हनुमान जी को चोला चढ़ाने की सही विधि (Hanuman Ji Ka Chola)

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Hanuman Ji Ka Chola हनुमान भक्तों के लिए विशेष श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी को चमेली के तेल और सिंदूर का चोला चढ़ाने की परंपरा है। यहाँ जानिए हनुमान जी का चोला क्या है, चोला चढ़ाने की सही विधि, आवश्यक सामग्री तथा सौम्य और उग्र विधि का महत्व।

यदि आप नियमित रूप से हनुमान जी की पूजा करते हैं, तो हनुमान भक्तों के लिए 11 जरूरी नियम भी जरूर जानें।

विषय हनुमान जी का चोला
समर्पित हनुमान जी
शुभ दिन मंगलवार एवं शनिवार
मुख्य सामग्री चमेली का तेल और सिंदूर

हनुमान जी को चोला क्यों चढ़ाया जाता है?

हनुमान जी को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला चढ़ाना उनकी भक्ति, सेवा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान श्रीराम के प्रति हनुमान जी का प्रेम और निस्वार्थ भाव ही इस परंपरा की सबसे बड़ी प्रेरणा है।

भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार चोला चढ़ाकर भगवान से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य, साहस और जीवन की परेशानियों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह मानी जाती है कि पूजा केवल विधि से नहीं, बल्कि सच्चे मन और श्रद्धा से की जाए।

भक्तों आज का विषय है कि हनुमान जी को चोला (Hanuman Ji Ka Chola) कैसे चढ़ाना चाहिए इसकी हम आपको सही विधि बताएंगे। विधि के साथ साथ हम आपको बताएंगे कि किन दो तरीकों सौम्य और उग्र से चोला हनुमान जी को चढ़ाया जाता है।

Hanuman Ji Ka Chola Kya Hai?

बालाजी महाराज को चोला मंगलवार या शनिवार के शुभ दिन को चढ़ाना चाहिए। बालाजी महाराज हनुमान जी को चमेली के तेल और सिंदूर से चोला चढ़ाया जाता है।

चोला सिंदूर और चमेली के तेल का मिश्रण होता है, जिसे विशेष विधि से भगवान हनुमान की प्रतिमा पर लगाया जाता है। इसके बाद जनेऊ, वस्त्र, वर्क, फूल और प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। कई मंदिरों में यह सेवा केवल पुजारी द्वारा कराई जाती है, जबकि कुछ स्थानों पर श्रद्धालु स्वयं भी चोला चढ़ा सकते हैं।

अगर आप पहली बार चोला चढ़ा रहे हैं, तो पहले मंदिर के नियम जान लेना बेहतर रहता है। इससे पूजा भी सही तरीके से होती है और मंदिर की परंपरा का सम्मान भी बना रहता है।

हनुमान जी को चोला कैसे चढ़ाए?

हनुमान जी को चोला चढ़ाने की सही विधि (Hanuman Ji Ka Chola)

चोला चढ़ाने से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें और मन को शांत रखें। पूजा की पूरी सामग्री पहले से तैयार कर लें ताकि पूजा के बीच में कोई बाधा न आए। इसके बाद भगवान श्रीराम और हनुमान जी का स्मरण करते हुए पूजा शुरू करें।

चोला चढ़ाने के बाद हनुमान चालीसा की महिमा जानने से इस पाठ के आध्यात्मिक महत्व को भी समझा जा सकता है।

यदि मंदिर में पुजारी की देखरेख में चोला चढ़ाया जाता है, तो उनकी बताई हुई विधि का ही पालन करें। हर मंदिर की अपनी परंपरा होती है और उसका सम्मान करना भी पूजा का ही एक हिस्सा माना जाता है।

Hanuman Ji Ka Chola Ka Saman List

  • चमेली का तेल
  • लाल सिंदूर
  • चांदी या सोने का वर्क
  • जनेऊ
  • अंगोछा
  • वस्त्र

ये सब चोले का सामान लेने के बाद चोला चढ़ाने की तैयारी कर लें।

चोला चढ़ाने के लिए सबसे जरूरी सामग्री सिंदूर और चमेली का तेल माना जाता है। इसके अलावा जनेऊ, अंगोछा, वस्त्र, फूल, धूप, दीप, प्रसाद और चांदी या सोने का वर्क भी कई जगह परंपरा के अनुसार चढ़ाया जाता है।

जरूरी नहीं कि हर मंदिर में सभी सामग्री का उपयोग किया जाए। कुछ मंदिरों में केवल सिंदूर और चमेली के तेल से चोला चढ़ाया जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर पूरी पूजा सामग्री अर्पित करने की परंपरा होती है। इसलिए जिस मंदिर में आप पूजा करने जा रहे हैं, वहां के नियम पहले जान लेना अच्छा रहता है।

Hanuman Ji Ko Chola Chadhane Ki Vidhi

  • सबसे पहले प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान करें और वेशभूषा में स्वच्छ धोती कुर्ता पहने।
  • बालाजी महाराज का ध्यान करते हुए मन ही मन प्रार्थना करें कि बाबा हम आपको चोला चढ़ा रहे हैं। आप हमारा कल्याण करें और अपना आशीर्वाद हम पर बनाए रखें।
  • बालाजी हनुमान जी की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं।

पूजा शुरू करने से पहले भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी का स्मरण करें। इसके बाद पूरे समय मन में श्रीराम नाम का जाप करते रहें। माना जाता है कि चोला केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि भगवान के प्रति अपने प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करने का माध्यम भी है।

यदि प्रतिमा पर पहले से चोला लगा हो, तो बिना मंदिर की अनुमति उसे हटाने का प्रयास न करें। कई मंदिरों में यह सेवा केवल पुजारी द्वारा की जाती है। ऐसे स्थानों पर श्रद्धालु केवल सामग्री अर्पित करते हैं और चोला मंदिर की परंपरा के अनुसार चढ़ाया जाता है।

Hanuman Ji Ka Chola Kaise Banaye?

  • स्नान कराने के बाद एक शुद्ध स्वच्छ बर्तन में सिंदूर डालें।
  • सिंदूर में थोड़ा सा चमेली का तेल अच्छे से मिला लें।

सिंदूर और चमेली के तेल का मिश्रण बहुत अधिक पतला या बहुत अधिक गाढ़ा नहीं होना चाहिए। दोनों को अच्छी तरह मिलाकर ही चोला तैयार किया जाता है ताकि प्रतिमा पर आसानी से लगाया जा सके।

पूरी प्रक्रिया के दौरान मन में भगवान श्रीराम और हनुमान जी का स्मरण करते रहें। धार्मिक परंपरा में माना जाता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया छोटा-सा पूजन भी भगवान को प्रिय होता है।

आगे की विधि

  • श्री राम जी का जाप करते हुए हनुमान जी को पैरों से सिर की ओर यह चोला चढ़ाएं।
  • सबसे पहले दाहिने पैर पर नीचे से ऊपर की ओर चोला चढ़ाए।
  • फिर बायें पैर पर नीचे से ऊपर की ओर चोला चढ़ाना चाहिए।
  • पैरों के बाद बालाजी हनुमान जी के दाहिने हाथ पर नीचे से ऊपर की ओर चोला चढ़ाना है।
  • दाहिने हाथ की विधि की तरह ही बायें हाथ पर चोला चढ़ाए।
  • फिर बाकी अंगों पर भी नीचे से ऊपर की तरफ चोला चढ़ाए।
  • सोने या चांदी के वर्क लेकर सिंदूर का चोला जो आपने चढ़ाया है उसपर वर्क के टुकड़े लगा दीजिए।
  • वर्क लगाने के बाद सामग्री में से हनुमान जी का जनेऊ (Hanuman Ji Ka Janeu) धारण कराए।
  • जनेऊ पहनाने के बाद वस्त्र आदि पहनाएं।
  • वस्त्र धारण कराने के पश्चात हनुमानजी को भोग लगाएं। धूप दीप पुष्प आदि से पूजन करें।
  • हनुमान जी का चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करें और बालाजी महाराज की आरती गाएं।
  • बालाजी महाराज के आगे माथा टेके।

