मेहंदीपुर बालाजी में पेशी क्या होती है? मेहंदीपुर बालाजी धाम में होने वाली पेशी को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि यहां पेशी शब्द का क्या अर्थ है। पेशी उर्दू का एक कानूनी शब्द है, जिसका अर्थ किसी मामले की सुनवाई या अदालत में उपस्थित होना होता है। मेहंदीपुर में पेशी के दौरान बुरी और निषिद्ध गतिविधियों से जुड़े माने जाने वाले आत्माओं के बारे में बताया जाता है और मंदिर के दूत उन्हें दंड देते हैं। ◉ Antti Pakaslahti Research — p. 142
बाहर से देखने पर पेशी में व्यक्ति के बोलने और शरीर की गतिविधियों में काफी बदलाव दिखाई देता है। कुछ लोग झूमते, कांपते और नाचते हुए दिखाई देते हैं, जबकि कुछ लोग तेज आवाज में बोलते या चिल्लाते हैं। ◉ Antti Pakaslahti Research — p. 142
Research में पेशी को trance से जोड़ा गया है। मंदिर में spirit से प्रभावित माने जाने वाले व्यक्ति के व्यवहार और वहां होने वाली धार्मिक प्रक्रिया का भी अध्ययन किया गया था। ◉ Nilisha Vashist Research
Academic document में बताया गया है कि मंदिर में अलग-अलग देवी-देवताओं से जुड़ी धार्मिक प्रक्रियाओं के साथ food offerings भी की जाती थीं। पूरी प्रक्रिया में arzi → darkhast → peshi → bayaan का क्रम बताया गया है। ◉ शोध में दर्ज ritual sequence
मेहंदीपुर बालाजी में पेशी के अलावा अर्जी और दरख्वास्त भी यहां की प्रमुख धार्मिक प्रक्रियाओं में शामिल हैं। यदि आप मेहंदीपुर बालाजी में अर्जी लगाने का तरीका जानना चाहते हैं, तो इसकी पूरी प्रक्रिया अलग पोस्ट में पढ़ सकते हैं।

📌 एक नजर में मेहंदीपुर बालाजी की पेशी
| विषय | जानकारी |
| पेशी का अर्थ | किसी मामले की सुनवाई या अदालत में उपस्थित होना |
| मेहंदीपुर में पेशी | मंदिर परिसर और उसके आसपास दिखाई देती है |
| प्रमुख समय | शाम की आरती और दोपहर के कीर्तन के दौरान |
| प्रमुख स्थान | प्रेतराज सरकार का मंदिर और उसके आसपास का क्षेत्र |
| पेशी के दौरान | झूमना, कांपना, नाचना, बोलना और चिल्लाना जैसी गतिविधियां दिखाई देती हैं |
| पेशी समाप्त होने पर | पवित्र जल छिड़के जाने का उल्लेख मिलता है |
| पेशी के बाद | पूजा-पाठ और कुछ परहेज रखने का उल्लेख मिलता है |
मेहंदीपुर बालाजी में पेशी कहां होती है?
पेशी किसी एक जगह तक सीमित नहीं रहती। मेहंदीपुर में यह मंदिर परिसर और उसके आसपास भी दिखाई देती है। शाम की आरती के समय मंदिर के अंदर और मंदिर के सामने वाली सड़क पर बड़ी संख्या में पेशी होती दिखाई देती है। ◉ Antti Pakaslahti Research — p. 142
पेशी का एक प्रमुख स्थान प्रेतराज सरकार का मंदिर भी है। मंदिर की दूसरी मंजिल पर बने बड़े हॉल में हर दोपहर लगभग दो घंटे कीर्तन होता है। यहां बड़ी संख्या में लोग फर्श पर बैठकर भजन गाते हैं और इसी दौरान पेशी के दृश्य भी दिखाई देते हैं। ◉ Antti Pakaslahti Research — p. 142
पेशी के दौरान क्या दिखाई देता है?
