मेहंदीपुर बालाजी का नाम लेते ही सबसे पहले बालाजी महाराज, भैरव बाबा और प्रेतराज सरकार का ध्यान आता है। लेकिन इस पुराने धाम की कहानी सिर्फ इन्हीं नामों तक सीमित नहीं है। कुण्डीवाले बाबा भी मेहंदीपुर बालाजी से जुड़ी एक पुरानी और अब कम सुनाई देने वाली कहानी का हिस्सा हैं।
कुण्डीवाले बाबा का पुराना स्थान एक कुंड या टैंक से जुड़ा बताया गया है। इस जगह को लेकर अलग-अलग स्थानीय मान्यताएं थीं, जिनका उल्लेख शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में किया है।

इस कहानी की सबसे खास बात यह है कि शोधकर्ताओं ने कुण्डी वाले बाबा को लेकर अपनी रिसर्च में एक से अधिक मान्यताएं दर्ज की हैं। इन्हीं बातों से पता चलता है कि कभी मेहंदीपुर में इस छोटे से स्थान का भी अपना महत्व था।
कुण्डीवाले बाबा कौन थे?
कुण्डीवाले बाबा के बारे में सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि उनके बारे में एक ही तरह की मान्यता नहीं मिलती। अलग-अलग लोगों के बीच उनके बारे में अलग बातें कही जाती थीं।
शोधकर्ता Graham Dwyer ने मेहंदीपुर की परंपराओं का अध्ययन करते हुए कुण्डी वाले बाबा का भी जिक्र किया है। उनके शोध में कुण्डीवाले बाबा को मेहंदीपुर के मुख्य देवताओं की सहायता करने वाली स्थानीय शक्तियों में गिना गया है। ◉ Graham Dwyer — 2003
लेकिन Dwyer के शोध में कुण्डीवाले बाबा को लेकर एक और ज्यादा दिलचस्प बात आती है।
कुछ लोग उन्हें सिद्ध पुरुष मानते थे
Dwyer ने लिखा है कि कुछ लोग कुण्डीवाले बाबा को किसी पुराने दुष्ट प्रेत से बदलकर बने हुए देवता के रूप में नहीं मानते थे। उनकी मान्यता अलग थी।
उनके अनुसार कुण्डीवाले बाबा एक deified saint यानी सिद्ध पुरुष (siddha purusha) थे। माना जाता था कि उनके पास असाधारण या अलौकिक शक्तियां थीं।
यानी कुछ लोगों की नजर में कुण्डी वाले बाबा कोई साधारण धार्मिक व्यक्ति नहीं थे। वे ऐसे सिद्ध पुरुष थे जिनमें विशेष शक्ति थी और जिनकी अपनी अलग आध्यात्मिक पहचान थी।◉ Graham Dwyer — p. 19
कुंड सिर्फ पानी की जगह नहीं था
कुण्डीवाले बाबा की कहानी में सबसे खास बात उनके नाम से जुड़ा वह कुंड या टैंक है।
Dwyer के अनुसार, कुछ लोगों की मान्यता थी कि कुण्डीवाले बाबा की दिव्य शक्ति यानी shakti उसी कुंड में निवास करती थी।
इस बात से उस छोटे से कुंड का महत्व समझ में आता है। वह केवल पानी रखने या पानी जमा होने की जगह नहीं माना जाता था। लोगों की उस मान्यता में वह कुण्डीवाले बाबा की शक्ति का निवास-स्थान था।
यही बात कुण्डी वाले बाबा की कहानी को और खास बना देती है। बाबा का नाम एक कुंड से जुड़ा था और उस कुंड को ही उनकी शक्ति से जुड़ा हुआ माना जाता था।◉ Graham Dwyer — p. 19
कुण्डीवाले बाबा और पितरों की मान्यता
कुण्डीवाले बाबा के बारे में Florence Halder ने भी अपने fieldwork में महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज की है। उन्होंने 2006 में मेहंदीपुर में रहकर यहां की उपचार-पद्धति की परंपराओं का अध्ययन किया था।
Halder के अनुसार, कुण्डीवाले बाबा के पुराने स्थान से जुड़ी मान्यता में उन्हें आत्माओं की अशुद्धि दूर करने वाला माना जाता था। इसमें खास तौर पर pitr यानी पूर्वजों की आत्माओं का जिक्र मिलता है।
इसका मतलब बिल्कुल यह नहीं है कि कुण्डी वाले बाबा की पूरी पहचान केवल पितरों से जुड़ी थी। बल्कि शोध में यह उनकी बताई गई भूमिकाओं में से एक है। उनके बारे में दूसरी मान्यता उन्हें सिद्ध पुरुष और अलौकिक शक्ति वाले बाबा के रूप में भी देखती थी।◉ Florence Halder Research — p. 6