चोला पूरा होने के बाद कुछ समय भगवान के सामने बैठकर प्रार्थना करें। जल्दबाजी में मंदिर से लौटने के बजाय भगवान का स्मरण करें और अपने परिवार, समाज तथा सभी लोगों के मंगल की कामना करें।

यदि संभव हो तो पूजा के बाद हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ भी करें। इससे पूजा का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

उग्र विधि से हनुमान जी को चोला चढ़ाने की विधि

हनुमान जी को चोला दो तरीके से चढ़ाया जाता है।

  1. चरणों से सिर की ओर
  2. सिर से चरणों की ओर

जब आप हनुमान जी का चोला इन्हें चरणों से सिर की ओर ले जाते हुए चढ़ाते हैं तो इस तरीके को चोला चढ़ाने की सौम्य विधि कहते हैं।

जबकि दूसरी ओर अगर आप चोला सिर से हनुमानजी के चरणों की ओर चोला चढ़ाते हैं तो यह विधि उग्र विधि कहलाती है।

सौम्य और उग्र दोनों विधियां धार्मिक परंपराओं में प्रचलित हैं। दोनों का उद्देश्य भगवान की पूजा ही है। अंतर केवल चोला लगाने की दिशा का होता है। इसलिए जिस परंपरा का पालन आपके मंदिर या परिवार में किया जाता है, उसी के अनुसार पूजा करना उचित माना जाता है।

कब किस विधि से चोला चढ़ाए? (Hanuman Ji Ka Chola Vidhi)

जब आपको या आपके परिवार में कोई संकट या परेशानी हो या आपकी कोई मनोकामना आदि हो तो उग्र विधि से हनुमान जी को चोला चढ़ाना चाहिए ।

जब आपकी समस्या का समाधान हो जाए या मनोकामना पूरी हो जाए तो सौम्य विधि का पालन करते हुए चोला चढ़ाना उचित रहता है।

अगर आप निःस्वार्थ चोला चढ़ा रहे हैं या किसी का दिया हुआ चोला आप चढ़ा रहे हैं तो सौम्य विधि का पालन करते हुए चोला चढ़ाएं।

यदि आपको यह समझ में न आए कि कौन-सी विधि अपनानी चाहिए, तो अपने मंदिर के पुजारी से सलाह ले सकते हैं। अधिकांश भक्त सामान्य रूप से सौम्य विधि से ही चोला चढ़ाते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भगवान हनुमान के प्रति श्रद्धा और विश्वास बना रहे। केवल विधि बदलने से पूजा का महत्व कम या अधिक नहीं होता, बल्कि सच्ची भक्ति ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।

उग्र विधि से हनुमानजी को चोला चढ़ाने की विधि

ऊपर बतायी गयी विधि की तरह ही आपको वही सामान लेकर तैयारी करनी है और चोला कैसे चढ़ाना है यह जान लीजिए।

  • सबसे पहले हनुमानजी के दायें पैर पर उनकी जांघ से नीचे की ओर चोला चढ़ाए।
  • फिर बायें पैर पर उनकी जांघ से नीचे की ओर चोला चढ़ाए।
  • सीधे हाथ के कंधे से हाथ की उंगलियों की ओर ले जाते हुए सिन्दूर का चोला चढ़ाए।
  • इसी तरह बायें हाथ के कंधे से हाथ की उँगलियों की तरफ सिंदूर लगाएं।
  • अंत में सिर से नीचे की ओर सिन्दूर का लेप लगाएं।
  • वर्क लगाए।
  • जनेऊ धारण करायें।
  • धूप, दीप, भोग लगाए।
  • हनुमान चालीसा और हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji ki Aarti) करें।

हनुमान जी को सिंदूर का चोला क्यों चढ़ाया जाता है?

