श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर, पुष्कर, अजमेर, राजस्थान

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श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर राजस्थान के अजमेर जिले के पवित्र तीर्थ पुष्कर में स्थित एक अनोखा धार्मिक स्थल है। यह मंदिर अपनी तीन मंजिला संरचना, रामायण की घटनाओं को दर्शाने वाली प्रतिमाओं और शीर्ष मंजिल पर विराजमान पंचमुखी हनुमान जी के लिए प्रसिद्ध है।

यदि आप श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर का इतिहास, धार्मिक महत्व, यहां की विशेषताएं और दर्शन की पूरी जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर एक नजर में

मंदिर का नाम श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर
स्थान पुष्कर, अजमेर, राजस्थान
मुख्य देवता भगवान हनुमान (पंचमुखी स्वरूप)
विशेष पहचान तीन मंजिला मंदिर और रामायण आधारित प्रतिमाएं
निर्माता रामसखा आश्रम
निकट दर्शनीय स्थल ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर सरोवर

अजमेर स्थित पुष्कर शहर पहुंचने के लिए जयपुर होकर जाना उपयुक्त होता है। जयपुर रेल, सड़क और वायु मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। जयपुर पहुंचने के लिए देश के सभी प्रमुख शहरों से सीधी रेल सेवा उपलब्ध है। जयपुर उत्तर पश्चिम रेलवे का मुख्यालय है। सड़क मार्ग से जयपुर जाने के लिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात आदि राज्यों से नियमित बसे संचालित होती हैं।

जयपुर हवाई अड्डे के लिए देश के कई शहरों से सीधी हवाई उड़ाने है। राजस्थान के अजमेर शहर से 14 किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिम मे अरावली पहाड़ियों की गोद मे बसा पुष्कर शहर भारत के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। पुष्कर को सभी तीर्थों का मुख माना जाता है। पद्म पुराण मे पुष्कर की श्रेष्ठता का वर्णन किया गया है।

पुष्कर मुख्य रूप से चौदहवीं शताब्दी मे बने ब्रह्मा जी के मंदिर और सरोवर के लिए विख्यात है। प्रसिद्ध और पावन पुष्कर सरोवर की लम्बाई और चौड़ाई समान है। डेढ़ किलोमीटर लम्बे और इतने ही चौड़े पुष्कर सरोवर को पास की पहाड़ी से देखें तो ये वर्गाकार स्फटिक मणि के समान जगमगाता दिखाई देता है। इसके चारों तरफ बने हुए पावन घाट इसके सौंदर्य को दुगना कर देते हैं।

श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर की विशेषताएं

चौथी शताब्दी में बने ब्रह्मा मंदिर के अलावा छोटी सी नगरी पुष्कर मे 500 से अधिक मन्दिर हैं और इन्हीं मंदिरों मे से एक मंदिर है श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर। मीनार की शक्ल में बने इस तीन मंजिला मंदिर की शोभा ही निराली है। रामसखा आश्रम द्वारा निर्मित श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर के भूतल में नौ खंड हैं जिसमें विभिन्न देवी देवताओं के साथ महान संतो की प्रतिमाएं सुशोभित हैं।

सबसे ऊपर के खंड में पंचमुखी हनुमान विराजमान है। अगर आप भगवान हनुमान के एक और प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर के बारे में जानना चाहते हैं, तो करमनघाट हनुमान मंदिर की जानकारी भी जरूर पढ़ें।

पुष्कर के विश्व विख्यात ब्रह्मा मंदिर के जाने वाले रास्ते पर बना श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर इस इलाके का सबसे ऊंचा मंदिर है। जिसे श्रद्धालु दूर से ही देख सकते हैं। विशेष रूप से प्रत्येक मंजिल पर बनी प्रभु श्रीराम जी के साथ बजरंग बली की विभिन्न मुद्राओं वाली विभिन्न प्रतिमाएं जो राम कथा से संबंधित घटनाओं को उजागर करती है। फिर चाहे वो बाली वध का प्रसंग हो या बजरंग बली हनुमान जी द्वारा अहिरावण की कैद से छुड़ाकर प्रभु श्रीराम और भ्राता लक्ष्मण को कंधे पर बिठाकर लाना हो।

