निर्जला एकादशी व्रत में क्या करें और क्या न करें | नियम, सावधानियां और लाभ

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Nirjala Ekadashi Vrat Ke Niyam जानना प्रत्येक व्रती के लिए महत्वपूर्ण है। निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है। निर्जला एकादशी हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है।

यदि आप सभी एकादशियों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो एकादशी व्रत अवश्य पढ़ें।

मान्यता है कि जो व्यक्ति वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त कर सकता है। इस दिन भक्त बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।

Nirjala Ekadashi Vrat Ke Niyam

निर्जला एकादशी 2027 संक्षिप्त जानकारी

विषयजानकारी
व्रत का नामनिर्जला एकादशी
समर्पित देवताभगवान विष्णु
मासज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी
व्रत प्रकारनिर्जल उपवास
मुख्य नियमअन्न और जल का त्याग कर भगवान विष्णु की पूजा
विशेष कार्यजप, पूजा, दान-पुण्य, विष्णु सहस्रनाम पाठ
दान का महत्वजल, वस्त्र, पंखा, फल एवं अन्न का दान शुभ माना जाता है
पारणद्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर
मुख्य लाभसभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होने की मान्यता

निर्जला एकादशी 2027 कब है?

निर्जला एकादशी ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है तथा दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना गया है।

Nirjala Ekadashi Vrat Ke Niyam

निर्जला एकादशी व्रत रखने वाले भक्तों को कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। इनमें से कुछ प्रमुख नियम यह हैं –

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान और पूजा करें।
  • व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर भगवान के नाम का जप करें।
  • क्रोध, झूठ और विवाद से दूर रहें।
  • द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण करें।

Nirjala Ekadashi Vrat Ke Niyam – निर्जला एकादशी में क्या करें?

  • भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • निर्जला एकादशी के दिन विष्णु सहस्रनाम, गीता या श्रीहरि के मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है।
  • दान-पुण्य करें।
  • इस दिन जल, वस्त्र, पंखा, फल और अन्न का दान विशेष फलदायी माना गया है।
  • तुलसी पूजन करें।
  • तुलसी माता की पूजा करके भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।

निर्जला एकादशी में क्या न करें?

  • किसी का अपमान न करें।
  • झूठ न बोलें।
  • तामसिक भोजन से दूर रहें।
  • क्रोध और विवाद से बचें।
  • नशे का सेवन न करें।
  • व्रत के दिन नकारात्मक विचारों से बचें।

निर्जला एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत पापों के क्षय, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने वाले व्यक्ति को विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

शोधपरक संदर्भों में एकादशी को हिंदू उपवास-परंपरा के एक विशिष्ट रूप के रूप में भी दर्ज किया गया है। Amitabh Vikram Dwivedi का Ekādaśī अध्याय Springer की Encyclopedia of Indian Religions में प्रकाशित है, जिसमें एकादशी की धार्मिक परंपरा, उपवास-विधि और विभिन्न एकादशियों से जुड़े शास्त्रीय संदर्भों की चर्चा की गई है।◉ Springer Research — Ekādaśī

निर्जला एकादशी व्रत कथा

महाभारत के अनुसार भीमसेन को अत्यधिक भूख लगती थी, जिसके कारण वे सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के दिन निर्जला व्रत रखने की सलाह दी। कहा गया कि इस एक व्रत के पालन से सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त हो सकता है। तभी से निर्जला एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। मुख्य कथा इस प्रकार है –

प्राचीन काल की बात है एक बार पांडवों में एक भीम ने व्यास जी से कहा – “भगवन! युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, कुन्ती तथा द्रोपदी सभी लोग एकादशी के दिन व्रत रखते हैं तथा मुझसे भी यह कार्य करने को कहते हैं।

मै कहता हूँ कि भूख बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा। मै दान देकर तथा विष्णु भगवान की पूजा अर्चना करके उन्हें प्रसन्न कर लूंगा।

बिना उपवास किए जिस तरह से संभव हो सके मुझे आप एकादशी का व्रत करने का फल बताइए, मैं बिन काया क्लेश के ही फल चाहता हूं।”

इस पर वेदव्यास जी बोले – ” हे भीम! यदि तुम्हे स्वर्गलोक प्रिय है तथा नर्क से सुरक्षित रहना चाहते हो तो दोनों एकादशियों का व्रत करना होगा।

