सिंधु जल संधि क्या है

सिंधु जल संधि क्या है ? What Is Indus Water Treaty ?

सिंधु जल संधि क्या है ?

14 फरवरी 2019 का दिन कौन भारतवासी भूल सकता है, यह वह दिन था जब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा मे आत्मघाती हुआ। हमारे जवानों के कारवां पर हुए हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। परिणामस्वरूप पाकिस्तान के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक और सीधी सैन्य कार्रवाई की मांग उठने लगी। इन मांगो के अलावा एक मांग मुख्य रूप से सामने आई और वह है पाकिस्तान का पानी बंद करने की। विगत वर्षों में जब भी पाकिस्तान और भारत के बीच टेंशन बड़ी है हर बार यह कहा गया कि हमे सिंधु जल संधि को तोड़ कर पाकिस्तान को बूंद बूंद पानी के लिए तरसा देना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भी कह चुके हैं कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। जब उरी पर सेना के कैंप पर आतंकी हमला हुआ था तो हमारे देश ने सिंधु जल विवाद की पाकिस्तान के साथ मीटिंग भी स्थगित कर दी थी।

पाकिस्तान के साथ अब तक तीन बार सीधी तौर से युद्ध हो चुका है और भारत ने हमेशा पानी की मानवीय जरूरत को ध्यान में रखते हुए हमेशा इस अंतरराष्ट्रीय सिंधु जल संधि का सम्मान किया और भारत से पाकिस्तान को जाने वाली नदियों को अविरल बहने दिया। आज तक कितने ही युद्ध या टेंशन दोनों देशों के बीच क्यूँ ही ना हुए हो भारत ने प्रतिघात करते हुए कभी इस संधि का असम्मान नहीं किया।

सिंधु जल संधि का समझौता सन् 1960 मे हुआ था और यह कहना गलत नहीं होगा कि सिंधु संधि से मिलने वाले पानी से ही पाकिस्तान की पानी की जरूरत पूरी होती है। पुलवामा पर हुए आतंकी हमले के बाद श्री नितिन गडकरी ने घोषणा की कि अब भारत अपने हिस्से का पानी पाकिस्तान को नहीं देगा और भारत बांध और नहर बना कर यह पानी रोकेगा।

दरअसल, इस घोषणा से पहले ही शाहपुर कांडी डैम बनाने का काम काफी पहले से चल रहा है। आपको बता दें कि इस डैम के बन जाने से सिंधु जल समझौता नहीं टूटेगा बल्कि हमारे देश के हिस्से का पानी जो पाकिस्तान की ओर जा रहा है वह रुक पाएगा और इस जल का उपयोग हम पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों की ओर मोड़ कर कर पाएंगे।

3000 किलोमीटर लंबी है सिंधु नदी :-

बताया जाता है कि सिंधु नदी की लम्बाई तकरीबन 3000 किलोमीटर है। इसमें से कई एक सहायक नदियां निकल कर जाती है और इनके तटीय इलाकों में लगभग 30 करोड़ लोग रहते हैं। इस नदी का इलाका भी करीब करीब 11 लाख 65 हजार किलोमीटर तक का है। इलाके के दृष्टिकोण से इसका भूभाग –

  • भारत 39 प्रतिशत
  • पाकिस्तान 47 प्रतिशत
  • चीन 8 प्रतिशत
  • अफगानिस्तान 6 प्रतिशत

कब से है सिंधु जल विवाद ?

जब अखंड भारत मे ब्रिटिश शासन था, पंजाब के दक्षिण में सिंधु नदी घाटी बेसिन में बड़ी नहर बनायी गयी थी। और जब हमारे देश का विभाजन हुआ तब पंजाब राज्य का पश्चिम की तरफ का भाग भारत में और पूर्व की तरफ का भाग पाकिस्तान के हिस्से में आया। इसके साथ ही नदियों और नहरों का भी बंटवारा हुआ और इन्ही नदियों और नहरों पर ही जल की आपूर्ति के लिए पाकिस्तान भारत पर ही टिका हुआ है।

असल में पानी के लिए झगड़ा देश के बंटवारे से पहले ही शुरू हो गया था। सन् 1947 के 20 दिसंबर को को दोनों देशों के बीच एक अग्रीमेंट हुआ जिसमे पाकिस्तान को दो नहरों का पानी दिया गया। जब देश का बंटवारा हो गया तो सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियां (उद्गम स्थल) भारत के हिस्से और इसका सिंचाई भूभाग पाकिस्तान के हिस्से आया।

1 अप्रैल 1948 ko पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र मे पानी की विकट समस्या खड़ी हो गई थी क्योंकि भारत ने पाकिस्तान की ओर जाने वाली दोनों नहरों का पानी रोक दिया था। पाकिस्तान की 17 लाख एकड़ भूमि बिन पानी के बंजर सी हो उठी थी। एक हस्तक्षेप के बाद लगभग एक माह के बाद पाकिस्तान को फिर से पानी की सप्लाई दी जाने लगी थी।

4 मई 1947 को इस विवाद के बाद दोनों देशों के बीच एक समझौता तय हुआ जिसमे पाकिस्तान ने सहमति जताई कि भारत के पंजाब प्रांत को अपने हिस्से का पानी कम किया जाए। पाकिस्तान इस मामले को इंटरनेशनल कोर्ट मे ले जाना चाहता था जिस पर भारत ने अस्वीकृत कर दिया।