शाम की पूजा के समय बालाजी और सीता-राम मंदिर के बीच वाली सड़क पर बड़ी भीड़ जमा हो जाती है। लोग जोर-जोर से “जय बाबा की” और “जय श्री राम” बोलते हैं। इसी भीड़ में कुछ लोग झूमते, कांपते और नाचते हुए दिखाई देते हैं। ◉ Antti Pakaslahti Research — p. 142
पेशी के दौरान आसपास मौजूद लोग छोटे-छोटे घेरे में खड़े होकर तालियां बजाते हैं और जोर से बोलते हैं। इस दौरान “जल्दी बोलो”, “जोर से बोलो”, “तेरा नाम?”, “कहां से आया?” जैसे सवाल किए जाते हैं। कुछ लोग दूतों को आगे बढ़ने के लिए “मार लगा दो!” और “संकट काटो!” जैसे शब्द भी बोलते हैं। ◉ Antti Pakaslahti Research — p. 143
पेशी के दौरान व्यक्ति के साथ क्या होता है?
पेशी आगे बढ़ने पर व्यक्ति गुस्से में बोल सकता है, जोर-जोर से चिल्ला सकता है और उसके शरीर की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। कुछ मामलों में वह जमीन पर गिर जाता है। पेशी के दौरान “मुझे छोड़ दो” और “मुझे माफ कर दो” जैसी बातें भी सुनाई देती हैं। इसके बाद व्यक्ति अपने बारे में और हुई घटनाओं के बारे में बताने लगता है। ◉ Antti Pakaslahti Research — p. 143
पेशी के दौरान सवाल-जवाब कैसे होते हैं?
पेशी के दौरान भगत व्यक्ति से सीधे बातचीत करने के बजाय सामने आए माने जाने वाले आत्मा से सवाल करता है। उससे उसका नाम, कहां से आया है और परेशानी का कारण क्या है, जैसे सवाल पूछे जाते हैं। बातचीत आगे बढ़ने पर उससे अपने किए कामों के बारे में बताने और मरीज तथा उसके परिवार को छोड़ने का वचन लेने की प्रक्रिया भी बताई गई है।
◉ Antti Pakaslahti Research — pp. 149–150
मेहंदीपुर बालाजी में होने वाली इस प्रक्रिया से जुड़े भगत कौन होते हैं, यह जानना भी जरूरी है, क्योंकि भगत की भूमिका यहां होने वाली धार्मिक प्रक्रिया को समझने में मदद करती है।
एक session में कई लोगों की पेशी होती थी
एक session के दौरान अलग-अलग लोगों की कई पेशियां लगातार हो सकती थीं। जब एक व्यक्ति पेशी में होता था, तब बाकी लोग उसके आसपास मौजूद रहकर देखते और उसका साथ देते थे। इसके बाद भूमिकाएं बदलती रहती थीं और दूसरा व्यक्ति पेशी में शामिल होता था।◉ Antti Pakaslahti Research — p. 150
मेहंदीपुर बालाजी में पेशी के साथ यहां होने वाली दरख्वास्त की प्रक्रिया भी अलग है। मेहंदीपुर बालाजी की दरख्वास्त क्या है और इसे कैसे लगाते हैं, इसकी पूरी जानकारी अलग पोस्ट में दी गई है।
भगतों के कीर्तन में भी पेशी होती थी
मेहंदीपुर में भगत अपने साथ आने वाले लोगों के लिए कीर्तन भी आयोजित करते थे। इन कीर्तनों में लोग समूह में भजन गाते, संगीत बजाते और तालियां बजाते थे। कई बार इन sessions में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते थे और इसी दौरान मंदिर में दिखाई देने जैसी पेशी भी होती थी।
कुछ भगत खुद पेशी की अवस्था में जाते थे, जबकि कुछ अपने साथ रहने वाली सहायक की मदद लेते थे।◉ Antti Pakaslahti Research — pp. 145–146
पेशी खत्म कैसे होती है?
