भगवान दत्तात्रेय जयंती – Dattatreya Jayanti Story In Hindi

0
344

दत्तात्रेय जयंती ( Dattatreya Jayanti) – मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की दशमी को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार भगवान दत्तात्रेय के तीन सिर और छह भुजाएं थी। ये त्रिदेवों के अंश माने जाते हैं।

भगवान दत्तात्रेय जयंती हिन्दू धर्म के प्रमुख धार्मिक पर्वों में से एक है। यदि आप अन्य प्रमुख हिन्दू पर्वों, उनके महत्व और परंपराओं के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो पर्व एवं त्योहार की विस्तृत जानकारी भी पढ़ सकते हैं।

भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा - Dattatreya Jayanti

भगवान दत्तात्रेय कौन हैं?

भगवान दत्तात्रेय बहुत ही दयालु हैं। नित्य उपासना करने वाले भक्तों को भगवान दत्तात्रेय सुख, समृद्धि और वर्चस्व प्राप्ति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

इनकी गिनती महान ऋषियों में की जाती है। असाधारण ज्ञान और विलक्षण अंतर्दृष्टि से इन्होंने कई लोगों का घमंड चूर चूर किया है। इनके जन्म की कथा बड़ी विचित्र है।

Dattatreya Jayanti की कहानी (Bhagwan Dattatreya Ki Kahani In Hindi)

एक बार नारद मुनि भगवान शंकर, विष्णु और ब्रह्माजी से मिलने स्वर्ग लोक गये। परन्तु उनकी भेंट त्रिदेवों में से किसी से न हो सकी।

उनकी भेंट त्रिदेवों की पत्नियों पार्वती, लक्ष्मी एवं सरस्वती जी से हो गई। नारद ने तीनों का घमंड तोड़ने के लिए कहा कि मैं विश्वभर का भ्रमण करता रहता हूँ।

परन्तु अत्रि ऋषि की पत्नी अनुसूइया के समान पतिव्रता धर्म वाली, शील एवं सद्गुण सम्पन्न स्त्री मैंने नहीं देखी। आप तीनों देवियां भी पतिव्रत धर्म पालन में उनसे पीछे हैं।

यह सुनकर उनके अहं को बड़ी ठेस लगी, क्योंकि वे समझती थीं कि हमारे समान पतिव्रता स्त्री संसार में नहीं है। नारदजी के चले जाने के बाद तीनों देवियों ने अपने अपने देवों से सती अनुसूइया का पतिव्रत धर्म नष्ट करने का आग्रह किया।

संयोगवश त्रिदेव एक ही समय अत्रि मुनि के आश्रम पर पहुंचे। तीनों देवों का एक ही उद्देश्य था- अनुसूइया का पतिधर्म नष्ट करना।

तीनों ने मिलकर योजना बना डाली। तीनों देवों ने ऋषियों का वेष धारण कर अनुसूइयां से भिक्षा मांगी। भिक्षा में उन्होंने भोजन करने की इच्छा प्रकट की।

अतिथि सत्कार को अपना धर्म समझने वाली अनुसूइया ने कहा आप स्नान आदि से निवृत्त होकर आइए, तब तक मैं आपके लिए रसोई तैयार करती हूं। तीनों देव स्नान करके आए तो अनुसूइया ने उन्हें आसन ग्रहण करने को कहा।

इस पर तीनों देव बोले-हम तभी आसन ग्रहण कर सकते हैं, जब तुम प्राकृतिक अवस्था में बिना कपड़ों के हमें भोजन कराओगी। अनुसूइया के तन बदन में आग लग गई परन्तु पतिव्रत धर्म के कारण वह त्रिदेवों की चाल समझ गई।

अनुसूइया ने अत्रि ऋषि के चरणोदक को त्रिदेवों के ऊपर छिड़क दिया। इससे त्रिदेव छोटे छोटे बालकों के रूप में बदल गए।

तब सबको उनकी शर्त के मुताबिक अनुसूइया ने भोजन कराया तथा पालने पर अलग अलग उन्हें झुलाने लगीं। काफी समय बीत जाने पर भी जब त्रिदेव नहीं लौटे तो त्रिदेवियों को चिन्ता होने लगी।

त्रिदेवियां त्रिदेवों को खोजती हुई अत्रि ऋषि के आश्रम में पहुंची और सती अनुसूइया से त्रिदेवों के बारे में जानकारी करने लगी। अनुसूइया ने पालनों की ओर इंगित करके कहा कि तुम्हारे देव पालनों में आराम कर रहे हैं।

अपने अपने देव को पहचान लो परन्तु तीनों के चेहरे एक से होने के कारण वे न पहचान सकीं। लक्ष्मी जी ने बहुत चालाकी से विष्णु को पालने से उठाया तो वे शंकर निकले, उस पर उनको बड़ा उपहास सहना पड़ा।

तीनों देवियों के अनुनय विनय करने पर अनुसूइया ने कहा कि इन तीनों ने मेरा दूध पिया है। इसलिए इन्हें किसी न किसी रूप में मेरे पास रहना होगा।

इस पर त्रिदेवों के अंश से एक विशिष्ट बालक का जन्म हुआ जिसके तीन सिर तथा छः भुजाएं थीं। यही बालक बड़ा होकर दत्तात्रेय ऋषि कहलाए। अनुमूहया ने पुनः मति चरणोदक से त्रिदेवों को पूर्ववत् कर दिया।

Dattatreya Jayanti का महत्व

दत्तात्रेय जयंती हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि भगवान दत्तात्रेय त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त अवतार हैं। इस दिन श्रद्धालु भगवान दत्तात्रेय की पूजा-अर्चना, व्रत और भजन-कीर्तन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनकी उपासना करने से ज्ञान, वैराग्य, सुख और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। अनेक स्थानों पर दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम और सत्संग आयोजित किए जाते हैं।

सनातन धर्म में भगवान के विभिन्न अवतारों और उनके प्राकट्य दिवसों का विशेष महत्व माना जाता है। इसी प्रकार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है।

Frequently Asked Questions

Dattatreya Jayanti कब मनाई जाती है?

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है।

भगवान दत्तात्रेय किसके अवतार माने जाते हैं?

भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त स्वरूप के रूप में माना जाता है।

दत्तात्रेय जयंती का क्या महत्व है?

इस दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा करने से ज्ञान, वैराग्य और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होने की मान्यता है।

भगवान दत्तात्रेय के कितने सिर और भुजाएं थीं?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान दत्तात्रेय के तीन सिर और छह भुजाएं थीं।

पिछला लेखतुलसी विवाह भजन लिरिक्स इन हिंदी | Tulsi Vivah Bhajan Lyrics
अगला लेखKumbh Mela: इतिहास, पौराणिक कथा, महत्व और आयोजन स्थल
PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें