होरी हनुमान जी का मंदिर राजस्थान – यहां आने से होते हैं दुख दूर। प्रेत बाधाओं से भी मिलती है मुक्ति।

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होरी हनुमान मंदिर राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की सीमा के पास स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर स्थानीय लोगों के बीच विशेष रूप से बाधा निवारण, मनोकामना पूर्ति और भगवान हनुमान की कृपा से जुड़ी मान्यताओं के लिए जाना जाता है।

यदि आप होरी हनुमान मंदिर का इतिहास, धार्मिक मान्यताएं, मंदिर की विशेषताएं और यहां से जुड़ी लोककथाओं के बारे में जानना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

होरी हनुमान मंदिर एक नजर में

मंदिर का नाम होरी हनुमान मंदिर
स्थान होरी गांव, प्रतापगढ़ (राजस्थान) सीमा क्षेत्र
मुख्य देवता भगवान हनुमान
विशेष पहचान बाधा निवारण से जुड़ी स्थानीय मान्यताएं
अनुमानित प्राचीनता लगभग 125 वर्ष
मुख्य आकर्षण प्राचीन मंदिर और लोक आस्था

 

होरी हनुमान जी का मंदिर राजस्थान – यहां आने से होते हैं दुख दूर। प्रेत बाधाओं से भी मिलती है मुक्ति।

होरी के हनुमान, जी हाँ, होरी नाम के गाँव में हनुमान जी का खास रूप। वो रूप जिसके दर्शन करने भर से सारे रोग छू मन्तर हो जाते हैं और सारी बाधाएं हट जाती हैं।

एक खास स्थान, जहां विराजे हैं हनुमान – करते हैं सब परेशानियों का निदान। यहां आने से होते हैं दुख दूर।

स्थानीय मान्यता है कि यहां दर्शन और पूजा-अर्चना करने से भक्तों को विभिन्न प्रकार की बाधाओं से राहत मिलती है।

मंदसौर और राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की सीमा पर स्थित है गाँव होरी का।

ये गाँव इलाके के और गांवों जैसा ही है लेकिन इस गाँव को अलग कर दिया है 125 साल पुराने मंदिर ने। जिसे होरी हनुमान धाम कहा जाता है।

होरी हनुमान मंदिर की विशेषताएं

होरी हनुमान जी का मंदिर:- खास है ये मंदिर – बजरंग बली का अनोखा रूप।

जी हां, श्रद्धालु कहते हैं, बजरंग बली जिस रूप में यहां है वैसा ही शायद ही कहीं और इस रूप में हो। इसी रूप की ख्याति दूर दूर तक फैली हुई है।

प्रेत बाधाओं के सताए लोगों के लिए ये है खास मंदिर। लगती है यहाँ खास हाजिरी – जंजीर से बांधे जाते हैं लोग और हो जाते हैं ठीक। कोई बंधा रहता है जंजीर से। कोई कैद रहता है ताले में। कोई है बेसुध।

सभी के परिवार वालों को भरोसा है बजरंग बली पर। वो कुछ ऐसा चमत्कार दिखाएंगे और ये ठीक हो जाएंगे।

माने भी क्यूँ न? यहां पुजारी के मुताबिक ऐसे कितने ही अनगिनत दरबार मे आकर ठीक हो गए हैं।

कहा जाता है कि किसी भी आत्मा ने आदमी को सताया हो, कोई भी भूत या प्रेत परेशान कर रहा हो, इस स्थान पर आने के बाद सभी हवाएं शरीर छोड़ देती हैं।

मंदिर में आने वाले कई लोग ऐसे हैं जिन्हे दुष्ट आत्माओं ने घेर रखा था। वो कहते हैं बजरंग बली की महिमा से वो अब बिल्कुल स्वस्थ महसूस कर रहे हैं।

मंदिर से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं

होरी हनुमान जी का मंदिर –  मंदिर में लोगों की गहरी आस्था – कई लोगों के बने बिगड़े काम

यहां आने वाले लोग कहते हैं कि तमाम रोगों और बाधाओं से तो मंदिर में आने के बाद मुक्ति मिल ही जाती है, साथ ही बिगड़े काम भी बन जाते हैं।

इसी वजह से मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती ही जा रही है।

लोगों की भले ही मंदिर की गहरी आस्था हो भले ही हजारो लोग यहाँ आकर ठीक हो गए हो लेकिन जानकार भूत प्रेत बाधाओं की बात पर यकीन नहीं करते।

उनका कहना है कि ये एक मानसिक बीमारी है जिसका इलाज किसी कुशल डॉक्टर से ही कराना चाहिए।

होरी गाँव में जैसा मंदिर अभी है वैसा पहले नहीं था। मंदिर के स्थान पर वहां एक चबूतरा हुआ करता था जहां एक भक्त पूजा करता था।

