हनुमान पचीसा (श्री बालाजी पचीसा) – संपूर्ण पाठ, अर्थ, लाभ और पाठ करने की विधि

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अगर आप हनुमान पचीसा या श्री बालाजी पचीसा का पूरा पाठ ढूंढ रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं।

इस पोस्ट में सबसे पहले हनुमान पचीसा का संपूर्ण पाठ दिया गया है, ताकि आपको दूसरी वेबसाइटों की तरह लंबा इंतज़ार न करना पड़े।

पाठ के बाद आप हनुमान पचीसा का महत्व, इसे कब पढ़ना चाहिए, मेहंदीपुर बालाजी महाराज के दरबार में यह कब गाया जाता है, इसके लाभऔर दूसरी जरूरी जानकारी भी पढ़ सकते हैं।

नोट: नीचे सबसे पहले हनुमान पचीसा (श्री बालाजी पचीसा) का संपूर्ण पाठ दिया गया है। अगर आप केवल पाठ पढ़ना चाहते हैं, तो यहीं से शुरू करें।
हनुमान पचीसा पाठ के लिए भगवान श्री हनुमान जी का भक्तिमय स्वरूप
भगवान श्री हनुमान जी का भक्तिमय स्वरूप, जिसे हनुमान पचीसा (श्री बालाजी पचीसा) से संबंधित पोस्ट में दर्शाया गया है।

हनुमान पचीसा (श्री बालाजी पचीसा) संपूर्ण पाठ

संदर्भ: इस पोस्ट में प्रकाशित हनुमान पचीसा (श्री बालाजी पचीसा) का पाठ श्री बालाजी दरबार सेवक समिति (रजि.) द्वारा प्रकाशित भजन पुस्तिका (सन 2001) के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।

अजब है शक्ति आपकी, अजब तुम्हारे रंग
चरणो में आ गिर पड़ा, ओ मेरे बजरंग

बजरंग दर्द दिल का, किससे कहूँ मै जाकर
दुश्मन दरिद्र मुझ पर, लाया है दल चढ़ाकर
संकट से वीर बंकट, मुझको छुड़ा तू आकर
सदमा है सख्त दिल पर, कहता हूँ सिर झुकाकर
तुझी से लौ लगी है, सुनले श्रवण लगाकर
अय अंजनी के नन्दन, रघुवर चरण के चाकर
बजरंग दर्द दिल का, किससे कहूँ मैं जाकर

सूरत विशाल तेरी, मन मे मेरे बसी है
करने को तेरी खिदमत, मैंने कमर कसी है
अब तो यह बात बाबा, आकर कठिन फंसी है
सेवक सहे जो संकट, उसमे तेरी हँसी है

अद्भुत शरीर तेरा, है वीर वन के वासी
दृग देख कर देह मे, कूदे मदन विलासी
भृकुटि विपद को भंजन, कोटि मदन विलासी
वरन मे छवि कहाँ तक, दुष्टो को फूंक फांसी

माथे तिलक विराजे, सिर पर मुकुट निराला
कुण्डल श्रावण मे सोहे, गल बीच मुक्त माला
बाजू रत्न जड़ित है, सोहे भुजन मे आला
छवि जो निहारे तेरी, उसका हो बोल बाला

तन पे सिन्दूर सोहे, कर मे गदा विराजे
अद्भुत अनूप जंघा पे, जाँघिया को साजे
पत्थर पिघल हो पानी, पाताल दहल गाजे
चंदन खड़ाऊं सोहे, चरणों में वीर तेरे
जिन देव हाथ जोड़े, चरणों में रहे तेरे
जिन पर कुम्हर है तेरी, उनके फूंके है डेरे
अब तो सुफल मनोरथ, कर दे तू बाबा मेरे

जिनके जिगर में तेरी, सूरत समां रही है
उनका वह अपना जलवा, जग में दिखा रही है
सृष्टि की सारी सम्पति, उन्ही पे आ रही है
पर मुझ बेनसीब को, झांसा दिखा रही है

तुम्ही ने वीर बंकट, रघुवर के काज सारे
ढूंढन सिया को लाये, तुम रावण के द्वारे
बन के बिलई भवन सब, लंका के झांक डारे
लाये खबर सिया की, हे ! हरी के प्राण प्यारे

