गौ गिरिराज व्रत-Gau Giriraj Vrat

0
440

गौ गिरिराज व्रत (Gau Giriraj Vrat) भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को श्रद्धा और विधि-विधान से किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक व्रत है। इस दिन गौ माता और श्री गिरिराज महाराज की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने से भगवान विष्णु एवं गौ माता की कृपा प्राप्त होती है तथा सुख, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान् लक्ष्मी नारायण की पूजा करनी भी उत्तम मानी जाती है।

इस व्रत में भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। यदि आप माता लक्ष्मी को समर्पित प्रमुख व्रत के बारे में जानना चाहते हैं, तो महालक्ष्मी व्रत भी पढ़ सकते हैं।

इस पोस्ट में आप गौ गिरिराज व्रत की पूजा विधि, व्रत का महत्व, पूजन मंत्र, श्री गिरिराज जी की आरती तथा धार्मिक मान्यताओं के बारे में विस्तार से जानेंगे। यदि आप हिंदू धर्म के अन्य प्रमुख व्रतों और पूजा-विधियों के बारे में जानना चाहते हैं, तो व्रत एवं पूजा: संपूर्ण जानकारी, महत्व और नियम भी अवश्य पढ़ें।

गौ गिरिराज व्रत (Gau Giriraj Vrat)

01गौ गिरिराज व्रत कब किया जाता है? यह व्रत भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी को किया जाता है।
02गौ गिरिराज व्रत 2026 में कब है? यह व्रत 2026 में 22 सितंबर को किया जायेगा।
03गौ गिरिराज व्रत के पूज्यनीय आराध्य कौन कौन हैं? गिरिराज जी, गौ माता, भगवान् लक्ष्मीनारायण।
04गौ गिरिराज व्रत पूजा की विशेषता क्या है? इस दिन गऊ यानि गाय ब्राह्मण को दान की जाती है।
05गौ गिरिराज व्रत के फायदे क्या है? इस व्रत को करने से सहस्त्र अश्वमेघ और राज सूर्य यज्ञ के बराबर फल मिलता है।

गौ गिरिराज व्रत कथा पूजन विधि आरती gau giriraj vrat katha pujan vidhi aarti

गौ गिरिराज व्रत कब किया जाता है?

गौ गिरिराज व्रत प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस दिन गौ माता, श्री गिरिराज महाराज तथा भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

गौ गिरिराज व्रत के लाभ

  • गौ माता की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
  • भगवान विष्णु एवं श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
  • गौ सेवा का पुण्य प्राप्त होता है।
  • धार्मिक एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

गौ गिरिराज पूजन विधि क्या है?

सबसे पहले एक मंडप तैयार करना चाहिए। फिर भगवान् गिरिराज की प्रतिमा को स्नान कराना चाहिए। तत्पश्चात भगवान् की प्रतिमा को मंडप में स्थापित करना चाहिये।

गौ माता की पूजा में निम्नलिखित मंत्र को पढ़कर गायों को नमस्कार कीजिये –

पंचगाव समुत्पन्नाः मथ्यमाने महोदधौ।

तेषां मध्ये तु या नंदा तस्मै धेन्वे नमो नमः॥

अर्थात् समुद का मंथन होने पर उस समय पांच गाय पैदा हुई। उनके बीच में नन्दा नाम वाली गाय है। उस गाय को बारंबार नमस्कार है। फिर से यह मंत्र पढ़कर गाय ब्राह्मण को दान कर दें।

गावो ममाग्रतः सन्तु गावो में सन्तु पृष्ठतः।

गावो में पाश्वर्तः सन्तु गवां मध्ये वसाम्यहम॥

अर्थात् गायें मेरे आगे और पीछे रहें। गायें मेरी बगल में रहें और मैं गायों के बीच में निवास करता रहूं। इसके बाद ब्राह्मण को दक्षिणा देकर आदर सत्कार सहित विदा करें।

जो भी व्यक्ति गौ गिरिराज व्रत को करता है वह सहस्रों अश्वमेघ और राज सूर्य यज्ञ के फल का भागी होता है।

भाद्रपद मास में भगवान विष्णु की उपासना से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण व्रतों में वामन द्वादशी का भी विशेष महत्व माना जाता है।

गौ गिरिराज व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में गाय माता को सभी देवताओं का निवास स्थान माना गया है, जबकि श्री गिरिराज महाराज भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय स्वरूप माने जाते हैं। इसलिए इस व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है।

मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करने से गौ सेवा का पुण्य प्राप्त होता है, भगवान विष्णु एवं श्रीकृष्ण की कृपा मिलती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

श्री गिरिराज जी की आरती

ब्रजभूमि ब्रजांगना बृजवासी बृजराज।
यह चारों के मुकुट है जय जय श्री गिरिराज॥

श्री कृष्ण चरण रज मस्तक धरि बैठो है गिरिराज।
जो गिरिराज कृपा करे सफल करे सब काज॥

कबीर कबीर क्या कहे, जा यमुना के तीर।
एक एक गोपी प्रेम में, बह गये कोटि कबीर॥

दीनन को हितकारी है भक्तन को रखवारो।
सब देवन को देव कहावे सात कोस वारो॥

एक रूप से पूजत है दूजो रहयो पूजाय।
सहस्त्र भुजा फैलाय के माँग माँग के खाय॥

वैष्णव से वैष्णव मिले, यह पूरब की पहचान।
और लागे टांकी प्रेम की, तो निकले हीरा खान॥

कोई तन दुःखी कोई मन दुःखी, कोई धन बिन रहे उदास।
थोड़े थोड़े सब दुःखी, इक सुखी श्री गिरिराज को दास।॥

निष्कर्ष

गौ गिरिराज व्रत गौ माता, श्री गिरिराज महाराज और भगवान विष्णु की आराधना का एक महत्वपूर्ण धार्मिक व्रत है। श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत का पालन करने से गौ सेवा का पुण्य, सुख-समृद्धि तथा भगवान की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। इस पोस्ट में आपने व्रत की पूजा विधि, महत्व, पूजन मंत्र, आरती और धार्मिक मान्यताओं के बारे में विस्तार से जाना।

यदि आप भाद्रपद मास में मनाए जाने वाले अन्य प्रमुख धार्मिक पर्वों के बारे में जानना चाहते हैं, तो राधा अष्टमी का धार्मिक महत्व भी अवश्य जानें।

गौ गिरिराज व्रत से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)

गौ गिरिराज व्रत कब किया जाता है?

यह व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को किया जाता है।

गौ गिरिराज व्रत में किसकी पूजा की जाती है?

इस दिन गौ माता, श्री गिरिराज महाराज तथा भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा की जाती है।

क्या इस व्रत में गौदान का महत्व है?

हाँ, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गौदान और गौ सेवा का विशेष पुण्य बताया गया है।

क्या गौ गिरिराज व्रत भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा है?

हाँ, श्री गिरिराज महाराज भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय स्वरूप माने जाते हैं, इसलिए इस व्रत का उनसे विशेष संबंध माना जाता है।

पिछला लेखवामन द्वादशी व्रत कथा पूजा विधि और उद्यापन – Vaman Dwadashi Vrat Katha
अगला लेखअनन्त चतुर्दशी व्रत कथा (Anant Chaturdashi Vrat Katha)
PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें