाता है।
क्या घर पर बालाजी महाराज की अज्ञारी की जा सकती है?
हाँ, उचित विधि, श्रद्धा और सावधानी के साथ घर पर भी बालाजी महाराज की अज्ञारी की जा सकती है।
क्या भोग लगाने से पहले पूजा करना आवश्यक है?
हाँ, सामान्यतः पहले श्री बालाजी महाराज की पूजा, दीप, धूप आदि अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद श्रद्धापूर्वक भोग लगाया जाता है।
छप्पन भोग का क्या महत्व है?
छप्पन भोग भगवान के प्रति श्रद्धा, प्रेम और पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। हालांकि श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार साधारण सात्विक भोग भी अर्पित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
उम्मीद करते हैं कि अब आपको यह अच्छी तरह समझ में आ गया होगा कि श्री बालाजी महाराज का भोग क्या होता है, अज्ञारी किसे कहते हैं तथा घर पर भोग और अज्ञारी किस प्रकार की जाती है। यदि भोग पूरी श्रद्धा, सात्विकता और नियमपूर्वक लगाया जाए तो वही सबसे उत्तम माना जाता है।
यदि आप मेहंदीपुर बालाजी में पूजा, भोग, अज्ञारी, अर्जी, दरख्वास्त तथा अन्य सभी महत्वपूर्ण नियमों की विस्तृत जानकारी एक ही स्थान पर पढ़ना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी के नियम अवश्य पढ़ें।
॥ जय श्री बालाजी महाराज ॥
॥ जय श्री प्रेतराज सरकार ॥
॥ जय श्री भैरव जी महाराज ॥





