कार्तिक पूर्णिमा और गंगा स्नान की कहानी (Story Of Ganga Snan In Hindi)

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कार्तिक पूर्णिमा और गंगा स्नान की कहानी (Story Of Ganga Snan In Hindi) – पुराणों में कहा गया है कि इसी तिथि पर शिवजी ने त्रिपुरा नामक राक्षस को मारा था इसलिए इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं। इस तिथि को भगवान् का मत्स्यावतार हुआ था।

यदि आप वर्षभर आने वाले सभी प्रमुख व्रत, पूर्णिमा, अमावस्या और पूजा-विधियों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो सभी प्रमुख व्रत एवं पूजा की संपूर्ण जानकारी भी पढ़ सकते हैं।

इस दिन गंगा स्नान, दीप दान आदि का विशेष महत्व है। इसी प्रकार माघ पूर्णिमा पर स्नान, दान और भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस दिन यदि कृतिका नक्षत्र हो तो महाकार्तिकी होती है और यह भरणी होने से विशेष फल देती है।

story of ganga snan and kartik purnima in hindi

कार्तिक पूर्णिमा का विधान (Kartik Purnima Puja Vidhi)

इस दिन “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र से भगवान् कृष्ण की पूजा की जाती है। भगवान विष्णु की आराधना से जुड़े प्रमुख पर्वों में बैकुण्ठ चतुर्दशी व्रत का भी विशेष महत्व बताया गया है। पांच दिनों तक घी का दीपक जलता रहना चाहिए।

“ॐ विष्णवे नमः स्वाहा।” मंत्र से घी, तिल और जौ की 108 आहुतियां देते हुए वचन करना चाहिए।

गंगा स्नान की कहानी ( Story Of Ganga Snan In Hindi)

चिड़ा-चिड़ी की कहानी :-

इस कहानी को कार्तिक पूर्णिमा के अगले दिन पड़वा को पढ़ते हैं और आटे के चिड़ा-चिड़ी बनाकर घर के बीचोंबीच रखते हैं और वस्त्र पहनाते हैं।

घर के सभी कमरों में घर का सारा सामान रखते हैं और चिड़ा-चिड़ी को खील बताशे व लड्डू का भोग लगाते हैं।

इस दिन खिचड़ी बनाते हैं और घी और आम का अचार रखकर ठाकुर जी का भोग लगाकर खुद भी प्रसाद लेते हैं। सूखी खिचड़ी मंदिर में भी देते हैं।

चार चिड़ियां थी। चारों कार्तिक नहाती थीं। आयी पड़वा चारों ने सोचा चलो खिचड़ी बनाएं। एक चिड़िया चावल ले आयी, एक चिड़िया दाल ले आयी, एक चिड़िया घी ले आयी, सबने मिलकर खिचड़ी बनाई।

सबने सोचा कि पहले नहाकर आती हैं फिर सब बैठकर खिचड़ी खाएगी। पहले एक चिड़िया आयी, उसे भूख लग रही थी। बाकी चिड़ियां अभी नहीं आयी थी तो उसने खिचड़ी की भाप खा ली।

दूसरी चिड़िया आयी उसने पानी पी लिया। तीसरी चिड़िया ने खिचड़ी खा ली और चौथी चिड़िया ने खुरचन खा ली।

चारों चिड़ियां मर गयी। जिस चिड़िया ने भाप खाई थी वो राजा के घर राजकुमारी बनी। जिस चिड़िया ने पानी पिया था वो कुम्हार की लड़की बनी, जिस चिड़िया ने खिचड़ी खाई थी वो ब्राह्मण की लड़की बनी और जिस चिड़िया ने खुरचन खाई थी वो हथिनी बनी।

कुम्हार की लड़की राजा के यहां दासी बनी। ब्राह्मण की लड़की राजकुमारी की सहेली बनी। हथिनी भी राजा के यहां थी।

