मेहंदीपुर के बालाजी

नास्तिक भी आस्तिक बन जाते हैं, मेहंदीपुर के बालाजी दरबार में

जी हाँ, बिल्कुल ठीक पढ़ा आपने। मेहंदीपुर के बालाजी मंदिर की यही तो महिमा है जो लोगों की जुबान पर है और सिर चढ़कर बोलती है। जो भी यहाँ एक बार गया है यहाँ के चमत्कारों से वशीभूत होकर उसने यही कहा है, “नास्तिक भी आस्तिक बन जाते हैं, मेहंदीपुर के बालाजी दरबार में“।

मेहंदीपुर के बालाजी महाराज की महिमा :

यहाँ आने पर ही पता चलता है कि भूत प्रेत जैसी ऊपरी बाधा किस तरह से लोगों को कष्ट पहुंचाती है। लोग यह भी देखते हैं कि किस प्रकार ये इन चीजों से छुटकारा पाते हैं।

यहाँ की मान्यता के अनुसार भूत प्रेत के सताये हुए दुखी लोग जिन्हें ” संकट वाला ” कहा जाता है, मेहंदीपुर के बालाजी के दरबार में अर्जी लगाते हैं। यहाँ तीन देवताओं की प्रधानता है। अर्जी के रूप में मेहंदीपुर के बालाजी महाराज को लड्डू का, श्री प्रेतराज सरकार को चावल और श्री भैरो बाबा को उड़द का भोग लगाया जाता है।

भोग लगाने के बाद इस अर्जी के प्रसाद के दो लड्डू बचते हैं, जो संकट वाले को खुद ही खाने को कहा जाता है। जैसे ही व्यक्ति इन दो लड्डुओं को खाता है वैसे ही वह झूमने लगता है और अजीबो गरीब हरकतें करने लगता है। मानो कोई दिखायी ना देनी वाली चीज़ शरीर में आकर बोल रही हो।

ऐसा प्रतीत होता है मानो व्यक्ति के ऊपर मार पड़ रही हो। वह भागने की कोशिश भी करता है लेकिन ऐसा दृश्य भी बन जाता है जैसे किसी ने उसके हाथों मे हथकड़ी और पैरो मे बेड़ियाँ बांध दी हो। वह अपने हाथों से ही खुद के सिर में सैकड़ो जूते मारता है, रोता है, चीखता है, कभी खुद को उल्टा लटका लेता है, कभी जलने की चीख मारता है जैसे किसीने आग मे जला दिया हो। मारो से परेशान होकर या तो वह स्वयं को बालाजी महाराज के चरणों में समर्पित कर देता है या फिर उसका नामो निशान मिटा दिया जाता है।

ऐसा बताया जाता है कि जो भूत सच्चे मन से बालाजी महाराज के चरणों में बैठ जाते हैं, उन्हें ये अपना दूत बना लेते हैं। संकट कट जाने के बाद हर एक व्यक्ति को बालाजी एक दूत देते हैं, जो बालाजी के नियम करते रहने तक सदा उसके साथ रहते हैं और उसकी रक्षा करते हैं।

ये दूत व्यक्ति को सन्मार्ग पर ले जाते हैं और अनिष्ट से बचाते हैं। ऐसा भी सुनने को मिलता है कि लोग कभी कभी दूत की बातों में आकर अपना नुकसान भी कर बैठते हैं। उन्हें सलाह दी जाती है कि वह खुद के ही दूत महाराज से सलाह मांगे।

जब तक संकट वाले को खुद का दूत ना मिल जाये उन्हें निरंतर मेहंदीपुर के बालाजी महाराज के दरबार मे जाकर प्रार्थना करते रहना चाहिए।

मेहंदीपुर मे कोई ना तो चिकित्सालय है ना ही कोई डॉक्टर यहाँ स्वयं भू सिर्फ बालाजी महाराज ही है जो अपनी चमत्कारिक शक्तियों से लोगों का इलाज करते हैं।