धीरे धीरे इस स्थान का ध्यान करने से लोगों के काम बनने लगे जिसके बाद इस स्थान की आस्था गहरी हो चली।
उत्तर प्रदेश की हनुमान धारा, चित्रकूट भी भगवान हनुमान से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं और धार्मिक महत्व के कारण देशभर के भक्तों के बीच प्रसिद्ध है।

होरी हनुमान मंदिर का इतिहास

होरी हनुमान जी का मंदिर जहां मिलती है कई बाधाओं से मुक्ति।

दूर हो जाते हैं कई रोग और अनूठी है इस मंदिर के बनने की कहानी।

पहले इस स्थान पर था चबूतरा – भक्तों ने दिया मंदिर का रूप।

जी हां, होरी गाँव में जहां वर्तमान में मंदिर नजर आता है वहां कभी एक चबूतरा हुआ करता था।

यहीं बजरंग बली की मूर्ति स्थापित थी। चबूतरे और मूर्ति की साफ सफाई जगन्नाथ नाम का एक भक्त किया करता था।

जगन्नाथ की बजरंग बली मे गहरी आस्था थी। कहा जाता है कि बजरंग बली कई साल पहले ही यहां अपने चमत्कार दिखाने लगे थे।

उन्हीं की महिमा से जगन्नाथ को मंदिर के पास चांदी का एक सिक्का मिला।

जगन्नाथ ने वो सिक्का पास के ही पोटड़ी गाँव के एक आदमी रामलाल के यहां रख दिया। धीरे धीरे रोज जगन्नाथ को और सिक्के मिलने लगे।

वो उन्हें रामलाल के यहां जमा करने लगा। एक दिन रामलाल ने सिक्के का राज बताने की जिद की तो जगन्नाथ ने हकीकत बता दी। उसी दिन के बाद उसे सिक्के मिलने बंद हो गए।

कुछ लोग मंदिर की महिमा से जुड़ी एक और कहानी बताते हैं।

वो बताते हैं कि एक साल रोजड नदी में भयंकर बाढ़ आ गई थी। आसपास के कई मकान धराशायी हो गए।

पोटड़ी गाँव भी जल मग्न हो गया।

उस गाँव में नाथू जी तम्बोले नाम के आदमी ने होरी हनुमान का ध्यान किया और कहा कि अगर बजरंग बली उनका अनाज सुरक्षित बचा देते हैं तो वो उसका कुछ अंश अर्पित करेंगे।

हनुमान जी की कृपा से उसका अनाज बच गया। इसके बाद नाथू जी ने मंदिर बनवाने के लिए अनाज का हिस्सा दिया।

लोगों के मुताबिक लोगों ने धीरे धीरे पुराने चबूतरे पर मंदिर बनवा दिया।

जिसमें बजरंग बली की प्रतिमा तो स्थापित की ही गयी साथ ही उनके भक्त जगन्नाथ की मूर्ति भी लगाई गई। अब इस मंदिर को भव्य रूप दिया जा रहा है।

होरी हनुमान के दर्शन के लिए आसपास से तो लोग आते ही हैं दूर दूर से भी लोग यहां मुराद मांगने आते हैं।
राजस्थान के पुष्कर में स्थित श्री नवखण्डीय तुलसी मानस हनुमान मंदिर भी भगवान हनुमान के विविध स्वरूपों और रामायण से जुड़ी झांकियों के लिए विशेष पहचान रखता है।

होरी हनुमान मंदिर कैसे पहुंचे?

यह मंदिर राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की सीमा के पास स्थित होरी गांव में है। प्रतापगढ़ और मंदसौर से सड़क मार्ग द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। निजी वाहन और स्थानीय परिवहन के साधन उपलब्ध रहते हैं।

मंदिर जाने से पहले ध्यान रखें

  • मंदिर परिसर की शांति और नियमों का पालन करें।
  • भीड़ वाले दिनों में दर्शन के लिए अतिरिक्त समय रखें।
  • किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
  • स्थानीय धार्मिक परंपराओं का सम्मान करें।

अगर आप देशभर के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो भारत के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर की विस्तृत जानकारी भी अवश्य पढ़ें।

होरी हनुमान मंदिर से जुड़े सवाल

होरी हनुमान मंदिर कहां स्थित है?

यह मंदिर राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की सीमा के पास स्थित होरी गांव में है।

यह मंदिर किस लिए प्रसिद्ध है?

यह मंदिर भगवान हनुमान के प्रति गहरी आस्था और बाधा निवारण से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है।

क्या मंदिर लगभग 125 वर्ष पुराना है?

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का इतिहास लगभग 125 वर्ष पुराना माना जाता है।

क्या दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं?

हां, राजस्थान, मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं।

अगर आप भगवान हनुमान के पंचमुखी स्वरूप के दर्शन करना चाहते हैं, तो श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर, राजा कटरा (कोलकाता) की जानकारी भी जरूर पढ़ें।

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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