शक्ति लगी लखन के, तब काम तुम्ही आये
लेने को औषधि तुम, हे पवन पुत्र धाये
फिर जड़ समेत पर्वत, तुम्ही उखाड़ लाये
जाना नहीं किसी ने, रवि गाल में छिपाए
संकट मिटा लखन का, भई हर्ष सबके मन में
अतुलित अपार बल है, बाबा तेरी भुजन में

मारे है ताल जब तू, कूदे किलक के वन में
सुरों के शस्त्र कर से, झट गिर पड़े धरन में
जब ले गया प्रभु को, अहिरावण चुराकर
पाताल पहुंचे पल में, फिर तुम पता लगाकर
ली बांध मुश्के तुमने थी, मकर ध्बज की जाकर
दाखिल हुए भवन में, निज रूप को छिपाकर

सुन के वचन ख़ुशी हुयी, अहिरावण को भारी
झटपट से की असुर ने, बलिदान की तैयारी
बुलाए राम लक्ष्मण, ली हाथ में कटारी
बोला कड़क फड़क कर, वह दुष्ट बलंकारी
सुन ले ओ राम तपस्वी, बंदर नचाने वाले
अरमान अपने जी के, तू अब सब ही मिटाले
करता हूँ अब तुझे मैं, सुन मौत के हवाले
जो ले हिमायत तेरी उसको तू अब बुलाले

बोले प्रभु ऐ मूरख, क्यों भय हमें दिखावे
धीरे से बोल भैया, हनुमान सुन न पावे
जीता तुझे न छोड़े, क्यों गाल तू बजाबे
संकट से वीर बंकट, फिर कौन हमें बचावे
सुन के वचन प्रभु के, हुंकार तुमने मारी
मर्कट गिरा धरन पर, भागे भवन पुजारी
फिर करके कोप तुमने, बज्र की देह धारी
अहिरावण असुर की, पल भर में दम निकाली

जिस पर है वीर वंकट, पड़ जाए तेरा साया
कायर से मर्द होवे, यह भेद वेद गाया
सेवक जो सच्चे दिल से, तेरी शरण में आया
उसके न घर से हर्गिज, टाले टले है माया
जो कोई भक्त तेरी, सेवा करे है जी से
हर फन में हर हुनर में, वह न दबे किसी से

पर जो विमुख है तुमसे, खोटी सुने सभी से
आफत पड़े है उस पर, दांती क़ज़ा भी पीसे
तुम्हारे सिवा न कोई, रघुनाथ को है प्यारा
जो चाहो सो करो तुम, अख्तियार तुम्हे सारा
अय बेकसों के बाली, मुझको तेरा सहारा
भिक्षुक हूँ तेरे दर का, झाँकू न कोई द्वारा

तेरे सिवा न कोई,  इस वक्त में है मेरा
आकर के हर तरफ से, गर्दिश ने मुझको घेरा
अय केशरी के नंदन, करिये इधर भी फेरा

मांगू मदद मैं किससे, सेवक कहाँ मैं तेरा
इस वक्त वीर मेरे, दिन खोटे आ रहे है
दुश्मन भी वार अपना, मुझ पर चला रहे हैं
सेवक तेरे को बाबा, जो अब सता रहे है
वो नाम अपना मौत के दफ्तर लिखा रहे है

लेते ही नाम तेरा, भय पास नहीं आये
रूठी हुई मुकद्दर, पल में हुक्म बजाये
तेरे सिवा न बाबा, चिंता मेरी मिटावे
तू ही वकील मेरा, मुझे राम से मिलावे
मुझ दीन की ओ दाता, कर ले तू अब सुनाई
दुनिया की फ़िक्र गम से, मुझको दिला रिहाई
मांगू मुराद ये ही, बुद्धि बड़े सवाई

मेरे रकीब पर हो, ताउन की चढ़ाई

तू शाह मैं भिखारी, कहने की क्या जरूरत, जो जी में आये दे दे, पूछे मती महुरत

अय शहंशाह हमारे, भोली है तेरी मूरत। तुझको प्रसन्न करने की, क्या करूँ मैं सूरत

हलधर महंत तेरे, कदमो को सदा चूमे दिज रूप राम तेरे, बल से विदेश घूमे ज्ञानी गुनी हो जो भी, गुन सुन के तेरे झूमे यह दास रहता है, निर्भय तेरी भू मे ।।

बजरंग दर्द दिल का , किससे कहूँ मै जाकर
दुश्मन दरिद्र मुझ पर ,लाया है दल चढ़ाकर
संकट से वीर बंकट , मुझको छुड़ा तू आकर
सदमा है सख्त दिल पर , कहता हूँ सिर झुकाकर
तुझी से लौ लगी है , सुनले श्रवण लगाकर
अय अंजनी के नन्दन , रघुवर चरण के चाकर
बजरंग दर्द दिल का , किससे कहूँ मैं जाकर ।।

हनुमान पचीसा क्या है?