ऐसा भी बहुत सुनने मे आया है कि लोग ऊपरी बाधा से पीड़ित व्यक्ति को यहाँ ले तो आते हैं। हमेशा धर्मशाला या अपने होटल के कमरे में ही बैठे रहते हैं। कभी प्रार्थना पूजा नहीं करते ना ही बताये गये नियमों का पालन करते हैं। ना तो वो कभी मंदिर तक भी जाते ना ही आरती मे शामिल होते। एक पोस्ट मैंने पढ़ी जिसका शीर्षक था “जिन्हें कंगाल होना हो, बालाजी जाए“। जब ऐसे लोगों की संकट और परेशानियों से मुक्ति नहीं होती तो ये सारा दोष बालाजी महाराज पर ही मढ़ देते हैं। मेहनत ना करने वाले और वैज्ञानिक सोच रखने वाले का यहाँ आना व्यर्थ है। यहाँ सब कुछ आस्था और श्रद्धा भाव पर ही टिका हुआ है। यहाँ स्वयं यानि “मैं” की भावना त्याग देनी चाहिए। भक्ति मे स्वयं का कोई मान सम्मान नही होता है।

कहा गया है कि जब द्रौपदी जब दुष्टों से घिर कर चिल्लाई थी खुद विष्णु भगवान् ने आकर उनका चीर बढ़ाया था। गजराज को उबारा था और प्रह्लाद को बचाया था। यह सब भक्ति का ही तो प्रभाव था।

रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने क्या खूब कहा है – रामहिं केवल प्रेम पियारा।। जानि लेहु जो जानन हारा।।”

यकीनन प्रार्थना और भक्ति मे महान शक्ति होती है। अतः सभी दर्शनार्थियों को तन, मन, धन से बालाजी महाराज के चरणों में खुद को अर्पित कर देना चाहिए और कही भी भटकना नहीं चाहिए।

” एकहि साधे सब सधे, सब साधे सब जाय। “

गीता में श्री कृष्ण ने कहा है –
” अनन्याश्चिन्तयन्तो माम, ये जनाः पारयुपासते। तेशां नित्याभियुक्तानां, योगक्षेम वहाम्यहम ।।”

अर्थात् जो भक्त दुनिया के सारे झंझट छोड़कर केवल मेरा ही ध्यान करते हैं उनके कल्याण की मुझे चिंता रहती है, अर्थात उनका योगक्षेम मै ही वहन करता हूँ। इसलिए जो भी पीड़ित यहाँ आए उन्हें पूरी तरह भक्त बन कर तपस्या मय जीवन जीना चाहिए तभी शीघ्रता से संकट दूर होंगे।

मेहंदीपुर के बालाजी मे सुविधाये :

इस स्थल पर वर्ष भर मे देश के कोने कोने से लोग यहाँ आते हैं। रहने के लिए यहाँ सस्ती महंगी, छोटी बड़ी हर तरह की धर्मशालाएं हैं। पानी बिजली की भी आपूर्ति है। रोज मर्रा की सारी चीज़ें यहाँ सुविधाजनक रूप से उपलब्ध हैं।

गलत काम करने वालो की यहाँ खैर नहीं :

यहाँ की ख़ासियत है कि अगर किसी दर्शनार्थी का गलत आचरण सामने आता है तो बालाजी महाराज की शक्तियाँ उसे यहाँ से जाने को विवश कर देती हैं।

मेहंदीपुर के बालाजी मंदिर में उत्तराधिकारी प्रणाली :

यह स्थान शुरू से ही महंत जी के उत्तराधिकारी के रूप मे अधिकृत रहा है। यहाँ के प्रथम महंत श्री गणेश पुरी जी रहे हैं उन्हीं के काल मे आज यह स्थान इतना विख्यात हो पाया है। इनकी साधना और सेवा भाव का स्तर इतना अधिक व्यापक था जिसकी तुलना करना आज असंभव सा है।

वर्तमान समय में श्री किशोर पुरी जी यहाँ के उत्तराधिकारी है। यहाँ की सेवा पूजा एवं व्यवस्था यही देखते हैं। स्वभाव से निर्मल, विद्वान और चरित्रवान इनके कार्यकाल में इस स्थान की महिमा बढ़ती ही जा रही है।

आतिथ्य की भावना, ब्राह्मण और संतो की सेवा, अनुष्ठान और हवन यहाँ होने वाले धार्मिक क्रिया कलाप हैं जिस कारण से यहाँ की पताका देश के कोने कोने मे बढ़ती जा रही है।

ऐसा कहा गया है – धर्मेंण हन्यते ब्याधिः
अर्थात् धर्म के प्रभाव से सभी विपत्तियां और बिमारी दूर होती हैं।

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नोट :- इस पोस्ट का उद्देश्य किसी भी तरह से धार्मिक ठेस पहुँचाना नहीं है, यह पोस्ट निजी अनुभव के आधार पर लिखी गई है।

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