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दरख्वास्त मेहंदीपुर बालाजी की क्या है – कब, क्यों और इसे कैसे लगाते हैं?

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श्री मेहंदीपुर बालाजी महाराज की दरख्वास्त क्या होती है? बालाजी महाराज को दरख्वास्त क्यों लगाई जाती है, इसे कब लगाया जाता है, कैसे लगाया जाता है तथा अर्जी और दरख्वास्त में क्या अंतर होता है? यदि आप पहली बार मेहंदीपुर बालाजी धाम जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन सभी प्रश्नों के उत्तर जानना आपके लिए बहुत आवश्यक है।

विषय सूची

विषय मेहंदीपुर बालाजी की दरख्वास्त
वर्तमान शुल्क ₹51 (वर्तमान व्यवस्था)
प्रसाद देसी घी के बेसन के 6 लड्डुओं का पैक डिब्बा
कहाँ लगती है श्री बालाजी महाराज, श्री भैरव बाबा एवं श्री प्रेतराज सरकार के दरबार में
श्री दीवान सरकार केवल दर्शन एवं शीश नवाया जाता है
मुख्य उद्देश्य प्रार्थना, कृतज्ञता एवं सुरक्षित यात्रा की कामना के साथ अपनी विनती प्रस्तुत करना
किस दिन नहीं लगती ग्रहण वाले दिन

राजस्थान के दौसा जिले में छोटी-छोटी पहाड़ियों से घिरा हुआ मेहंदीपुर नामक स्थान और यहाँ स्थित स्वयंभू श्री बालाजी महाराज का चमत्कारिक मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहाँ केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि अपनी प्रार्थना और मनोकामना लेकर भी आते हैं।

यहाँ आने वाला लगभग हर श्रद्धालु श्री बालाजी महाराज के दर्शन करने के बाद इस धाम की महिमा का उल्लेख अवश्य करता है। शायद इसी कारण लोगों के बीच यह कहावत भी प्रचलित है कि “नास्तिक भी आस्तिक बन जाते हैं श्री मेहंदीपुर दरबार में।”

पहले मंदिर में दर्शन के लिए खड़े श्रद्धालुओं के हाथों में अर्जी की थालियाँ और दरख्वास्त के छोटे-छोटे दोने दिखाई देते थे। वर्तमान व्यवस्था में अब अर्जी और दरख्वास्त दोनों के लिए देसी घी के बेसन के लड्डुओं के पैक डिब्बे दिए जाते हैं। इन्हीं के माध्यम से श्रद्धालु श्री बालाजी महाराज के चरणों में अपनी प्रार्थना और निवेदन अर्पित करते हैं।

यदि आप मेहंदीपुर बालाजी में अर्जी लगाने का तरीका विस्तार से जानना चाहते हैं, तो हमारा यह आर्टिकल भी अवश्य पढ़ें। आइए अब विस्तार से जानते हैं कि दरख्वास्त क्या होती है, इसका महत्व क्या है और इसे सही विधि से कैसे लगाया जाता है।

बालाजी महाराज की दरख्वास्त क्या होती है?

जैसा कि हमने ऊपर बताया, मेहंदीपुर बालाजी धाम में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु अपने हाथों में एक विशेष प्रसाद लेकर चलते हैं, जिसे दरख्वास्त कहा जाता है। यह केवल प्रसाद नहीं, बल्कि श्री बालाजी महाराज के चरणों में अपनी प्रार्थना, निवेदन और कृतज्ञता व्यक्त करने की एक धार्मिक परंपरा मानी जाती है।

दरखास्त को ठीक से समझने के लिए यह भी जानना जरूरी है कि अर्जी और दरखास्त में क्या अंतर होता है।

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार अब पहले की तरह दोना, बताशे और घी नहीं दिए जाते। अब श्रद्धालुओं को एक छोटे डिब्बे में देसी घी के बेसन के लड्डू दिए जाते हैं, जिन्हें निर्धारित विधि के अनुसार श्री बालाजी महाराज, श्री भैरव बाबा, श्री प्रेतराज सरकार तथा श्री दीवान सरकार के दरबार में अर्पित किया जाता है। ◉ Antti Pakaslahti Research — pp. 141–142

दरख्वास्त कहाँ मिलती है और इसकी कीमत कितनी है?