श्री राम जी का राज्य अभिषेक होने के बाद एक मंगलवार की सुबह जब हनुमानजी को भूख लगी तो वो माता सीता के पास कुछ खाने के लिए लेने पहुंचे।

सीता माता जी उस समय अपनी मांग में सिंदूर लगा रही थी।

यह देखकर हनुमानजी ने उनसे आश्चर्य पूर्वक प्रश्न किया – माता! आपने अपनी मांग में यह कौन सी लाल रंग की चीज़ लगा रखी है?

यह सुनकर सीता माता ने प्रसन्नता पूर्वक कहा कि हनुमान! यह सुहागिन स्त्रियों का प्रतीक, मंगल सूचक सौभाग्य वर्धक सिंदूर है।

जिसे अपने स्वामी की लंबी आयु के लिए जीवन पर्यन्त लगाया जाता है और इससे वे मुझसे प्रसन्न रहते हैं।

हनुमान जी महाराज ने यह बात सुनकर सोचा कि जब उंगली भर सिंदूर लगाने से स्वामी की आयु में वृद्धि होती है तो क्यों न मैं सारे बदन पर इसे लगाकर अपने स्वामी श्री राम जी को अजर अमर कर दूं।

उन्होंने जैसा सोचा वैसा ही कर भी दिखाया। वह अपने बदन पर सिंदूर लगाकर श्री राम जी के दरबार में पहुंच गए।

उन्हें इस प्रकार सिंदूर मे देखकर दरबार में उपस्थित सभी लोग हंसे और श्री राम भी उन्हें देखकर मुस्कराने लगे और बहुत प्रसन्न हुए।

उनके सरल भाव पर मुग्ध होकर उन्होंने यह घोषणा की कि जो मंगलवार के दिन मेरे अनन्य प्रिय भक्त श्री हनुमान जी को तेल और सिंदूर चढ़ाएंगे, उन्हें मेरी प्रसन्नता प्राप्त होगी।

सिंदूर चढ़ाने वाले को उनकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। इस पर माता सीता के वचनों में हनुमानजी को और भी अधिक दृढ़ विश्वास हो गया।

कहा जाता है कि उसी समय से भगवान् श्री राम के प्रति हनुमान जी की अनुपम स्वामिभक्ति को याद करने के लिए उनके सारे शरीर पर चमेली के तेल में घोलकर सिन्दूर लगाया जाता है।

हनुमान जी के चोले का महत्व

हनुमान जी को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला चढ़ाना भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चोला चढ़ाने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है तथा भक्त के जीवन के कष्ट, भय और बाधाएं दूर होती हैं। मंगलवार और शनिवार को श्रद्धापूर्वक चोला चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है।

यदि आप भगवान हनुमान के अलग-अलग स्वरूपों और उनके धार्मिक महत्व के बारे में जानना चाहते हैं, तो हनुमान जी के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन के लाभ भी पढ़ें।

हनुमान जी का चोला से जुड़े प्रश्न

हनुमान जी को चोला कब चढ़ाना चाहिए?

हनुमान जी को चोला मुख्य रूप से मंगलवार और शनिवार को चढ़ाया जाता है।

हनुमान जी के चोले में कौन-कौन सी सामग्री लगती है?

चमेली का तेल, सिंदूर, वर्क, जनेऊ, अंगोछा और वस्त्र आदि सामग्री का उपयोग किया जाता है।

हनुमान जी को सिंदूर का चोला क्यों चढ़ाया जाता है?

यह परंपरा हनुमान जी की श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति से जुड़ी हुई है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

अगर आप भगवान हनुमान की पूजा, भक्ति, कथाओं, चालीसा, मंदिरों और धार्मिक परंपराओं के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो हनुमान भक्ति, कथा और साधना: सम्पूर्ण मार्गदर्शिका भी जरूर पढ़ें।

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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