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जानिए श्री हनुमान चालीसा के जन्म और उत्पत्ति की कहानी मेहंदीपुर बालाजी ब्लॉग पर

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जानिए श्री हनुमान चालीसा के जन्म और उत्पत्ति की कहानी मेहंदीपुर बालाजी ब्लॉग पर – ॥श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि, बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि, बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार, बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

Hanuman chalisa ke janm aur utpatti ki kahani हनुमान चालीसा के जन्म और उत्पत्ति की कहानी

भक्तों कहते हैं कि जब भी आप बड़ी मुसीबत मे हो या भूत पिशाच के डर ने आपको बुरी तरह से जकड़ रखा हो और आपको लग रहा हो कि अब तो समस्या से पार पाना मुश्किल ही है तो केवल राम नाम का जाप और हनुमान चालीसा का पाठ आपके हर दुःख का निवारण कर सकता है।

लेकिन हृदय में प्रभु श्री राम और उनके भक्त हनुमान के प्रति परम विश्वास होना अति आवश्यक है। क्योंकि अगर विश्वास ही नहीं है तो भक्ति की शक्ति का अर्थ ही नहीं रह जाता और ऐसे ही अविश्वास का साक्षी बना था अकबर।

जिसने तुलसीदास के राम और हनुमान के विश्वास का मज़ाक बनाया और आखिरकार उसने राम के नाम और हनुमान की शक्ति को मानना ही पड़ा।

हनुमान चालीसा के जन्म और उत्पत्ति की कहानी

ये घटना उन दिनों की है जब अकबर का शासन हुआ करता था। एक दिन तुलसीदास राम नाम मे लीन होकर कहीं से गुजर रहे थे। तभी रास्ते मे एक रोती हुई महिला अचानक से तुलसीदास के पैरों मे जा गिरी।

यह देखकर तुलसीदास के मुह से उस महिला को आशीर्वाद स्वरूप “सौभाग्यवती भव” निकल गया। यह सुनकर वह महिला तुलसीदास जी से कहती है कि कुछ देर पहले उसके पति मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं। इसलिए उनके आशीर्वाद का कोई महत्व नहीं रह जाता।

यह सुनकर तुलसीदास जी उस महिला से कहते हैं कि आशीर्वाद मुह से निकल चुका है और अब वो वापिस तो आ नहीं सकता इसलिए उस आशीर्वाद को सत्य होना ही होगा। इसके बाद तुलसीदास उस महिला के पति के मृत शरीर के पास जाते हैं। और सभी से आंखे बंद कर के राम नाम का जाप करने को कहते हैं।

कुछ ही देर बाद राम नाम की शक्ति अपना चमत्कार दिखाती है। और उस महिला का पति जीवित हो जाता है। जब इस चमत्कार की घटना पूरे शहर भर में फैल जाती है तो हर तरफ राम नाम के साथ ही तुलसीदास का नाम भी गूंजने लगता है।

ये बात जब सम्राट अकबर को पता चलती है तो वह तुरंत तुलसीदास को राजदरबार मे बुलवाता है। तुलसीदास के राजदरबार मे आते ही अकबर उनसे उनके चमत्कार के बारे में पूछता है। लेकिन तुलसीदास राम का नाम लेकर चुप हो जाते हैं।

तभी अकबर तुलसीदास से दरबार के अंदर ही एक चमत्कार करने के लिए कहता है। यह सुनकर तुलसीदास से चुप नहीं रहा जाता और वह अकबर से कहते हैं कि मुझे कोई चमत्कार करना नहीं आता। राम नाम की शक्ति से बढ़कर कोई चमत्कार नहीं है।

इसीलिए मैं कोई चमत्कार नहीं दिखा सकता। ये सुनकर अकबर को गुस्सा आ जाता है। और वो तुलसीदास को कारावास में डालने का आदेश दे देता है और कहता है कि देखते हैं तुम्हारे राम नाम मे कितनी शक्ति है।

इसके बाद सैनिक तुलसीदास को फतेहपुर सीकरी मे कैद कर देते हैं। तुलसीदास जी अकबर की नादानी पर मुस्कराते हैं और राम नाम का जाप करना शुरू कर देते हैं। यही वो समय था जब हनुमान चालीसा अस्तित्व में आयी। दरअसल तुलसीदास ने अपने कारावास के दौरान प्रभु श्रीराम के साथ उनके भक्त हनुमान जी महाराज का ध्यान करते हुए हनुमान चालीसा लिखी।

और ठीक चालीसवें दिन एक ऐसी घटना हुई जिसने सभी को चौंका दिया। अचानक न जाने कहां से बन्दरों की फौज ने शहर भर में हंगामा कर दिया। फतेहपुर सीकरी कोई हिस्सा ऐसा नहीं बचा था जहां बन्दरों ने आतंक न मचाया हो।

सैनिकों का मार मार कर बुरा हाल कर दिया। कभी किसी को नोचा तो कभी किसी को बुरी तरह से काट लिया। पत्थर फेंक फेंक के कई लोगों को घायल कर दिया। अचानक से बन्दरों का आतंक देख कर सभी हैरान थे। ये सब देखकर अकबर के बहुत पुराने सेवक ने देखकर अकबर को बताया कि ये कुछ और नहीं बन्दी बनाए गए तुलसीदास का चमत्कार है।

ये सुनते ही अकबर तुलसीदास के पास गया और उनसे माफी मांगी। अकबर को क्षमा मांगते देख तुलसीदास कहते हैं कि मै कौन होता हूँ क्षमा करने वाला। चमत्कार भी राम नाम का था और क्षमा भी राम ही करेंगे।

ये सुनकर अकबर तुलसीदास को कैद से मुक्त कर देता है। कहते हैं कि इस घटना के बाद तुलसीदास और अकबर के बीच बहुत गहरी दोस्ती हो गयी। अकबर राम नाम के चमत्कार से इतना प्रभावित हुआ कि उसने ऐलान कर दिया कि उसके शासन मे राम, हनुमान और अन्य देवी देवताओं को मानने वालों को किसी भी तरह से परेशान न किया जाए।

तो भक्तों, ये राम नाम का चमत्कार ही था, श्री राम की लीला ही थी जिसकी वजह से हनुमान चालीसा का जन्म या उत्पत्ति हुई। और इस कलियुग में रामभक्त हनुमान तक पहुंचने का मार्ग प्राप्त हो सका।

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