दरख्वास्त आपको श्री बालाजी महाराज मंदिर के सामने दोनों ओर स्थित प्रसाद की दुकानों पर आसानी से मिल जाती है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार इसकी कीमत ₹51 है। मंदिर के आसपास स्थित सभी अधिकृत प्रसाद विक्रेता लगभग एक ही निर्धारित मूल्य पर दरख्वास्त उपलब्ध कराते हैं। यदि भविष्य में मंदिर ट्रस्ट द्वारा मूल्य में परिवर्तन किया जाता है, तो सभी दुकानों पर वही नया मूल्य लागू होता है।

यही कारण है कि किसी भी दुकान से दरख्वास्त लेने पर आपको कीमत में अंतर देखने को नहीं मिलेगा।

दरख्वास्त में क्या होता है?

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार दुकानदार आपको एक छोटे डिब्बे में देसी घी के बेसन के छह लड्डू देता है। पहले की व्यवस्था में दोना, घी और बताशे भी दिए जाते थे, लेकिन अब मंदिर की वर्तमान व्यवस्था के अनुसार केवल लड्डुओं का पैक डिब्बा ही दिया जाता है।

यद्यपि प्रसाद की सामग्री में परिवर्तन हुआ है, लेकिन दरख्वास्त लगाने की धार्मिक परंपरा और उसका महत्व आज भी पहले की तरह ही माना जाता है।

यदि आप श्री बालाजी महाराज को भोग या अज्ञारी लगाने की विधि भी जानना चाहते हैं, तो यह लेख अवश्य पढ़ें।

बालाजी की दरख्वास्त का महत्व

बालाजी की दरख्वास्त क्यों लगाई जाती है?

शायद ही ऐसी कोई परंपरा आपको किसी अन्य मंदिर में देखने को मिले, जहाँ इस प्रकार से दरख्वास्त लगाने की परंपरा प्रचलित हो। मेहंदीपुर बालाजी धाम में यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से श्रद्धापूर्वक निभाई जाती आ रही है।

मान्यता के अनुसार जिस स्थान पर आज श्री बालाजी महाराज का भव्य मंदिर स्थित है, उसके चारों ओर पहले घना जंगल हुआ करता था। उस समय इस क्षेत्र में चोर, डाकुओं और जंगली जानवरों का भय बना रहता था। जो भी व्यक्ति इस मार्ग से होकर गुजरता, उसके मन में असुरक्षा की भावना रहती थी।

इसी कारण जब श्रद्धालु सकुशल श्री बालाजी महाराज के दरबार तक पहुँच जाते थे, तो वे बाबा के चरणों में दरख्वास्त लगाकर उनका आभार व्यक्त करते थे। वे प्रार्थना करते थे— “हे बाबा! आपकी कृपा से मैं सुरक्षित आपके दरबार तक पहुँच गया हूँ। कृपया मेरी दरख्वास्त स्वीकार करें।”

बालाजी से निकलते समय मरीज एक बार फिर दर्ख़ास्त (darkhāst) चढ़ाते हैं, ताकि देवताओं से घर वापस लौटने की यात्रा और वहाँ के घरेलू जीवन के लिए सुरक्षा की प्रार्थना की जा सके।◉ Antti Pakaslahti Research — p. 143

इसी प्रकार घर लौटते समय भी श्रद्धालु पुनः दरख्वास्त लगाकर प्रार्थना करते थे कि “हे बाबा! जैसे आपने यहाँ तक सुरक्षित पहुँचाया, वैसे ही मुझे सकुशल अपने घर भी पहुँचा देना।”

स्थानीय मान्यता के अनुसार इसी परंपरा के कारण लोगों के मन से भय समाप्त होने लगा और धीरे-धीरे दरख्वास्त लगाने की यह परंपरा मेहंदीपुर बालाजी धाम की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल हो गई। आज भी लाखों श्रद्धालु इसी श्रद्धा और विश्वास के साथ दरख्वास्त लगाते हैं।

दरख्वास्त की एक अन्य मान्यता

ऐसी मान्यता भी प्रचलित है कि छोटी-छोटी परेशानियों, दैनिक जीवन की कठिनाइयों अथवा सुरक्षित यात्रा की कामना के लिए भी श्रद्धालु दरख्वास्त लगाते हैं। प्रत्येक श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के अनुसार बाबा के चरणों में अपनी प्रार्थना प्रस्तुत करता है।

दरख्वास्त कब लगानी चाहिए?

