मेहंदीपुर बालाजी में कीर्तन क्या होता है? मेहंदीपुर बालाजी में कीर्तन का मतलब है एक जगह बैठकर मिलकर भजन गाना। यहां मंदिर में होने वाले कीर्तन के अलावा मेहंदीपुर आने वाले कुछ धार्मिक गुरु और उपचार से जुड़े लोग भी अपने साथ आए लोगों के साथ रहते हैं और पूजा-पाठ, भजन और कीर्तन जैसी धार्मिक गतिविधियां करते हैं।
ऐसे लोगों के साथ आने वाले परिवार के सदस्य और दूसरे लोग भी इन गतिविधियों में शामिल होते हैं। इसलिए यहां होने वाला कीर्तन सिर्फ किसी एक व्यक्ति का कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि कई लोग साथ बैठकर इसमें हिस्सा लेते हैं।
मेहंदीपुर बालाजी आने से पहले मंदिर के नियम, पूजा-पाठ और दूसरी जरूरी बातों की जानकारी लेना चाहते हैं तो मेहंदीपुर बालाजी के नियम और संपूर्ण जानकारी भी पढ़ सकते हैं।
◉ Antti Pakaslahti Research — p. 147

मेहंदीपुर बालाजी में कीर्तन कहां होता है?
मेहंदीपुर बालाजी में कीर्तन अलग-अलग जगहों पर होने का उल्लेख मिलता है। प्रेतराज सरकार के मंदिर की दूसरी मंजिल पर बने बड़े हॉल में दोपहर के समय कीर्तन होता है। यहां काफी संख्या में लोग एक साथ बैठकर भजन गाते हैं।
इसके अलावा मेहंदीपुर आने वाले धार्मिक गुरु और उनके साथ आए लोग guesthouse में भी ठहरते हैं। वहां भी उनके साथ रहने वाले लोग मिलकर पूजा-पाठ, भजन और कीर्तन जैसी गतिविधियों में शामिल होते हैं।
◉ Antti Pakaslahti Research — pp. 142, 147
प्रेतराज सरकार के मंदिर में कीर्तन कैसे होता है?
प्रेतराज सरकार के मंदिर की दूसरी मंजिल पर बने बड़े हॉल में हर दोपहर करीब दो घंटे कीर्तन होने का उल्लेख मिलता है। लोग फर्श पर बैठकर एक साथ भजन गाते हैं।
भजन को एक व्यक्ति आगे बढ़ाता है और बाकी लोग उसके साथ मिलकर गाते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग एक साथ कीर्तन में शामिल होते हैं।
◉ Antti Pakaslahti Research — p. 142
मेहंदीपुर आने वाले गुरु अपनी संगत के साथ क्या करते हैं?
मेहंदीपुर आने वाले कुछ धार्मिक गुरु अपने साथ लोगों को लेकर आते हैं। ये लोग यहां ठहरते हैं और गुरु के साथ अलग-अलग धार्मिक गतिविधियों में शामिल होते हैं।
Research में एक ऐसे गुरु का विवरण मिलता है जो अपने साथ आए लोगों के साथ guesthouse में रहते थे। उनके साथ आने वाले मरीज और उनके परिवार भी रोज होने वाले sessions और दूसरी धार्मिक गतिविधियों में शामिल होते थे।
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◉ Antti Pakaslahti Research — p. 147
Guesthouse में होने वाला कीर्तन कैसा होता है?
Research में बताए गए एक guesthouse में कीर्तन दिन में दो बार होता था। सुबह करीब दो घंटे और दोपहर करीब दो घंटे का session होता था। इसमें गुरु के साथ आए लोग, उनके परिवार और दूसरे साथ आने वाले लोग भी शामिल होते थे।
लगभग 10 से 20 पुरुष और महिलाएं, कुछ छोटे बच्चों के साथ, एक बड़े कालीन पर बैठते थे। सामने एक छोटा पूजा स्थान था। वहां देवी-देवताओं के चित्र फूलों से सजाए गए थे और घी का दीपक जल रहा था।
लोग उसी पूजा स्थान के सामने बैठकर कीर्तन और दूसरी धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेते थे।
◉ Antti Pakaslahti Research — p. 148
कीर्तन शुरू होने से पहले क्या होता है?
Session शुरू होने पर लोग पहले पूजा स्थान के सामने प्रार्थना करते थे। कुछ लोग हाथ जोड़कर भगवान को प्रणाम करते थे और कुछ लोग जमीन पर माथा टेककर प्रणाम करते थे। इसके बाद वे वहां मौजूद गुरु और उनकी सहायक को भी प्रणाम करते थे।
कुछ लोग बाहर कालीन पर बैठते थे और कुछ पूजा स्थान के पास बैठकर प्रार्थना करते थे। इसके बाद session आगे बढ़ता था।
◉ Antti Pakaslahti Research — p. 148
कीर्तन में कौन-कौन शामिल होते हैं?
