जय श्रीराम भक्तों! आज हम इस पोस्ट के माध्यम से जानने का प्रयास करेंगे कि क्या है मेहंदीपुर बालाजी का सच । आखिर ऐसा क्या है यहां जिसका कारण जानने लोग दुनिया भर से यहां आते हैं। भक्तों, जैसा कि हम जानते हैं कि आस्था को विज्ञान की कसौटी पर नापा तौला नहीं जा सकता और न ही ये मुमकिन भी है।
लेकिन, मेहंदीपुर बालाजी धाम की महिमा तो इतनी अधिक लोकप्रिय है कि देश क्या विदेश से भी बड़े बड़े साइंटिस्ट यहां की धरती पर अपने शोधकार्य करने आते हैं और यहां के अनसुलझे राज की पहेलियों की परत हटाते हटाते स्वयं इनके आगे नतमस्तक हो जाया करते हैं।
आज हम आस्था के आधार पर कुछ पॉइंट्स के साथ कोशिश करेंगे कि आखिर क्या है मेहंदीपुर बालाजी का सच ।
हनुमान जी को यहां बाल रूप में पूजा जाना :-
मेहंदीपुर बालाजी यानि मेहंदीपुर और बालाजी दो अलग अलग शब्दों से मिलकर बना है। जिस स्थान पर बालाजी महाराज का भव्य मंदिर बना हुआ है उस स्थान का नाम मेहंदीपुर है और बालाजी यानि हनुमान जी का बाल रूप । इसी बाल रूप की लोकप्रियता के कारण यह धाम मेहंदीपुर बालाजी के नाम से प्रसिद्ध है।
ऐसा बताया जाता है कि राजस्थान के लोग हनुमान जी की पूजा बाल रूप में ही करना पसंद करते हैं और अगर आप वहां हनुमान जी के मंदिरों में जाएंगे तो आपको लगभग लगभग सभी हनुमान मंदिर के नाम बालाजी महाराज के नाम से ही देखने को मिलेंगे। जैसे सालासर बालाजी, पूनरासर बालाजी, भन्दे बालाजी महाराज का मंदिर, संकट मोचन बालाजी महाराज मंदिर आदि। मूर्ति आदि भी देखने से ऐसा लगता है कि मानो हनुमान जी बाल रूप में हो। इसलिए यह कहा जा सकता है कि मेहंदीपुर बालाजी का सच यह भी है कि यहाँ हनुमान जी बाल रूप में ही विराजमान है।
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर की प्राचीनता :-
यहाँ के मुख्य मंदिर के बारे में अलग अलग वर्गो द्वारा उल्लेखित किया जाता है कि मंदिर का इतिहास 1000 साल से भी प्राचीनतम है। लोक कथाओं के अनुसार हनुमान जी महाराज ने श्री गणेश पुरी जी को स्वप्न में अपनी शिला खंड दिखायी थी। बाद में श्री महंत जी ने मंदिर बनवाया।
यह भी संभव है कि इस मंदिर का निर्माण या पुनर्निर्माण कई चरणों में हुआ हो परन्तु इतिहासकारों के अनुसार वर्तमान मंदिर की बनावट राजपूताना है। इतिहास में भी राजपूतों का काल सातवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक का बताया जाता है। अतः इस मेहंदीपुर बालाजी का सच माना जा सकता है कि इस मंदिर का इतिहास कम से कम एक हजार साल पुराना तो है।
प्रतिमा के सीने से जल की एक धारा लगातार निकलते रहना :-
इस धाम की एक बहुत बड़ी खासियत यह है कि बालाजी महाराज की प्रतिमा के बायीं ओर एक बारीक जल की धारा अविरल बहती रहती है जो कि पर्याप्त चोला सिंदूर आदि लगाने के बाद भी बंद नहीं होती है। इसी जल को इकट्ठा करके सुबह शाम होने वाली आरती मे उपयोग मे लाया जाता है।
कई बार शोध किए गए कि इस जल का स्रोत क्या है परन्तु आज तक यह मालूम नहीं चल पाया है कि यह जल कहां से आता है। आस्था की पराकाष्ठा और बेनतीजे शोध कार्यो से मेहंदीपुर बालाजी का सच यह भी पता चलता है कि बालाजी महाराज की बहती सूक्ष्म जल धारा मात्र एक लोकोक्ति नहीं वरन् एक चमत्कारिक सच है।
घाटे वाले बालाजी क्यों कहा जाता है ?
मेहंदीपुर बालाजी का सच एक यह भी है कि यहां बालाजी महाराज को घाटे वाले बाबा भी कहा जाता है। इस बात का सच इस बात से पता चलता है कि यह स्थान जहां मंदिर है चारों ओर पहाड़ियों की तलहटी में है जिसे घाटी कहा जाता है। वर्तमान में सबसे समीप की पहाड़ी एक तो मंदिर के पीछे की ओर है दूसरी सामने की ओर। जिन्हें यहां सात पहाड़ी और तीन पहाड़ी कहा जाता है।
भूत प्रेत, टीबी, लकवा और मिर्गी आदि का उपचार :-
ये एक ऐसा प्रश्न है जिसमें आपको पक्ष विपक्ष मे विभिन्न मत और साथ ही विरोधाभास मिलेगा। विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान इसे सिरे से खारिज कर देता है लेकिन अगर यहां आने वाले श्रद्धालुओं के दावों की मानें तो लाखों लोग यहां से ठीक होकर गए हैं और स्वस्थ जीवन बिता रहे हैं।
दिन पर दिन बढ़ती मंदिर की लोकप्रियता इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है। साईंस इसे सिर्फ आस्था और विश्वास का कारण बताता है। एक वैज्ञानिक तथ्य यह भी है कि भरोसा बीमारियों को जल्दी ठीक करने मे काफी मददगार होता है। पर सवाल यह है कि बिन दवाई और डॉक्टर के बीमारी ठीक हो जाना अविश्वसनीय परंतु तमाम दावों के बावजूद आस्था और विश्वास के बल पर यह भी मेहंदीपुर बालाजी का सच है।
जय श्रीराम
जय श्री बालाजी महाराज
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