मेहंदीपुर बालाजी धाम की प्रचलित मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु अपनी आवश्यकता और उद्देश्य के अनुसार अलग-अलग अवसरों पर दरख्वास्त लगाते हैं। प्रमुख अवसर निम्नलिखित हैं।

1. घर से मेहंदीपुर धाम के लिए निकलते समय

जब भी आपका श्री मेहंदीपुर बालाजी धाम जाने का विचार बने, तो घर से प्रस्थान करने से ठीक पहले घर के मंदिर में श्री बालाजी महाराज का स्मरण करके दरख्वास्त लगाई जाती है। परिवार का प्रत्येक सदस्य जो दर्शन के लिए जा रहा हो, अपनी अलग-अलग दरख्वास्त लगाता है।

परंपरा के अनुसार 51 रुपये लाल रंग के कपड़े में बांधकर श्री बालाजी महाराज के समक्ष रखे जाते हैं। इसके बाद अपना पूरा नाम, पिता का नाम, पूरा पता तथा अपनी प्रार्थना मन ही मन बोलते हुए बाबा से सुरक्षित यात्रा की प्रार्थना की जाती है।

यहाँ की मान्यता के अनुसार दरख्वास्त लगाने के बाद जब तक अपने शहर की सीमा पार न हो जाए, तब तक अन्न या जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। शहर की सीमा पार करने के बाद ही भोजन या जल ग्रहण किया जाता है।

घर से प्रस्थान करने से पहले यदि आप श्री बालाजी महाराज की पूजा सही विधि से करना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी महाराज की पूजा कैसे करें लेख आपके लिए उपयोगी रहेगा।

2. मेहंदीपुर बालाजी धाम पहुँचने के बाद

धाम पहुँचने के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद प्रसाद की दुकान से वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ₹51 की दरख्वास्त लेकर श्री बालाजी महाराज के दर्शन करें तथा मन ही मन अपना नाम, पता और धन्यवाद प्रकट करें कि बाबा की कृपा से आप सकुशल उनके दरबार तक पहुँच गए हैं।

यहाँ की मान्यता के अनुसार दरख्वास्त लगाने से पहले अन्न या जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।

3. मेहंदीपुर बालाजी से घर वापसी के समय

जब भी आप मेहंदीपुर बालाजी धाम से अपने घर के लिए रवाना हों, तब भी एक बार दरख्वास्त अवश्य लगाई जाती है। श्रद्धालु श्री बालाजी महाराज के चरणों में प्रार्थना करते हैं कि जैसे आपकी कृपा से दर्शन सफल हुए, उसी प्रकार हमें सकुशल अपने घर भी पहुँचा देना।

यहाँ की प्रचलित मान्यता के अनुसार दरख्वास्त लगाने के बाद जब तक मेहंदीपुर बालाजी की सीमा, जिसे आजकल बालाजी मोड़ कहा जाता है, पार न हो जाए, तब तक अन्न या जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।

यदि आप दरख्वास्त लगाने के बाद रखे जाने वाले सात्विक आहार और परहेज़ के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो क्या बालाजी महाराज की पूजा में प्याज और लहसुन खाया जा सकता है? यह लेख भी पढ़ें।

4. संकट या छोटी-छोटी परेशानियों के समय

ऐसी मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी छोटी परेशानी, मानसिक चिंता, भय अथवा अन्य किसी संकट से परेशान हो, तो वह श्रद्धापूर्वक श्री बालाजी महाराज के चरणों में दरख्वास्त लगा सकता है। प्रत्येक श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के अनुसार बाबा से प्रार्थना करता है।

मेहंदीपुर बालाजी की दरख्वास्त से जुड़ी प्रक्रिया के साथ यहां होने वाली पेशी क्या होती है? यह जानना भी जरूरी है कि पेशी के दौरान क्या-क्या होता है और इसे कैसे देखा जाता है।

5. पितृ विसर्जन अमावस्या के अवसर पर

कई श्रद्धालु पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन भी दरख्वास्त लगाकर अपने पितरों का तर्पण एवं विसर्जन करते हैं। यह भी यहाँ की प्रचलित धार्मिक मान्यताओं में से एक मानी जाती है।

मेहंदीपुर बालाजी में दरख्वास्त कैसे लगाते हैं?