मंदिर के गर्भगृह और मुख्य प्रतिमाएं

श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर मे प्रवेश करते ही सबसे पहले दर्शन होते हैं संगमरमर की बनी श्री हनुमान जी की प्रतिमा की। सफेद वस्त्र पहने एक हाथ में गदा हुटाये और दूसरे हाथ से भक्तो को आशीर्वाद देते प्रभु बजरंग बली हनुमान जी की ये प्रतिमा थोड़ी उग्र नजर आती है। गले में लाल और सफेद पुष्पों की माला पहने हनुमान जी के सिर पर चांदी का रत्न जड़ित मुकुट शोभायमान है। उनके मस्तक पर चंदन का तिलक सुशोभित है।

बजरंग बली जी के चरणों के पास तांबे का कलश, घंटी तथा शंख रखे हुए हैं। इन पूजन सामग्रियों के पास ही दान पात्र रखा हुआ है। गर्भ गृह मे हनुमान जी की प्रतिमा के पास ही एक तरफ हनुमान जी की तस्वीर रखी हुई है जिस पर हनुमान चालीसा लिखी हुई है। इस मंदिर के उपर शीर्ष पर बड़े बड़े अक्षरों में जय श्री राम लिखा हुआ है जो उनकी राम भक्ति का सूचक है।

मंदिर परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवता

मंदिर प्रांगण में हनुमान जी की प्रतिमा के पास ही सर्व प्रथम पूजनीय श्री गणेश जी की प्रतिमा स्थापित है। हाथों में पशु पाश तथा लड्डू लिए बैठे गणेश जी की प्रतिमा को नगीनो से सजाया गया है। श्री गणेश की आशीर्वाद देती हथेली पर उकेरा गया स्वास्तिक का चिह्न उनके शुभ प्रताप की पुष्टि करता है। भगवान श्री गणेश के पास ही उनके प्रिय वाहन मूषक महाराज हाथों मे लड्डू लिए बैठे हैं।

श्री गणेश प्रतिमा की दूसरी तरफ विशाल शिवलिंग स्थापित है। काले पत्थर से बने शिवलिंग पर भगवान शंकर की मुखाकृति उकेरी गई है। शिवलिंग पर तांबे का सर्प छत्र समान विराजित है और इसी के साथ शिवलिंग पर तांबे का कलश लटकाया गया है जिससे बूंद-बूंद जल शिवलिंग पर टपकता रहता है। शिवलिंग के समीप ही काले पत्थर से बने नंदी बैल विराजमान है। शिवलिंग के पास पूरा शिव परिवार उपस्थित है। माँ पार्वती के साथ भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाएं विराजित हैं। संगमरमर से बनी प्रतिमाओं पर भक्त जन पुष्प चढ़ाते हैं।

विशेष रूप से लाल पुष्प के साथ माँ पार्वती को नारंगी चुनरी उड़ाई गयी है। भगवान शिव के समक्ष हाथ जोड़े बैठी माँ पार्वती भगवान शिव की आराधना मे मग्न हैं। शिवलिंग के ठीक पीछे माँ सरस्वती, माँ दुर्गा और माँ संतोषी की प्रतिमाएं स्थापित है। लाल साड़ी पहने हाथों में तलवार, त्रिशूल और पात्र लिए कमल के फूल पर विराजित चतुर्भुज संतोषी माता की प्रतिमा अत्यन्त ही मनोहारी है।

संतोषी माता के बाजू में लाल पीली साड़ी पहने माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है। अपने वाहन शेर पर बैठी अष्टभुजी माँ दुर्गा ने हाथो में तलवार के साथ त्रिशूल, नर मुंड और रक्त पात्र थामा हुआ है। माँ दुर्गा तथा माँ संतोषी की इन प्रतिमाओं के साथ अपने वाहन हंस पर सवार माँ सरस्वती की प्रतिमा भक्तों को लुभाती है। हाथों में वीणा तथा शास्त्र थामे माँ सरस्वती ने शुभ सफेद वस्त्र धारण किए हुए हैं।

श्रीराम दरबार और रामायण से जुड़ी झांकियां

श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर के प्रांगण में ही एक जगह पर श्री राम दरबार उपस्थित है। पत्नी सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ हाथों में धनुष बाण थामे खड़े प्रभु श्रीराम की प्रसन्न मुद्रा भक्तों को लुभाती है। हर्षोल्लास से सराबोर इन तीनों प्रतिमाओं को लाल वस्त्र पहनाए गए हैं। सिर पर स्वर्ण मुकुट के साथ हाथो में धनुष-बाण थामे भ्राता लक्ष्मण अपने भाई श्रीराम की रक्षा मे तत्पर नजर आते हैं।

