Home Vrat Aur Tyohar मौनी अमावस्या का व्रत क्यों और कैसे किया जाता है? (Mauni Amavasya...

मौनी अमावस्या का व्रत क्यों और कैसे किया जाता है? (Mauni Amavasya Vrat)

0
351

जानिए मौनी अमावस्या का व्रत क्यों और कैसे किया जाता है? (Mauni Amavasya Vrat In Hindi) – प्रत्येक वर्ष माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या मनायी जाती है।

इसी दिन सृष्टि के संचालक मनु का जन्म दिवस भी मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन मनुष्य को मौन धारण करना चाहिए।

मौन से आशय चुप रहने से है। कोशिश यह रहनी चाहिए कि व्रती इस दिन न के बराबर ही बोले या कम से कम बोले और कटु शब्द तो बिल्कुल भी न बोलें।

mauni amavasya vrat kyon aur kaise kiya jata hai in hindi?

ऐसा भी कहा जाता है कि मौन रहने से आत्मबल प्राप्त होता है और इंद्री वशीभूत होती है।

योग पर आधारित व्रत होने के कारण इसे साधु, महात्मा और योगीजन प्राचीन समय से करते आ रहे हैं।

यह मान्यता भी प्रचलित है कि यदि मौनी अमावस्या के व्रत (Mauni Amavasya Vrat) को मौन धारण करके समाप्त किया जाए तो व्रती को मुनि पद प्राप्त होता है।

मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान और दान दक्षिणा का अपना अलग और विशेष महत्व माना गया है। इस दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है।

इसीलिए इस व्रत को करने वाले गंगा के किनारे कुटिया बनाकर या तंबू गाड़कर एक महीने तक इसमे निवास करते हैं और प्रतिदिन गंगा स्नान करते हैं।

महातीर्थ प्रयागराज में तीनों पवित्र नदी गंगा, जमुना और सरस्वती के संगम में मौनी अमावस्या के दिन लोग मौन धारण कर डुबकी लगाते हैं।

इस दिन स्नान करने के बाद लोग वस्त्र, अन्न, गौ, धन भूमि का दान किया जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि माना जाता है कि अमृत का कोई मोल नहीं है।

मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के दिन पवित्र नदियों में स्नान अमृत स्नान माना जाता है इसलिए अमृत के तुल्य दान करना भी चाहिए।

दान का मोल नहीं देखना चाहिए। आप अपनी श्रद्धा और शक्ति सामर्थ्य के अनुसार दान कीजिए।

बहुत से लोग गौ दान करते हैं क्योंकि गाय में सभी देवी देवता निवास करते हैं और गौ दान से अमृत स्नान का ऋण चुकता हो जाता है। तिल का दान भी श्रेष्ठ माना गया है।

मौन रहकर बिना बोले और बिन होठ हिलाए मन ही मन अपने इष्टदेव का जाप करते रहना चाहिए। इससे साधारण जाप की तुलना में कई गुना पुण्य प्राप्त होता है और सिद्धि प्राप्त होती है।

मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के दिन सूर्य भगवान् को सूर्योदय के समय अर्ध्य देना चाहिए इससे निर्धनता और दरिद्रता दूर होती है।

मौनी अमावस्या की कथा (Mauni Amavasya Vrat Katha In Hindi)

गंगा, जमुना और सरस्वती के संगम में स्नान की कथा जगजाहिर होती है सागर मंथन की कथा से। सागर मंथन अमृत को निकालने के लिए देवताओं और असुरों द्वारा किया गया था।

अमृत के निकलने से पहले अनेकों बहुमूल्य वस्तुएँ सागर मंथन से प्राप्त हुई थी जिन्हें दोनों पक्षों द्वारा बांट लिया गया था।

भगवान् धन्वंतरि जब अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए उसी समय असुर और राक्षस अधीर ही उठे और अमृत कलश को प्राप्त करने के लिए उस ओर दौड़ पड़े।

अपने हाथों से कलश दूर जाते देख देवतागण भी उसी ओर भाग उठे और कलश लेने की होड़ में दोनों पक्षों में खींचतान शुरू हो गई।

इसी खींचतान में कलश से अमृत की कुछ बूंदे छलक कर गिर पड़ी। ये बूंदे प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक की नदियों में जा गिरी।

आपको बता दें कि ऐसी मान्यता है कि मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के दिन यहां की नदियों में नहाने से अमृत तुल्य स्नान का पुण्य प्राप्त होता है।

सोमवार और कुम्भ के समय तो इसका फल बहुत अधिक हो जाता है। कार्तिक माह के गंगा स्नान के तुल्य मौनी अमावस्या का स्नान माना जाता है।

मौनी अमावस्या व्रत विधि (Amavasya Vrat Vidhi In Hindi)

  • सुबह सुबह सूर्योदय की पहली किरण के साथ गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • नदी का पूजन कच्चे दूध, चावल, और पुष्प से करें।
  • अगर आप पवित्र नदी में जाकर प्रत्यक्ष स्नान नहीं कर सकते तो घर में ही जल में गंगा जल मिलाकर स्नान करें।
  • मौन रहकर स्नान करें। मन ही मन गंगा स्तुति करे।
  • स्नानोपरांत सूर्य भगवान् को अर्ध्य दीजिए।
  • स्नान करके तिल और तिल से बने खाद्य पदार्थों का दान करें। वस्त्र, अन्न, धन, स्वर्ण, भूमि आदि का दान अपने सामर्थ्य के अनुसार करे। पितृ के लिए भी दान करें।
  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा भेंट कीजिए।
  • इस दिन पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा करके अर्ध्य दें और सन्मुख दीप जलाए।
  • जो लोग इस व्रत को नहीं कर सकते उन्हें इस दिन मीठा भोजन करना चाहिए।
  • तुलसी परिक्रमा श्रेष्ठ मानी गई है क्योंकि तुलसी में भगवान् विष्णु का निवास माना जाता है।
  • इस दिन दीप दान उत्तम माना गया है।
  • पूरे दिन संयम रखें और कटु शब्दों से बचें।
  • घर में सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए।
  • इस दिन व्रती किसी भी प्रकार का शृंगार न करें।
  • विवाहित दंपति ब्रह्मचर्य का इस दिन विशेष रूप से पालन करें ताकि अमृत रूपी स्नान दूषित न हो।
  • श्मशान, अंत्येष्टि क्रिया स्थलों पर जाने से बचें।
  • जो कुछ भी खाए उसमें तुलसी के पत्ते अवश्य डाले।