राजकुमारी को पिछले जन्म की सब बातें याद थी। राजकुमारी का विवाह हुआ। जब वह विदा हो रही थी तो राजा से बोली कि मैं अपनी सहेली और दासी को साथ ले जाऊँगी। राजा ने कहा कि ले जाना।

राजकुमारी फिर भी न गई तो राजा ने पूछा कि तुम्हें और क्या चाहिए तो वो बोली कि मुझे हथिनी भी चाहिए।

राजा ने नौकर भेजे कि हथिनी को ले आओ पर वह हथिनी नहीं उठी। राजकुमारी खुद उसके पास गयी और उसके कान में पिछले जन्म की बात कही जिसे सुनकर हथिनी उठकर खड़ी हो गई।

राजा यह सब देख रहा था। वह तलवार लेकर खड़ा हो गया और बोला कि बता तू कौन है और तू हथिनी से क्या बात कर रही थी। सच-सच बता नहीं तो तेरा सिर काट दूंगा।

राजकुमारी ने राजा को पिछले जन्म की सारी बात बता दी। राजा ने कहा कि कार्तिक नहाने और गंगा स्नान (Ganga Snan) का इतना फल होता है तो हम भी जोड़े से कार्तिक नहाएंगे और खूब दान पुण्य करेंगे। दान-पुण्य के साथ यदि पितरों के निमित्त धार्मिक कर्म करना चाहें, तो पितृपक्ष में श्राद्ध करने की विधि भी अवश्य जानें।
पवित्र नदी में स्नान की परंपरा मौनी अमावस्या पर भी अत्यंत पुण्यदायक मानी गई है।

कार्तिक पूर्णिमा का भोग (Kartik Purnima ka Bhog)

ठाडे रहियो रे यशोदा जी के लाल कलेवा लाऊँ माखन का।
भरा कटोरा दूध का, मिश्री देऊं मिलाय

पीजा पीजा रे यशोदा जी के लाल, कलेवा लायी माखन का।
आजा आजा रे यशोदा जी के लाल कलेवा…..

ठाडे रहियो रे यशोदा……
भरी मटकिया छाछ की माखन देऊं मिलाय

आजा खाजा रे यशोदा जी के लाल, कलेवा लायी माखन का। ठाडे रहियो रे……

सुबह सवेरे मंदिर जाऊं मंदिर जाके भोग लगाऊँ
दर्शन देजा रे यशोदा जी के लाल, कलेवा लायी माखन का।

आजा आजा रे यशोदा जी के लाल….
ठाडे रहियो रे यशोदा जी के लाल…..

भोग 2 :-

मोहन हमारे घर आए रुच रुच भोग लगाए
जरा न शर्माये कि मालिक है संसार का….

भिलनी के बेर सुदामा के तंदुल, रुच रुच भोग लगाए
जरा न शर्माये कि मालिक है संसार का….

मीरा के प्रभु गिरधर नागर चरण कमल चित लाए
आकर दर्श दिखाए जरा न शर्माये कि मालिक है

संसार का मोहन हमारे…..
दुर्योधन की मेवा त्यागी साग विदुर घर खाए

जरा न शर्माये कि मालिक है संसार का…..
आपकी वस्तु आपके आगे इसमे हमारा कुछ नहीं लागे

जरा न शरमाये कि मालिक है संसार का……..
इस भोग को जो भी खाए भवसागर से पार हो जाए

जरा न शर्माये कि मालिक है संसार का……
मोहन हमारे घर आए……….

निष्कर्ष

कार्तिक पूर्णिमा सनातन धर्म की सबसे पवित्र पूर्णिमाओं में से एक मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान, भगवान विष्णु की पूजा और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए धार्मिक कार्य व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer)

इस पोस्ट में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पुराणों तथा लोक परंपराओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों में पूजा-विधि और रीति-रिवाजों में भिन्नता हो सकती है। किसी विशेष परंपरा का पालन करने से पहले अपने परिवार के बुजुर्गों या योग्य विद्वान की सलाह अवश्य लें।

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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