हनुमान पचीसा भगवान श्री हनुमान जी की महिमा का एक प्रसिद्ध भक्ति पाठ है। कई जगह इसे श्री बालाजी पचीसा भी कहा जाता है। इस पाठ में बजरंगबली के बल, भक्ति, अपने भक्तों की रक्षा और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अटूट सेवा का सुंदर वर्णन मिलता है।

यह पाठ खासकर उन भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है, जो श्री हनुमान जी और मेहंदीपुर बालाजी महाराज में गहरी आस्था रखते हैं। बहुत से लोग इसे अपनी रोज़ की पूजा में पढ़ते हैं, जबकि कई भक्त मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती जैसे खास दिनों पर इसका पाठ करते हैं।

मेहंदीपुर बालाजी महाराज के दरबार में भी हनुमान पचीसा का अपना एक खास स्थान है। आम तौर पर भजनों के बाद और आरती से पहले भक्त लोग एक साथ हनुमान पचीसा का पाठ करते हैं।

📌 एक नजर में हनुमान पचीसा

अन्य नाम श्री बालाजी पचीसा
समर्पित भगवान श्री हनुमान जी
लोकप्रिय स्थान मेहंदीपुर बालाजी धाम
सामूहिक पाठ भजन के बाद एवं आरती से पहले
प्रकाशित स्रोत श्री बालाजी दरबार सेवक समिति (रजि.) भजन पुस्तिका (2001)

पचीसा पढ़ने के लाभ

हनुमान पचीसा पढ़ने से मिलने वाले लाभों के बारे में अलग-अलग भक्तों की अपनी-अपनी आस्था और अनुभव हैं। आम तौर पर भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से इसका पाठ करने से बजरंगबली की कृपा बनी रहती है और मन को शांति मिलती है।

  • मन में हिम्मत और आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • डर और नकारात्मक सोच कम करने में मदद मिलती है।
  • भगवान श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति मजबूत होती है।
  • मुश्किल समय में मन को सहारा मिलता है।

💡 क्या आप जानते हैं?

मेहंदीपुर बालाजी धाम में अनेक श्रद्धालु हनुमान पचीसा को श्री बालाजी पचीसा के नाम से जानते हैं। मंदिर की भजन परंपरा में भी इसका विशेष स्थान माना जाता है।

यदि आप हनुमान जी की उपासना से जुड़े अन्य लोकप्रिय भजन भी पढ़ना चाहते हैं, तो सिन्दूर चढ़ाने से हर काम होता है भजन भी अवश्य पढ़ें।

हनुमान पचीसा कब पढ़ना चाहिए?

हनुमान पचीसा पढ़ने के लिए कोई एक तय समय नहीं है। आप जब भी साफ मन और श्रद्धा से भगवान श्री हनुमान जी का सुमिरन करना चाहें, तब इसका पाठ कर सकते हैं।

फिर भी बहुत से भक्त सुबह स्नान के बाद या शाम की आरती से पहले हनुमान पचीसा पढ़ना पसंद करते हैं। मंगलवार और शनिवार को भी बड़ी संख्या में भक्त इसका पाठ करते हैं।

अगर किसी वजह से रोज़ पाठ करना संभव न हो, तो सप्ताह में एक या दो दिन भी श्रद्धा से पढ़ सकते हैं। भगवान भाव देखते हैं, केवल संख्या नहीं।

🪔 भक्ति संदेश

हनुमान पचीसा का महत्व केवल नियमित पाठ में नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और भगवान श्री हनुमान जी के प्रति समर्पित भाव में माना जाता है।

संकट के समय श्रद्धापूर्वक गाए जाने वाले भजनों में अंजनी के लाल हनुमान आज मेरा संकट हरो भी भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

मेहंदीपुर बालाजी में यह पचीसा कब गाया जाता है?