कीर्तन में गुरु के साथ आए लोग, परिवार के सदस्य और दूसरे साथ आए लोग भी शामिल हो सकते हैं। Research में बताए गए एक session में पुरुषों और महिलाओं के साथ छोटे बच्चे भी मौजूद थे।
इसलिए वहां कीर्तन में सिर्फ वही व्यक्ति शामिल नहीं होता जिसके लिए गुरु से मिलने आया गया है। उसके परिवार के लोग और साथ आए दूसरे लोग भी साथ बैठकर इसमें हिस्सा लेते हैं।
◉ Antti Pakaslahti Research — p. 148
कीर्तन में भजन क्यों गाए जाते हैं?
कीर्तन में भजन गाना सबसे मुख्य बात है। Research में भी भजन गाने को खास महत्व दिए जाने का उल्लेख है। इसमें लोग खुद भजन गाते हैं और धार्मिक गतिविधि में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं।
यानी यहां केवल बैठकर भजन सुनने की बात नहीं है। साथ आए लोग भी भजन गाने में शामिल होते हैं।
◉ Antti Pakaslahti Research — p. 148
कीर्तन और पेशी का क्या संबंध है?
मेहंदीपुर बालाजी में कीर्तन और पेशी का जिक्र एक साथ भी मिलता है। प्रेतराज सरकार के मंदिर में दोपहर के समय होने वाले कीर्तन के दौरान पेशी से जुड़े दृश्य दिखाई देने का वर्णन किया गया है।
यानी वहां कीर्तन चल रहा होता है और उसी दौरान कुछ लोगों में पेशी से जुड़ी गतिविधियां दिखाई देने का उल्लेख मिलता है।
अगर आप मेहंदीपुर बालाजी में पेशी क्या होती है? इसके बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो हमारी संबंधित पोस्ट पढ़ सकते हैं।
◉ Antti Pakaslahti Research — p. 142
मेहंदीपुर बालाजी के कीर्तन की मुख्य बातें
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| कीर्तन | लोग एक साथ बैठकर भजन गाते हैं |
| प्रेतराज सरकार मंदिर | दोपहर में लगभग दो घंटे कीर्तन का उल्लेख |
| संगत | गुरु के साथ आए लोग और परिवार के सदस्य |
| Guesthouse में कीर्तन | सुबह और दोपहर में sessions होने का उल्लेख |
| मुख्य गतिविधियां | भजन, प्रार्थना और पूजा-पाठ |
◉ Antti Pakaslahti Research — pp. 142, 147–148
कीर्तन के दौरान पूजा स्थान पर क्या होता है?
Research में बताए गए guesthouse के session में सामने एक छोटा पूजा स्थान था। वहां देवी-देवताओं के चित्र फूलों से सजाए गए थे और घी का दीपक जल रहा था। लोग उसी पूजा स्थान के सामने बैठकर धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेते थे।
जलता हुआ दीपक उस पूरे session के दौरान लोगों के सामने दिखाई देता था।
◉ Antti Pakaslahti Research — p. 148
क्या घर पर भी भजन करने का उल्लेख मिलता है?
Research में घर लौटने के बाद भी पूजा-पाठ और भजन को रोजमर्रा की धार्मिक गतिविधि का हिस्सा बनाए रखने का उल्लेख मिलता है।
यानी धार्मिक गतिविधि केवल मेहंदीपुर में रहने तक सीमित नहीं रहती थी, बल्कि घर पर भी पूजा और भजन जारी रखने की बात कही गई है।
◉ Antti Pakaslahti Research — p. 154
निष्कर्ष
मेहंदीपुर बालाजी में कीर्तन का मतलब है लोगों का एक साथ बैठकर भजन गाना और धार्मिक गतिविधि में शामिल होना। प्रेतराज सरकार के मंदिर में दोपहर के समय कीर्तन होने का उल्लेख मिलता है, जिसमें काफी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
इसके अलावा मेहंदीपुर आने वाले कुछ धार्मिक गुरु अपने साथ आए लोगों के साथ guesthouse में भी रहते हैं। वहां गुरु, उनके साथ आए लोग और परिवार के सदस्य मिलकर पूजा-पाठ, भजन और कीर्तन जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
इसलिए आसान शब्दों में कहें तो यहां कीर्तन का मतलब है—लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं, पूजा करते हैं, भजन गाते हैं और साथ मिलकर धार्मिक गतिविधि में हिस्सा लेते हैं।
◉ Antti Pakaslahti Research — pp. 142, 147–148, 154
स्रोत एवं संदर्भ
Antti Pakaslahti — Family-Centered Treatment of Mental Health Problems at the Balaji Temple in Rajasthan
मंदिर में होने वाले कीर्तन और उससे जुड़े विवरण के लिए p. 142, मेहंदीपुर में धार्मिक गुरु और उनके साथ आए लोगों के guesthouse में रहने के विवरण के लिए p. 147, तथा guesthouse में होने वाले कीर्तन sessions के लिए p. 148 देखें। घर पर पूजा और भजन से संबंधित विवरण के लिए p. 154 देखें।