सबसे पहले प्रसाद की दुकान से ₹51 की दरख्वास्त लें। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार दुकानदार आपको एक छोटे डिब्बे में देसी घी के बेसन के छह लड्डू देता है। इसके बाद श्री बालाजी महाराज के दर्शन की लाइन में लग जाएँ। लाइन में खड़े-खड़े मन ही मन अपना पूरा नाम, पिता का नाम (विवाहित महिलाएँ अपने पति का नाम), अपना पूरा पता तथा अपनी प्रार्थना दोहराते रहें।

जब आपकी बारी आए तो दरख्वास्त का डिब्बा पुजारी जी के सामने कर दें। पुजारी जी उसमें से कुछ लड्डू निकालकर धार्मिक विधि पूरी करते हैं तथा दो sweetmeats वापस करता है और उन्हें अलग रखने को कहता है।  ◉ Antti Pakaslahti Research — p. 142

इस समय भी आपको मन ही मन अपनी प्रार्थना दोहराते रहना चाहिए।

श्री बालाजी महाराज के दर्शन के बाद उसी दरख्वास्त के डिब्बे को लेकर श्री भैरव बाबा के दरबार में जाएँ। वहाँ भी पुजारी जी उसी प्रकार धार्मिक प्रक्रिया पूरी करके शेष लड्डू आपको वापस कर देते हैं। इसके बाद सीढ़ियों से श्री प्रेतराज सरकार के दरबार में पहुँचें, जहाँ पुनः यही प्रक्रिया सम्पन्न होती है।

श्री प्रेतराज सरकार के दर्शन करने के बाद उनके ठीक पीछे स्थित श्री दीवान सरकार के पवित्र स्थान पर श्रद्धापूर्वक शीश नवाएँ और दर्शन करें। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार श्री दीवान सरकार के यहाँ दरख्वास्त नहीं लगाई जाती।

इसके बाद मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय वर्तमान व्यवस्था के अनुसार दरख्वास्त के डिब्बे में से दो लड्डू स्वयं निकालकर ग्रहण करने के लिए अलग रख लें। ये दोनों लड्डू केवल उसी श्रद्धालु को खाने चाहिए जिसने दरख्वास्त लगाई है।

शेष बचे हुए लड्डुओं को मंदिर परिसर से बाहर निर्धारित स्थान पर छोड़ दें और श्रद्धापूर्वक अपनी यात्रा आगे बढ़ाएँ।

दरख्वास्त लगाने के बाद श्रद्धालुओं को उससे जुड़े नियमों और सावधानियों का भी पालन करना चाहिए। इसके लिए अर्जी से जुड़ी 16 बातें भी अवश्य पढ़ें।

निष्कर्ष

मेहंदीपुर बालाजी धाम में दरख्वास्त केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि श्री बालाजी महाराज के प्रति श्रद्धा, विश्वास और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम मानी जाती है। चाहे आप पहली बार धाम आ रहे हों या पहले भी कई बार दर्शन कर चुके हों, दरख्वास्त की सही विधि और वर्तमान व्यवस्था की जानकारी होना आवश्यक है।

यदि आप दरख्वास्त और अर्जी के नियमों का श्रद्धापूर्वक पालन करते हैं, तो पूरी प्रक्रिया अधिक सहजता से सम्पन्न कर सकते हैं।

यदि आप मेहंदीपुर बालाजी जाने के नियम, अर्जी, दरख्वास्त, परहेज, 41 दिन के नियम तथा दर्शन से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी एक ही स्थान पर पढ़ना चाहते हैं, तो मेहंदीपुर बालाजी के नियम अवश्य पढ़ें।

॥ जय श्री बालाजी महाराज ॥

बालाजी की दरख्वास्त से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)

बालाजी की दरख्वास्त क्या होती है?

