Mehandipur Balaji : यहां रज रज में समाए हुए हैं, बजरंग बली हनुमान

।। Mehandipur Balaji : यहां रज रज में समाए हुए हैं, बजरंग बली हनुमान।।

Mehandipur Balaji : यहां रज रज में समाए हुए हैं, बजरंग बली हनुमान

Mehandipur Balaji : यहां रज रज में समाए हुए हैं, बजरंग बली हनुमान

Mehandipur Balaji मे एक ऐसा मंदिर है जिसके बारे में यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि यहाँ की मिट्टी के कण-कण मे बालवीर हनुमान निवास करते हैं।

MEHANDIPUR BALAJI TEMPLE, RAJASTHAN

मेवाड़ राजपूतों की धरती देवभूमि “राजस्थान” के “मेहंदीपुर” नामक ग्राम मे अवतरित हनुमान जी का यह Balaji Mandir भक्ति भाव से पूरी तरह से ओत प्रोत है। बजरंग बली मे आस्था रखने वालो के लिए यह मंदिर किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

Mehandipur Balaji मे स्थापित यह मंदिर हनुमान जी का ऐसा मंदिर है जो कि आज “Mehandipur Ke Balaji” के रूप मे विश्व विख्यात है।

MEHANDIPUR BALAJI :- यहाँ की बढ़ती लोकप्रियता

Balaji Temple की आलोचना करने वालों का कहना रहता है कि यहाँ गंदगी की मार है, स्वच्छता का स्तर बहुत ही निम्न है। एक कारण चाहे जो भी कुछ हो, यहाँ आने वाले लोगों मे कभी कोई कमी नहीं आई बल्कि बालाजीमंदिर मेहंदीपुर की प्रसिद्धी और यात्रियों की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है।

MEHANDIPUR BALAJI का एक छोटा सा वृतांत :-

एक छोटा सा वृतांत जो कभी-कभी रह रह कर याद दिलाता है और हमारी पोस्ट के शीर्षक को न्याय संगत भी कराता है कि वाकई में यहां के कण कण या कहें तो रज रज में बालाजी हनुमान निवास करते हैं।

हमारे एक घनिष्ठ मित्र हैं जिनकी पुत्री ऊपरी बाधा से पीड़ित थी। अचानक से कहीं भी कभी भी कोई अदृश्य सी चीज़ उसके शरीर में दाखिल हो जाया करती थी। कभी भी रोना, चीख देना, डांटना, बालों को बिखेर कर बैठ जाना रोज की दैनिक गति विधियों का एक अंग सा हो गया था।

ना खाने की सुध ना ही पीने की सुध। बंदा करे तो क्या करे, सिवाय अश्रु विच्छेद के। ऐसा नहीं था कि चिकित्सा ना करायी गयी हो। एक से एक अच्छे मनो- चिकित्सक को दिखाया गया। परिणाम शून्य।

यात्रा श्री MEHANDIPUR BALAJI :-

किसी ने सलाह दी कि राजस्थान के दौसा जिले स्थित Mehandipur Balaji  ले जाओ। वहाँ के नियम आदि बतलाय गए कि वहां जाकर ऐसा करना है वैसा करना है, और वहां क्या क्या नहीं करना है।

निराश को क्या चाहिए बस एक आशा की किरण और ये मित्रवर सपरिवार चल दिए Delhi To Mehandipur Balaji By Train. Bandikui Station पर पहुँच कर वहाँ से स्थानीय सवारी से पहुंच गए Mehandipur Balaji.

बालाजी धाम की कठिन परिस्थितियाँ :-

वहाँ ये लोग पहुंचे शाम के समय। फटाफट लिया एक सस्ती सी धर्मशाला में एक कमरा। चूंकि आर्थिक स्थिति इतनी सुदृढ़ नहीं थी इसलिए सभी एक ही Room मे समा गए।

शाम का समय था, बालाजी महाराज के दर्शन मिलना तो अत्यन्त ही कठिन था। उपर से शाम की आरती का भी वक़्त हो चला था। ये ऐसा समय होता है कि चाहे लोग दिन भर अपने होटल या धर्मशाला के कमरे से ना निकले, आरती में शामिल होने जरूर जाएंगे। ऐसे में भीड़ का भयंकर आलम होना तो लाजिमी ही था।

तो, हमारे ये बन्धु चल पड़े बालाजी महाराज के दर्शन करने। वहाँ आरती हो रही थी। आरती पूरी हुई तो mehndipur balaji mandir के अंदर की तरफ जाने के लिए भीड़ भागी तो कुछ अपने अपने कमरे में जाने के लिए। कुछ समाधि वाले बाबा की आरती की तरफ। सबकी दिशाएं अलग अलग।

