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क्या आप माघ पूर्णिमा का सर्वोत्तम लाभ प्राप्त करना चाहते हैं तो जरूर कीजिए ये काम?

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क्या आप माघ पूर्णिमा का सर्वोत्तम लाभ प्राप्त करना चाहते हैं तो जरूर कीजिए ये काम? – हमारे देश भारत की संस्कृति और यहां की परम्परा में पूर्णिमा विशेष स्थान रखती है और हर पूर्णिमा जिसे पूरनमासी भी कहा जाता है का विशिष्ट महत्व होता है।

अगर हिन्दू सनातन धर्म की बात की जाए तो माघ मास में आने वाली माघ पूर्णिमा का अलग ही धार्मिक महत्व होता है। इसे कहीं कहीं माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

माघ पूर्णिमा

मान्यता के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन संगम प्रयाग में स्नान और ध्यान करने से मनोकामना पूरी होती है और मोक्ष प्राप्त होता है।

जनश्रुति के अनुसार इस दिन स्वर्गलोक से देवतागण और पितृजन सदृश्य होते हैं।

माघ पूर्णिमा की धार्मिक मान्यताएं

ऐसा कहा जाता है कि माघ मास में देवी देवता पृथ्वी लोक में आते हैं और प्रयाग संगम में स्नान ध्यान आदि करते हैं। देवतागण यहां मनुष्य रूप में आते हैं और भजन, ध्यान, दान, जप आदि क्रियाएं करते हैं।

माघ पूर्णिमा वाले दिन स्नान करके सभी देव गण अपने अपने निवास लोक चले जाते हैं।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में यदि किसी भी धार्मिक पवित्र नदी, समुद्र आदि में स्नान किया जाए और सूर्य को अर्ध्य, जाप, ध्यान, प्रभु स्मरण, दान आदि कृत्यों को किया जाए तो इसका प्रताप दैहिक, आध्यात्मिक और मानसिक दोषों को दूर कर देता है।

ऐसा माना जाता है कि भगवान् विष्णु माघी पूर्णिमा के दिन गंगाजल में स्नान करते हैं और यदि इस दिन गंगाजल का स्पर्श मात्र भी कर लिया जाए तो स्पर्श करने वाला मृत्युपर्यंत बैकुण्ठ को प्राप्त हो जाता है।

दैवीय तेज समाहित होने के कारण यह जल पाप मोचक माना जाता है। और पापों के नष्ट हो जाने से व्यक्ति बैकुण्ठ लोक का उत्तराधिकारी बन जाता है।

अगर समय महाकुंभ का हो तो माघ पूर्णिमा का स्नान अलग ही धार्मिक महत्व रखता है क्योंकि इस स्थिति पर चन्द्रमा अपने पूर्ण यौवन पर होता है।

साधुओं का कहना है कि इस पूर्णिमा पर चन्द्रमा की किरणें पूरी लौकिकता के साथ पृथ्वी पर पड़ती है। स्नान के बाद मानव का शरीर उन किरणों के पड़ने से शांति की अनुभूति पाता है और इसलिए पूर्णिमा का स्थान महत्वपूर्ण है।

माघ पूर्णिमा वाले दिन यज्ञ, तप और दान का महत्व :-

इस दिन किए गए यज्ञ, तप और ज्ञान का विशेष मह्त्व माना जाता है। पुराणों के अनुसार भगवान् विष्णु व्रत, उपवास और दान से भी उतने प्रसन्न नहीं होते जितने माघी पूर्णिमा के स्नान से होते हैं।

यही कारण है कि इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा की जाती है। भोजन, वस्त्र, गुड़, कपास,घी, लड्डू, फल और अन्न आदि का दान करना पुण्यदायक माना जाता है।

इस माह में तिल का दान विशेष दान माना जाता है। इस दिन भगवान् सत्यनारायण की कथा और दान पुण्य को अति फलदायी माना गया है।

सत्यनारायण भगवान् की पूजा सामग्री

भगवान् सत्यनारायण की कथा के बाद उनका पूजन होता है। भगवान् विष्णुजी की पूजा में केले के पत्ते व फल, पंचामृत, सुपारी, पान, तिल, मौली, रोली, कुमकुम और दूर्वा का प्रयोग किया जाता है।

कैसे करें इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा?

  • सत्यनारायण भगवान् की पूजा के लिए दूध, शहद, केला, तुलसी, गंगाजल और मेवा मिलाकर पंचामृत तैयार करें।
  • गेहूं के आटे को भूनकर उसमें शक्कर मिलाकर कसार का प्रसाद तैयार कर लें और उसमें फलों के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर मिला लें।
  • लक्ष्मी जी, शिवजी और ब्रह्माजी की आरती कीजिए।
  • इसके बाद भोग लगाकर प्रसाद और चरणामृत बांटे।
  • गरीब लोगों को सर्दी ठंड से बचने के लिए ऊनी वस्त्र, कंबल, आग तापने के लिए लकड़ी, तिल, गुड़, घी आदि का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। अतः दान पुण्य जरूर करे।
  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें यथाशक्ति दक्षिणा भेंट करें।

माघ पूर्णिमा पर पितृ तर्पण कैसे करें?

माघ मास में पूर्णिमा पर पितृ तर्पण से पितरों की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह दिन पितरों के पुण्य स्नान का आखिरी दिन कहा जाता है।

आइए जानते हैं कि इस दिन कैसे तर्पण करें।

  • माघ पूर्णिमा के दिन काले तिलों से हवन कराए और तर्पण कराए। यह हवन आप किसी भी ज्ञानी ब्राह्मण से करा सकते हैं।
  • इस दिन पितरों के निमित्त स्नान, दान और माधव पूजा करने से सब पाप नष्ट हो जाते हैं और पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है।

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