दरख्वास्त मेहंदीपुर बालाजी धाम की एक धार्मिक परंपरा है, जिसके माध्यम से श्रद्धालु श्री बालाजी महाराज के चरणों में अपनी प्रार्थना और निवेदन प्रस्तुत करते हैं।

दरख्वास्त कितने रुपये की मिलती है?

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार दरख्वास्त ₹51 में उपलब्ध होती है। भविष्य में मंदिर ट्रस्ट द्वारा मूल्य में परिवर्तन किया जा सकता है।

दरख्वास्त में क्या मिलता है?

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार एक छोटे डिब्बे में देसी घी के बेसन के छह लड्डू दिए जाते हैं।

क्या दरख्वास्त का प्रसाद घर ले जा सकते हैं?

नहीं। वर्तमान व्यवस्था और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार दो लड्डू स्वयं ग्रहण किए जाते हैं तथा शेष लड्डुओं को मंदिर परिसर से बाहर निर्धारित स्थान पर छोड़ दिया जाता है।

क्या दरख्वास्त के दो लड्डू किसी दूसरे व्यक्ति को दे सकते हैं?

नहीं। दरख्वास्त के दो लड्डू उसी श्रद्धालु को स्वयं ग्रहण करने चाहिए जिसने दरख्वास्त लगाई है।

क्या श्री दीवान सरकार के यहाँ भी दरख्वास्त लगाई जाती है?

नहीं। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार श्री दीवान सरकार के पवित्र स्थान पर केवल श्रद्धापूर्वक दर्शन और शीश नवाया जाता है। दरख्वास्त श्री बालाजी महाराज, श्री भैरव बाबा और श्री प्रेतराज सरकार के दरबार में लगाई जाती है।

दरख्वास्त किस दिन नहीं लगाई जाती?

मेहंदीपुर बालाजी धाम की प्रचलित व्यवस्था के अनुसार ग्रहण (सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण) वाले दिन दरख्वास्त नहीं लगाई जाती। यदि आप विशेष रूप से दरख्वास्त लगाने के उद्देश्य से धाम आ रहे हैं, तो अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इन तिथियों का ध्यान अवश्य रखें।

स्रोत एवं संदर्भ

1. Antti Pakaslahti — Family-Centered Treatment of Mental Health Problems at the Balaji Temple in Rajasthan
— शोध-पत्र। मेहंदीपुर बालाजी में दरख़ास्त से संबंधित विवरण के लिए pp. 141–143 देखें।
मूल शोध-पत्र देखें

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अगला लेखनास्तिक भी आस्तिक बन जाते हैं, मेहंदीपुर के बालाजी दरबार में
PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

30 टिप्पणी

  1. अगर अर्ज़ी एक बार लगा दी हो लेकिन संकट नही खत्म हुआ हो, तोह फिर दुबारा से अर्ज़ी लगानी पडती है??? जब भी मेहंदीपुर जाये फिर से अर्ज़ी लागए ??

  2. घर से निकलने के पहले दरखास्त में जो घर पर लाल कपड़े में लपेटकर 10 रुपए रखते हैं उसका क्या करते हैं?

    • ब्रजेश जी घर पर लगायी जाने वाली दरखास्त को मेहंदीपुर बालाजी महाराज के मंदिर में पहुंचाई जाती है क्योंकि इस पर सिर्फ और सिर्फ बालाजी महाराज का हक होता है। जब भी आप बालाजी जाए इसे मेहंदीपुर पहुंचा दें।

    • बालाजी में सुबह शाम की आरती में 5 आरती होती है। अनिवार्य तो कुछ नहीं है पर यहां की आरती को काफी शुभ माना जाता है और यहां आरती के बाद मिलने वाले छींटे की काफी मान्यता है। भक्तों को आरती के छींटे अवश्य लेने चाहिए तभी यात्रा सम्पूर्ण मानी जाती है।

  3. बाला जी महाराज के दर्शन बाद क्या कही दर्शन या घूमने जा सकते है। औऱ दर्शन के बाद प्याज लहसुन कितने दिन नहीं खाना चाहिए।

  4. सादर प्रणाम
    कुछ जगह ऐसे होता है निमंत्रण में जहा खाना मजबूरी बन जाता है लहसुन प्याज के सेवन के बाद क्या करें

    कृपया मार्गदर्शन करें

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