भीम बोले – ” हे देव! एक समय के भोजन करने से तो मेरा काम न चल सकेगा। मेरे उदर में वृक नामक अग्नि निरंतर प्रज्ज्वलित रहती है।

पर्याप्त भोजन करने पर भी मेरी क्षुधा शांत नहीं होती है। हे ऋषिवर आप कृपया करके मुझे ऐसा व्रत बतलाइए कि जिसके करने मात्र से मेरा कल्याण हो सके।

इस पर वेदव्यास जी बोले – ” हे भद्र! ज्येष्ठ की एकादशी को निर्जला व्रत कीजिए। स्नान, आचमन में जल ग्रहण कर सकते हैं, अन्न बिल्कुल न ग्रहण करे।

अन्नहार लेने से व्रत खंडित हो जाता है। तुम भी जीवनपर्यन्त इस व्रत का पालन करो। इससे तुम्हारे पूर्वकृत एकादशियों के अन्न खाने का पाप समूल नष्ट हो जाएगा।

इस दिन ‘ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ‘ मंत्र का उच्चारण करना चाहिये एवं गौ दान करना चाहिए।”

व्यसज्ञानुसार भीम ने बड़े साहस के साथ निर्जला का यह व्रत किया, जिसके फलस्वरूप प्रातः होते – होते संज्ञाहीन हो गए ।

तब पांडवों ने गंगाजल, तुलसी, चरणामृत, प्रसाद देकर उनकी मूर्च्छा दूर की। तभी से भीम पापमुक्त हो गए।

निर्जला एकादशी व्रत पर आधुनिक शोध

निर्जला एकादशी के उपवास पर एक cross-sectional अध्ययन में 40–59 वर्ष आयु के 187 प्रतिभागियों का अध्ययन किया गया। इनमें 85 लोग नियमित रूप से निर्जला एकादशी का पालन करते थे और 102 लोग सामान्य भोजन-पद्धति का पालन करते थे। अध्ययन में निर्जला एकादशी का पालन करने वाले समूह ने inhibitory control और executive functioning से जुड़े कुछ परीक्षणों में बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि sustained attention और working memory में दोनों समूहों के बीच महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। यह अध्ययन केवल association दिखाता है; इससे निर्जला उपवास के स्वास्थ्य लाभ का कारण-परिणाम संबंध सिद्ध नहीं होता।◉ Research Study — Nirjala Ekadashi & Cognition

निर्जला एकादशी व्रत के लाभ

  • भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
  • मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है।
  • दान-पुण्य का विशेष फल प्राप्त होता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।
  • धर्म और भक्ति में रुचि बढ़ती है।

निर्जला एकादशी के बाद आने वाली योगिनी एकादशी का भी विशेष धार्मिक महत्व है।

योगिनी एकादशी के बाद आने वाली देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का शुभारंभ होता है। इस एकादशी की व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व और धार्मिक मान्यताओं की विस्तृत जानकारी भी अवश्य पढ़ें।

Nirjala Ekadashi Vrat Ke Niyam FAQ

निर्जला एकादशी में पानी पी सकते हैं?

परंपरागत निर्जला व्रत में जल ग्रहण नहीं किया जाता, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार व्रत कर सकता है।

निर्जला एकादशी का पारण कब किया जाता है?

द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर पारण किया जाता है।

निर्जला एकादशी का व्रत किस देवता को समर्पित है?

यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है।

Nirjala Ekadashi Vrat Ke Niyam में दान करने का क्या महत्व है?

इस दिन जल, अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

स्रोत और संदर्भ

Amitabh Vikram Dwivedi — “Ekādaśī”
In: Hinduism and Tribal Religions, Encyclopedia of Indian Religions, Springer. DOI: 10.1007/978-94-024-1188-1_186, pp. 481–482.
मूल प्रकाशन / DOI देखें ↗
Medha Kulkarni & Miriam Priti Mohan — “Cognitive Health in Adults Practising Nirjala Ekadashi: A Cross-sectional Study with Ad libitum Dieters”
Christ (Deemed to be University), Bengaluru. अध्ययन में 187 वयस्क प्रतिभागियों के बीच Nirjala Ekadashi practice और cognitive performance का cross-sectional comparison किया गया।
शोध-अध्ययन का मूल abstract देखें ↗
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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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