अजीत डोभाल का जीवन परिचय ( Ajit Doval Biography In Hindi )
एक ऐसा भारतीय जो खुले आम पाकिस्तान को एक और मुंबई हमले के बदले बलूचिस्तान छीन लेने की चेतावनी देने से गुरेज नहीं करता।
एक ऐसा जासूस जो पाकिस्तान के लाहोर में सात साल तक मुसलमान बनकर अपने देश की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध रहा हो।
वो भारत के एक ऐसे नागरिक जिन्हें शांति कार्य में दिए जाने वाले सबसे बड़े दूसरे पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया हो, जी हाँ, हम बात कर रहे हैं मोदी सरकार में सबसे बड़े ताकतवर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की।
अजीत डोभाल कई ऐसे कारनामो को अंजाम दे चुके हैं जिसे सुनकर जेम्स बांड के किस्से भी फीके लगने लगते हैं।
वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर आसीन अजीत कुमार डोभाल से बड़े से बड़े मंत्री भी उनसे सहमे रहते हैं।
ये सरकार में सबसे ताकतवर माने जाते हैं क्योंकि इनके कंधे पर राष्ट्रीय सुरक्षा का भार शामिल है और ये मोदी के सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं।
इसका अनुमान आप इस बात से लगा सकते हैं कि देश के अहम फैसलों मे इनका खास रोल रहता है। आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताएंगे अजीत डोभाल की जासूसी की जिन्दगी के बारे में और बताएंगे कि कैसे अजीत डोभाल जासूसी की जिंदगी से बाहर आकर मोदी सरकार मे इतना खास किरदार निभा रहे हैं।
अजीत डोभाल आज राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर कार्य करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के राइट हैंड मेन माने जाते हैं।
इनके इतने बड़े रुतबे के पीछे संघर्ष की उतनी ही बड़ी दास्तान है। अजीत डोभाल का जन्म 20 जनवरी 1945 को उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल मे हुआ था। इनके पिता भारतीय आर्मी में ब्रिगेडियर थे और दादा प्रथम विश्व युद्ध लड़ चुके थे।
इन्होंने मिलिट्री स्कूल से स्कूली पढ़ाई की और इसके बाद आगरा विश्वविद्यालय से अर्थ शास्त्र में एमए किया और पोस्ट ग्रेजुएट करने के बाद आईपीएस की तैयारी करने लगे।
कठिन परिश्रम के बल पर वे केरल काडर मे 1965 मे आईपीएस के पद पर चुन लिए गए और 1972 में भारतीय खुफिया एजेंसी आईबी से जुड़े।
इसके बाद देश के लिए जासूसी का काम किया। सात साल तक पाकिस्तान मे रहे। यहां वह पाकिस्तान आर्मी में मार्शल की पोस्ट तक पहुंचे और कई खुफिया जानकारी भारत तक पहुंचाते रहे।
आईपीएस के पद पर 17 साल की ड्यूटी के बाद जो अवार्ड मिलता है वो अवार्ड डोभाल को मात्र छह साल बाद ही मिल गया।
1987 मे जब पंजाब के अमृतसर साहिब मे आतंकियों ने कब्जा किया तो डोभाल पाकिस्तानी एजेंट बनकर मंदिर के अंदर गए और तीन दिन तक आतंकवादियों के साथ अंदर रहे और जब सारी जानकारी लेकर बाहर आए तो उसी जानकारी के बल पर आर्मी ने ऑपरेशन ब्लैक थंडर सफलता पूर्वक अंजाम दिया और इससे पहले ऑपरेशन ब्लू स्टार मे भी अजीत डोभाल का खास योगदान रहा।
1988 में अजीत डोभाल को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। डोभाल एक ऐसे नॉन आर्मी पर्सन थे जिन्हे इस अवार्ड से सम्मानित किया गया था। 1993 में खालिस्तान लिब्रेशन फ्रंट ने रोमनयायी राजनयिक Livia Radu को बंधक बनाया तो उसे भी अजीत डोभाल ने ही छुड़वाया।
ऐसा ही एक और मौका 1999 में आया जब पाकिस्तानी आतंकियों ने काठमांडू से इंडियन एयरलाइन्स के आई सी 814 को हाइजैक कर कंधार ले गए तब उन्होंने आतंकियों के साथ डील की और यात्रियों को जिंदा छुड़वाया।
एक ऐसा मौका जब हमारे 150 के करीब यात्री आतंकियों के कब्जे मे हो तो ऐसे समय में पाकिस्तान मे जाकर के आतंकवादियों के साथ डील करना काफी मुश्किल और खतरनाक हो जाता है जो अजीत डोभाल ने भली भांति निभाया।
नौकरी से रिटायर होने के बाद 2004 मे अजीत डोभाल को आईबी का डाइरेक्टर बनाया गया। उस वक़्त उत्तर पूर्व में जो मिजो नेशनल फ्रंट ने जो हिंसात्मक माहौल बनाया हुआ था ऐसे में अजीत डोभाल ने लोगों का विश्वास जीतकर संगठन मे दो फाड़ कराया और संगठन के लीडरों को आत्म समर्पण करने के लिए मजबूर किया और इस तरह से संगठन की कमर तोड़ दी।
इंटेलिजेंस ब्यूरो मे काम करते हुए डोभाल ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में खुफिया एजेंसी रॉ को फिर से सक्रिय किया और बलूचिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने मे कामयाबी हासिल की।
देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार होने के नाते देश की आंतरिक और बाहरी जिम्मेदारी अजीत डोभाल के कंधो पर रहती है। ये दुश्मनों के घर में घुसकर मारकर से नहीं चूकते हैं।
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2015 मे म्यांमार मे 5 किलोमीटर अंदर घुसकर 50 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया और नागालैंड में आतंकियों को घुटने टेकने को मजबूर कर दिया। इधर कश्मीर में भी आर्मी को पेलेट गन देकर आतंकियों को मारने की खुली आजादी दी।
सन 2016 में उरी मे आतंकियों ने सेना के कैंप पर हमला किया तो इन्होनें ही एक सीक्रेट प्लान तैयार किया और 10 दिनों के भीतर ही पाकिस्तान के घर में घुसकर कार्यवाही की और बदला लिया। इंडियन आर्मी ने पाकिस्तान के घर में घुसकर जवाब दिया जिसमें 40 आतंकी और 2 पाकिस्तानी आर्मी के जवान मारे गए। इस ऑपरेशन मे भारतीय सेना के किसी भी जवान को किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
नौकरी से रिटायर होने के बाद विवेकानंद यूथ फ़ोरम की स्थापना की जो कि हिन्दुत्ववादी संगठन है। डोभाल इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसी हस्तियों के साथ भी काम कर चुके हैं और अब नरेन्द्र मोदी जैसी हस्ती के साथ काम कर रहे हैं और दुनिया के साथ होने वाले सुरक्षा समझोतो मे भी अजीत डोभाल का सीधा दखल होता है।
अजीत डोभाल के कंधो पर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी होती है यही वजह है कि विदेश दौरों के दौरान पीएम मोदी की सुरक्षा का जो प्लान होता है उसे अंत समय में डोभाल अपने मुताबिक चेंज करवाते हैं।
टर्की और फ़्रांस मे होने वाले जी-20 के सम्मेलन से पहले अजीत डोभाल ने पीएम की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथों में ली और इस दौरान इस्राइली खुफिया एजेंसी मोसाद और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी की मदद से पीएम मोदी की सुरक्षा के लिए अलग से प्लान तैयार किया गया।