पुरुषोत्तम राम के साथ खड़ी माँ सीता अपने अर्धांगिनी होने का उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करती है। सभी प्रतिमाओं के गले में मोतियों की माला सुशोभित है। राम दरबार में हनुमान जी के साथ उनकी तस्वीर भी रखी गयी है। प्रभु श्रीराम के संगमरमर से बने इस छोटे से मंदिर के ऊपर ॥ श्री नृत्य राघवाय नमः॥ अंकित है।

श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर की बनावट को देख कर इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये मंदिर बेहद ही प्राचीन है। इस प्राचीन मंदिर में इन प्रतिमाओं के साथ इनकी दीवारों पर विभिन्न देवी देवताओं की तस्वीरें चिपकायी गयी है। बजरंग बली हनुमान जी के मंदिर के बाहर संगमरमर की शिला पर काले अक्षरों से हनुमान चालीसा के साथ श्रीराम भजन भी लिखे हुए हैं।

श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर मे पंच आरती की लौ के साथ रेशमी कपड़े एवं शंख से आरती करने की परंपरा है। घंटियों की मधुर ध्वनि के साथ घंटियों की गूंज, तालियों की आवाज और नगाड़े की थाप के साथ आरती का कार्यक्रम सम्पन्न किया जाता है। प्रभु की आराधना में लीन भक्तों मे हर उम्र के लोग शामिल होते हैं।
मध्य प्रदेश का श्री सिद्धवीर खेड़ापति हनुमान मंदिर भी अपनी अनोखी मान्यताओं और भगवान हनुमान के प्रति भक्तों की अटूट आस्था के लिए प्रसिद्ध है।

मंदिर की आरती और पूजा परंपरा

आरती के बाद भक्त बजरंग बली की प्रतिमा की परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा के बाद हनुमान जी को साष्टांग प्रणाम कर अपनी पूजा सम्पन्न करते हैं। श्री हनुमान जी को साष्टांग नमन करते हुए भक्त इस बात का खास ख्याल रखते हैं कि उनका सिर हनुमान जी की तरफ न हो। अजमेर स्थित पुष्कर के श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर में राम भक्त हनुमान जी सहित विभिन्न देवी देवताओं के पावन दर्शन कर आस्थावान भक्तों को परम आनंद प्राप्त होता है।

इसी प्रकार सारंगपुर हनुमान मंदिर भी भगवान हनुमान के चमत्कारी धामों में गिना जाता है, जहां देशभर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

अगर आप भारत के विभिन्न राज्यों में स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो भारत के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर की विस्तृत जानकारी भी अवश्य पढ़ें।

श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर कैसे पहुंचे?

यह मंदिर राजस्थान के अजमेर जिले के पुष्कर शहर में स्थित है। अजमेर रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पुष्कर पहुंचा जा सकता है। जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा निकटतम प्रमुख एयरपोर्ट है, जहां से टैक्सी और बस की सुविधा उपलब्ध रहती है।

मंदिर जाने से पहले ध्यान रखें

  • सुबह और शाम के समय दर्शन का वातावरण सबसे अधिक शांत और आध्यात्मिक रहता है।
  • पुष्कर सरोवर और ब्रह्मा मंदिर के दर्शन भी साथ में किए जा सकते हैं।
  • मंदिर परिसर की स्वच्छता और नियमों का पालन करें।
  • भीड़ वाले दिनों में वाहन निर्धारित पार्किंग में ही खड़ा करें।

श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर से जुड़े सवाल

श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर कहां स्थित है?

यह मंदिर पुष्कर, अजमेर (राजस्थान) में स्थित है।

यह मंदिर किस लिए प्रसिद्ध है?

यह मंदिर तीन मंजिला संरचना, पंचमुखी हनुमान जी और रामायण की घटनाओं पर आधारित प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध है।

मंदिर के सबसे ऊपर कौन विराजमान हैं?

मंदिर की शीर्ष मंजिल पर पंचमुखी हनुमान जी विराजमान हैं।

क्या यहां अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी हैं?

हां, यहां श्रीराम दरबार, शिव परिवार, गणेश जी, मां दुर्गा, मां सरस्वती, मां संतोषी सहित अनेक देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

क्या पुष्कर के अन्य प्रसिद्ध स्थल यहां से पास हैं?

हां, विश्व प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर और पुष्कर सरोवर इस मंदिर के निकट ही स्थित हैं।

॥ सियावर राम चन्द्र की जय ॥

॥ पवन सुत हनुमान की जय ॥

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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