आपका ये सिर का दर्द कहीं संकट की निशानी तो नहीं - Mehandipur Balaji Facts

आपका ये सिर का दर्द कहीं संकट की निशानी तो नहीं – Mehandipur Balaji Facts

यदि आपको कभी भी अचानक से रह रह कर सिर का दर्द (Head Ache) उठने लगता है। आप दवाइयाँ खाते हैं, फोरी तौर पर आपको आराम तो मिल जाता है लेकिन कुछ दिन बाद ये फिर उठने लगता है। आपने खुद को तमाम डॉक्टर को दिखाया, टेस्ट कराये लेकिन सब नॉर्मल। तो चौंक जाइये ये आपकी संकट की निशानी भी हो सकती है।

क्या होता है संकट और क्यों इसे करते हैं सिर दर्द से relate

हम Mehandipur Balaji जाने वाले अधिकांश लोगों से मिले और वहाँ आने वाले विद्वान बन्धुओं, दरबार लगाने वाले महंत जनो से मिले। परिणाम स्वरूप यह जानकारी मिली कि ऐसी परिस्थितियों में सिर का दर्द संकट के होने के फल स्वरूप होता है।

हमे बताया गया कि भूत प्रेत बाधा, ऊपरी परेशानी जिनमे पितृ दोष, आहूत, क्रिया, घर में लड़ाई झगड़ा होना, संतान ना होना, व्यापार कारोबार मे गिरावट, बीमारियों का लगे रहना या दवाई का ना लगना ऐसे कुछ चंद उदाहरण है जिन्हें यहाँ संकट कहा जाता है।

इसके बारे में जब और पता किया गया तो हमे पता चला कि संकट होने की स्थिति में :

1. पीड़ित के सिर मे सिर का दर्द जो कि ज्यादातर ऊपरी हिस्से में होता है।

2. यह सिर मे लगातार बना रहता है।

3. सीने में भारीपन बना रहना या फिर साँस भारी चलती है।

4. किसी के सिर में दर्द के साथ पेट में भी दर्द होना।

5. सपने में सर्प दिखायी देना।

6. घर में रक्त के छीटें दिखना।

7. मृत लोगों का अक्सर दिखाई देना या उनसे बातें करना।

8. दुर्घटना वश किसी चौराहे पर किसी टोने पर पैर पड़ जाना।

उपरोक्त बातें संकट से होने के लक्षण बतायी गयी। पीड़ित व्यक्ति इनमें से कोई भी एक या अधिक लक्षणों का शिकार हो सकता है।

Mehandipur Balaji में कई ऐसे व्यक्तियों से हम ने जानकारी इकट्ठा की तो आश्चर्यजनक रूप से ये व्यक्ति जो कि यहाँ संकट वाले थे और बालाजी मे अपना उपचार करा रहे थे, अधिकांशतः इन लक्षणों से गुज़र रहे थे।

बताया जाता है कि राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी मंदिर मे संकट ग्रस्त लोग हाज़िर होते हैं और यहाँ अर्जी, दरख्वास्त, भोग के माध्यम से रोग मुक्त हो जाते हैं। यहाँ उपचार के नाम पर कोई पैसा नहीं लिया जाता। बस रहने और खाने की व्यवस्था स्वयं को करनी होती है।

यहाँ ऐसे व्यक्तियों का इलाज स्वयं बालाजी महाराज करते हैं। यहाँ भक्ति ही सर्वोपरि है। बालाजी महाराज भाव के भूखे हैं जो भी सच्चे मन से यहाँ अर्जी लगाता है बाबा उसकी मुराद अवश्य ही सुनते हैं।

नोट : इस पोस्ट का उद्देश्य किसी भी तरह से अंधविश्वास की तरफ ले जाना नहीं है। उपरोक्त तथ्य निजी अनुभव और आम लोगों से ली गई जानकारी पर आधारित है।

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