पेशी के दौरान गतिविधियां चलती रहती हैं और अंत में व्यक्ति थककर जमीन पर गिर सकता है। इसके बाद मंदिर के मुख्य पुजारी वहां पहुंचकर लोगों पर पवित्र जल छिड़कते हैं। पवित्र जल छिड़के जाने के बाद पेशी समाप्त हो जाती है। ◉ Antti Pakaslahti Research — p. 143
क्या पेशी एक ही बार में पूरी हो जाती है?
हर व्यक्ति के मामले में पेशी एक ही बार में पूरी हो जाए, ऐसा नहीं है। कुछ लोगों के मामले में एक से अधिक पेशी की जाती है और कुछ मामलों में यह प्रक्रिया लंबे समय तक चल सकती है। यदि परिवार के कई सदस्यों को एक ही परेशानी से जुड़ा माना जाता है, तो परिवार के दूसरे सदस्यों की भी पेशी हो सकती है। ◉ Antti Pakaslahti Research — p. 144
पेशी के बाद क्या परहेज रखा जाता है?
मेहंदीपुर से वापस लौटने के बाद कुछ लोग खाने-पीने और रोजमर्रा के व्यवहार से जुड़े परहेज रखते हैं। इसमें शराब, मांस और लहसुन से दूर रहने का उल्लेख मिलता है। कुछ मामलों में 11, 21 या 41 दिनों तक घर से बाहर न निकलने और रात में जमीन पर सोने की बात भी बताई गई है। ◉ Antti Pakaslahti Research — pp. 144–145
पेशी के बाद घर पर क्या किया जाता है?
पेशी के बाद घर पर सुबह और शाम पूजा-पाठ करने का भी उल्लेख मिलता है। इसके साथ मेहंदीपुर बालाजी से वापस लाए गए पवित्र भस्म और जल का उपयोग किया जाता है। ◉ Antti Pakaslahti Research — p. 144
कुछ परिवारों में परेशानी दूर होने के बाद मेहंदीपुर बालाजी वापस जाकर धन्यवाद के रूप में विशेष पूजा करने की बात भी मिलती है। इस पूजा को सवामणी कहा गया है। ◉ Antti Pakaslahti Research — pp. 144–145
मेहंदीपुर बालाजी धाम में होने वाली अर्जी, दरख्वास्त, पेशी और अन्य प्रमुख प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानने के लिए मेहंदीपुर बालाजी के नियम पोस्ट पढ़ें।
निष्कर्ष
मेहंदीपुर बालाजी में पेशी के दौरान अलग-अलग तरह की गतिविधियां दिखाई देती हैं। शाम की पूजा और प्रेतराज सरकार के मंदिर में होने वाले कीर्तन के दौरान भी पेशी देखने को मिलती है। पेशी के दौरान कुछ लोग झूमते, कांपते, नाचते या जोर-जोर से बोलते हैं। इसके बाद पवित्र जल छिड़के जाने पर पेशी समाप्त होती है। कुछ लोगों के मामले में यह प्रक्रिया एक से अधिक बार होती है और घर लौटने के बाद पूजा-पाठ तथा परहेज रखने का भी उल्लेख मिलता है। ◉ Antti Pakaslahti Research — pp. 142–145
मेहंदीपुर बालाजी में संकट और उसके इलाज से जुड़ी मान्यताओं को समझने के लिए आप यह भी पढ़ सकते हैं:
मेहंदीपुर बालाजी में संकटवाला कौन होता है?
स्रोत एवं संदर्भ
1. Nilisha Vashist — “Shamanism and Ritual Healing”
Department of Anthropology, University of Delhi — 2013
संबंधित भाग: PDF pp. 6–7 / document lines 189–237.
📄 University of Delhi — Original PDF
2. Antti Pakaslahti — Family-Centered Treatment of Mental Health Problems at the Balaji Temple in Rajasthan
— शोध-पत्र। मेहंदीपुर बालाजी में पेशी से जुड़े विवरण के लिए pp. 142–145 देखें।
मूल शोध-पत्र देखें