क्या है सिंधु जल संधि ? ( What Is Sindhu Water Treaty )

इस संधि के अनुसार पूर्व की नदियां जिसमें सतलुज, रावी और व्यास का पानी भारत के हिस्से में आया। यह व्याख्या की गयी कि रावी और सतलुज नदी का प्रवाह यदि पाकिस्तान पहुंचता है तो उस पानी का उपयोग पाकिस्तान कर सकेगा और पाकिस्तान इस बात को लेकर बाध्य होगा कि वह कभी भी इस पानी की मात्रा को लेकर कभी ना तो कोई दावा करेगा ना ही समझौते को चुनौती देगा।

यह भी व्यवस्था की गई थी कि 1 अप्रैल 1960 से लेकर 31 मार्च 1970 तक यानि 10 वर्षों के भीतर पाकिस्तान जिसे पश्चिम की नदियां सिंधु, झेलम और चिनाव से अपने क्षेत्र की सिंचाई जरूरत को पूरा कर लेगा और इस अवधि के दौरान भारत अपनी पूर्वी नदियों का पानी पाकिस्तान को देता रहेगा।

पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों यानि सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी पर पूरा अधिकार दिया गया। भारत इस जल का प्रयोग बिना जल प्रवाह रोके और सीमित रूप से सिर्फ सिंचाई और विद्युत के लिए ही कर सकता है। साथ ही हिन्दुस्तान पश्चिम की नदियों पर 3.60 लाख फुट जल का भंडारण कर पाएगा।

यह भी व्यवस्था की गई थी कि समय समय पर दोनों देश बैठक और मौके का मुआयना कर सकेंगे। एक सिंधु आयोग ( Sindhu Commission ) बनाया गया और दोनों देशों की ओर से वाटर कमिश्नर बनाए गए।

यदि दोनों देश अगर अपने हिस्से की नदियों पर कोई प्रॉजेक्ट बनाते हैं और दूसरा देश यदि कोई आपत्ति दर्शाता है तो दोनों ओर से एक साथ मीटिंग की जाएगी और आपत्ति का जवाब दिया जाएगा। यदि मीटिंग के दौरान कोई विवाद उठता है या सन्तोष जनक रास्ता नहीं मिल पाता है तो ऐसी स्थिति में दोनों देशों के सरकारों के स्तर से मामला सुलझाया जाएगा।

कैसे लिखी गई सिंधु जल संधि ? ( How This Treaty Came Into Existence )

डेविड लिलियंथल जो कि टेनसी वैली अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख थे 1951 में हिन्दुस्तान आए थे और बाद में पाकिस्तान भी गए। जब वह वापिस अपने देश अमेरिका गए तो उन्होंने एक आर्टिकल लिखा जो सिंधु जल पर आधारित था। डेविड ब्लैक जो कि उस समय वर्ल्ड बैंक के प्रमुख थे उन्होने यह आर्टिकल पढ़ा और भारत और पाकिस्तान को एक प्रस्ताव दिया। यहीं से बस सिंधु जल संधि पर काम शुरू हो गया। 19 सितम्बर 1960 को भारत के प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू पाकिस्तान गए और पाकिस्तान के कराची मे राष्ट्रपति अयूब खान ने और जवाहरलाल नेहरू ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

कैसे रोका जाएगा नदियों का पानी ?

भारत ने अपने हिस्से का पानी पाकिस्तान को रोकने के लिए घोषणा तो कर दी है लेकिन यह सब तुरंत ही नहीं हो सकेगा। पानी रोकने के लिए जम्मू कश्मीर में बांध बनाने होंगे और इन्हें बनाने मे काफी वक़्त लगेगा। जब तक कि ये बांध बन कर तैयार नहीं हो जाते पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोकना संभव नहीं है। अभी शाहपुर कांडी डैम प्रॉजेक्ट पर काम चल रहा है जिसे पूरी तरह से बन कर तैयार होने मे ही करीब छह सालों का समय लगेगा और तब तक यूँ ही पाकिस्तान को हमे अपने हिस्से का पानी देना पड़ेगा।

इस प्रोजेक्ट से 781 mcm पानी रुक जाएगा जो पाकिस्तान की ओर जाता है। ऐसा अनुमान है कि इस पानी से 31380 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई भी की जा सकेगी और साथ ही 196 मेगावाट बिजली भी बनायी जा सकेगी। सिंधु जल संधि से भारत को कुल 20 फीसदी पानी ही मिला है। भारत ने पश्चिम की नदियों का सीमित उपयोग यानि सिंचाई और बिजली के लिए कोई व्यवस्था भी अभी तक नहीं कर पाया है।

अब क्या फैसले लिए गए हैं ?

सरकार के अनुसार रावी, सतलुज और व्यास नदियों का पानी अब रोका जाएगा जिस पर डैम बनाए जाएंगे। शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है। 5 वर्षों में इस पर 485 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। डैम बनाने के बाद रोका गया पानी जम्मू-कश्मीर और पंजाब को दिया जाएगा। जल्द ही सरकार दो और डैम बनाने की घोषणा कर सकती है ।

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