मेहंदीपुर बालाजी महाराज के दरबार में हनुमान पचीसा का अपना एक खास स्थान है। आम तौर पर मंदिर में भजनों के बाद और आरती से पहले भक्त लोग एक साथ हनुमान पचीसा का पाठ करते हैं।

दरबार में मौजूद सैकड़ों भक्त पूरे श्रद्धा भाव से इस पाठ में शामिल होते हैं। इसी वजह से मेहंदीपुर बालाजी आने वाले बहुत से भक्त अपने घर पर भी भजन के बाद और आरती से पहले हनुमान पचीसा पढ़ते हैं।

अगर आप भी मेहंदीपुर बालाजी महाराज की तरह अपने घर में पूजा करना चाहते हैं, तो भजन के बाद हनुमान पचीसा और उसके बाद आरती करना एक अच्छा क्रम माना जाता है।

📖 विशेष जानकारी

मेहंदीपुर बालाजी आने वाले अनेक श्रद्धालु मंदिर की इसी परंपरा का पालन अपने घर में भी करते हैं। वे भजन के बाद हनुमान पचीसा और अंत में आरती का क्रम अपनाते हैं।

क्या हनुमान पचीसा रोज़ पढ़ सकते हैं?

हाँ, अगर आपकी श्रद्धा है तो हनुमान पचीसा रोज़ पढ़ सकते हैं। इसे पढ़ने पर किसी तरह की रोक नहीं है। बहुत से भक्त इसे अपनी रोज़ की पूजा का हिस्सा बनाते हैं।

अगर रोज़ समय नहीं मिल पाता, तो मंगलवार, शनिवार या किसी भी शुभ दिन इसका पाठ कर सकते हैं। सबसे ज़रूरी बात यह है कि पाठ करते समय मन शांत हो और भगवान श्री हनुमान जी के प्रति सच्ची श्रद्धा हो।

यदि आप हनुमान जी के अन्य प्रसिद्ध भजनों के बोल भी पढ़ना चाहते हैं, तो दुनिया में देव हजारो हैं बजरंग बली का क्या कहना भजन भी अवश्य पढ़ें।

हनुमान पचीसा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. हनुमान पचीसा क्या है?

हनुमान पचीसा भगवान श्री हनुमान जी की महिमा का प्रसिद्ध भक्ति पाठ है। कई जगह इसे श्री बालाजी पचीसा भी कहा जाता है।

2. क्या पचीसा रोज़ पढ़ सकते हैं?

हाँ। श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान पचीसा का पाठ रोज़ किया जा सकता है।

3. हनुमान पचीसा पढ़ने का सबसे अच्छा दिन कौन-सा है?

वैसे तो इसे किसी भी दिन पढ़ सकते हैं, लेकिन मंगलवार और शनिवार को अधिक भक्त इसका पाठ करते हैं।

4. मेहंदीपुर बालाजी में हनुमान पचीसा कब गाया जाता है?

आम तौर पर मेहंदीपुर बालाजी महाराज के दरबार में भजनों के बाद और आरती से पहले हनुमान पचीसा का सामूहिक पाठ किया जाता है।

5. क्या महिलाएं हनुमान पचीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ। श्रद्धा के साथ कोई भी भक्त हनुमान पचीसा का पाठ कर सकता है।

6. क्या हनुमान पचीसा और श्री बालाजी पचीसा एक ही हैं?

हाँ। कई क्षेत्रों में इसी पाठ को श्री बालाजी पचीसा के नाम से भी जाना जाता है।

संदर्भ

  • श्री बालाजी दरबार सेवक समिति (रजि.), भजन पुस्तिका, सन 2001।

हनुमान पचीसा से संबंधित प्रकाशित धार्मिक पुस्तकों के डिजिटल संस्करण Internet Archive पर भी देखे जा सकते हैं।

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PUNIT NAGAR
पुनीत नागर JSBJM.org के संस्थापक और लेखक हैं। वे मेहंदीपुर बालाजी धाम, मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं, दर्शन, अर्जी-दरखास्त, हनुमान भक्ति और सनातन धर्म से संबंधित विषयों पर हिंदी में लेख लिखते हैं। उनका प्रयास उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, शोध सामग्री, पुस्तकों तथा संबंधित धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। जहाँ किसी जानकारी का आधार धार्मिक मान्यता या स्थानीय परंपरा होता है, उसे उसी संदर्भ में स्पष्ट करने का प्रयास किया जाता है।

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