उस पुराने स्थान पर एक छोटी कुंडी थी
Halder ने लिखा है कि जब वह मेहंदीपुर में fieldwork कर रही थीं, तब कुण्डीवाले बाबा का पुराना स्थान अपने पहले वाले रूप में मौजूद नहीं था। वहां एक बड़ा हॉल बनाया जा रहा था।
लेकिन पुराने स्थान की जानकारी उन्हें मिली। उनके अनुसार, कुण्डीवाले बाबा के छोटे से पुराने स्थान पर एक छोटा जलाशय या reservoir था, जिसे उनके निवास-स्थान के रूप में बताया गया था।
लोग वहां चढ़ावा भी चढ़ाते थे। चढ़ावे को उस छोटे जलाशय में डालने की बात Halder ने दर्ज की है।◉ Florence Halder Research — p. 6
कुण्डीवाले बाबा के यहां पानी से जुड़ी एक अजीब मान्यता
कुण्डीवाले बाबा के पुराने स्थान से जुड़ा पानी भी एक खास मान्यता का हिस्सा था।
Halder ने Kakar (1990) के एक सहयोगी के हवाले से लिखा कि उस कुंड का गंदा पानी ऐसे व्यक्ति को पिलाया जाता था जिसके बारे में माना जाता था कि उसके भीतर की आत्मा बहुत ज्यादा विरोध कर रही है। उस पानी को कुत्तों के नहाने की पसंदीदा जगह का पानी भी बताया गया है।
यहां यह साफ समझना जरूरी है कि यह पुरानी मान्यता और उस समय दर्ज की गई प्रथा है। इसे आज किसी तरह का उपचार समझना या दोहराना उचित नहीं है।
◉ Florence Halder Research — p. 6
◉ Kakar (1990) — Halder के उद्धरण के अनुसार
कुण्डीवाले बाबा के बाद स्नान क्यों किया जाता था?
Halder ने यह भी लिखा है कि कुण्डी वाले बाबा के स्थान पर जाने के बाद लोगों को स्नान करना पड़ता था।
इसके पीछे उस समय की शुद्धि और अशुद्धि से जुड़ी धार्मिक प्रथा थी। वहां जाने के बाद स्नान करके खुद को साफ और शुद्ध करना जरूरी माना जाता था।
यानी उस पुराने स्थान से जुड़ी परंपरा में केवल कुंड या चढ़ावा ही नहीं था। उसके साथ स्नान जैसी दूसरी बातें भी जुड़ी हुई थीं।
◉ Florence Halder Research — p. 6
कुण्डीवाले बाबा का पुराना स्थान अब क्यों नहीं दिखता?
यही इस कहानी का सबसे दुखद और दिलचस्प हिस्सा है।
Florence Halder जब वर्ष 2006 में मेहंदीपुर में रहकर अध्ययन कर रही थीं, तब कुण्डीवाले बाबा का पुराना स्थान पहले जैसा नहीं बचा था। वहां एक बड़ा हॉल बनाया जा रहा था।
इसलिए आज अगर कोई उस पुराने स्थान को उसी रूप में खोजने की कोशिश करे, तो जरूरी नहीं कि उसे वह जगह वैसी ही मिले जैसी पुराने समय में थी।
हमारे पास उस पुराने स्थान की जानकारी मुख्य रूप से उन लोगों की बताई बातों और शोधकर्ताओं के fieldwork से आती है, जिन्होंने उस समय इस परंपरा को दर्ज किया था।
◉ Florence Halder Research — 2006 fieldwork
कुण्डीवाले बाबा और भंगीबाड़ा अलग-अलग थे
मेहंदीपुर की पुरानी उपचार-परंपरा पर लिखते समय एक गलती से बचना बहुत जरूरी है। कुण्डीवाले बाबा और भंगीबाड़ा को एक ही स्थान नहीं मानना चाहिए।
Florence Halder ने दोनों का अलग-अलग वर्णन किया है। भंगीबाड़ा के साथ अलग तरह के उपचारों का उल्लेख मिलता है, जबकि कुण्डी वाले बाबा का पुराना स्थान एक छोटे जलाशय से जुड़ा बताया गया है।
इसलिए दोनों विषयों को अलग रखना ही शोध के अनुसार सही है।
भंगीबाड़ा की कहानी यहां पढ़ सकते हैं:
भंगीबाड़ा: मेहंदीपुर बालाजी में एक भूला-बिसरा उपचार स्थल
◉ Florence Halder Research — pp. 5–6
कुण्डीवाले बाबा की कहानी में Dwyer और Halder की जानकारी कैसे जुड़ती है?