इस भागम भाग में हमारे बंधु अपनी जेब कटा बैठे। कंगाली मे आटा गीला जैसी हालत हो गई। दर्शन तो मिले नहीं, देर से आने के कारण आरती के छींटे भी ना मिल पाए।

ख़ैर, निराश होकर इन्होने अपनी धर्मशाला का रुख किया। जब तक सोए नहीं येही सोचते रहे कि जेब कैसे कटी, एक दूसरे पर आरोप मंड देना आदि आदि।

सुबह हुई, बताने वाले ने समझा कर भेजा था कि जाकर बालाजी मंदिर में अर्जी लगाना। 200 रुपये के करीब का खर्चा समझो। श्रीमान् जी जेब कटने के बाद हिसाब लगाने लगे कि वापिस जाने, room के किराए और खाने पीने के खर्च के बाद शेष राशि कितनी बचेगी। बची राशि से अर्जी तो लग सकती थी नहीं, सो 5 रुपए की darkhast लगाना ही उचित समझा। मंगलवार का दिन था लाइन बहुत लंबी थी। घबरा कर वापिस धर्मशाला लौट आए।

बालाजी महाराज पर आस्था और स्वयं का विवेक :-

वही room me ही बालाजी की photo रखी, दीपक जो घर से लाए थे जलाया और अपने 5 रुपए बालाजी महाराज के आगे रख दिए। वहीं बालाजी महाराज के जयकारे लगाते रहे।

दोपहर को 2 बजे से 4 बजे तक प्रेतराज सरकार के मंदिर में कचहरी लगती है। समझाया था कि बेटी को वहां बिठाना। सो, पहुंच गए प्रेत राज जी के दरबार में। वहाँ माथा टेका और वापिस आ गए। इनकी समझ मे ये आया कि इन्हे वहां बस माथा टेकना है जबकि दो घंटे वहीं रुकना था।

घाटे वाले बाबा का चमत्कार :-

बैठे बैठे क्या करते शाम को समाधि वाले बाबा की तरफ चल पड़े। वहां लोगो की देखा देखी परिक्रमा देने लगे। परिक्रमा देने के वक़्त ही इनकी पुत्री चीखने चिल्लाने लगी। मुझे छोड़ दो, अब नहीं आऊंगा, मत मारो मुझे ऐसा बोलने लगी।

पिता जी इसे परिक्रमा से हटा कर सामने रेत के मैदान मे ले आए और बिठा दिया। सोच मे पड़ गए कि अब क्या करें। किससे पूछे क्या करे। कुछ भी समझ ना आया तो वहीं से रेत उठा कर बोले हे बालाजी, ना तो मै कोई मंत्र जानू ना तेरी पूजा। इस भूत को भगा। इतना ही बोल कर वो रेत बेटी के माथे से लगा दी। बेटी तुरंत बेहोश सी होकर गिर पड़ी। उसे हिला डुलाकर खड़ा किया।

दूत महाराज का मिलना :-

बिटिया को फिर जाने क्या हुआ जैसे कोई शक्ति सी आ गयी हो उसमें बालाजी का जयकारा लगाने लगी। बोली आज से हम इस बच्ची की रक्षा करेंगे। तुम घर जाओ आज के बाद कोई बुरी आत्मा इसे परेशान नहीं करेगी।

ये सुन कर सबके आंसू बह निकले। बालाजी महाराज का धन्यवाद किया और शाम को ही बिना दर्शन किए ये वापिस ट्रेन से अपने घर आ गए। आज इनकी बेटी पूरी तरह से स्वस्थ है और आने के बाद कोई परेशानी नहीं आई।

इन्हे दर्शन ना कर पाने का मलाल था जो उन्होने अगले साल जा कर पूरा किया।

यहाँ एक बात ध्यान देने की है, कि यहाँ संकट वालों के लिए इतने नियम हैं जिसे पूरा करने में धन, श्रम और समय बहुत अधिक लगता है। परंतु, धन और उचित मार्गदर्शन के अभाव मे भी सिर्फ भक्ति के बल पर या कहे तो विश्वास बल के कारण संकट का कट जाना वो भी बिना मंदिर के अंदर गए। वाकई में कहना गलत नहीं होगा यहां की रज रज में हनुमान बसते हैं।

जरूरी नहीं कि आप दर्शन करने मंदिर के अंदर ही जाओ, अर्जी ही लगाओ तभी बाबा आपकी पुकार सुनेंगे। यहाँ के चप्पे चप्पे पर बाबा का वासा है। यहां की धरती पर आपके कदम पड़ गए तो समझो कि भक्त का भगवान् शिरोमणि श्री Mehandipur Balaji महाराज से खुद ही सम्पर्क सध गया।

।। जय श्री राम ।।

।। जय Mehandipur Balaji महाराज ।।

Disclaimer : उपरोक्त विचार स्वयं लेखक के हैं।
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