दोनों शोधों को साथ रखकर देखें तो कुण्डीवाले बाबा की तस्वीर कुछ ज्यादा साफ दिखाई देती है।
Dwyer के विवरण में कुछ लोगों की ऐसी मान्यता सामने आती है जिसमें कुण्डीवाले बाबा को सिद्ध पुरुष और असाधारण शक्ति वाले संत के रूप में देखा जाता था। उनकी दिव्य शक्ति को उसी कुंड से जुड़ा माना जाता था।
वहीं Halder ने अपने 2006 के fieldwork में उस पुराने स्थान, छोटे जलाशय, चढ़ावे, पितरों से जुड़ी मान्यता और वहां जाने के बाद स्नान जैसी बातों को दर्ज किया।
इस तरह दोनों स्रोत मिलकर हमें उस पुराने स्थान की एक तस्वीर देते हैं—एक ऐसा छोटा धार्मिक स्थल, जिसके बारे में अलग-अलग स्थानीय मान्यताएं थीं और जिसका महत्व समय के साथ कम होता गया।
◉ Graham Dwyer — p. 19
◉ Florence Halder Research — p. 6
मेहंदीपुर के इतिहास में कुण्डीवाले बाबा की कहानी
मेहंदीपुर बालाजी का इतिहास केवल मुख्य मंदिर की मूर्तियों और बड़े धार्मिक स्थलों से नहीं बनता। उसके आसपास मौजूद छोटे स्थान भी कभी यहां आने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।
कुण्डीवाले बाबा की कहानी भी ऐसी ही एक पुरानी कड़ी है।
एक छोटा-सा स्थान था। उससे एक कुंड या जलाशय जुड़ा था। कुछ लोग उसमें कुण्डीवाले बाबा की शक्ति का निवास मानते थे। वहां चढ़ावे की परंपरा थी। कुछ मान्यताओं में इसे आत्माओं की अशुद्धि दूर करने से जोड़ा गया और खास तौर पर पितरों का उल्लेख मिलता है।
फिर समय बदला। पुराना स्थान अपने पहले वाले रूप में नहीं रहा और वहां बड़ा हॉल बनाया जाने लगा।
यही वजह है कि आज कुण्डीवाले बाबा का नाम बहुत कम सुनाई देता है। लेकिन पुराने शोध में दर्ज उनकी कहानी मेहंदीपुर के उस दौर की एक ऐसी झलक देती है, जो अब धीरे-धीरे पीछे छूट गई है।
आज कुण्डीवाले बाबा को याद करने की वजह
कुण्डीवाले बाबा की कहानी किसी चमत्कार का दावा करने के लिए नहीं, बल्कि मेहंदीपुर बालाजी के पुराने धार्मिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
इससे पता चलता है कि कभी इस धाम में मुख्य मंदिर के साथ-साथ कई छोटे स्थान और स्थानीय मान्यताएं भी लोगों की धार्मिक दुनिया का हिस्सा थीं। उनमें से कुछ स्थान समय के साथ बदल गए और कुछ लगभग भुला दिए गए।
कुण्डीवाले बाबा उन्हीं भूली हुई कड़ियों में से एक हैं।
एक जरूरी सावधानी
इस पोस्ट में पानी, स्नान और उपचार से जुड़ी बातें पुरानी धार्मिक मान्यताओं और शोध में दर्ज प्रथाओं के रूप में दी गई हैं। इन्हें आधुनिक चिकित्सा उपचार नहीं समझना चाहिए। विशेष रूप से गंदा पानी पीने वाली बात केवल ऐतिहासिक शोध में दर्ज एक प्रथा है; इसे आज दोहराना सुरक्षित नहीं है।
स्रोत और संदर्भ
1. Graham Dwyer — The Divine and the Demonic: Supernatural Affliction and Its Treatment in North India, Routledge, 2003. कुण्डीवाले बाबा से संबंधित महत्वपूर्ण विवरण p. 19 में मिलता है।
Graham Dwyer — The Divine and the Demonic
2. Florence Halder — Appréhension de la possession et des vertus thérapeutiques du temple hindou de Balaji Mehendipur (Rajasthan), 2007. यह अध्ययन 2006 में किए गए fieldwork पर आधारित है। कुण्डीवाले बाबा से संबंधित मुख्य विवरण p. 6 में है।
Florence Halder का शोध-पत्र PDF
3. Sudhir Kakar — Shamans, Mystics and Doctors, 1990. Halder ने कुण्डीवाले बाबा के पानी से संबंधित जानकारी Kakar के एक सहयोगी के हवाले से दर्ज की है।
निष्कर्ष
कुण्डीवाले बाबा मेहंदीपुर बालाजी की उन पुरानी और अब कम सुनाई देने वाली कहानियों में से एक हैं, जिनके पीछे एक छोटा-सा स्थान, एक कुंड और उससे जुड़ी कई मान्यताएं थीं।
Dwyer के अनुसार, कुछ लोग उन्हें सिद्ध पुरुष मानते थे और उनकी दिव्य शक्ति को उसी कुंड में निवास करती हुई मानते थे। Halder ने बाद में अपने fieldwork में उस पुराने स्थान और उससे जुड़ी प्रथाओं को दर्ज किया।
इसलिए कुण्डीवाले बाबा की कहानी को मेहंदीपुर बालाजी के पुराने इतिहास की एक भूली हुई कड़ी के रूप में देखा जा सकता है।





